CJI Surya Kant ने INDIA ब्लॉक को मिलने से किया इनकार, राहुल गांधी की ‘वोट चोरी’ मुहिम के बीच क्या है पूरा मामला?
CJI सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात करने से इनकार करते हुए चुनावी मुद्दों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाने की बात कही। विपक्ष ने SIR, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर मार्च किया।
CJI Surya Kant INDIA Bloc Meeting: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। विपक्षी नेता कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। CJI ने उन्हें मुलाकात के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने का रास्ता बताया। इस बीच, 12 अक्टूबर को विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
CJI Surya Kant ने INDIA ब्लॉक से मिलने से क्यों किया इनकार?

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को उनसे मिलकर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CJI ने अपने जवाब में कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। अदालत प्रशासनिक स्तर पर किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर इस तरह के मामलों पर निर्देश नहीं दे सकती। ऐसे मुद्दों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए। CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति कानून के अनुसार याचिका दायर कर सकता है और अदालत उचित प्रक्रिया के तहत उस पर विचार करेगी।
Rahul Gandhi की ‘Vote Chori’ मुहिम और INDIA ब्लॉक की चार मांगें क्या हैं?
राहुल गांधी ने प्रस्तावित मार्च को किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का मुद्दा बताया था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए, जिससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे गए ज्ञापन में INDIA ब्लॉक ने चार प्रमुख मांगें रखी थीं:
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले 2023 के कानून को वापस लेना।
SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकना और विपक्ष के अनुसार हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करना।
सभी चुनावों में मतपत्रों की व्यवस्था वापस लागू करना।
पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करना, जिनमें विपक्ष के दावे के अनुसार वोट चोरी के निर्णायक सबूत मिले हैं।
ये विपक्ष की मांगें और आरोप हैं। इन्हें अदालत या चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान दिल्ली में क्या हुआ?
12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इसी बीच, दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाई गई और यातायात पर प्रतिबंध लगाए गए। रॉयटर्स के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान छह मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। इससे पहले सप्ताहांत में भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। विपक्ष के प्रदर्शन के पीछे केवल CJI से मुलाकात का मुद्दा नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर असंतोष भी है।इससे पहले भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा था कि परंपरा के अनुसार मुख्य न्यायाधीश राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से इस तरह मुलाकात नहीं करते। भाजपा ने विपक्ष को अपने मुद्दे कानूनी माध्यमों से उठाने की सलाह दी थी।
SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट का पहले क्या रुख रहा है?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं की जानकारी की जांच करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष और कुछ अन्य पक्षों ने सवाल उठाए हैं।मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में कराए गए SIR की वैधता बरकरार रखी थी। अदालत ने माना था कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की समीक्षा करने का अधिकार है। उस फैसले में मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के मामलों में प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा उपायों पर भी निर्देश दिए गए थे। बिहार से जुड़े उस फैसले को देशभर में SIR के हर विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं समझा जाना चाहिए।अब मौजूदा विवाद में विपक्ष के आरोपों, चुनाव आयोग की दलीलों और अदालत में लंबित याचिकाओं पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
CJI Surya Kant INDIA Bloc Meeting विवाद ने चुनावी पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। CJI ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं की, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत आने का रास्ता खुला बताया। अब SIR, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोपों पर आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलें अहम होंगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
CJI सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं से मिलने से इनकार क्यों किया?
रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता था, वे पहले से अदालत में विचाराधीन थे। CJI ने संकेत दिया कि इन मामलों को प्रशासनिक मुलाकात के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए।
INDIA ब्लॉक सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा?
विपक्षी दल कथित वोट चोरी, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की।
SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच और सूची को अद्यतन किया जाता है।
INDIA ब्लॉक की प्रमुख मांगें क्या हैं?
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR रोकने, हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने, मतपत्रों की वापसी और कुछ विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को सही माना है?
मुलाकात से इनकार को आरोपों की पुष्टि या खारिज किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आरोपों पर अदालत का रुख संबंधित याचिकाओं और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर तय होगा।