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NEET सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, NTA Office Visit से हलचल..!

सुप्रीम कोर्ट NTA के नए दिल्ली मुख्यालय का निरीक्षण कर व्यवस्था और स्टाफ की स्थिति देखेगा। कोर्ट ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले पैनल की प्रगति पर दो हफ्ते में हलफनामा मांगा है। NEET सुधारों के implementation पर भी नजर है।

NEET सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, NTA Office Visit से हलचल..!

Supreme Court NTA Office Visit: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA में प्रस्तावित सुधारों को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। 18 सितंबर को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि वह NTA के नए मुख्यालय का दौरा कर वहां की व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की स्थिति को खुद देखना चाहती है। कोर्ट का यह रुख NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों के बाद NTA के संस्थागत पुनर्गठन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। इसी सुनवाई में कोर्ट ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की प्रगति पर दो हफ्ते में एफिडेविट दाखिल करने को भी कहा है।

NTA के ऑफिस पहुंचकर व्यवस्था देखेंगे जज

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि NTA का अब सेंट्रल दिल्ली के मिंटो रोड पर स्थायी कार्यालय है। इस पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि वह और उनके साथी जज एक दिन वहां आएंगे और देखेंगे कि सिस्टम वास्तव में काम कर रहा है या नहीं।कोर्ट की चिंता सिर्फ नए ऑफिस की बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। जस्टिस नरसिम्हा ने NTA के पास स्थायी व्यवस्था और पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम आधा स्टाफ स्थायी होना चाहिए और पूरी व्यवस्था केवल डेप्युटेशन पर आए कर्मचारियों के भरोसे नहीं चलनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि परीक्षा कराने वाली संस्था का ढांचा इतना मजबूत हो कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिले।

तुषार मेहता ने भी संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर सहमति जताई और यह सवाल उठाया कि क्या NTA से जुड़े सुधारों के लिए किसी समिति या व्यवस्था को वैधानिक आधार देने की जरूरत होगी।

नए NTA ऑफिस में क्या बदला है?

केंद्र की ओर से दाखिल एफिडेविट में NTA में किए जा रहे कई बदलावों की जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक NTA अब अलग-अलग परीक्षाओं के हिसाब से बने यूनिट मॉडल से हटकर फंक्शनल वर्टिकल स्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य परीक्षा संचालन के अलग-अलग हिस्सों में विशेषज्ञता विकसित करना है।NTA के नेतृत्व में भी बदलाव किया गया है। संस्था में सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी को डायरेक्टर जनरल बनाया गया है। इसके अलावा अलग-अलग सेवाओं के कैडर लेवल अधिकारियों को शामिल किया गया है और सिक्योरिटी, HR तथा R&D जैसे क्षेत्रों में डोमेन स्पेशलिस्ट की ओपन मार्केट से भर्ती की जा रही है।

वरिष्ठ नेतृत्व में IAS, IPS और इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस से जुड़े अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। एफिडेविट के मुताबिक NTA के कॉन्फिडेंशियल ऑफिस को मिंटो रोड स्थित करीब 55,520 वर्ग फुट की डेडिकेटेड सरकारी सुविधा में स्थानांतरित किया गया है। इस परिसर में X-ray स्क्रीनिंग और सुरक्षा व्यवस्था भी है। एफिडेविट के अनुसार यहां 39 CISF जवान सुरक्षा में तैनात हैं।
कोर्ट ने NTA को यह एफिडेविट अपनी वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है, ताकि छात्र और दूसरे स्टेकहोल्डर्स भी किए गए बदलावों की प्रगति देख सकें।

नंदन नीलेकणि पैनल की रिपोर्ट पर भी कोर्ट की नजर

सुप्रीम कोर्ट जिस दूसरे बड़े मुद्दे पर जवाब चाहता है, वह नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स है। इस पैनल को NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में जरूरी स्ट्रक्चरल चेंज सुझाने का काम दिया गया है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि पैनल ने कई स्तर पर विस्तृत चर्चा की है। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पहले की हाई-लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स से जुड़े लोगों के साथ बातचीत भी शामिल है।

सरकार की ओर से बताया गया कि पैनल की रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की उम्मीद है। जस्टिस नरसिम्हा ने सिर्फ रिपोर्ट तैयार होने पर जोर नहीं दिया। उन्होंने पूछा कि अभी तक क्या प्रगति हुई है और क्या सुझाव सामने आए हैं। कोर्ट ने हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के साथ काम कर रहे जॉइंट सेक्रेटरी को दो हफ्ते के भीतर प्रगति बताने वाला एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट का भी जिक्र किया और कहा कि सिर्फ कमेटी की रिपोर्ट होना पर्याप्त नहीं है। उसके सुझावों को लागू करना और उन्हें संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से कहा गया कि नीलेकणि कमेटी की रिपोर्ट आगे के काम के लिए रोडमैप दे सकती है और सरकार इसके इंप्लीमेंटेशन को लेकर प्रतिबद्ध है।

NEET और NTA में किन सुधारों की बात हो रही है?

