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Fake Medicine Racket: बेंगलुरु की 3 फार्मेसी पर SIT की रेड, नकली दवाओं का नेटवर्क देख अधिकारी भी सतर्क!

कर्नाटक SIT ने नकली दवाओं के कथित नेटवर्क की जांच में बेंगलुरु की तीन फार्मेसी पर छापेमारी की। संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं और अस्पतालों तक आपूर्ति की आशंका की जांच शुरू हुई है।

Fake Medicine Racket: बेंगलुरु की 3 फार्मेसी पर SIT की रेड, नकली दवाओं का नेटवर्क देख अधिकारी भी सतर्क!

कर्नाटक में Fake Medicine Racket की जांच तेज हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बेंगलुरु की तीन फार्मेसी पर छापेमारी कर संदिग्ध नकली दवाओं का स्टॉक जब्त किया है। जांच का दायरा अब मुख्य आरोपियों से आगे बढ़कर दवाओं की सप्लाई चेन, खुदरा दुकानों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच गया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कहीं इन दवाओं की आपूर्ति अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम तक तो नहीं हुई थी।

Fake Medicine Racket: बेंगलुरु की किन 3 फार्मेसी पर हुई छापेमारी?

SIT अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान बेंगलुरु की तीन फार्मेसी को निशाना बनाया गया। इनमें शामिल हैं:

RR Pharma: राजराजेश्वरी नगर

2365 LLP Pharma: चामराजपेट

Patel Pharma: थलाघट्टापुरा

अधिकारियों ने बताया कि ये छापेमारी मुख्य आरोपी प्रशांत और वितरक वीरेश जैन समेत संदिग्धों से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।तलाशी के दौरान प्रतिष्ठानों में रखी संदिग्ध नकली दवाओं की खेप बरामद कर जब्त की गई। फार्मेसी मालिकों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कारोबार, दवाओं की खरीद के स्रोत और मुख्य आरोपियों के साथ वित्तीय लेनदेन को लेकर पूछताछ की जा रही है।

सस्ती दवाओं को ब्रांडेड बताकर बेचने का आरोप, कैसे चलता था नेटवर्क?

जांच में सामने आए शुरुआती संकेतों के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में कम कीमत वाली जेनेरिक या घटिया गुणवत्ता की दवाएं खरीदकर उन्हें बड़े दवा ब्रांडों के असली उत्पाद के रूप में पेश करने की आशंका है। आरोप है कि दवाओं की दोबारा पैकेजिंग और लेबलिंग करके उन्हें बाजार में बेचा जाता था, ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके।हालांकि, जांच एजेंसी को अभी यह पता लगाना है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था, दवाएं कहां से खरीदी गईं और किन माध्यमों से खुदरा बाजार तक पहुंचाई गईं। किसी दवा के नकली होने और किसी व्यक्ति की संलिप्तता की अंतिम पुष्टि जांच तथा संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।SIT अब दवाओं की सप्लाई चेन, परिवहन के माध्यमों, भंडारण केंद्रों और वितरण की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित फार्मेसी ने कथित तौर पर ये दवाएं कब से खरीदनी शुरू की थीं।

अस्पतालों और नर्सिंग होम तक पहुंची थीं नकली दवाएं?

इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ा है। SIT यह जांच कर रही है कि संदिग्ध दवाएं और ICU में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन किन अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम तक पहुंचे हो सकते हैं।जांच एजेंसी ने संदिग्धों के माध्यम से दवाएं खरीदने वाले कई स्वास्थ्य संस्थानों को नोटिस भी जारी किए हैं। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया, निर्धारित प्रोटोकॉल के संभावित उल्लंघन और प्रबंधन की भूमिका की जांच करना है।इसके साथ ही उन मरीजों के रिकॉर्ड की पड़ताल भी की जा रही है, जिन्हें प्रभावित दवाएं दी गई हो सकती हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी मरीज को इन दवाओं से नुकसान हुआ है या किसी अस्पताल ने जानबूझकर इन्हें खरीदा था।

अगस्त की छापेमारी के बाद कैसे बढ़ी जांच?

यह कार्रवाई 18 अगस्त को बिदादी में हुई छापेमारी के बाद शुरू हुई व्यापक जांच का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अब कथित बहु-राज्यीय नेटवर्क और उससे जुड़े वितरण तंत्र तक पहुंचने पर केंद्रित है।SIT यह पता लगाने में जुटी है कि नकली दवाओं की खरीद, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री में किन लोगों की भूमिका थी। जांच का उद्देश्य पूरे कथित नेटवर्क को उजागर करना और कानून के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

निष्कर्ष

Fake Medicine Racket की जांच अब बेंगलुरु की तीन फार्मेसी से आगे बढ़कर संभावित सप्लायर, वितरकों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच गई है। SIT की अगली कार्रवाई से पता चल सकेगा कि कथित नेटवर्क कितना व्यापक था और संदिग्ध दवाएं किन जगहों तक पहुंचीं। फिलहाल जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Fake Medicine Racket का मामला कहां सामने आया है?

यह मामला कर्नाटक में सामने आया है। SIT ने बेंगलुरु की तीन फार्मेसी पर छापेमारी की है।

किन फार्मेसी पर छापेमारी हुई?

RR Pharma (राजराजेश्वरी नगर), 2365 LLP Pharma (चामराजपेट) और Patel Pharma (थलाघट्टापुरा) में तलाशी ली गई।

जांच में मुख्य आरोपियों के तौर पर किनके नाम सामने आए हैं?

प्रशांत और वितरक वीरेश जैन से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर छापेमारी की गई। मामले में उनकी भूमिका जांच के अधीन है।

क्या नकली दवाएं अस्पतालों तक पहुंची थीं?

SIT इसकी जांच कर रही है। संदिग्धों से दवाएं खरीदने वाले कुछ स्वास्थ्य संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन सभी आपूर्ति और संभावित प्रभाव की पुष्टि होना बाकी है।

नकली दवाओं के नेटवर्क की जांच का मुख्य उद्देश्य क्या है?

दवाओं के स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला, वितरण और बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान करना तथा कानून के तहत कार्रवाई करना।

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