Rahul Gandhi Vote Theft Claim: राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के दावे पर सवाल, ‘वोट चोरी’ पर क्या बोलीं राष्ट्रपति?
राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ आरोपों पर सबूत मांगे। सरकारी सूत्रों ने इसे गलत बताते हुए कहा कि आरोप स्वीकार नहीं किए गए। INDIA ब्लॉक ने चुनाव आयुक्त को हटाने और एसआईआर रोकने सहित कई मांगें रखीं।
Rahul Gandhi Vote Theft Claim: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। राहुल ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज नहीं किया और उनसे सबूत मांगे। हालांकि, 10 अक्टूबर को सरकारी सूत्रों ने इस दावे को गलत बताया। इससे पहले 9 अक्टूबर को विपक्षी INDIA ब्लॉक के 10 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की थी।

राहुल बोले- राष्ट्रपति ने आरोपों को खारिज नहीं किया
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति विपक्ष के आरोपों को खारिज करेंगी, लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। राहुल ने कहा कि वह इस बात से हैरान थे कि राष्ट्रपति ने आरोपों पर सबूत मांगे।राहुल गांधी ने दावा किया कि देशभर में चुनावों के दौरान वोट चोरी हुई है और विपक्ष इस संबंध में सबूत देने को तैयार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करने का आरोप भी लगाया। ये राहुल गांधी और विपक्ष के आरोप हैं; इन्हें चुनावी गड़बड़ी साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार बोली- राष्ट्रपति को विवाद में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण
राहुल गांधी के बयान के कुछ घंटे बाद सरकारी सूत्रों ने उनके दावे का खंडन किया। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोप स्वीकार किए थे, यह कहना गलत है। सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति को इस विवाद में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है।विवाद का केंद्र राष्ट्रपति की ओर से सबूत मांगे जाने और विपक्ष की बात सुनने को लेकर है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, राष्ट्रपति ने उन्हें मामले से जुड़े सबूत देने और अपनी शिकायतों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। वहीं, सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इसे आरोपों की स्वीकृति नहीं माना जा सकता। राष्ट्रपति की ओर से विपक्ष के आरोपों को स्वीकार किए जाने की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।
राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में चार बड़ी मांगें
INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मु को चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। ज्ञापन में चुनाव से जुड़े कानून और प्रक्रिया में बदलाव की मांगें भी शामिल थीं।विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले 2023 के कानून को वापस लेना शामिल है। इसके अलावा, SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकने और विपक्ष के मुताबिक हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई।
विपक्ष ने सभी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी रखी। साथ ही, पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की, जिनमें उसके अनुसार वोट चोरी के निर्णायक सबूत पेश किए गए हैं। ये विपक्ष के ज्ञापन में रखी गई मांगें हैं, न कि किसी अदालत या चुनाव आयोग का निष्कर्ष।
ममता बनर्जी और खड़गे ने भी बताई मुलाकात की बात
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुलाकात के बाद राष्ट्रपति के रुख को सकारात्मक बताया। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने मामले का विवरण देखने और आरोपों की जांच करने की बात कही।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताएं सुनीं और मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया। विपक्षी नेताओं के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल सबूत जुटा रहा है और उन्हें राष्ट्रपति के सामने पेश करेगा। INDIA ब्लॉक ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की भी बात कही है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप
यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव के बीच सामने आया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के मामलों में संबंधित रिकॉर्ड और तय प्रक्रिया के आधार पर जांच की जाती है। किसी नाम के हटने को अपने आप में ‘वोट चोरी’ का प्रमाण नहीं माना जा सकता; इसके लिए मामले से जुड़े तथ्य और सबूत जरूरी हैं।
फिलहाल, राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान और सरकारी सूत्रों के खंडन ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। अब विपक्ष सबूत सौंपने और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहा है। इस बीच, राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार किए थे या नहीं, इसे लेकर सरकारी सूत्रों और विपक्ष की ओर से सामने आए बयानों में स्पष्ट अंतर बना हुआ है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Rahul Gandhi ने President Murmu को लेकर क्या दावा किया?
राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज नहीं किया और उनसे सबूत मांगे। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की बात सुनी।
President Murmu ने कथित तौर पर Vote Theft के आरोप पर क्या कहा?
विपक्षी नेताओं के मुताबिक, राष्ट्रपति ने उनसे आरोपों के समर्थन में सबूत देने और मामले का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इसे आरोप स्वीकार करना नहीं माना जा सकता।
Rahul Gandhi के दावे को गलत क्यों बताया गया?
सरकारी सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार नहीं किए थे और राहुल गांधी का दावा गलत है। सरकार ने राष्ट्रपति को राजनीतिक विवाद में घसीटने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
इस मामले में रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आई?
9 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के 10 नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, SIR रोकने, मतदाता सूची में कथित रूप से हटाए गए नाम बहाल करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने जैसी मांगें शामिल थीं।
भारत में चुनावी शिकायतों की जांच कौन करता है?
चुनाव और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर चुनाव आयोग तथा संबंधित चुनाव अधिकारी तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हैं। शिकायत की प्रकृति के आधार पर मामला अदालत या अन्य सक्षम प्राधिकरण तक भी जा सकता है।
Vote Theft Allegation का क्या मतलब है?
‘वोट चोरी’ का आरोप चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, जैसे मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम हटाने या मतदान प्रक्रिया को अनुचित तरीके से प्रभावित करने के दावे के लिए इस्तेमाल किया जाता है। किसी आरोप को साबित करने के लिए संबंधित सबूत और जांच जरूरी हैं।