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Karnataka Jobs Scam : KPSC में बड़े भर्ती घोटाले का खुलासापूर्व चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार के निलंबन के क्या हैं मायने?

कर्नाटक KPSC में 2019 से भर्ती अनियमितताओं की शिकायतों की कड़ी सामने आई है। निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार पर पेपर लीक, नंबरों में हेरफेर और आंसर शीट से छेड़छाड़ जैसे आरोप हैं। CID इन मामलों की जांच कर रही है।

Karnataka Jobs Scam : KPSC में बड़े भर्ती घोटाले का खुलासापूर्व चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार के निलंबन के क्या हैं मायने?

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Karnataka Jobs Scam : कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती करने वाली कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) इन दिनों गंभीर अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जांच के घेरे में है। पिछले दो महीनों में सामने आए मामलों में KPSC के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार का नाम प्रमुखता से सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, साहूकार 2019 में KPSC के सदस्य बने और 2021 में चेयरमैन बनाए गए। उनके कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया में नंबर रोकने, इंटरव्यू पैनल में हेरफेर, टैबुलेशन रिकॉर्ड बदलने, आंसर शीट से छेड़छाड़ और पेपर लीक जैसे आरोप सामने आए। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी बेटी को कथित तौर पर कम आय दिखाने वाले प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी मिली। अगस्त 2026 में राज्यपाल ने उन्हें निलंबित कर दिया।इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत जांच का दावा है कि ये मामले केवल साहूकार से जुड़े हालिया विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 2019 से KPSC में शिकायतों और अनियमितताओं की एक लंबी कड़ी सामने आती है। रिपोर्ट में BJP और कांग्रेस, दोनों सरकारों के दौरान संस्थागत स्तर पर उठाए गए सवालों और कार्रवाई के तरीके की पड़ताल की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए कई आरोप अभी जांच या कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उन्हें अदालत से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

बेटी की नौकरी से खुला मामला, फिर पेपर लीक की जांच तक पहुंचा

साहूकार पर सबसे बड़ा विवाद उनकी बेटी सुम S. साहूकार की सरकारी नौकरी को लेकर सामने आया। आरोप है कि उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन करते समय परिवार की सालाना आय 40 हजार रुपए बताई, जबकि उनके पिता उस समय KPSC में पद पर थे और लाखों रुपए सालाना वेतन पा रहे थे। पुलिस केस में आरोप है कि कम आय दिखाने वाले इन दस्तावेजों का इस्तेमाल आरक्षण का लाभ लेने के लिए किया गया।कर्नाटक के राज्यपाल ने 25 अगस्त 2026 को संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत साहूकार को निलंबित किया। राज्यपाल के आदेश के मुताबिक, यह कार्रवाई राज्य मंत्रिमंडल की 21 अगस्त की सलाह के आधार पर हुई और अगले आदेश तक लागू रहेगी।
इसी दौरान KPSC की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया। 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक हुआ और कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश के आरोप लगे। इसके बाद KPSC की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे।

2019 से शिकायतें, लेकिन कार्रवाई का सवाल बना रहा

इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, साहूकार के कार्यकाल में अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें कम से कम चार बार अधिकारियों के स्तर पर उठाई गईं। रिपोर्ट में KPSC के आधिकारिक नोट्स और अधिकारियों की शिकायतों का भी हवाला दिया गया है।इनमें परीक्षा के बाद कुछ उम्मीदवारों के नंबर रोकने, अच्छे प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसे मांगने, इंटरव्यू पैनल में हेरफेर, टैबुलेशन रिकॉर्ड बदलने और आंसर शीट से छेड़छाड़ जैसे आरोप शामिल हैं। कुछ मामलों में प्रश्नपत्र चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाने के आरोप भी सामने आए।
इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि KPSC जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज में बाहरी निगरानी सीमित होती है। यही वजह है कि इंडियन एक्सप्रेस ने पुराने अधिकारियों, कर्मचारियों, उम्मीदवारों, वकीलों और पूर्व KPSC सदस्यों से बातचीत के साथ शिकायतों, FIR और कोर्ट दस्तावेजों की पड़ताल की।

