West Bengal Name Change : पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी, आखिर क्या है सरकार का प्लान?
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने की चर्चा फिर शुरू हो गई है। बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने जल्द विधानसभा में बिल लाने की बात कही है। हालांकि नाम बदलने के लिए विधानसभा के बाद संसद की संवैधानिक प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
West Bengal Name Change : पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा करने की तैयारी फिर चर्चा में है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने से जुड़ा विधेयक ला सकती है। उन्होंने यह बात वाराणसी में प्रस्तावित पश्चिम बंगा भवन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही। भट्टाचार्य के मुताबिक, नाम ‘पश्चिम बंगा’ रखने का मकसद राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ना है। हालांकि अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है और पश्चिम बंगाल का आधिकारिक नाम बदला नहीं है।

20 साल से ज्यादा पुरानी है नाम बदलने की कोशिश
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1999 में हुई थी, जब ज्योति बसु के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार ने विधानसभा में राज्य का नाम पश्चिम बंगा करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद ‘बांग्ला’ नाम को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका।2011 में ममता बनर्जी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा। उस समय राज्य सरकार ने पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा था। अगस्त 2011 में सर्वदलीय बैठक में भी इस नाम पर सहमति बनी थी। सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में ‘West Bengal’ नाम की वजह से राष्ट्रीय बैठकों में राज्य का नाम काफी नीचे आता है और प्रतिनिधियों को बोलने के लिए अक्सर देर तक इंतजार करना पड़ता है। इसे प्रशासनिक नुकसान से जोड़कर भी देखा गया था। हालांकि केंद्र से मंजूरी नहीं मिली।
इसके बाद 2016 में ममता बनर्जी सरकार ने तीन अलग-अलग नामों का प्रस्ताव दिया था। बंगाली में बांग्ला, अंग्रेजी में बंगाल और हिंदी में बंगाल नाम रखने की बात सामने आई थी। बाद में 2018 में विधानसभा ने एक ही नाम बांग्ला रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका।
अब फिर ‘पश्चिम बंगा’ नाम पर जोर
समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस बार राज्य का नाम पश्चिम बंगा रखने का फैसला इतिहास से जोड़कर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में बिल ला सकती है और संभव है कि इसे मौजूदा विधानसभा सत्र में ही पेश किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि अब ‘बांग्ला’ या ‘West Bengal’ जैसे नामों के बजाय ‘पश्चिम बंगा’ नाम इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि विधानसभा में बिल आने या प्रस्ताव पारित होने से नाम तुरंत आधिकारिक नहीं बदल जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत किसी राज्य के नाम में बदलाव की प्रक्रिया संसद से जुड़ी है। राज्य विधानसभा से राय लेने के बाद संसद में कानून की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार ऐसे कानून के जरिए पहली अनुसूची में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन
नाम बदलने की चर्चा के साथ वाराणसी में पश्चिम बंगा भवन और सांस्कृतिक केंद्र बनाने की योजना भी सामने आई है। भट्टाचार्य के मुताबिक राज्य के संस्कृति और पर्यटन विभाग, केंद्र सरकार और कूच बिहार के राजपरिवार के वंशज इस योजना से जुड़े हैं।प्रस्तावित भवन का इस्तेमाल सिर्फ ठहरने की जगह के तौर पर नहीं होगा। इसे बंगाल की साहित्य, संस्कृति और विरासत को सामने रखने वाले सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। साथ ही पश्चिम बंगाल से वाराणसी आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए उचित दर पर रहने की सुविधा देने की बात कही गई है।
