UPI Transaction Charge Rule पर टल सकती है नई व्यवस्था, Rs 2,000 से ज्यादा के Payments पर MDR को लेकर व्यापारियों की मांग
UPI Transaction Charge Rule को लेकर व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से नई व्यवस्था लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 करने की मांग की है। प्रस्तावित MDR चुनिंदा Rs 2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों के लिए UPI के नए नियम चर्चा का विषय बन गए हैं। Rs 2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के प्रस्ताव के बीच व्यापारी संगठनों ने सरकार से इसकी लागू होने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहारों के सीजन में नई व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारियों को नियम समझने और तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। अब सवाल यह है कि प्रस्तावित UPI Transaction Charge Rule में क्या बदलाव हो सकते हैं और इसका दुकानदारों व ग्राहकों पर कितना असर पड़ेगा?
UPI Transaction Charge Rule पर क्यों उठी तारीख बढ़ाने की मांग?
भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। UPI Transaction Charge Rule के तहत चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लगाने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारी संगठनों ने सरकार से और समय देने की मांग की है। संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपकर इसके लागू होने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 करने का अनुरोध किया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापारी संगठनों का कहना है कि कारोबारियों के बीच प्रस्तावित UPI Charges को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी है। ऐसे में त्योहारों के मौसम से ठीक पहले नई व्यवस्था लागू होने से व्यापारियों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, तारीख बढ़ाने की मांग का मतलब यह नहीं है कि सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। फिलहाल 1 जनवरी 2027 को नई व्यवस्था लागू होने की तारीख के रूप में व्यापारी संगठनों ने प्रस्तावित किया है।
Rs 2,000 से ज्यादा के Payment पर कितना लगेगा MDR?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI Transactions पर Rs 2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, सभी UPI Payments पर यह शुल्क नहीं लगेगा। लागू होने वाली दर ट्रांजैक्शन की श्रेणी पर निर्भर करेगी।प्रस्तावित शुल्क को उदाहरण से समझें:
- Rs 3,000 का ट्रांजैक्शन: 0.4% MDR के हिसाब से Rs 12 शुल्क।
- Rs 50,000 का ट्रांजैक्शन: 0.4% MDR के हिसाब से Rs 200 शुल्क।
- Rs 75,000 या उससे अधिक का ट्रांजैक्शन: अधिकतम Rs 300 MDR।
यह शुल्क चुनिंदा श्रेणियों में आने वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होने का प्रस्ताव है। इसलिए केवल ट्रांजैक्शन की राशि Rs 2,000 से अधिक होने के आधार पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि हर दुकानदार या हर UPI Payment पर MDR लगेगा।
व्यापारी संगठन क्यों चाहते हैं ज्यादा समय?
व्यापारी संगठनों की मुख्य चिंता यह है कि कारोबारियों को नई UPI Payment Charges व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयार होने का पर्याप्त समय नहीं मिला है। त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और डिजिटल पेमेंट की संख्या आम तौर पर बढ़ जाती है। ऐसे समय पर नई फीस व्यवस्था लागू होने से दुकानदारों को अपनी भुगतान प्रक्रिया, लागत और ग्राहकों के साथ संवाद को लेकर अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ सकती है। इसी वजह से व्यापारी संगठनों ने सरकार से 15 अक्टूबर की प्रस्तावित तारीख को आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने देशभर में जागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई है, ताकि व्यापारी समझ सकें कि MDR किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसकी गणना कैसे की जाएगी।
क्या सभी UPI Payments पर लगेगा Charge?
नहीं। प्रस्तावित MDR Framework सभी UPI Payments पर लागू नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 95% से अधिक UPI P2M Transactions इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहने की उम्मीद है। छोटे व्यापारियों के लिए P2PM मॉडल के तहत जीरो MDR जारी रहने की बात भी कही गई है। इसका अर्थ है कि सामान्य ग्राहकों के बीच होने वाले Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर और चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। व्यापारियों और ग्राहकों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि UPI Transaction Charge Rule का प्रस्ताव मुख्य रूप से कुछ निर्धारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर केंद्रित है।

Railway, Telecom और Insurance Payments पर क्या होगा नियम?
