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South Korea Lee North Korea Dialogue : माइन ब्लास्ट के बाद दक्षिण कोरिया की उत्तर कोरिया से बातचीत की अपील, क्या फिर शुरू होगी बातचीत?

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग ने डीएमजेड माइन ब्लास्ट के बीच उत्तर कोरिया से बातचीत और भरोसा बहाल करने की अपील की। साथ ही उन्होंने युद्धकालीन सैन्य कमान, परमाणु पनडुब्बी, एआई आधारित डिफेंस सिस्टम और लेजर तकनीक से रक्षा क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया।

South Korea Lee North Korea Dialogue : माइन ब्लास्ट के बाद दक्षिण कोरिया की उत्तर कोरिया से बातचीत की अपील, क्या फिर शुरू होगी बातचीत?

South Korea Lee North Korea Dialogue : दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग ने उत्तर कोरिया से दोबारा बातचीत शुरू करने और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की अपील की है। 1 अक्टूबर को 78वें आर्म्ड फोर्सेज डे के मौके पर दिए भाषण में ली ने कहा कि उनका प्रशासन दोनों कोरियाई देशों के बीच सैन्य तनाव कम करने के लिए व्यावहारिक कदम लगातार उठाता रहेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब डीएमजेड में माइन ब्लास्ट के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। दक्षिण कोरिया की सेना और यूएन कमांड ने जांच में आर्मिस्टिस समझौते के उल्लंघन की बात कही है, जबकि उत्तर कोरिया ने आरोपों को खारिज कर दिया है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग 1 अक्टूबर 2026 को दक्षिण कोरिया के ग्येर्योंग शहर में एक सैन्य अड्डे पर 78वें सशस्त्र बल दिवस के मौके पर भाषण दे रहे हैं। (Image Credit - Reuters)
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग 1 अक्टूबर 2026 को दक्षिण कोरिया के ग्येर्योंग शहर में एक सैन्य अड्डे पर 78वें सशस्त्र बल दिवस के मौके पर भाषण दे रहे हैं। (Image Credit - Reuters)

माइन ब्लास्ट के बाद बढ़ा तनाव, प्योंगयांग ने आरोप नकारे

21 सितंबर को डीएमजेड में एक घटना के दौरान तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे। दक्षिण कोरियाई सेना और यूएन कमांड की संयुक्त जांच में सैन्य सीमांकन रेखा के दक्षिणी हिस्से में एक सक्रिय उत्तर कोरियाई माइन मिलने की बात सामने आई। दक्षिण कोरिया ने शुरुआती जांच के आधार पर कहा कि धमाके उत्तर कोरिया की एंटी-पर्सनल माइंस से हुए होने की संभावना बहुत ज्यादा है। यूएन कमांड ने बाद में कहा कि उसकी जांच के निष्कर्षों के आधार पर आर्मिस्टिस समझौते का उल्लंघन हुआ है।उत्तर कोरिया ने इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया। किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया पर जांच के नतीजे गढ़ने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर सियोल ने इसके आधार पर कोई कार्रवाई की तो जवाब दिया जाएगा। उत्तर कोरिया की ओर से इस घटना में अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया गया है।
यही वजह है कि ली जे-म्यॉन्ग का ताजा बयान खास महत्व रखता है। एक तरफ सियोल घटना को आर्मिस्टिस उल्लंघन मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति उत्तर कोरिया के साथ संवाद की संभावना खुली रखना चाहते हैं।

ली बोले- भरोसा बहाल करें, बातचीत का रास्ता खोलें

आर्म्ड फोर्सेज डे के भाषण में ली ने उत्तर कोरिया से लंबे समय से बंद पड़े संवाद को फिर शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को भरोसा बहाल करने और सैन्य तनाव कम करने के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। ली ने यह भी कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और समृद्धि दोनों देशों के अपने प्रयासों से हासिल की जानी चाहिए।ली सरकार पहले भी उत्तर कोरिया के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने की कोशिश करती रही है, लेकिन प्योंगयांग की तरफ से इन प्रयासों को अब तक सीमित प्रतिक्रिया मिली है। इसी दौरान उत्तर कोरिया डीएमजेड के आसपास सीमा पर अपनी सैन्य किलेबंदी को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे माहौल में सियोल की ओर से बातचीत का प्रस्ताव और सैन्य क्षमता बढ़ाने की योजना साथ-साथ चल रही है।

अमेरिका से सैन्य कमान वापस लेने की तैयारी

ली ने अपने भाषण में दक्षिण कोरिया की सैन्य आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल यानी ओपकॉन को अमेरिका से दक्षिण कोरिया को वापस लेने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दक्षिण कोरिया के पास शांतिकालीन सैन्य ऑपरेशनल कंट्रोल पहले से है, जबकि युद्धकालीन कमान की व्यवस्था अमेरिका के साथ संयुक्त कमांड स्ट्रक्चर से जुड़ी हुई है। ली इसे देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता मजबूत करने की अपनी लंबे समय से चली आ रही नीति का हिस्सा मानते हैं।अगस्त में भी ली ने अपने कार्यकाल के दौरान युद्धकालीन ओपकॉन ट्रांसफर की तैयारी तेज करने का निर्देश दिया था। इसका मकसद दक्षिण कोरिया की अपनी सैन्य क्षमताओं को इस स्तर तक मजबूत करना है कि वह युद्धकालीन कमान की जिम्मेदारी ज्यादा प्रभावी तरीके से संभाल सके।

