Djibouti Coast Boat Tragedy : जिबूती के तट पर 139 लोगों की मौत, आखिर नाव डूबने की क्या रही वजह?
जिबूती के तट पर 305 प्रवासियों से भरी नाव डूबने से कम से कम 139 लोगों की मौत हुई और 84 लापता हैं। करीब 82 लोगों को बचाया गया। सभी जीवित बचे लोग इथियोपियाई नागरिक हैं, जो बेहतर जीवन की तलाश में यमन जा रहे थे।
Djibouti Coast Boat Tragedy : पूर्वी अफ्रीकी देश जिबूती के तट पर 8-9 अक्टूबर 2026 की रात प्रवासियों से भरी नाव पलटने से कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई। नाव में 305 लोग सवार थे और वह जिबूती से यमन जा रही थी। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के मुताबिक, हादसे में 84 लोग अब भी लापता हैं, जबकि करीब 82 लोगों को बचा लिया गया। मृतकों में कम से कम 15 बच्चे भी शामिल हैं। नाव के डूबने की वजह उसमें क्षमता से ज्यादा लोगों का सवार होना बताई गई है। बचाव दल लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

नाव में 305 लोग सवार थे, किनारे के पास ही डूब गई
IOM के मुताबिक, यह हादसा जिबूती के तटीय इलाके गुहेरे में, ओबॉक बंदरगाह शहर के उत्तर में हुआ। नाव बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार करके यमन की ओर जा रही थी। जीवित बचे लोगों ने बताया कि नाव पर चढ़ने के कुछ ही समय बाद वह पीछे की ओर झुककर डूबने लगी। IOM के जिबूती मिशन प्रमुख एलेक्जेंडर कोइसाक ने बताया कि नाव में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने के कारण हादसा हुआ।कोइसाक के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने बचाव और शवों को निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में शव किनारे आने से स्थिति बेहद मुश्किल हो गई। उन्होंने बताया कि मृतकों की आधिकारिक संख्या में फिलहाल उन्हीं शवों को शामिल किया गया है, जिन्हें स्थानीय अधिकारियों ने दफनाया है। कुछ प्रवासियों ने अपने साथियों को खुद दफना दिया था। इन शवों की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें आधिकारिक आंकड़ों में जोड़ा जा सकेगा।
उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि कई लोगों को बिना नाम के सामूहिक कब्र में दफनाना पड़ा। इससे उनके परिवारों के लिए यह जानना भी मुश्किल हो सकता है कि उनके साथ क्या हुआ।
बचाए गए लोगों को मेडिकल और मानसिक मदद दी जा रही
हादसे में बचे लोगों को ओबॉक स्थित IOM के बचाव केंद्र में पहुंचाया गया है। यहां उन्हें समुद्री पानी निगलने से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए चिकित्सा सहायता और मानसिक सहयोग दिया जा रहा है। IOM के मुताबिक, जीवित बचे सभी लोग इथियोपिया के नागरिक हैं।कोइसाक ने बताया कि हादसे के बाद बचे लोग सदमे में हैं और उनसे बात करना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ लोगों को अपने परिवार के सदस्यों की मौत की जानकारी मिल चुकी है, जबकि अन्य लोगों को फोन के जरिए घर पर संपर्क कर यह बताने का मौका दिया गया कि वे सुरक्षित हैं।
IOM की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों की मदद कर रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि समुद्र में लापता लोगों का पता चलने के बाद मृतकों का आंकड़ा बदल सकता है।
बेहतर कमाई के लिए अफ्रीका से खाड़ी देशों तक जाते हैं प्रवासी
अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र से हर साल हजारों लोग रोजगार, सुरक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में जिबूती पहुंचते हैं। यहां से वे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार करके यमन जाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद कई प्रवासियों का लक्ष्य सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों तक पहुंचना होता है, जहां उन्हें रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद रहती है।यह रास्ता बेहद जोखिम भरा है। छोटी और जरूरत से ज्यादा भरी नावों में समुद्र पार करने के दौरान डूबने, तस्करी और हिरासत में लिए जाने का खतरा बना रहता है। गरीबी, असुरक्षा, सूखा और जलवायु परिवर्तन के असर भी लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।
यमन में जारी संघर्ष के बावजूद इस मार्ग से प्रवासियों का आना-जाना जारी है। हाल के हफ्तों में यमन में लड़ाई बढ़ने के बाद कम से कम 2,000 यमनी नागरिकों को जिबूती में सहायता दी गई। यह प्रवासियों की सामान्य दिशा से उलट है, क्योंकि आमतौर पर पूर्वी अफ्रीका से लोग यमन के रास्ते खाड़ी देशों की ओर जाते हैं।
IOM के मिसिंग माइग्रेंट्स प्रोजेक्ट के मुताबिक, 2025 में इस मार्ग पर 900 से ज्यादा प्रवासियों की मौत हुई या वे लापता हो गए। संगठन की महानिदेशक एमी पोप ने कहा कि लोग तभी ऐसी नावों में सवार होते हैं, जब उन्हें लगता है कि उनके पास सुरक्षित रास्ता नहीं है। उन्होंने सरकारों और सहायता देने वाले संगठनों से सुरक्षित और कानूनी प्रवासन के विकल्प बढ़ाने की अपील की।

इंडोनेशिया में भी डूबी थी यात्री फेरी, 78 लोगों की मौत
समुद्री हादसों का खतरा केवल अफ्रीका के इस मार्ग तक सीमित नहीं है। सितंबर 2026 में इंडोनेशिया के जावा सागर में ‘विर्गो ट्रांसपोर्ट 8’ नाम की फेरी डूब गई थी। यह सुराबाया से बोर्नियो द्वीप की ओर जा रही थी। हादसे के समय इसमें 213 यात्री और 30 क्रू सदस्य सवार थे।इंडोनेशियाई पुलिस के मुताबिक, 108 लोगों को बचाया गया, जबकि 78 लोगों की मौत हुई और 57 लोग लापता रहे। मामले की जांच के दौरान फेरी के कप्तान और कंपनी से जुड़े तीन अधिकारियों को संदिग्ध के रूप में नामजद किया गया।
इंडोनेशिया में 17 हजार से ज्यादा द्वीप हैं, इसलिए लोगों और सामान की आवाजाही के लिए नावों और फेरी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे हादसे समुद्री सुरक्षा, नावों की क्षमता और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन की जरूरत को सामने लाते हैं।
जिबूती में हुआ हादसा भी दिखाता है कि सुरक्षित यात्रा के विकल्पों की कमी लोगों को जान जोखिम में डालने पर मजबूर कर सकती है। IOM ने देशों से अपील की है कि अगली ऐसी दुर्घटना होने से पहले सुरक्षित और कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
जिबूती में प्रवासियों की नाव डूबने से कितने लोगों की मौत हुई?
IOM के मुताबिक, कम से कम 139 लोगों की मौत हुई है। इनमें कम से कम 15 बच्चे शामिल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
हादसे के बाद कितने लोग लापता हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, 84 लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल उनकी तलाश कर रहे हैं।
नाव कहां से कहां जा रही थी?
नाव जिबूती से यमन जा रही थी। हादसा जिबूती के गुहेरे तटीय इलाके में, ओबॉक के उत्तर में हुआ।
नाव डूबने की वजह क्या बताई गई है?
IOM के जिबूती मिशन प्रमुख के मुताबिक, नाव में क्षमता से ज्यादा लोगों के सवार होने के कारण वह डूब गई। हादसे की जांच और बचाव कार्य जारी हैं।
प्रवासी इस खतरनाक समुद्री रास्ते से क्यों जाते हैं?
कई लोग रोजगार, बेहतर कमाई और सुरक्षा की तलाश में पूर्वी अफ्रीका से यमन होते हुए खाड़ी देशों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। गरीबी, असुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के असर भी इस पलायन की वजह हैं।