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Russian Gold Hong Kong: रूस का सोना पहुंच रहा है हांगकांग, क्या बदल रही है ग्लोबल गोल्ड मार्केट की तस्वीर?

पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूसी सोने का कारोबार एशिया की ओर बढ़ा है। जनवरी-जुलाई 2026 में हांगकांग ने 112.7 टन रूसी सोना आयात किया, जो 2025 की पूरी मात्रा से अधिक है। हांगकांग 2027 तक नया क्लियरिंग-सेटलमेंट सिस्टम शुरू कर अंतरराष्ट्रीय गोल्ड हब बनने की तैयारी कर रहा है।

Russian Gold Hong Kong: रूस का सोना पहुंच रहा है हांगकांग, क्या बदल रही है ग्लोबल गोल्ड मार्केट की तस्वीर?

Russian Gold Hong Kong: पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस का सोना जिस तरह एशियाई बाजारों की ओर मुड़ा है, उसमें हांगकांग की भूमिका तेजी से बढ़ी है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच हांगकांग ने 112.7 टन रूसी मूल का सोना आयात किया। यह मात्रा पूरे 2025 में आए 92.1 टन से भी ज्यादा है। 2021 में यह आंकड़ा सिर्फ 3.3 टन था। इसी बीच हांगकांग अपने गोल्ड मार्केट के लिए नया क्लियरिंग और सेटलमेंट सिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय सोने के कारोबार में अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।हांगकांग के वित्तीय सेवा एवं ट्रेजरी सचिव क्रिस्टोफर हुई ने इटली के सोरेंटो में हुई ग्लोबल प्रेशियस मेटल्स कॉन्फ्रेंस 2026 में बताया कि हांगकांग का गोल्ड मार्केट अब योजना बनाने के चरण से निकलकर लागू करने के चरण में पहुंच चुका है। जुलाई में नए गोल्ड सेंट्रल क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सिस्टम का ट्रायल शुरू हो चुका है और इसे 2027 की पहली तिमाही में औपचारिक रूप से शुरू करने का लक्ष्य है।

112.7 टन रूसी सोना हांगकांग पहुंचा, 2025 का रिकॉर्ड भी टूटा

रूसी सोने की हांगकांग में बढ़ती आमद इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है। बुलियनवॉल्ट के हांगकांग के आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान हांगकांग में 112.7 टन रूसी मूल का सोना आया। 2025 में पूरे साल यह मात्रा 92.1 टन थी, जबकि 2021 में रूस से सिर्फ 3.3 टन सोना हांगकांग आया था। 2026 के पहले सात महीनों में रूसी सोने की हिस्सेदारी हांगकांग के गैर-मौद्रिक सोने के आयात में करीब 14.7% रही, जो 2021 में सिर्फ 0.6% थी।इस बदलाव की बड़ी वजह रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंध हैं। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी सोने के लिए लंदन जैसे पारंपरिक पश्चिमी बाजारों का रास्ता काफी हद तक बंद हो गया। एलबीएमए ने मार्च 2022 में रूस की छह रिफाइनरियों को अपनी गुड डिलीवरी लिस्ट से निलंबित कर दिया था। इसके बाद रूस ने अपने सोने के कारोबार को एशिया की ओर मोड़ना शुरू किया।
हांगकांग में रूस से आने वाला ज्यादातर सोना वहीं अंतिम रूप से इस्तेमाल नहीं होता। रिपोर्टों के मुताबिक, इसका बड़ा हिस्सा आगे मुख्यभूमि चीन जाता है। चीन ने रूसी सोने पर पश्चिमी देशों जैसे प्रतिबंध नहीं लगाए हैं, इसलिए हांगकांग रूस और चीन के बीच सोने के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण रास्ता बन गया है। 2022 से अब तक हांगकांग की संस्थाओं द्वारा खरीदे गए रूसी सोने की कुल कीमत करीब 35 अरब डॉलर बताई गई है।

