Home / International / Indus Waters Dispute: SCO में फिर उठा सिंधु जल विवाद, शहबाज बोले- पानी को हथियार न बनाएं; जानिए भारत का क्या है रुख?
International

Indus Waters Dispute: SCO में फिर उठा सिंधु जल विवाद, शहबाज बोले- पानी को हथियार न बनाएं; जानिए भारत का क्या है रुख?

SCO सम्मेलन में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर पानी को राजनीतिक हथियार न बनाने का आरोप लगाया। वहीं भारत ने हेग की मध्यस्थता अदालत के फैसले को खारिज करते हुए उसके अधिकार क्षेत्र को नहीं माना है। दोनों देशों के बीच विवाद जारी है।

Indus Waters Dispute: SCO में फिर उठा सिंधु जल विवाद, शहबाज बोले- पानी को हथियार न बनाएं; जानिए भारत का क्या है रुख?

Indus Waters Dispute: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में सिंधु जल समझौते का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शरीफ ने कहा कि पानी क्षेत्र की ‘जीवन रेखा’ है और इसे किसी भी तरह राजनीतिक दबाव या हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) ने सिंधु जल समझौते की स्थिति और जम्मू-कश्मीर की रतले जलविद्युत परियोजना से जुड़े मामले में फैसला दिया था। भारत ने इस फैसले को तुरंत खारिज करते हुए कहा कि वह इस मध्यस्थता अदालत को मान्यता नहीं देता और इसके पास भारत के फैसलों पर अधिकार क्षेत्र नहीं है।

SCO में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते पर क्या कहा?

SCO के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि पानी लाखों लोगों के जीवन, कृषि और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को दबाव बनाने या राजनीतिक लाभ हासिल करने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पानी को इस इलाके की "जीवन-रेखा" बताया और कहा कि यह लाखों लोगों की ज़िंदगी बनाए रखता है, खेती में मदद करता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पानी को इस इलाके की "जीवन-रेखा" बताया और कहा कि यह लाखों लोगों की ज़िंदगी बनाए रखता है, खेती में मदद करता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

शरीफ ने यह भी कहा कि साझा नदियों से जुड़े समझौते बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं और इन्हें राजनीतिक सुविधा के हिसाब से एकतरफा तरीके से नहीं हटाया जा सकता। उनके मुताबिक ऐसे समझौतों का सम्मान उनकी भावना और शब्दों दोनों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जल विवाद को क्षेत्रीय शांति से भी जोड़ा। उनका कहना था कि दक्षिण एशिया तब तक अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता, जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति नहीं होती। ऐसे में साझा जल संसाधनों को लेकर विवादों का समाधान बातचीत और क्षेत्रीय सहयोग के जरिए होना चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे Indus Waters Dispute के संदर्भ में देखा जा रहा है।

आखिर सिंधु जल समझौता क्या है?

Indus Waters Treaty भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को हुआ था। करीब नौ साल की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ और विश्व बैंक ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विश्व बैंक इस समझौते का हस्ताक्षरकर्ता भी है।

समझौते में सिंधु नदी तंत्र की छह प्रमुख नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया। रावी, ब्यास और सतलुज यानी पूर्वी नदियों के पानी के इस्तेमाल का मुख्य अधिकार भारत को दिया गया, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब यानी पश्चिमी नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को पश्चिमी नदियों पर कोई अधिकार नहीं है। समझौते में भारत को कुछ निर्धारित शर्तों के तहत इन नदियों पर जलविद्युत परियोजनाएं बनाने और सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इसी वजह से जम्मू-कश्मीर में भारत की कई जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तकनीकी और कानूनी विवाद चलते रहे हैं।

विवादों के समाधान के लिए समझौते में स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) बनाया गया। तकनीकी मतभेदों के लिए न्यूट्रल एक्सपर्ट (Neutral Expert) और कुछ निर्धारित विवादों के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) की व्यवस्था भी है।

2025 में भारत ने समझौता ‘अबेयंस’ में क्यों रखा?

सिंधु जल विवाद ने अप्रैल 2025 में नया मोड़ लिया। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को ‘अबेयंस’ (abeyance) में रखने का फैसला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

भारत का कहना था कि पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को लेकर ठोस और स्थायी कार्रवाई होने तक समझौते को सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया।

पाकिस्तान ने भारत के इस कदम का विरोध किया और कहा कि भारत एकतरफा तरीके से सिंधु जल समझौते को निलंबित नहीं कर सकता। यही सवाल बाद में हेग स्थित मध्यस्थता अदालत के सामने भी पहुंचा।

हेग की अदालत ने 31 अगस्त को क्या फैसला दिया?

31 अगस्त 2026 को हेग स्थित Permanent Court of Arbitration ने सिंधु जल समझौते की स्थिति पर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि समझौता अभी भी लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से ‘अबेयंस’ में नहीं रख सकता। अदालत के मुताबिक समझौते को बदलने या समाप्त करने के लिए उसकी निर्धारित व्यवस्था का पालन जरूरी है।

अदालत ने रतले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट को लेकर भी अंतरिम उपाय जारी किए। रतले परियोजना चिनाब नदी पर स्थित है और भारत के लिए यह महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है।

इस मामले में पाकिस्तान ने परियोजना की कुछ डिजाइन विशेषताओं पर आपत्ति जताई थी। वहीं भारत का पक्ष रहा है कि वह सिंधु जल समझौते के तहत अनुमत जलविद्युत परियोजना बना रहा है। रतले और किशनगंगा परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी सवालों पर अलग न्यूट्रल एक्सपर्ट प्रक्रिया भी चल रही है। विश्व बैंक ने दोनों प्रक्रियाओं के लिए नियुक्तियां की थीं।

अदालत के अंतरिम आदेश के तहत रतले परियोजना के कुछ निर्माण कार्यों पर सीमाएं लगाई गई हैं। ये उपाय न्यूट्रल एक्सपर्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहने हैं। रिपोर्टों के मुताबिक संबंधित तकनीकी प्रक्रिया का अंतिम फैसला जुलाई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है।

भारत ने Hague Court का फैसला क्यों खारिज किया?