साहूकार की KPSC में नियुक्ति पर भी सवाल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साहूकार की KPSC में नियुक्ति को लेकर भी शुरुआत से सवाल थे। वह सितंबर 2019 में KPSC के सदस्य बने थे। रिपोर्ट में एक पूर्व सहयोगी के हवाले से कहा गया कि उन्हें शुरुआत में ‘ऑफिशियल KPSC मेंबर’ के रूप में नियुक्त किया गया, जबकि उन्होंने पहले कोई सरकारी नौकरी नहीं की थी। बाद में उनकी श्रेणी को ‘नॉन-ऑफिशियल’ के रूप में बदला गया।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पब्लिक सर्विस कमीशन के सदस्य बनने के लिए कानून में कोई न्यूनतम शैक्षणिक या पेशेवर योग्यता निर्धारित नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कुछ सरकारी और KPSC सूत्रों ने दावा किया कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल राजनीतिक संपर्कों के जरिए नियुक्तियां कराने में किया जा सकता है। यह एक व्यवस्था संबंधी आलोचना है, किसी व्यक्ति की नियुक्ति के बारे में अदालत का फैसला नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, साहूकार KPSC में आने से पहले एक नेशनल कोऑपरेटिव संस्था में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर पर काम कर चुके थे। बाद में उन्हें काम संतोषजनक नहीं होने और समय पर नहीं पहुंचने जैसी वजहों से नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अनौपचारिक रूप से मनी-लेंडिंग का काम किया।

दो IAS अधिकारियों ने उठाई आपत्ति, फिर दोनों हटे

इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह भी सामने आया कि KPSC में साहूकार के कथित ‘मिसयूज ऑफ पावर’ और कामकाज को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों ने लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दो IAS अधिकारियों को साहूकार से संबंधित मामलों पर आपत्ति उठाने के बाद उनके पदों से हटाया गया। रिपोर्ट इसे KPSC के अंदर जवाबदेही की कोशिशों के कमजोर पड़ने के संदर्भ में रखती है। हालांकि, किसी अधिकारी को हटाने का कारण केवल यही था, यह अलग से स्थापित तथ्य नहीं है।
एक अन्य मामले में आंसर शीट से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए SIT का प्रस्ताव सामने आया था। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और मामले में न्यायिक स्तर पर भी बदलाव हुए। बाद में प्रस्तावित जांच प्रभावी रूप से ठंडी पड़ गई।

एक और नाम सामने आया- शाकुंतला दुंडिगौदार

साहूकार के खिलाफ जांच के दौरान एक और KPSC सदस्य शाकुंतला दुंडिगौदार का नाम सामने आया। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई 2026 में साहूकार के खिलाफ KPSC की आंतरिक जांच के लिए शाकुंतला को ही जांच का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी।इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, शाकुंतला की KPSC में नियुक्ति की टाइमिंग और उनकी पारिवारिक राजनीतिक कड़ियों पर भी सवाल उठे। 3 फरवरी 2023 को एक हाई-पावर्ड रिफॉर्म्स कमिशन ने KPSC की सदस्य संख्या घटाकर 14 से 8 करने की सिफारिश की थी। आयोग ने यह भी सुझाव दिया था कि अकादमिक क्षेत्र से सदस्य नियुक्त करते समय फुल प्रोफेसर जैसे योग्य लोगों को प्राथमिकता दी जाए।
इसके करीब चार हफ्ते बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने KPSC की सदस्य संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया। 15 मार्च 2023 को नियम में बदलाव हुआ और अगले ही दिन, 16 मार्च को शाकुंतला की नियुक्ति कर दी गई। वह शिगगांव की स्कूल टीचर थीं, जो बोम्मई का विधानसभा क्षेत्र था।
इसके बाद 7 अप्रैल 2023 को उनके पति श्रीकांत दुंडिगौदार BJP में दोबारा शामिल हुए। इंडियन एक्सप्रेस ने स्थानीय राजनीतिक सूत्रों के हवाले से श्रीकांत और बोम्मई के पुराने राजनीतिक संबंधों तथा कारोबारी लाभ के आरोपों का उल्लेख किया है। श्रीकांत ने इन आरोपों से इनकार किया।
रिपोर्ट में कंपनी के वार्षिक रिटर्न का हवाला देते हुए बताया गया कि उनके कारोबार का राजस्व FY2022 के 25 करोड़ रुपए से बढ़कर FY2023 में 62 करोड़ रुपए हो गया, यानी करीब 160% की वृद्धि। यह आंकड़ा अपने आप में किसी गलत काम का प्रमाण नहीं है, लेकिन जांच में इसे राजनीतिक और कारोबारी संबंधों के संदर्भ में रखा गया है।

