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Monsoon Withdrawal शुरू, India Worst Rain Deficit 15% पर, 17 साल में सबसे कमजोर सीजन का खतरा

भारत में मानसून की वापसी शुरू हो गई है, लेकिन बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है। 19 सितंबर तक देश में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज हुई। दक्षिणी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर असर ज्यादा है, जबकि कमजोर मानसून ने खरीफ फसलों और कृषि गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ाया है।

Monsoon Withdrawal शुरू, India Worst Rain Deficit 15% पर, 17 साल में सबसे कमजोर सीजन का खतरा

देश में इस साल मानसून ने राहत कम और चिंता ज्यादा दी है। India Worst Rain Deficit की चर्चा इसलिए तेज हो गई है क्योंकि 19 सितंबर तक देश में मौसमी बारिश सामान्य से 15% कम रही। इसी बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से अपनी वापसी शुरू कर दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के अनुसार यह वापसी सामान्य तारीख 17 सितंबर के काफी करीब है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक करीब 43% भू-क्षेत्र अभी भी बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में है। मानसून ने जुलाई में मामूली अतिरिक्त बारिश दी थी, लेकिन जून, अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य से नीचे रही। ऐसे में सवाल सिर्फ मानसून की वापसी का नहीं, बल्कि खेती, जल उपलब्धता और आने वाले रबी मौसम पर इसके असर का भी है।

15% की कमी ने क्यों बढ़ाई चिंता?

19 सितंबर तक भारत में कुल मौसमी बारिश 695.6 मिमी रही, जो सामान्य से 15% कम है। करीब 43% देश का भू-क्षेत्र बारिश की कमी से प्रभावित है। दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम के कई राज्यों में कमी ज्यादा है, जिससे कृषि, मिट्टी की नमी और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। राज्यवार तस्वीर देखें तो मेघालय में 59%, आंध्र प्रदेश में 43%, अरुणाचल प्रदेश में 41% और बिहार में 36% तक बारिश की कमी दर्ज हुई है। इसके अलावा गोवा में 35%, कर्नाटक में 31%, केरल में 28%, असम में 26%, तमिलनाडु और हरियाणा में 22-22% तथा तेलंगाना में 21% कमी रही। दक्षिणी प्रायद्वीप में कम बारिश का असर खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में कई प्रमुख खरीफ फसलें मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती हैं। बारिश की कमी के कारण कई जगह बुवाई का क्षेत्र और फसल की उत्पादन क्षमता दोनों प्रभावित हुए हैं।

Monsoon Withdrawal 2026 राजस्थान से शुरू, आगे कहां पहुंचेगा?

आईएमडी ने 19 सितंबर को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस हट चुका है। वापसी की रेखा राजस्थान के रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला क्षेत्रों से होकर गुजर रही थी। मौसम विभाग ने कहा कि अगले तीन से चार दिनों में राजस्थान के और हिस्सों के साथ पंजाब तथा कच्छ-सौराष्ट्र के कुछ इलाकों से भी मानसून की वापसी की स्थिति बन सकती है।

सामान्य तौर पर मानसून की वापसी सितंबर के मध्य से शुरू होती है। IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी की घोषणा के लिए बारिश की गतिविधि में लगातार कमी, निचले वायुमंडल में एंटी-साइक्लोन की स्थापना और नमी में पर्याप्त गिरावट जैसे संकेत देखे जाते हैं। इस साल वापसी 17 सितंबर की सामान्य तारीख के मुकाबले करीब चार दिन बाद शुरू हुई। इसका मतलब यह है कि मानसून की वापसी में देरी बहुत असामान्य स्तर की नहीं रही, लेकिन पूरे मौसम में हुई बारिश की कमी इसे महत्वपूर्ण जरूर बनाती है।

El Nino बना India Rainfall Deficit की बड़ी वजह?

इस साल कमजोर मानसून के पीछे सबसे प्रमुख मौसम संबंधी कारकों में El Nino शामिल है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है और भारत में मानसूनी बारिश के पैटर्न पर असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय जलवायु संस्थानों के ताजा आकलनों के अनुसार 2026 का El Nino तेजी से मजबूत हुआ है। अमेरिकी मौसम विभाग के Climate Prediction Center ने सितंबर में इसे मजबूत होते हुए बताया और शरद तथा सर्दियों के दौरान बहुत मजबूत El Nino की 90% से अधिक संभावना जताई।

विश्व मौसम संगठन ने भी सितंबर में कहा कि El Nino आने वाले महीनों में बहुत मजबूत स्थिति तक पहुंच सकता है और इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बड़ा बदलाव हो सकता है। भारत में भी सरकार ने इससे पहले कमजोर मानसून और El Nino के संभावित असर को देखते हुए खरीफ तैयारी, जल संरक्षण और संवेदनशील जिलों के लिए आकस्मिक योजनाओं पर जोर दिया था।

खरीफ फसलों पर Rainfall Deficit India का कितना असर?