प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ खास क्षेत्रों के लिए अलग MDR दरें रखी गई हैं। इनमें रेलवे भुगतान, टेलीकॉम सेवाएं, बीमा और ईंधन से जुड़े चुनिंदा ट्रांजैक्शन शामिल हैं।
- Railway, Telecom, Insurance और Fuel: Rs 2,000 से अधिक के संबंधित UPI Transactions पर Rs 5 का फ्लैट MDR प्रस्तावित है।
- Capital Market Transactions: म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.02% MDR प्रस्तावित है, जिसकी अधिकतम सीमा Rs 300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
- छोटे व्यापारी: P2PM मॉडल के तहत जीरो MDR की व्यवस्था जारी रहने की बात कही गई है।
इन दरों को प्रस्तावित फ्रेमवर्क के संदर्भ में समझना चाहिए। वास्तविक लागू होने की तारीख और शर्तों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दिशानिर्देशों से करना जरूरी होगा।
क्या UPI Payment करने वाले ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त पैसा?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, MDR व्यापारियों पर लागू होने वाला शुल्क है, न कि ग्राहकों के लिए UPI इस्तेमाल करने का सामान्य चार्ज। UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की कोई मासिक सीमा या कोटा तय करने का प्रस्ताव नहीं बताया गया है। बैंकों को यह भी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत सीधे ग्राहकों पर न डालें। इसका मतलब है कि PhonePe, Google Pay या दूसरे UPI Apps से भुगतान करने वाले ग्राहकों को केवल इस प्रस्ताव के कारण हर भुगतान पर अलग फीस देनी होगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता। हालांकि, ग्राहकों को किसी भी संभावित बदलाव के लिए आधिकारिक दिशानिर्देशों पर नजर रखनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि MDR का दायरा चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित है।
MDR से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कहां होगा?
प्रस्तावित फ्रेमवर्क में कुल MDR कलेक्शन का 5% हिस्सा छोटे व्यापारियों के बीच UPI Acceptance को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए एक विशेष फंड में आवंटित करने की बात कही गई है। MDR से मिलने वाली राशि को UPI Ecosystem के अलग-अलग प्रतिभागियों के बीच साझा किए जाने का भी प्रस्ताव है। इससे UPI के विस्तार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल भुगतान से जुड़ी नई तकनीकों को समर्थन देने की उम्मीद है। प्रस्तावित दरें आम तौर पर कार्ड और डिजिटल वॉलेट पर लागू होने वाले शुल्कों से कम रहने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, व्यापारियों पर वास्तविक लागत का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उनका ट्रांजैक्शन किस श्रेणी में आता है और संबंधित नियम किस तरह लागू होते हैं।
निष्कर्ष
UPI Transaction Charge Rule को लेकर व्यापारी संगठनों की मांग ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े नए शुल्कों पर बहस तेज कर दी है। संगठन चाहते हैं कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था लागू करने से पहले कारोबारियों को पर्याप्त समय और स्पष्ट जानकारी मिले। Rs 2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR और कुछ क्षेत्रों में अलग दरों का प्रस्ताव है, लेकिन सभी UPI Payments पर शुल्क नहीं लगेगा। फिलहाल 1 जनवरी 2027 नई तारीख के रूप में व्यापारी संगठनों की मांग है, सरकार की मंजूरी की पुष्टि नहीं। इसलिए कारोबारियों और ग्राहकों को अंतिम नियमों और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना चाहिए।
FAQ (Frequently Asked Questions):
UPI Transaction Charge Rule को टालने की मांग क्यों की जा रही है?
व्यापारी संगठनों का कहना है कि नई MDR व्यवस्था को लेकर कारोबारियों के बीच स्पष्टता की कमी है। इसलिए उन्होंने सरकार से इसे लागू करने से पहले ज्यादा समय देने की मांग की है।
क्या UPI Transaction Charges की नई तारीख 1 जनवरी 2027 होगी?
व्यापारी संगठनों ने 15 अक्टूबर की प्रस्तावित तारीख को बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 करने की मांग की है। इसे अभी सरकार द्वारा मंजूर नई तारीख नहीं माना जाना चाहिए।
क्या UPI Payments ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेंगे?
प्रस्तावित MDR व्यापारियों पर लागू होने वाला शुल्क है। ग्राहकों के लिए UPI इस्तेमाल करने की कोई नई सामान्य फीस या मासिक ट्रांजैक्शन सीमा प्रस्तावित नहीं बताई गई है।
Rs 2,000 से ज्यादा के UPI Transactions पर कितना MDR लगेगा?
चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR प्रस्तावित है। Rs 75,000 या उससे अधिक के पात्र ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा Rs 300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
क्या PhonePe और Google Pay पर UPI Payment करने के लिए Charge देना होगा?
सिर्फ PhonePe या Google Pay से भुगतान करने के कारण ग्राहकों पर यह MDR अपने आप लागू नहीं होता। प्रस्तावित शुल्क चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ा है और ग्राहकों पर इसे सीधे डालने से रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
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