US Treasury Buyback $6 Billion : 6 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीद रहा अमेरिका, आखिर क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
अमेरिका का ट्रेजरी डिपार्टमेंट 24 सितंबर को 20-30 साल वाले सरकारी बॉन्ड की 6 अरब डॉलर तक बायबैक करेगा। यह कदम लंबी अवधि के बॉन्ड बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए है, जहां यील्ड और सरकार की बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ी हुई है।
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US Treasury Buyback $6 Billion : अमेरिका का ट्रेजरी डिपार्टमेंट 24 सितंबर 2026 को 6 अरब डॉलर तक के लंबे समय वाले सरकारी बॉन्ड वापस खरीद रहा है। यह ऑपरेशन ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के बढ़ाए गए बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम के तहत हो रहा है। इसका मकसद लंबे समय वाले ट्रेजरी सिक्योरिटीज के बाजार में लिक्विडिटी को सपोर्ट करना है, जहां हाल के दिनों में बॉन्ड यील्ड और सरकार की उधारी लागत बढ़ी है। इस बायबैक में 20 से 30 साल की अवधि वाले ट्रेजरी सिक्योरिटीज खरीदे जाएंगे। इसकी अधिकतम सीमा उस 2 अरब डॉलर की शुरुआती योजना से तीन गुना है, जिसकी जानकारी अगस्त की शुरुआत में निवेशकों को दी गई थी।

30-Year Yield 5.40% के करीब, बॉन्ड बाजार में दबाव
बायबैक की घोषणा ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में लंबी अवधि की यील्ड ऊंची बनी हुई है। 23 सितंबर को 30-year Treasury yield कारोबार के दौरान 5.38% तक पहुंच गई। यह सितंबर की शुरुआत में देखे गए करीब 5.40% के स्तर के आसपास है। यह स्तर 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर सरकार की लंबी अवधि की उधारी लागत पर पड़ता है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड दुनिया के वित्तीय बाजारों के लिए एक अहम बेंचमार्क भी है। इसलिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बड़ी तेजी का असर दूसरे देशों की बॉन्ड यील्ड, कंपनियों की उधारी लागत और निवेशकों के फैसलों पर भी पड़ सकता है।
इसी माहौल में ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने लंबे समय वाले बॉन्ड को वापस खरीदने का फैसला किया है। अगस्त में विभाग ने लंबी अवधि के नॉमिनल कूपन सिक्योरिटीज के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक का आकार बढ़ाने की घोषणा की थी।
6 अरब डॉलर का बॉन्ड बायबैक आखिर है क्या?
ट्रेजरी बायबैक का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अपने कुल सरकारी कर्ज को सीधे 6 अरब डॉलर कम कर देगा। इस प्रक्रिया में अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में पहले से जारी कुछ सरकारी सिक्योरिटीज को निवेशकों से वापस खरीदता है।ऐसे बॉन्ड को वापस खरीदने का एक उद्देश्य बाजार के उस हिस्से में लिक्विडिटी बनाए रखना है, जहां निवेशकों के लिए खरीद-बिक्री करना मुश्किल हो सकता है। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने इस कार्यक्रम को लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक के तौर पर पेश किया है।
24 सितंबर के ऑपरेशन में 20 से 30 साल की अवधि वाले नॉमिनल ट्रेजरी सिक्योरिटीज को टारगेट किया जा रहा है। यानी जिन सरकारी बॉन्ड की मैच्योरिटी काफी लंबी अवधि के बाद होगी, उनमें से कुछ को ट्रेजरी निवेशकों से वापस खरीदेगा।
यह प्रक्रिया सामान्य सरकारी बॉन्ड नीलामी से अलग है। नीलामी में सरकार नए बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाती है, जबकि बायबैक में सरकार बाजार में पहले से मौजूद कुछ बॉन्ड वापस खरीदती है।
पहले 2 अरब डॉलर, अब 6 अरब डॉलर तक
इस प्रोग्राम में सबसे बड़ा बदलाव बायबैक के आकार को लेकर हुआ है। अगस्त की शुरुआत में निवेशकों को लंबे समय वाले ट्रेजरी बायबैक ऑपरेशन के लिए अधिकतम 2 अरब डॉलर की जानकारी दी गई थी। लेकिन 19 अगस्त को ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने घोषणा की कि ऐसे ऑपरेशनों का आकार कम से कम दोगुना किया जाएगा।इसके बाद 6 अरब डॉलर तक की खरीद की सीमा सामने आई। यानी मौजूदा ऑपरेशन की अधिकतम राशि शुरुआती योजना से तीन गुना है।