भारत ने अदालत के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस Court of Arbitration की कार्यवाही में भाग नहीं लिया और इस निकाय को मान्यता भी नहीं देता।

भारत का मुख्य तर्क यह है कि अदालत का गठन ही सिंधु जल समझौते की विवाद समाधान व्यवस्था के अनुरूप नहीं हुआ। भारत पहले से ही इस मामले में न्यूट्रल एक्सपर्ट की प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है।

यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ही परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर पाकिस्तान ने Court of Arbitration की प्रक्रिया का रास्ता चुना, जबकि भारत ने Neutral Expert की प्रक्रिया को उचित माना। विश्व बैंक ने 2022 में दोनों प्रक्रियाओं के लिए नियुक्तियां की थीं। विश्व बैंक के अनुसार दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं और समझौते में दोनों के लिए प्रावधान मौजूद हैं।

भारत का कहना है कि हेग की अदालत को भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। इसलिए उसके मौजूदा या भविष्य के फैसलों का भारत की जलविद्युत परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिंधु जल समझौते को ‘अबेयंस’ में रखने का उसका फैसला अभी भी लागू है।

शहबाज के बयान के बीच PM मोदी ने SCO में आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश

SCO सम्मेलन में सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान के रुख के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की कड़ी स्थिति दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत बताई, जिसमें टेरर फाइनेंसिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों के सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं।

मोदी ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं या आतंकियों को समर्थन और सुरक्षित ठिकाना देते हैं, उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा संदेश जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद किसी के लिए भी ‘रणनीतिक संपत्ति’ (strategic asset) नहीं हो सकता।

इस दौरान भारत ने SCO के लिए अपनी प्राथमिकताओं में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को प्रमुख बताया। मोदी ने अफगानिस्तान की स्थिरता, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा व सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर का भी उल्लेख किया और कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

Indus Waters Dispute अब किस दिशा में जाएगा?

फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर दो अलग-अलग स्थिति सामने हैं। पाकिस्तान समझौते को बाध्यकारी बताते हुए उसके पूरी तरह पालन की मांग कर रहा है। वहीं भारत हेग की Court of Arbitration के अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं करता और अपने ‘अबेयंस’ वाले फैसले को बरकरार रखता है।

दूसरी तरफ रतले और किशनगंगा परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर Neutral Expert की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसलिए आने वाले समय में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव भी बना रह सकता है।

SCO में शहबाज शरीफ का बयान यह दिखाता है कि पाकिस्तान अब Indus Waters Dispute को केवल द्विपक्षीय बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत की ओर से आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है। ऐसे में सिंधु जल समझौता आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों का एक और बड़ा विवादित मुद्दा बना रह सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

SCO में Pakistan PM ने Indus Waters को लेकर क्या कहा?

शहबाज शरीफ ने कहा कि पानी क्षेत्र की जीवन रेखा है और इसे राजनीतिक दबाव, जबरदस्ती या राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साझा जल समझौतों को बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता बताते हुए उनके पालन की मांग की।

India Pakistan Indus Waters Dispute क्या है?

यह भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी तंत्र की नदियों के पानी के इस्तेमाल और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ा विवाद है। दोनों देशों के बीच 1960 का सिंधु जल समझौता पानी के बंटवारे और विवाद समाधान की व्यवस्था तय करता है।

Indus Waters Treaty क्या है?

यह 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ जल समझौता है। इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज भारत के लिए तथा सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान के लिए निर्धारित की गईं। हालांकि दोनों देशों को दूसरे पक्ष के लिए निर्धारित नदियों पर भी कुछ सीमित अधिकार दिए गए हैं।

Pakistan Indus Waters Treaty को लेकर India से क्या मांग कर रहा है?

पाकिस्तान चाहता है कि भारत सिंधु जल समझौते का पालन करे और पश्चिमी नदियों पर बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं में समझौते की शर्तों का पालन सुनिश्चित करे। पाकिस्तान ने भारत के ‘अबेयंस’ वाले फैसले का भी विरोध किया है।

India ने Court Ruling को क्यों खारिज किया?

भारत ने कहा है कि वह हेग स्थित Court of Arbitration को मान्यता नहीं देता और इस मामले में उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है। भारत के अनुसार अदालत का गठन सिंधु जल समझौते की व्यवस्था के खिलाफ हुआ है।

Indus Waters Dispute में Court का क्या फैसला था?

31 अगस्त 2026 को Court of Arbitration ने कहा कि सिंधु जल समझौता लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से ‘अबेयंस’ में नहीं रख सकता। अदालत ने रतले परियोजना को लेकर कुछ अंतरिम निर्माण प्रतिबंध भी लगाए।

Indus Waters Treaty में किन नदियों को शामिल किया गया है?

सिंधु जल समझौते में छह प्रमुख नदियां शामिल हैं। इनमें पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलुज तथा पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब हैं।

क्या India ने Indus Waters Treaty को Suspend किया है?

भारत ने अप्रैल 2025 में समझौते को ‘अबेयंस’ में रखने का फैसला किया था। भारत की मौजूदा स्थिति के अनुसार यह फैसला अभी भी लागू है। वहीं हेग की Court of Arbitration ने माना है कि भारत इस तरह एकतरफा तरीके से समझौते को निलंबित नहीं कर सकता। भारत इस फैसले और अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता।

Was this article useful?