भट्टाचार्य ने कहा कि वाराणसी और बंगाल के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध रहे हैं। शहर में बड़ी संख्या में बंगाली परिवार रहते हैं और कई परिवारों का यहां कई पीढ़ियों से संबंध है। बंगाली टोला इस पुराने जुड़ाव का एक उदाहरण है।
कूच बिहार के राजपरिवार से जुड़ा है पुराना इतिहास
भट्टाचार्य ने वाराणसी में कूच बिहार के राजपरिवार से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कूच बिहार के राजपरिवार ने वहां काली मंदिर से जुड़ी विरासत को विकसित करने में भूमिका निभाई थी।उन्होंने यह भी कहा कि जयपुर की पूर्व महारानी और कूच बिहार के राजपरिवार से जुड़ी गायत्री देवी ने पुराने ढांचे को बचाने की कोशिश में हिस्सा लिया था। उनके मुताबिक, लेफ्ट फ्रंट सरकार के समय इस ढांचे के जीर्णोद्धार की कोशिश हुई थी और गायत्री देवी ने इसके लिए ₹5 करोड़ देने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। 2022 में टीएमसी सरकार की ओर से भी ऐसी कोशिश हुई, लेकिन वह भी आगे नहीं बढ़ पाई।
हालांकि वाराणसी के इस ऐतिहासिक स्थल की तारीख को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर मिलता है। इसलिए इस हिस्से में भट्टाचार्य के बताए विवरण को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। हाल की रिपोर्टों में कूच बिहार राजपरिवार से जुड़े काली मंदिर की नींव और निर्माण की तारीख अलग-अलग बताई गई है।
‘पश्चिम बंगा’ नाम के पीछे बंगाली पहचान का तर्क
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की पुरानी कोशिशों के पीछे एक प्रमुख तर्क यह रहा है कि राज्य के नाम में उसकी भाषा, संस्कृति और बंगाली पहचान दिखाई देनी चाहिए। 2011 में ‘पश्चिम बंगा’ और 2016-18 में ‘बांग्ला’ को लेकर हुई कोशिशों में भी यही तर्क सामने आया था।2018 के ‘बांग्ला’ प्रस्ताव पर केंद्र की ओर से अलग-अलग आपत्तियां सामने आई थीं। गृह मंत्रालय ने संसद में कहा था कि राज्य का नाम बदलने के लिए संवैधानिक स्तर पर प्रक्रिया जरूरी है। उस समय ‘बांग्ला’ नाम को लेकर यह चिंता भी सामने आई थी कि यह पड़ोसी देश बांग्लादेश के नाम से मिलता-जुलता है।
अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम की नई चर्चा के बाद यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार वास्तव में विधानसभा में बिल कब पेश करती है और केंद्र व संसद में इस प्रस्ताव पर क्या रुख रहता है। फिलहाल पश्चिम बंगाल का आधिकारिक नाम West Bengal ही है और ‘पश्चिम बंगा’ को नया आधिकारिक नाम मानना अभी जल्दबाजी होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
West Bengal का Name Change करके Paschim Banga क्यों किया जा रहा है?
समिक भट्टाचार्य के मुताबिक ‘पश्चिम बंगा’ नाम राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ता है। हालांकि यह अभी प्रस्तावित नाम है, आधिकारिक नाम नहीं।
Paschim Banga Bill क्या है?
यह प्रस्तावित विधेयक पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने से जुड़ा है। समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य सरकार इसे जल्द विधानसभा में ला सकती है।
West Bengal Name Change Bill कब पेश हो सकता है?
समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि बिल जल्द विधानसभा में आ सकता है और संभव है कि इसे मौजूदा सत्र में ही पेश किया जाए। अभी इसकी आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है।
क्या West Bengal का नाम officially बदल जाएगा?
अभी नहीं। विधानसभा में बिल पेश होना केवल प्रक्रिया का एक चरण होगा। नाम बदलने के लिए आगे संसद की प्रक्रिया और जरूरी मंजूरी पूरी करनी होगी।
Paschim Banga नाम का क्या मतलब है?
‘पश्चिम बंगा’ का अर्थ पश्चिमी बंगाल है। यह नाम बंगाल के पश्चिमी हिस्से के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक पहचान से जुड़ा है।