हांगकांग अब सोने के कारोबार की पूरी व्यवस्था बदल रहा

रूसी सोने की बढ़ती आमद हांगकांग के गोल्ड मार्केट में हो रहे व्यापक बदलाव का सिर्फ एक हिस्सा है। हांगकांग सरकार ने जुलाई 2026 में अपने गोल्ड सेंट्रल क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सिस्टम का ट्रायल शुरू किया। यह सिस्टम सोने के द्विपक्षीय और ओवर-द-काउंटर कारोबार के क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए बनाया गया है। ट्रायल के दौरान पहली गोल्ड डिपॉजिट और शुरुआती ट्रेडिंग-सेटलमेंट गतिविधियां भी पूरी हो चुकी हैं।शुरुआत में 11 बैंक इसके प्रोविजनल डायरेक्ट पार्टिसिपेंट बनाए गए थे। अब दूसरे बैंक और वित्तीय संस्थान भी इसमें शामिल होने में रुचि दिखा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सिस्टम को 2027 की पहली तिमाही में आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाए। इससे हांगकांग में सोने की खरीद-बिक्री के बाद क्लियरिंग और सेटलमेंट की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी।
इस सिस्टम को हांगकांग के आरटीजीएस यानी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम से जोड़ने का काम भी अंतिम चरण में है। इसका उद्देश्य डिलीवरी वर्सेस पेमेंट व्यवस्था बनाना है। इसमें सोने की डिलीवरी और भुगतान को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है, जिससे किसी एक पक्ष के भुगतान या डिलीवरी न करने का जोखिम कम होता है। हांगकांग सरकार का कहना है कि इससे सेटलमेंट रिस्क और ऑपरेशनल दिक्कतें कम होंगी।

शंघाई से जुड़ रहा हांगकांग का गोल्ड मार्केट

हांगकांग सिर्फ अपनी क्लियरिंग व्यवस्था तैयार नहीं कर रहा, बल्कि चीन के मुख्यभूमि गोल्ड मार्केट से भी सीधा कनेक्शन बढ़ा रहा है। जनवरी 2026 में हांगकांग सरकार और शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के बीच सहयोग समझौता हुआ था। इसके बाद जुलाई में डिलीवरी कनेक्ट की शुरुआती व्यवस्था शुरू की गई।इसका मकसद हांगकांग और मुख्यभूमि चीन के बीच भौतिक सोने की डिलीवरी के रास्ते को मजबूत करना है। यानी हांगकांग को सिर्फ ट्रेडिंग का केंद्र नहीं, बल्कि गोल्ड स्टोरेज, डिलीवरी और सेटलमेंट से जुड़ा पूरा बाजार बनाने की कोशिश हो रही है।
सरकार निजी क्षेत्र को गोल्ड स्टोरेज और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए टैक्स इंसेंटिव पर भी विचार किया जा रहा है। फिलहाल हांगकांग में सोने के आयात और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों पर टैक्स छूट पहले से मौजूद है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने पर और कंपनियां इस बाजार में निवेश कर सकती हैं।

एलबीएमए के साथ जुड़ाव से बढ़ेगी विश्वसनीयता

हांगकांग की योजना का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन यानी एलबीएमए के साथ सहयोग है। क्रिस्टोफर हुई ने बताया कि एलबीएमए अगले साल अप्रैल में हांगकांग सरकार और हांगकांग प्रेशियस मेटल्स सेंट्रल क्लियरिंग कंपनी के साथ मिलकर एशिया फोरम आयोजित करेगा।एलबीएमए और हांगकांग सरकार गोल्ड की गुड डिलीवरी स्टैंडर्ड व्यवस्था पर भी सहयोग की संभावना तलाश रहे हैं। अगर यह सहयोग आगे बढ़ता है तो हांगकांग के गोल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों को शामिल करने में मदद मिल सकती है। इससे वैश्विक निवेशकों और बड़ी वित्तीय संस्थाओं के लिए हांगकांग के गोल्ड मार्केट की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
क्रिस्टोफर हुई ने एलबीएमए के चेयरमैन पीटर ज़ोलनर से भी मुलाकात की। दोनों के बीच वैश्विक प्रेशियस मेटल्स मार्केट और हांगकांग-लंदन गोल्ड मार्केट के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई।