हालांकि 6 अरब डॉलर की सीमा का यह मतलब नहीं है कि ट्रेजरी हर बार पूरी राशि खर्च करेगा। इससे पहले 9 सितंबर को 10 से 20 साल की मैच्योरिटी वाले ट्रेजरी बॉन्ड के लिए भी 6 अरब डॉलर तक की खरीद की घोषणा हुई थी, लेकिन ट्रेजरी ने करीब 5.2 अरब डॉलर के बॉन्ड ही खरीदे।
अधिकारियों के मुताबिक इसकी वजह पर्याप्त प्रतिस्पर्धी बोलियां नहीं मिलना थी। उस ऑपरेशन में निवेशकों ने करीब 10.5 अरब डॉलर की सिक्योरिटीज ट्रेजरी को बेचने की पेशकश की थी।
इससे साफ है कि 6 अरब डॉलर बायबैक की अधिकतम सीमा है, जरूरी नहीं कि हर ऑपरेशन में पूरी राशि का इस्तेमाल किया जाए।
Scott Bessent ने फैसले का बचाव किया
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बायबैक का आकार बढ़ाने के फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि उन्होंने यह कदम तब उठाया जब उन्हें लगा कि बाजार कुछ सिक्योरिटीज की कीमतों में संतुलन से दूर जा रहा है।बेसेंट ने CNBC से बातचीत में कहा था कि उन्हें लगा कि बाजार “इक्विलिब्रियम प्राइसेज” से दूर जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 19 अगस्त की बायबैक घोषणा और 21 सितंबर के बीच 30-year बॉन्ड यील्ड में करीब 1 बेसिस पॉइंट की ही बढ़ोतरी हुई।
हालांकि इस नीति की आलोचना भी हुई है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) ने कहा कि इस तरह की “फाइनेंशियल इंजीनियरिंग” अमेरिका की बढ़ती डेट की मूल समस्या को दूर नहीं करती। संगठन के मुताबिक सेकेंडरी मार्केट में सिक्योरिटीज खरीदने से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इससे बढ़ते सरकारी कर्ज के संरचनात्मक कारण खत्म नहीं होते।
यहां बायबैक और अमेरिकी सरकार की कुल डेट समस्या को अलग-अलग समझना जरूरी है। बायबैक का मुख्य उद्देश्य बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी को सपोर्ट करना है, जबकि सरकारी कर्ज और फिस्कल डेफिसिट एक अलग और ज्यादा व्यापक मुद्दा है।
महंगा तेल और फेडरल रिजर्व की नीति भी वजह
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हाल की तेजी के पीछे कई वजहें हैं। इनमें ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई को लेकर चिंता भी शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा लागत बढ़ी, जिससे दुनिया भर के बॉन्ड बाजारों पर दबाव बढ़ा।इसी बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर की बैठक में पॉलिसी रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की। 16 सितंबर के फैसले के बाद फेडरल फंड्स रेट की टारगेट रेंज 3.75% से 4% हो गई।
फेडरल रिजर्व ने कहा कि महंगाई अभी भी ऊंची है और ब्याज दर में यह बदलाव उसे 2% के लक्ष्य की ओर लाने में मदद कर सकता है।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो लंबे समय वाले सरकारी बॉन्ड की कीमतों और यील्ड पर दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि ट्रेजरी का 20-30 साल वाले बॉन्ड में लिक्विडिटी सपोर्ट बढ़ाना बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।
बॉन्ड बायबैक से क्या बदलेगा?
जब ट्रेजरी डिपार्टमेंट बाजार से लंबे समय वाले बॉन्ड खरीदता है तो इन सिक्योरिटीज की मांग बढ़ सकती है। सामान्य स्थिति में इससे बॉन्ड की कीमत को सपोर्ट मिलता है और यील्ड पर नीचे की ओर दबाव पड़ सकता है।लेकिन इसका असर सिर्फ बायबैक की राशि पर निर्भर नहीं करता। उस समय बाजार में महंगाई, ब्याज दर, सरकारी बॉन्ड की सप्लाई, निवेशकों की मांग और अमेरिकी सरकार की उधारी की जरूरत जैसे कई फैक्टर भी काम करते हैं।
इसलिए 6 अरब डॉलर के बायबैक के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड निश्चित रूप से नीचे आ जाएगी। पिछली 6 अरब डॉलर तक की बायबैक सीमा वाले ऑपरेशन में भी ट्रेजरी ने पूरी राशि खर्च नहीं की थी।
24 सितंबर का ऑपरेशन अब बढ़ाए गए बायबैक प्रोग्राम की एक अहम परीक्षा है। बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रेजरी वास्तव में कितने बॉन्ड खरीदता है और उसके बाद 20 से 30 साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड और लिक्विडिटी में कितना बदलाव आता है।
अमेरिका के कर्ज बाजार के लिए क्यों अहम है यह कदम?
अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े सरकारी बॉन्ड बाजारों में से एक है। इसलिए अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज में होने वाला बड़ा बदलाव सिर्फ अमेरिकी निवेशकों तक सीमित नहीं रहता। दुनिया भर के बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, पेंशन फंड और दूसरे संस्थागत निवेशक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को अपने निवेश और रिस्क मैनेजमेंट में इस्तेमाल करते हैं।लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड बढ़ने पर वैश्विक वित्तीय बाजारों में उधारी की लागत भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, ट्रेजरी की ओर से बॉन्ड बायबैक का उद्देश्य बाजार में ट्रेडिंग और लिक्विडिटी को सपोर्ट देना है।
हालांकि यह ऑपरेशन अमेरिकी सरकार की बढ़ती कुल डेट या फिस्कल डेफिसिट का समाधान नहीं है। इसका असर मुख्य रूप से ट्रेजरी मार्केट के उस हिस्से पर देखा जाएगा जहां सरकार सिक्योरिटीज वापस खरीद रही है।
फिलहाल 24 सितंबर का 6 अरब डॉलर तक का ट्रेजरी बायबैक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्कॉट बेसेंट के बढ़ाए गए प्रोग्राम के तहत लंबे समय वाले बॉन्ड में बड़ा ऑपरेशन है। 30-year यील्ड के 5.40% के करीब बने रहने के बीच बाजार अब यह देख रहा है कि ट्रेजरी की खरीद से लंबे समय वाले बॉन्ड की मांग और बाजार की लिक्विडिटी पर कितना असर पड़ता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
US Treasury ने $6 billion bonds buyback करने का फैसला क्यों किया?
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने लंबे समय वाले ट्रेजरी सिक्योरिटीज के बाजार में लिक्विडिटी को सपोर्ट देने के लिए बायबैक प्रोग्राम का आकार बढ़ाया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब लंबे समय वाले बॉन्ड की यील्ड और सरकार की उधारी लागत ऊंची बनी हुई है।
Longer-dated Treasury securities क्या होते हैं?
लॉन्गर-डेटेड ट्रेजरी सिक्योरिटीज वे अमेरिकी सरकारी बॉन्ड होते हैं जिनकी मैच्योरिटी लंबी अवधि के बाद होती है। 24 सितंबर के ऑपरेशन में 20 से 30 साल की अवधि वाले ट्रेजरी सिक्योरिटीज को टारगेट किया जा रहा है।
US Treasury किन bonds को buy back करेगा?
24 सितंबर के ऑपरेशन में 20 से 30 साल की अवधि वाले नॉमिनल ट्रेजरी सिक्योरिटीज खरीदे जाएंगे। ये लंबे समय के सरकारी बॉन्ड हैं, जिनकी मैच्योरिटी कई दशक बाद हो सकती है।
Treasury buyback का bond market पर क्या असर हो सकता है?
बायबैक से संबंधित ट्रेजरी सिक्योरिटीज की मांग बढ़ सकती है और बाजार में लिक्विडिटी को सपोर्ट मिल सकता है। सामान्य परिस्थितियों में इससे बॉन्ड की कीमत को सहारा और यील्ड पर नीचे की ओर दबाव मिल सकता है, लेकिन वास्तविक असर बाजार की स्थिति, ब्याज दर, महंगाई और बॉन्ड की सप्लाई पर निर्भर करेगा।
$6 billion Treasury buyback पहले के मुकाबले कितना बड़ा है?
शुरुआती योजना में अधिकतम बायबैक राशि 2 अरब डॉलर थी। अब 24 सितंबर के ऑपरेशन के लिए अधिकतम सीमा 6 अरब डॉलर है। यानी मौजूदा सीमा शुरुआती योजना से तीन गुना है। हालांकि ट्रेजरी जरूरी नहीं कि हर ऑपरेशन में पूरी 6 अरब डॉलर की राशि खर्च करे।