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Kerala NTPC Power Deal: केरल में बिजली संकट के बीच NTPC का बड़ा प्लान, क्या खत्म होगा पावर क्राइसिस?

केरल ने बिजली संकट से निपटने के लिए एनटीपीसी के साथ कई फैसले किए हैं। सिन्नर से 300 मेगावाट बिजली ₹5.18 प्रति यूनिट पर लेने, कायमकुलम में 2,000 मेगावाट-आवर बैटरी स्टोरेज, 27 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट और नए पावर प्लांट की योजना है।

Kerala NTPC Power Deal: केरल में बिजली संकट के बीच NTPC का बड़ा प्लान, क्या खत्म होगा पावर क्राइसिस?

Keralam NTPC Power Crisis Deals: बिजली की बढ़ती मांग और सप्लाई की कमी से जूझ रहे केरल ने संकट से निपटने के लिए एनटीपीसी के साथ कई अहम फैसले किए हैं। इनमें महाराष्ट्र के सिन्नर प्रोजेक्ट से 300 मेगावाट तक बिजली ₹5.18 प्रति यूनिट की दर से लेना, कायमकुलम में 2,000 मेगावाट-आवर का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाना और राज्य में लंबे समय के लिए एक डेडिकेटेड पावर प्लांट स्थापित करने के लिए एनटीपीसी से अनुरोध करना शामिल है। इसके अलावा कायमकुलम के 27 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट को तेज करने और रामागुंडम पावर प्लांट से बिजली लेने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट करने पर भी सहमति बनी है।

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बिजली संकट के बीच केरल को महाराष्ट्र से मिलेगी 300 MW बिजली

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने नई दिल्ली में एनटीपीसी के सीएमडी गुरदीप सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बातचीत का मकसद तत्काल बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों के लिए राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना था।बैठक के बाद तय हुआ कि केरल को महाराष्ट्र के सिन्नर थर्मल पावर प्रोजेक्ट से 300 मेगावाट तक बिजली मिलेगी। इसकी दर ₹5.18 प्रति यूनिट रखी गई है। सिन्नर प्रोजेक्ट नासिक के पास स्थित है और एनटीपीसी तथा महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी ने 2026 में इसे खरीदा था।
यह बिजली व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केरल में पीक डिमांड के दौरान सप्लाई का दबाव बढ़ रहा है। राज्य को हाल में बिजली कटौती तक करनी पड़ी थी। हालांकि सिन्नर से मिलने वाली बिजली के अंतिम पावर परचेज एग्रीमेंट की प्रक्रिया अभी पूरी होनी है। केएसईबी के अधिकारियों के अनुसार आगे चलकर वहां से ज्यादा बिजली मिलने की संभावना पर भी काम चल रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा में फिलहाल 300 मेगावाट तक की सप्लाई बताई गई है।

कायमकुलम में 2,000 MWh का बड़ा बैटरी स्टोरेज सिस्टम

केरल की योजना सिर्फ बाहर से बिजली खरीदने तक सीमित नहीं है। कायमकुलम में 2,000 मेगावाट-आवर का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS लगाया जाएगा। इसके लिए केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, एनटीपीसी और एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच एमओयू किया जाएगा।इस सिस्टम का मकसद दिन के समय उपलब्ध अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय, खासकर शाम और रात की पीक डिमांड में इस्तेमाल करना है। इससे बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को संभालने में मदद मिलेगी। यह प्रोजेक्ट एनटीपीसी की कायमकुलम साइट पर प्रस्तावित है, जहां पहले से पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
इसके साथ ही पोथनकोड और श्रीकंडापुरम में 80-80 मेगावाट-आवर क्षमता वाले दो और BESS प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों की कुल क्षमता 160 मेगावाट-आवर होगी। इन प्रोजेक्टों के चालू होने की समयसीमा पहले की तुलना में आगे बढ़ी है।

27 MW सोलर प्रोजेक्ट तेज होगा, रामागुंडम से भी बिजली लेने की तैयारी

कायमकुलम में एनटीपीसी के 27 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट पर भी काम तेज करने का फैसला हुआ है। राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सहयोग देगी।इसके अलावा एनटीपीसी ने तेलंगाना के रामागुंडम पावर प्लांट से केरल को बिजली देने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट करने की इच्छा जताई है। यानी राज्य तत्काल जरूरत के लिए अलग-अलग स्रोतों से बिजली जुटाने के साथ भविष्य के लिए स्टोरेज और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी बढ़ाना चाहता है।

केरल में अपना पावर प्लांट लगाने की मांग

लंबे समय की जरूरत को देखते हुए केरल सरकार ने एनटीपीसी से राज्य में ही एक डेडिकेटेड पावर प्लांट स्थापित करने का अनुरोध किया है। इसका मकसद राज्य को भविष्य में पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है।हालांकि इसे लेकर अभी यह कहना सही नहीं होगा कि एनटीपीसी ने केरल में नया प्लांट लगाने का अंतिम फैसला कर लिया है। फिलहाल राज्य सरकार ने मांग रखी है और एनटीपीसी के साथ इस दिशा में आगे की बातचीत होनी है। वहीं रामागुंडम से बिजली खरीदने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट पर आगे बढ़ने की बात एनटीपीसी ने कही है।
बैठक में एनटीपीसी की प्रोफेशनल और टेक्निकल विशेषज्ञता केएसईबी को उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। इसका इस्तेमाल पावर मैनेजमेंट, तकनीकी संचालन और आधुनिक बिजली प्रबंधन सिस्टम को मजबूत करने में किया जाएगा।

