CJP Protest FIR: 20 जुलाई की हिंसा की फिर खुलेगी जांच, 2,873 लोगों की पहचान पर भी पुलिस की नजर
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 जुलाई के CJP प्रदर्शन में हुई कथित हिंसा की जांच के लिए एफआईआर दर्ज की है। पुलिस 2,873 लोगों की पहचान और हिंसा की संभावित पूर्व योजना की पड़ताल करेगी।
दिल्ली में CJP Protest FIR दर्ज होने के बाद 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच फिर तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाएगी कि हिंसा के लिए कथित तौर पर कौन जिम्मेदार था और क्या इसकी पहले से योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में उन 2,873 लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी, जिनकी पहचान प्रदर्शन के दौरान Facial Recognition System के जरिए किए जाने का दावा किया गया था। यह घटनाक्रम जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP के अगले प्रदर्शन से ठीक पहले सामने आया है।
CJP Protest FIR: 20 जुलाई की हिंसा में अब किन पहलुओं की होगी जांच?

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 8 अक्टूबर को 20 जुलाई के CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के संबंध में एफआईआर दर्ज की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच का मुख्य उद्देश्य कथित हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि घटना अचानक हुई थी या इसके पीछे पहले से कोई योजना थी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि CJP की ओर से संसद की तरफ मार्च का आह्वान किए जाने के बाद प्रदर्शन स्थलों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग दाखिल हुए थे या नहीं। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने से पहले आरोपों की पुष्टि जरूरी होगी।
पुलिस पर हमले से लेकर सरकारी संपत्ति को नुकसान तक, क्या हुआ था?
20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के अनुसार, पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं। इनमें पुलिस के वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात भी शामिल है।दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोप लगाए थे। ऐसे में जांच के दौरान दोनों पक्षों के दावों, उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाक्रम की परिस्थितियों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नई दिल्ली जिले के विभिन्न थानों में दर्ज 17 एफआईआर रद्द कर दी गई थीं। अब दर्ज की गई नई एफआईआर के तहत क्राइम ब्रांच हिंसा से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी।
2,873 लोगों की पहचान का दावा, Facial Recognition System पर भी सवाल
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान Facial Recognition System (FRS) के जरिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों की पहचान की गई थी। क्राइम ब्रांच जांच में इन लोगों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी।हालांकि, पुलिस ने खुद स्वीकार किया है कि उसके Facial Recognition System की सटीकता लगभग 50 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि केवल तकनीक के जरिए हुई पहचान को किसी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। जांच में अन्य साक्ष्यों और तथ्यों की पुष्टि करना अहम होगा।इसलिए 2,873 लोगों की पहचान किए जाने के दावे और हिंसा में उनकी कथित भूमिका के बीच अंतर समझना जरूरी है। पुलिस की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वास्तव में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
जंतर-मंतर पर अगले प्रदर्शन से पहले क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज हुई है, जब CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस बार प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाना है। CJP ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।पुलिस अधिकारी के मुताबिक, प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में नए प्रदर्शन से पहले दर्ज हुई एफआईआर और 20 जुलाई की हिंसा की जांच पर राजनीतिक और प्रशासनिक नजर बनी हुई है।हालांकि, नई एफआईआर दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि जांच में शामिल सभी आरोप साबित हो चुके हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे।
निष्कर्ष
CJP Protest FIR के जरिए दिल्ली पुलिस अब 20 जुलाई की हिंसा, कथित पूर्व योजना और प्रदर्शन के दौरान पहचाने गए लोगों की भूमिका की जांच करेगी। 2,873 लोगों की पहचान का दावा और Facial Recognition System की सीमित सटीकता इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था।
FAQ (Frequently Asked Questions):
CJP Protest FIR क्यों दर्ज की गई है?
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा की जांच के लिए एफआईआर दर्ज की है। जांच में जिम्मेदार लोगों की पहचान और हिंसा की संभावित पूर्व योजना की पड़ताल होगी।
20 जुलाई के प्रदर्शन में क्या हुआ था?
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोप भी लगाए थे।
पुलिस ने कितने लोगों की पहचान करने का दावा किया है?
पुलिस के मुताबिक, Facial Recognition System के जरिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों की पहचान की गई थी। उनकी भूमिका की जांच की जाएगी।
क्या Facial Recognition System की पहचान अंतिम सबूत है?
पुलिस ने सिस्टम की सटीकता लगभग 50 प्रतिशत बताई है। इसलिए तकनीकी पहचान के साथ अन्य साक्ष्यों की जांच और पुष्टि जरूरी है।
CJP का अगला प्रदर्शन कब और कहां प्रस्तावित है?
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी है, लेकिन पुलिस के अनुसार इसकी अनुमति नहीं दी गई है।