BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेंगे 11 देश, युद्ध से कारोबार तक भारत के सामने क्या हैं बड़े मुद्दे?
भारत की मेजबानी में BRICS Summit 2026 नई दिल्ली में होगा। सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सहयोग पर चर्चा होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ नीतियां भी अहम मुद्दे रहेंगे।
BRICS Summit 2026 India: भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संकट, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत की कोशिश खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ BRICS देशों के बीच कारोबार, निवेश, तकनीक और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाने की है।BRICS अब पहले के मुकाबले काफी बड़ा समूह बन चुका है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह समूह 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और सऊदी अरब के जुड़ने के बाद 10 सदस्यों का हुआ और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने से सदस्य देशों की संख्या 11 हो गई। बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इसके पार्टनर देश हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5% आबादी, लगभग 40% वैश्विक GDP और करीब 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत ने BRICS के एजेंडे में सुरक्षा से ज्यादा ‘रेजिलिएंस’ पर जोर दिया
भारत ने 2026 की BRICS अध्यक्षता के लिए “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” थीम रखी है। इसका मतलब है कि वैश्विक संकट आने पर BRICS देश खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को ज्यादा मजबूत बनाए रखें।इसी के तहत इस साल भारत ने स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और जरूरी सप्लाई चेन में सामूहिक सहयोग पर जोर दिया है। इसके साथ व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और हाई टेक्नोलॉजी भी शिखर सम्मेलन के अहम मुद्दों में शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में इस साल 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनमें BRICS के तीन प्रमुख सहयोग क्षेत्रों राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क पर काम किया गया। भारत 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्ष रह चुका है।
खाने-पीने से लेकर तेल तक, सप्लाई चेन सबसे बड़ी चिंता
इस बार खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को खास महत्व दिया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष ने ऊर्जा और वैश्विक व्यापार की सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में संकट ने तेल की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ाई है।ऐसे में BRICS के लिए सवाल सिर्फ ज्यादा उत्पादन का नहीं, बल्कि यह भी है कि संकट के समय जरूरी सामान, ऊर्जा और कृषि इनपुट की सप्लाई कितनी स्थिर रखी जा सकती है। BRICS पहले भी कृषि सहयोग और मजबूत खाद्य सप्लाई चेन की जरूरत पर जोर दे चुका है।
भारत इस बार इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ज्यादा मजबूत और विविध सप्लाई चेन पर जोर दे रहा है। व्यापार और निवेश को बढ़ाने के साथ ग्लोबल वैल्यू चेन को ज्यादा लचीला बनाने पर भी काम हुआ है। अगस्त में जयपुर में हुई BRICS ट्रेड मिनिस्टर्स बैठक में भारत ने खाद्य सुरक्षा समेत रणनीतिक सप्लाई चेन और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती BRICS के अंदर ही है
BRICS की ताकत उसकी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और बढ़ती सदस्यता में है, लेकिन यही विस्तार उसके लिए चुनौती भी बन रहा है। समूह में ऐसे देश शामिल हैं जिनके आपसी संबंधों और पश्चिम एशिया जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं।इसका उदाहरण 2026 में पहले ही देखने को मिल चुका है। मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर ईरान और UAE के बीच मतभेद के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बना सकी थी। इसके बजाय भारत ने चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किया था।
अब दिल्ली सम्मेलन से पहले BRICS शेरपाओं ने ईरान और UAE के बीच मतभेद कम करने और पश्चिम एशिया तथा फिलिस्तीन के मुद्दे पर साझा भाषा तैयार करने की कोशिश की है। इसलिए इस बार नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी।
मोदी के सामने शी चिनफिंग और पुतिन के साथ बातचीत का मौका
शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। पुतिन की भारत यात्रा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पुष्टि की है।शी चिनफिंग की भारत यात्रा खास महत्व रखती है। वे सात साल बाद भारत आ रहे हैं और ऐसे समय आ रहे हैं जब भारत-चीन संबंधों में सीमा तनाव के बाद धीरे-धीरे सुधार की कोशिश हो रही है। BRICS के मंच पर दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को लेकर भी बातचीत की संभावना है।
भारत BRICS के भीतर भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दे रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक भारत BRICS देशों के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है, ताकि सीमा पार भुगतान को आसान बनाया जा सके। हालांकि राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियां अभी मौजूद हैं।
दो दिन में क्या होगा, आखिर में जारी होगा नई दिल्ली घोषणापत्र
12 सितंबर को सम्मेलन की शुरुआत BRICS सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे में होने वाली बैठक से होगी। इसका विषय “इनक्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलैटरलिज्म” रखा गया है। इसके बाद भारत मंडपम में भारत के इनोवेशन और तकनीकी प्रदर्शन को दिखाने वाली प्रदर्शनी का कार्यक्रम है। शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS नेताओं के लिए डिनर की मेजबानी करेंगे।13 सितंबर को सदस्य देशों के साथ पार्टनर देशों और आउटरीच देशों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके बाद “रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इनक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ” विषय पर खुला सत्र होगा। सम्मेलन के अंत में नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया जाना है।
भारत के लिए इस सम्मेलन की सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितने बड़े नेता दिल्ली आए। असली चुनौती यह है कि 11 देशों के बीच मतभेदों के बावजूद खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, व्यापार, तकनीक और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर कितना साझा रास्ता निकाला जाता है। यही तय करेगा कि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच BRICS एक प्रभावी सहयोग मंच बन पाता है या सिर्फ अलग-अलग हितों वाले देशों का बड़ा समूह बनकर रह जाता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
BRICS Summit 2026 India में food security को लेकर क्या चर्चा होगी?
भारत खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि सहयोग, जरूरी कृषि इनपुट की स्थिर सप्लाई और मजबूत खाद्य सप्लाई चेन पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक संकट के समय खाद्य उपलब्धता और कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
India Hosted BRICS Summit 2026 में energy resilience क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव ने इस चिंता को और बढ़ाया है। इसलिए BRICS देशों के लिए ऊर्जा सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित और लचीला बनाना महत्वपूर्ण है।
BRICS 2026 Agenda में geopolitical challenges को कैसे शामिल किया गया है?
नेताओं को वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करनी है। इसमें पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं।
BRICS Food Security को मजबूत करने के लिए सदस्य देश क्या कर सकते हैं?
सदस्य देश कृषि तकनीक, कृषि इनपुट, उत्पादन और खाद्य सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा सकते हैं। BRICS पहले भी मजबूत और टिकाऊ खाद्य सप्लाई चेन की जरूरत पर जोर दे चुका है।
BRICS Energy Security पर India BRICS Presidency 2026 की क्या प्राथमिकताएं हैं?
भारत का जोर ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और संकट के समय ज्यादा भरोसेमंद सप्लाई व्यवस्था बनाने पर है। इसका संबंध सिर्फ तेल और गैस से नहीं, बल्कि व्यापक ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती से है।
BRICS Geopolitical Challenges के बीच Global Cooperation क्यों जरूरी है?
BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अगर ये देश खाद्य, ऊर्जा, व्यापार, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर साथ काम करते हैं, तो वैश्विक संकटों से निपटने की सामूहिक क्षमता बढ़ सकती है।