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US Pharma Tariff 2026 : भारत सहित 20 देशों की स्पेशलिटी दवाओं पर US ने हटाया 100% टैरिफ, जानिए किन मेडिसिन को मिली छूट?

अमेरिका ने भारत समेत 20 जूरिस्डिक्शन से आने वाली चुनिंदा स्पेशलिटी दवाओं और जरूरी इंग्रीडिएंट्स को 100% टैरिफ से राहत दी है। ऑर्फन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा थेरेपी, फर्टिलिटी, सेल-जीन थेरेपी और ADCs को शर्तों के तहत जीरो टैरिफ मिलेगा।

US Pharma Tariff 2026 : भारत सहित 20 देशों की स्पेशलिटी दवाओं पर US ने हटाया 100% टैरिफ, जानिए किन मेडिसिन को मिली छूट?

US Pharma Tariff 2026 : अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों और क्षेत्रों से आने वाली कुछ खास स्पेशलिटी फार्मास्युटिकल्स और उनके जरूरी इंग्रीडिएंट्स को 100% टैरिफ से राहत दी है। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी यानी BIS ने 23 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में इन दवाओं के लिए जीरो परसेंट टैरिफ की पात्रता तय की है। इसमें दुर्लभ बीमारियों की दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा से बनी थेरेपी, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल और जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स यानी ADCs और कुछ पशु चिकित्सा दवाएं शामिल हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत की सभी दवाओं पर टैरिफ हटा दिया है।यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने चुनिंदा पेटेंटेड फार्मास्युटिकल्स और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स पर 100% एड वैलोरेम टैरिफ लगाने की व्यवस्था की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2026 को फार्मास्युटिकल इंपोर्ट पर Section 232 के तहत यह नीति घोषित की थी। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इससे घरेलू दवा उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

भारत समेत 20 देशों को जीरो टैरिफ की पात्रता

अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के नए नोटिस में कुल 20 जूरिस्डिक्शन को इस विशेष टैरिफ राहत के लिए पात्र बताया गया है। इनमें भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।हालांकि, यह राहत केवल इस आधार पर नहीं मिलती कि दवा भारत से भेजी जा रही है। संबंधित स्पेशलिटी दवा या उसके इंग्रीडिएंट को अमेरिकी नियमों में तय कैटेगरी में आना होगा और उसे पात्र जूरिस्डिक्शन से संबंधित शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके अलावा, अगर कोई स्पेशलिटी दवा अमेरिका के लिए तत्काल स्वास्थ्य जरूरत पूरी करती है, तो कंपनियां अलग से टैरिफ राहत के लिए आवेदन भी कर सकती हैं।

किन दवाओं को मिलेगी राहत?

जीरो टैरिफ की सूची में सबसे पहले ऐसी दवाएं हैं जिनकी सभी स्वीकृत उपयोगिताएं यानी इंडिकेशंस दुर्लभ बीमारियों या स्थितियों के इलाज के लिए हैं। इन्हें अमेरिका में ऑर्फन ड्रग्स की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-डिराइव्ड थेरेपी और इनफर्टिलिटी यानी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी इसमें शामिल हैं।सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स यानी ADCs को भी इस व्यवस्था में जगह दी गई है। ADC ऐसी दवाएं होती हैं जिनमें एक एंटीबॉडी को दवा के सक्रिय हिस्से के साथ जोड़ा जाता है। इसके अलावा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर यानी CBRN खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ मेडिकल काउंटरमेजर्स तथा पशु स्वास्थ्य से जुड़ी फार्मास्युटिकल्स भी जीरो टैरिफ वाली श्रेणी में हैं। इन दवाओं के साथ इस्तेमाल होने वाले संबंधित एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स यानी APIs और जरूरी शुरुआती सामग्री को भी नियमों में शामिल किया गया है।

100% टैरिफ का असर किस पर है?

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 100% टैरिफ सभी दवाओं पर नहीं लगाया गया है। 2 अप्रैल की राष्ट्रपति घोषणा के मुताबिक Section 232 के तहत मुख्य व्यवस्था चुनिंदा पेटेंटेड फार्मास्युटिकल्स और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स के लिए है। Annex III में शामिल कंपनियों के लिए यह व्यवस्था 31 जुलाई 2026 से प्रभावी हुई, जबकि दूसरी कवर की गई कंपनियों के लिए 29 सितंबर 2026 से लागू होनी है।वहीं अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि फिलहाल Section 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ जेनेरिक फार्मास्युटिकल्स और उनके संबंधित इंग्रीडिएंट्स पर लागू नहीं हैं। यह भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय फार्मा इंडस्ट्री की अंतरराष्ट्रीय पहचान का बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं से जुड़ा है।

अमेरिका भारत के लिए कितना बड़ा फार्मा बाजार है?

