Delhi Voter List Notice: Advani से Jaishankar तक दिग्गजों को क्यों मिला नोटिस? 33 लाख वोटर्स पर EC की नजर, जानिए पूरा मामला
दिल्ली SIR में 33.13 लाख वोटर्स के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। एलके आडवाणी, एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़ और मनीष सिसोदिया भी सूची में हैं। दिल्ली CEO ने स्पष्ट किया कि नोटिस का मतलब नाम स्वतः हटना नहीं है।
दिल्ली की मतदाता सूची को लेकर चल रही Delhi Voter List Notice प्रक्रिया ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन चुनाव अधिकारियों का कहना है कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटना नहीं है।
Delhi SIR में 33 लाख लोगों को आखिर क्यों मिला नोटिस?

दिल्ली में चल रही Delhi SIR 2026 के तहत 97 लाख से अधिक मतदाताओं वाली ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की गई है। इनमें से करीब 33.13 लाख मतदाताओं के विवरण में विसंगतियां मिलने के बाद नोटिस जारी किए जा रहे हैं। 31.63 लाख से अधिक नोटिस अब तक दिए जा चुके हैं।अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को 2002 में हुए पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण की सूची से जोड़ा नहीं जा सका। कुछ मामलों में नाम, माता-पिता के नाम या अन्य विवरण में अंतर मिला है।मतदाताओं से इन विसंगतियों को स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा गया है।
Delhi SIR Voter Notice में Advani और Jaishankar के नाम क्यों आए?
Delhi SIR Voter Notice 2026 की सूची में कई बड़े नाम सामने आए हैं।पूर्व उपप्रधानमंत्री एलके आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका को नोटिस मिला है क्योंकि उनके नाम 2002 की मतदाता सूची से मैप नहीं हो सके। उनके बेटे जयंत का रिकॉर्ड मैपिंग प्रक्रिया में साफ पाया गया।विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर को भी नोटिस मिला है। दोनों को “unmapped with last SIR” श्रेणी में रखा गया है।पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी के नाम भी नोटिस पाने वालों की सूची में हैं। इसके अलावा पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों को भी नोटिस जारी हुआ है।विदेश सचिव विक्रम मिसरी, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी इस प्रक्रिया में सामने आए हैं।
Delhi Voter List Notice मिलने का क्या मतलब है?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि Delhi Voter List Notice मिलने का मतलब मतदाता का नाम स्वतः हटना नहीं है।सीईओ कार्यालय के अनुसार, सिस्टम से ऐसे नोटिस उन मतदाताओं को भेजे जा रहे हैं जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं, ताकि ECINET में डेटा को सही किया जा सके। किसी भी नाम को हटाने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।यानी नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता जवाब और जरूरी दस्तावेज देकर अपना रिकॉर्ड सत्यापित करा सकता है।
Delhi SIR 2026 में Voter Verification कैसे होगा?
Delhi Voter Verification की प्रक्रिया में मतदाता अपने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या बूथ लेवल अधिकारी के पास जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं।अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद सही पाए गए नामों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू का रिकॉर्ड नाम में अंतर के कारण चिह्नित हुआ था, लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी प्रविष्टि को अंतिम सूची के लिए वैध कर दिया गया।दिल्ली के सीईओ कार्यालय के अनुसार, SIR के दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी और नोटिस पाने वाले मतदाताओं को 29 अक्टूबर तक अपना जवाब और दस्तावेज जमा करने हैं।
Delhi SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
Delhi Electoral Roll Revision के दौरान बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने से राजनीतिक बहस भी तेज हुई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने अपने और अपनी पत्नी को नोटिस मिलने के बाद SIR को “special intensive deletion” बताया। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है।दूसरी ओर, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का कहना है कि नोटिस प्रक्रिया का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है और नोटिस को नाम हटाए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।इस बीच SIR से जुड़ी पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें 33 लाख से अधिक नोटिस पाने वालों के नाम और नोटिस के कारण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
निष्कर्ष
Delhi Voter List Notice की वजह से आडवाणी, एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़ और मनीष सिसोदिया जैसे प्रमुख नाम चर्चा में जरूर आए हैं, लेकिन चुनाव अधिकारियों के अनुसार नोटिस का अर्थ सीधे तौर पर नाम हटना नहीं है। Delhi SIR Voter Notice 2026 में अब दस्तावेजों के सत्यापन और मतदाताओं के जवाब के बाद अंतिम स्थिति तय होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Delhi SIR में 33 लाख वोटर्स को नोटिस क्यों मिला?
मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों या 2002 की पिछली SIR सूची से रिकॉर्ड मैप नहीं होने के कारण नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
LK Advani को Delhi Voter List Notice क्यों मिला?
उनके और परिवार के कुछ सदस्यों के नाम 2002 की SIR सूची से मैप नहीं हो सके, इसलिए नोटिस जारी किया गया।
Manish Sisodia को SIR नोटिस क्यों मिला?
सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों के रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रकार की विसंगतियां बताई गई हैं।
क्या नोटिस मिलने से वोटर लिस्ट से नाम कट जाएगा?
दिल्ली CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का मतलब स्वतः नाम हटना नहीं है। मतदाता को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज देने का अवसर मिलेगा।
Delhi SIR में दस्तावेज कब तक जमा करने हैं?
नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास 29 अक्टूबर तक जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा करने हैं।