लंदन और न्यूयॉर्क की पकड़ को चुनौती देने की कोशिश

दुनिया के भौतिक सोने के कारोबार में हांगकांग पहले से महत्वपूर्ण केंद्र है, लेकिन गोल्ड की कीमत तय करने और अंतरराष्ट्रीय सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लंदन और न्यूयॉर्क की भूमिका अभी ज्यादा मजबूत है। हांगकांग का नया इंफ्रास्ट्रक्चर इसी स्थिति को बदलने की कोशिश का हिस्सा है।रूसी सोने की बढ़ती आमद ने भी हांगकांग की भूमिका को नया महत्व दिया है। पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूस के सोने का रास्ता बंद करने के बजाय उसके व्यापार को काफी हद तक एशिया की ओर मोड़ दिया है। हांगकांग इस बदलाव में एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट और ट्रेडिंग हब बन रहा है।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि हांगकांग का नया गोल्ड क्लियरिंग सिस्टम केवल रूसी सोने के लिए बनाया गया है। सरकार का घोषित लक्ष्य इससे कहीं व्यापक है - अंतरराष्ट्रीय और मुख्यभूमि चीन के गोल्ड मार्केट को जोड़ना, क्लियरिंग और फिजिकल डिलीवरी को मजबूत करना, स्टोरेज और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाना और हांगकांग को एशिया के प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग एवं सेटलमेंट केंद्रों में शामिल करना।
अगर यह व्यवस्था तय समय पर लागू होती है और एलबीएमए के साथ मानकों पर सहयोग आगे बढ़ता है, तो हांगकांग की भूमिका सिर्फ रूसी सोने के लिए वैकल्पिक रास्ते तक सीमित नहीं रहेगी। वह एशिया और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बीच सोने के कारोबार, डिलीवरी और सेटलमेंट का बड़ा केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Russian Gold Hong Kong क्यों पहुंच रहा है?

रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद उसके सोने के लिए लंदन जैसे पारंपरिक पश्चिमी बाजारों तक पहुंच मुश्किल हुई। इसके बाद रूस का सोना एशियाई बाजारों की ओर ज्यादा मुड़ा। हांगकांग इस कारोबार में एक महत्वपूर्ण रास्ता बन गया है और वहां से काफी सोना आगे मुख्यभूमि चीन जाता है।

Western Sanctions ने Russian Gold Trade को कैसे बदला है?

2022 के बाद रूसी सोने की पश्चिमी बाजारों तक पहुंच सीमित हो गई। एलबीएमए ने रूस की छह रिफाइनरियों को गुड डिलीवरी लिस्ट से हटा दिया। इसके बाद रूस ने अपने सोने के निर्यात को चीन और दूसरे एशियाई बाजारों की ओर मोड़ा।

Hong Kong में Russian Gold की Supply क्यों बढ़ रही है?

हांगकांग पर रूस के सोने को लेकर पश्चिमी देशों जैसी व्यापक पाबंदियां नहीं हैं और वह चीन के करीब एक प्रमुख वित्तीय व व्यापारिक केंद्र है। 2026 के पहले सात महीनों में हांगकांग में 112.7 टन रूसी मूल का सोना आया, जो पूरे 2025 के 92.1 टन से ज्यादा है।

Russian Gold का Global Bullion Market पर क्या असर पड़ रहा है?

रूसी सोने का कारोबार पश्चिमी बाजारों से हटकर एशिया की ओर जाने से ग्लोबल बुलियन ट्रेड का भूगोल बदल रहा है। इससे हांगकांग और चीन जैसे एशियाई केंद्रों की भूमिका बढ़ रही है, जबकि लंदन जैसे पारंपरिक केंद्रों के बाहर सोने के कारोबार और सेटलमेंट के नए रास्ते विकसित हो रहे हैं।

क्या Western Sanctions के बावजूद Russia Gold बेच पा रहा है?

हां, रूस का सोना पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार से बाहर नहीं हुआ है। प्रतिबंधों के बाद इसके व्यापार के रास्ते बदले हैं और एशिया में इसकी बिक्री बढ़ी है। हांगकांग में 2026 के पहले सात महीनों में रिकॉर्ड रूसी सोने का आयात इसका एक बड़ा उदाहरण है। हालांकि, किसी खास लेनदेन को प्रतिबंधों से बचने वाला बताने के लिए अलग-अलग कंपनियों और लेनदेन की कानूनी स्थिति देखना जरूरी है।

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