NTA के पुनर्गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई बदलावों की मांग की गई है। इनमें क्वेश्चन पेपर की डिजिटल लॉकिंग, NEET-UG को पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट में बदलना और सेंटर-वाइज रिजल्ट जारी करना शामिल है। सेंटर-वाइज रिजल्ट से परीक्षा के परिणामों में किसी तरह की असामान्य स्थिति का पता लगाने में मदद मिल सकती है।याचिकाकर्ताओं ने NTA के लिए मजबूत गवर्निंग बॉडी और डोमेन एक्सपर्ट्स की भूमिका की जरूरत भी बताई है। एडवोकेट तन्वी दुबे ने कोर्ट को बताया कि राधाकृष्णन कमेटी ने भी डोमेन एक्सपर्ट्स और गवर्निंग बॉडी की जरूरत का उल्लेख किया था।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि डोमेन एक्सपर्ट्स से सलाह लेना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और दोनों कमेटियां इस पहलू पर काम कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि NEET-UG को कंप्यूटर-बेस्ड मोड में बदलने की योजना के साथ समयबद्ध निर्देश जरूरी हैं, क्योंकि अगली परीक्षाएं कुछ ही महीनों में होने वाली हैं। इस पर केंद्र ने कहा कि सरकार और नीलेकणि कमेटी भी अगली परीक्षा नजदीक होने को लेकर सजग हैं और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

NEET विवाद के बाद NTA पर इतना जोर क्यों?

NTA देश की कई बड़ी प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें JEE मेन, CUET-UG, CUET-PG, UGC-NET, CSIR-NET और NEET-UG जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में सुरक्षा, क्वेश्चन पेपर की गोपनीयता, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और रिजल्ट की पारदर्शिता को लेकर किसी भी गड़बड़ी का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ सकता है।NEET-UG को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे और इसके पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं। मौजूदा सुनवाई में कोर्ट अब केवल किसी एक परीक्षा की समस्या पर नहीं, बल्कि NTA की पूरी संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

यही वजह है कि कोर्ट ने NTA के नए ऑफिस को खुद देखने की बात कही है। साथ ही नंदन नीलेकणि पैनल की प्रगति और उसके सुझावों के इंप्लीमेंटेशन को लेकर भी जानकारी मांगी गई है। यानी अब फोकस सिर्फ सुधारों के सुझाव तैयार करने पर नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया पर भी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Supreme Court NTA office का visit क्यों करना चाहता है?

सुप्रीम कोर्ट NTA के नए मुख्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम और मैनपावर की वास्तविक स्थिति देखना चाहता है। कोर्ट यह भी देखना चाहता है कि परीक्षा सुरक्षा और संस्थागत सुधारों के लिए बताई गई व्यवस्थाएं वास्तव में लागू हुई हैं या नहीं।

Nandan Nilekani panel NTA reforms पर क्या काम कर रहा है?

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाला हाई-पावर्ड टास्क फोर्स NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में स्ट्रक्चरल सुधारों के सुझाव तैयार कर रहा है। पैनल ने अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स और पहले की राधाकृष्णन कमेटी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ चर्चा की है। सितंबर 2026 के अंत तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

Supreme Court ने Nandan Nilekani committee से कौन-सी report मांगी?

कोर्ट ने अभी पैनल की अंतिम रिपोर्ट सीधे नहीं मांगी है। उसने हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की अब तक की प्रगति और सामने आए सुझावों की जानकारी देने वाला एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। इसके लिए जॉइंट सेक्रेटरी को दो हफ्ते का समय दिया गया है।

NTA में कौन-कौन से reforms proposed हैं?

प्रस्तावित सुधारों में फंक्शनल वर्टिकल स्ट्रक्चर, स्थायी और विशेषज्ञ स्टाफ, सिक्योरिटी और R&D जैसे क्षेत्रों में डोमेन स्पेशलिस्ट, क्वेश्चन पेपर की डिजिटल लॉकिंग, NEET-UG को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट में बदलने की संभावना और सेंटर-वाइज रिजल्ट जारी करने जैसे उपाय शामिल हैं।

Supreme Court NEET UG मामले में NTA को क्यों monitor कर रहा है?

NEET-UG से जुड़े पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के विवादों के बाद NTA की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट अब NTA के रीस्ट्रक्चरिंग और परीक्षा सुधारों के इंप्लीमेंटेशन की प्रगति पर नजर रख

Nandan Nilekani का NTA reform में क्या role है?

नंदन नीलेकणि को केंद्र की ओर से गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह पैनल NTA और NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की व्यवस्था में स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए सुझाव तैयार कर रहा है। इसकी रिपोर्ट आगे के संस्थागत सुधारों के लिए रोडमैप का आधार बन सकती है।

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