जांच शुरू हुई, तीन दिन बाद CID को सौंप दी गई

मई 2023 में कांग्रेस के सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने। इसके बाद भी KPSC में साहूकार का कार्यकाल जारी रहा। जुलाई 2026 में उनके खिलाफ KPSC ने आंतरिक जांच शुरू की और इसकी जिम्मेदारी शाकुंतला दुंडिगौदार को दी गई।लेकिन यह जांच ज्यादा लंबी नहीं चली। 25 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक चली इस आंतरिक जांच को बाद में CID को सौंप दिया गया। 28 जुलाई को KPSC ने जांच पैनल को भंग कर दिया। यह बदलाव उस समय हुआ जब BJP ने मामले की CBI जांच की मांग की थी और कांग्रेस सरकार ने जांच पुलिस से CID को ट्रांसफर कर दी।
इस बीच शाकुंतला को लेकर भी अलग सवाल उठे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वह अपने पति की कंपनी में डायरेक्टर और शेयरहोल्डर रही हैं। उनके पति PWD कॉन्ट्रैक्टर हैं और कंपनी के सरकारी ठेकों से जुड़े रिकॉर्ड की भी रिपोर्ट में पड़ताल की गई है।

KPSC भर्ती प्रक्रिया में और भी मामले जांच के घेरे में

मामला सिर्फ साहूकार और शाकुंतला तक सीमित नहीं है। हालिया जांच में KPSC सदस्य डॉ. शांता होसामणि भी CID की जांच के दायरे में हैं। CID के मुताबिक, एक KAS उम्मीदवार और होसामणि के बीच इंटरव्यू से पहले 13 फोन कॉल हुई थीं। जांच एजेंसी ने इसे संदिग्ध संपर्क के तौर पर देखा है। संबंधित चयन सूची पर भी जांच पूरी होने तक रोक लगाई गई है।इस पूरी जांच ने सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। KPSC के जरिए होने वाली भर्तियों में लाखों उम्मीदवार परीक्षा देते हैं, इसलिए पेपर लीक, नंबरों में हेरफेर या इंटरव्यू प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर उम्मीदवारों के भरोसे पर पड़ता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Karnataka Jobs Scam क्या है और मामला किस recruitment body से जुड़ा है?

यह मामला कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन यानी KPSC की सरकारी भर्ती प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इसमें पेपर लीक, नंबर रोकने, आंसर शीट से छेड़छाड़, इंटरव्यू पैनल में हेरफेर और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे आरोपों की जांच हो रही है।

KPSC recruitment में किन irregularities के आरोप सामने आए हैं?

इंडियन एक्सप्रेस की जांच में परीक्षा के बाद उम्मीदवारों के नंबर रोकने, टॉप स्कोरर्स को कथित तौर पर पैसे के लिए निशाना बनाने, इंटरव्यू पैनल फिक्स करने, टैबुलेशन रिकॉर्ड बदलने, आंसर शीट से छेड़छाड़ और प्रश्नपत्र चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाने जैसे आरोप सामने आए हैं। इन मामलों की अलग-अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

Indian Express ने Karnataka Jobs Scam की investigation कैसे की?

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों ने पूर्व और मौजूदा KPSC अधिकारियों, कर्मचारियों, उम्मीदवारों, वकीलों और पूर्व सदस्यों से बातचीत की। इसके अलावा शिकायतों, FIR, कोर्ट दस्तावेजों और KPSC के आधिकारिक नोट्स की भी जांच की गई। इसी आधार पर 2019 से 2026 तक की घटनाओं को जोड़ा गया।

KPSC exam में marks और answer sheets को लेकर क्या allegations हैं?

जांच में कुछ उम्मीदवारों के नंबर रोकने, अच्छे प्रदर्शन करने वालों को कथित तौर पर रिश्वत के लिए निशाना बनाने और आंसर शीट में छेड़छाड़ के आरोप सामने आए हैं। कुछ मामलों में टैबुलेशन रिकॉर्ड बदलने की भी शिकायतें दर्ज हुईं।

Karnataka KPSC scam में question paper leak के क्या आरोप हैं?

400 पशु चिकित्सकों की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने का मामला सामने आया था। आरोप है कि पेपर चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी मामले और अन्य आरोपों के बीच KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार को अगस्त 2026 में निलंबित किया गया।

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