भारत का फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट सेक्टर इस फैसले से सीधे जुड़ा हुआ है। Pharmexcil के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल ड्रग्स और फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट करीब 30.47 अरब डॉलर रहा। इसमें ड्रग फॉर्मुलेशंस और बायोलॉजिकल्स का हिस्सा करीब 22.93 अरब डॉलर था।अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा फार्मा एक्सपोर्ट मार्केट भी है। Pharmexcil के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में कुल भारतीय फार्मा एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 34.51% थी। इसलिए अमेरिकी टैरिफ नियमों में बदलाव का भारतीय दवा कंपनियों और उनके अमेरिकी कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।
हालांकि, मौजूदा जीरो टैरिफ व्यवस्था को भारत की पूरी फार्मा इंडस्ट्री के लिए टैरिफ छूट कहना सही नहीं होगा। राहत केवल नोटिस में परिभाषित स्पेशलिटी प्रोडक्ट्स और निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले उत्पादों तक सीमित है।

जरूरत वाली दवाओं पर टैरिफ राहत का रास्ता खुला

अमेरिका ने उन स्पेशलिटी दवाओं के लिए भी टैरिफ में राहत पाने का रास्ता रखा है, जिनकी वहां तत्काल जरूरत है। दवा कंपनियां इसके लिए अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट में आवेदन कर सकती हैं। आवेदन में दवा का नाम, उसमें इस्तेमाल होने वाला एक्टिव इंग्रीडिएंट, बनाने वाली कंपनी, दवा किस देश में बनी है और अमेरिका में उसकी जरूरत क्यों है, जैसी जानकारी देनी होगी।कॉमर्स डिपार्टमेंट हर आवेदन को अलग-अलग जांचेगा। जरूरत पड़ने पर वह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी यूएसटीआर और हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज डिपार्टमेंट यानी एचएचएस से भी सलाह लेगा। मंजूरी मिलने पर अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन यानी सीबीपी टैरिफ में राहत लागू करेगा।
नए नियमों में क्लिनिकल ट्रायल, रिसर्च और डेवलपमेंट जैसे गैर-कमर्शियल कामों के लिए आयात की जाने वाली कुछ दवाओं और सामग्री को भी जीरो टैरिफ की सुविधा दी गई है। साथ ही, जेनेरिक दवाओं की पहचान को लेकर कुछ नियम भी साफ किए गए हैं।
इसलिए यूएस फार्मा टैरिफ 2026 में भारत को मिली राहत को सभी दवाओं पर टैरिफ छूट नहीं माना जा सकता। भारत से अमेरिका जाने वाली जेनेरिक दवाएं फिलहाल इस Section 232 टैरिफ के दायरे से बाहर हैं। वहीं, तय शर्तें पूरी करने वाली कुछ स्पेशलिटी दवाओं को जीरो टैरिफ का फायदा मिल सकता है

FAQ (Frequently Asked Questions):

US ने Indian specialty drugs पर tariff क्यों waive किया?

अमेरिकी नियमों के तहत कुछ स्पेशलिटी दवाओं को जीरो टैरिफ दिया गया है, क्योंकि अमेरिका इन्हें व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े समझौतों या अपनी तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों के संदर्भ में अलग श्रेणी में रखता है। भारत पात्र 20 जूरिस्डिक्शन में शामिल है।

India से US export होने वाली कौन-सी specialty medicines को राहत मिली है?

दुर्लभ बीमारियों की ऑर्फन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-डिराइव्ड थेरेपी, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल और जीन थेरेपी, ADCs, कुछ CBRN मेडिकल काउंटरमेजर्स और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं शर्तों के तहत जीरो टैरिफ के लिए पात्र हैं।

US tariff waiver में India के अलावा कितने countries शामिल हैं?

भारत के अलावा 19 अन्य जूरिस्डिक्शन शामिल हैं। इनमें यूरोपीय संघ, जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और अन्य देश शामिल हैं।

क्या सभी Indian medicines पर US tariff हटाया गया है?

नहीं। यह राहत केवल तय कैटेगरी की स्पेशलिटी फार्मास्युटिकल्स और संबंधित इंग्रीडिएंट्स पर लागू है। इसे भारत की सभी दवाओं के लिए सामान्य टैरिफ छूट नहीं माना जा सकता।

क्या generic drugs पर भी नया US tariff लागू है?

फिलहाल नहीं। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के मुताबिक Section 232 के मौजूदा फार्मास्युटिकल टैरिफ जेनेरिक फार्मास्युटिकल्स और उनके संबंधित इंग्रीडिएंट्स पर लागू नहीं हैं।

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