बारिश कम हुई, बिजली खरीद समझौतों की कमी से बढ़ा संकट

केरल में बिजली संकट के पीछे कई कारण बताए गए हैं। राज्य सरकार के मुताबिक इस साल बारिश में कमी, अल नीनो का असर और पर्याप्त पावर परचेज एग्रीमेंट नहीं होना प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इससे जलाशयों में पानी की उपलब्धता और हाइड्रो पावर उत्पादन पर भी दबाव पड़ा।रिपोर्टों के मुताबिक करीब एक दशक के अंतराल के बाद सितंबर में केरल में फिर बिजली प्रतिबंध लगाने की स्थिति बनी। राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध घरेलू उत्पादन उससे पूरी तरह मेल नहीं खा पा रहा।
राज्य सरकार ने बिजली संकट के लिए पहले की लंबी अवधि वाली बिजली खरीद व्यवस्थाओं को खत्म किए जाने को भी एक कारण बताया है, जबकि विपक्ष ने सरकार की पावर प्लानिंग पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में एनटीपीसी के साथ हुआ समझौता तत्काल सप्लाई बढ़ाने के साथ इस समस्या का लंबी अवधि का समाधान तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बिजली संकट से निपटने के लिए केरल की दोहरी रणनीति

केरल का मौजूदा प्लान तीन स्तरों पर काम करता दिखाई देता है। पहले स्तर पर सिन्नर से 300 मेगावाट तक बिजली लेकर तत्काल सप्लाई बढ़ाने की कोशिश है। दूसरे स्तर पर कायमकुलम में 2,000 MWh और पोथनकोड-श्रीकंडापुरम में कुल 160 MWh बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित की जा रही है। तीसरे स्तर पर 27 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट, रामागुंडम से बिजली और राज्य में डेडिकेटेड पावर प्लांट की संभावना पर काम किया जा रहा है।अगर ये योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो केरल को पीक डिमांड के दौरान बिजली उपलब्ध कराने और भविष्य की सप्लाई को ज्यादा स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि नए पावर प्लांट और कुछ पावर परचेज एग्रीमेंट अभी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं, इसलिए इनके वास्तविक असर का आकलन इनके लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Keralam ने Power Crisis से निपटने के लिए NTPC के साथ क्या Deals की हैं?

केरल को एनटीपीसी के महाराष्ट्र स्थित सिन्नर प्रोजेक्ट से 300 मेगावाट तक बिजली ₹5.18 प्रति यूनिट की दर से मिलेगी। इसके अलावा कायमकुलम में 2,000 MWh BESS लगाने के लिए केएसईबी, एनटीपीसी और एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के बीच एमओयू होगा। पोथनकोड और श्रीकंडापुरम में 80-80 MWh के BESS प्रोजेक्ट भी मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य है।

Kerala में Power Crisis क्यों पैदा हुआ?

राज्य सरकार के मुताबिक कम बारिश, अल नीनो का असर और पर्याप्त पावर परचेज एग्रीमेंट की कमी ने बिजली संकट को बढ़ाया। इसके साथ बिजली की मांग में बढ़ोतरी और उपलब्ध सप्लाई के बीच अंतर भी समस्या की वजह बना।

NTPC Kerala को कितनी Power Supply करेगा?

एनटीपीसी के सिन्नर प्रोजेक्ट से केरल को फिलहाल 300 मेगावाट तक बिजली ₹5.18 प्रति यूनिट की दर से मिलने की घोषणा की गई है। इसके अलावा रामागुंडम पावर प्लांट से बिजली लेने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट पर भी आगे बढ़ने की बात कही गई है।

Kerala ने Long-Term Power Needs को पूरा करने के लिए क्या योजना बनाई है?

राज्य सरकार ने एनटीपीसी से केरल में एक डेडिकेटेड पावर प्लांट स्थापित करने का अनुरोध किया है। साथ ही 2,000 MWh BESS, 160 MWh के दो अन्य स्टोरेज प्रोजेक्ट और कायमकुलम का 27 MW सोलर प्रोजेक्ट लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा की योजना का हिस्सा हैं।

Kerala और NTPC के बीच Power Agreement का क्या महत्व है?

इससे केरल को तत्काल अतिरिक्त बिजली मिलने के साथ ऊर्जा स्टोरेज, सोलर पावर और पावर मैनेजमेंट सिस्टम मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इससे पीक डिमांड के समय सप्लाई संभालने और भविष्य की बिजली जरूरतों के लिए ज्यादा स्थिर व्यवस्था बनाने की कोशिश है।

क्या NTPC Deal से Kerala में Electricity Shortage कम होगी?

तत्काल स्तर पर सिन्नर से 300 MW तक अतिरिक्त बिजली मिलने से सप्लाई का दबाव कम होने की उम्मीद है। आगे BESS और दूसरे पावर प्रोजेक्ट चालू होने पर पीक आवर्स में बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर इन योजनाओं के लागू होने और राज्य की बिजली मांग पर निर्भर करेगा।

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