2030 के दशक में परमाणु पनडुब्बी, डिफेंस में AI और लेजर का इस्तेमाल

ली ने दक्षिण कोरिया की सैन्य आधुनिकीकरण योजना का भी खाका सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश 2030 के दशक के मध्य तक स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। दक्षिण कोरिया पहले से ही इस क्षमता को अपनी भविष्य की समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मान रहा है।इसके साथ मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें एआई आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और हाई-एनर्जी लेजर इंटरसेप्टर जैसी तकनीकों को शामिल करने की योजना है। एआई का इस्तेमाल केवल हथियारों में नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध के लिए सेना की कमांड, निगरानी और निर्णय लेने की क्षमताओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
ली ने सेना में मैनड-अनमैंड टीमिंग यानी इंसानी सैनिकों और मानवरहित सिस्टम के साथ काम करने की क्षमता बढ़ाने की भी बात कही। सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए एकीकृत सैन्य अकादमी बनाने की योजना भी इसी व्यापक सैन्य सुधार का हिस्सा है।

तीन-स्तरीय डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा सियोल

दक्षिण कोरिया पहले से ही उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु खतरे से निपटने के लिए तीन-स्तरीय डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियों का पता लगाना, खतरे का आकलन करना और जरूरत पड़ने पर उसे इंटरसेप्ट करना है।नई तकनीकों को इसी व्यवस्था में शामिल करने की कोशिश हो रही है। एआई आधारित कमांड सिस्टम तेजी से मिलने वाले सैन्य डेटा को प्रोसेस करने और अलग-अलग डिफेंस सिस्टम के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वहीं हाई-एनर्जी लेजर जैसी तकनीक भविष्य में कम लागत वाले इंटरसेप्शन विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
इस पूरी योजना का एक बड़ा हिस्सा उत्तर कोरिया की बदलती सैन्य क्षमता के बीच दक्षिण कोरिया की अपनी डिफेंस क्षमता बढ़ाना है। मई में भी ली ने एआई, ड्रोन और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों को भविष्य की रक्षा क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

बातचीत की कोशिश और सैन्य तैयारी साथ-साथ

दक्षिण कोरिया की मौजूदा नीति में दो समानांतर पहल दिखाई देती हैं। ली सरकार उत्तर कोरिया के साथ संवाद और सैन्य तनाव कम करने की कोशिश जारी रखना चाहती है, लेकिन साथ ही अपनी सैन्य क्षमता को भी तेजी से आधुनिक बना रही है।डीएमजेड की हालिया घटना ने दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को फिर सामने ला दिया है। दक्षिण कोरिया और यूएन कमांड की जांच के निष्कर्ष उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया से अलग हैं। ऐसे में आगे की स्थिति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सीमा पर दोनों पक्ष किस तरह की सैन्य गतिविधियां करते हैं और क्या बातचीत के लिए कोई संपर्क चैनल दोबारा खुलता है।
फिलहाल ली का संदेश साफ है कि सियोल सैन्य तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन इसके साथ अपनी रक्षा क्षमता, तकनीकी क्षमता और युद्धकालीन कमान की तैयारी को भी मजबूत कर रहा है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

South Korea के President Lee ने North Korea से Dialogue बहाल करने की अपील क्यों की?

डीएमजेड में बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं के बीच ली ने भरोसा बहाल करने और सैन्य तनाव कम करने के लिए बातचीत फिर शुरू करने की अपील की।

Lee ने North Korea के साथ Relations को लेकर क्या कहा?

ली ने उत्तर कोरिया के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, भरोसा बढ़ाने और संवाद के जरिए संबंध सुधारने की बात कही।

South Korea ने Military Buildup की बात क्यों कही?

उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल खतरे के बीच दक्षिण कोरिया अपनी रक्षा क्षमता मजबूत रखना चाहता है, ताकि बातचीत के साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

South Korea और North Korea के बीच तनाव का मुख्य कारण क्या है?

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, सैन्य गतिविधियां, डीएमजेड की घटनाएं और दोनों देशों के बीच 1953 के युद्धविराम के बाद भी स्थायी शांति समझौता न होना मुख्य कारण हैं।

North Korea के साथ Dialogue बहाल करने की South Korea की नीति क्या है?

ली सरकार संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ चरणबद्ध परमाणु निरस्त्रीकरण और मजबूत रक्षा क्षमता की नीति पर आगे बढ़ रही है।

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