बारिश की कमी का सबसे सीधा असर खेती पर दिखाई दे रहा है। खरीफ मौसम में धान, दालें, तिलहन, कपास और दूसरी फसलों के लिए मानसूनी बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। सितंबर में बारिश की कमी ऐसे समय आई है जब कई फसलें विकास के महत्वपूर्ण चरण में हैं। रॉयटर्स के अनुसार 2026 में भारत के चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की गिरावट की संभावना जताई गई है। अनुमानित उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन से करीब 6.5% कम हो सकता है। कुछ प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी 42% तक पहुंची है, जबकि गर्मियों में बोए गए धान का क्षेत्रफल 11 सितंबर तक सालाना आधार पर करीब 4% कम था।

इसका असर केवल किसान की उपज तक सीमित नहीं रह सकता। उत्पादन घटने की स्थिति में स्थानीय कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ फसलों के लिए आयात की जरूरत भी बढ़ सकती है। हालांकि चावल के मामले में सरकारी भंडार फिलहाल मजबूत है। 1 सितंबर तक सरकारी चावल भंडार 5.96 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर था। मानसून की कमी का दूसरा असर आने वाले रबी मौसम पर पड़ सकता है। कम बारिश का मतलब कई क्षेत्रों में मिट्टी में कम नमी और जलाशयों में अपेक्षाकृत कम पानी हो सकता है, जिससे गेहूं, चना, सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

Source- WION
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क्या आगे बारिश से पूरी हो सकती है कमी?

मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। आईएमडी के अनुसार बंगाल की खाड़ी के उत्तर अंडमान सागर क्षेत्र में बना निम्न दबाव आगे बढ़ते हुए डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके प्रभाव से ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, सिक्किम और तटीय आंध्र प्रदेश में आने वाले दिनों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती यह है कि कुछ दिनों की तेज बारिश पूरे मौसमी घाटे को कितनी दूर तक कम कर पाएगी। 19 सितंबर तक 15% की संचयी कमी और करीब 43% क्षेत्र में बारिश की कमी को देखते हुए मानसून के आखिरी चरण की बारिश कुछ राहत दे सकती है, लेकिन पूरे मौसम का अंतर पूरी तरह खत्म होना अलग सवाल है।

17 साल बाद सबसे कमजोर Monsoon की ओर India?

2026 का मानसून अब 2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून बनने की दिशा में है। 2009 में देश में सामान्य से करीब 18% कम बारिश हुई थी। सितंबर 2026 के मध्य तक मौसमी कमी 15% थी, इसलिए अगर यह अंतर सीजन के अंत तक बना रहता है तो इस साल का मानसून लगभग 17 वर्षों में सबसे कमजोर माना जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि “सबसे कमजोर मानसून” और “देश में आधिकारिक सूखा” एक ही बात नहीं हैं। मौसमी बारिश में बड़ी कमी होने के बावजूद पूरे देश के लिए सूखा घोषित करना अलग मानकों और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए फिलहाल 2026 को 17 साल में सबसे कमजोर मानसून की ओर बढ़ता मौसम कहना अधिक सटीक है। वहीं इस साल जुलाई एकमात्र ऐसा महीना रहा जब देशभर में बारिश सामान्य से थोड़ी अधिक रही। जून में लगभग 35% की भारी कमी के बाद जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी, लेकिन अगस्त और सितंबर की कमजोर बारिश ने उस सुधार को काफी हद तक कमजोर कर दिया।

निष्कर्ष

India Worst Rain Deficit का मौजूदा परिदृश्य केवल मौसम की खबर नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध खेती, जल भंडारण, खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। 19 सितंबर तक देश में बारिश सामान्य से 15% कम थी और 43% भू-क्षेत्र बारिश की कमी से जूझ रहा था। मानसून की पश्चिमी राजस्थान से वापसी शुरू हो चुकी है, जबकि बंगाल की खाड़ी से बनने वाली मौसम प्रणाली कुछ राज्यों में बारिश ला सकती है। फिर भी इस सीजन की बड़ी चुनौती बनी हुई है कि कमजोर बारिश के कारण खरीफ फसलों और मिट्टी की नमी पर पड़ा असर कितना कम किया जा सकेगा। मजबूत होता El Niño इस पूरे परिदृश्य का एक अहम वैश्विक मौसम कारक है। हालांकि इसकी वजह से हुई बारिश की कमी को पूरी तरह एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि Monsoon Rain Deficit 2026 ने भारत के कृषि और जल संसाधनों के सामने इस साल एक गंभीर चुनौती जरूर खड़ी की है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

India में 2026 का rain deficit कितना है?

19 सितंबर 2026 तक भारत में संचयी मानसूनी बारिश सामान्य से 15% कम रही और कुल वर्षा 695.6 मिमी दर्ज हुई। लगभग 43% देश का भौगोलिक क्षेत्र बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में था।

Monsoon Rajasthan से withdrawal कब शुरू हुआ?

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 19 सितंबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापसी शुरू की। सामान्य तारीख 17 सितंबर मानी जाती है।

क्या 2026 में India का rainfall deficit 17 साल में सबसे ज्यादा है?

अभी अंतिम निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी। 19 सितंबर तक 15% की कमी थी और यदि यह कमी सीजन के अंत तक बनी रहती है, तो 2026 का मानसून 2009 के बाद सबसे कमजोर हो सकता है। 2009 में कमी करीब 18% थी।

इस साल मानसून कमजोर रहने की वजह क्या है?

मजबूत होता El Nino एक प्रमुख वैश्विक मौसम कारक है। इसके अलावा क्षेत्रीय समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां भी मानसून के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इसलिए पूरे Rain Deficit को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा।

Rain deficit का agriculture पर क्या असर हो सकता है?

कम बारिश से बुवाई, फसल की वृद्धि, मिट्टी की नमी और जलाशयों पर असर पड़ सकता है। रॉयटर्स के अनुसार 2026 में भारत के चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की गिरावट का अनुमान जताया गया है।

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