Manipur Violence Hearing: राहत शिविरों में मौतों पर Supreme Court सख्त, आखिर 25 मामलों की पूरी रिपोर्ट क्यों मांगी?
Manipur Violence Hearing में Supreme Court ने राहत शिविरों में हुई 25 संदिग्ध मौतों पर सख्ती दिखाई। Chief Secretary से पोस्टमार्टम, मौत के कारण और preventive measures की रिपोर्ट मांगी गई है, साथ ही FIR और जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
Manipur Violence Hearing के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा से विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में हुई संदिग्ध और कथित अप्राकृतिक मौतों को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने मणिपुर के Chief Secretary को 25 मामलों की विस्तृत रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत के कारणों से जुड़े दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया।मामले की सुनवाई Chief Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान राहत शिविरों में रह रहे internally displaced persons यानी IDPs की सुरक्षा और गरिमा को लेकर भी सवाल उठे।
Manipur Violence Hearing में Supreme Court ने क्यों जताई नाराजगी?

Manipur Violence Supreme Court Hearing के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि राहत शिविरों में हुई इन मौतों की जांच को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने Chief Secretary से 25 अप्राकृतिक मौतों से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि रिपोर्ट में मौतों के कारणों की पहचान करने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए preventive measures की जानकारी शामिल हो।CJI Surya Kant ने राज्य सरकार को सख्त लहजे में कहा कि Chief Secretary को अदालत से आदेश लेने की स्थिति में न पहुंचने दिया जाए और बताया जाए कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
Manipur Relief Camp Deaths में पोस्टमार्टम को लेकर क्या सवाल?
सुनवाई में अदालत के सामने राहत शिविरों में हुई मौतों को लेकर उपलब्ध आंकड़ों और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे। कोर्ट ने विशेष रूप से पूछा कि संदिग्ध मौतों में पोस्टमार्टम और आपराधिक जांच किस स्तर तक हुई।रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत के सामने रखी जानकारी में आठ जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतों का आंकड़ा सामने आया, जबकि कई मामलों में पोस्टमार्टम नहीं किए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह भी बताया गया कि 20 मामलों में पोस्टमार्टम हुआ था।अलग रिपोर्टों में अप्राकृतिक मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसी वजह से कोर्ट ने Chief Secretary से विस्तृत और दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट मांगी है।
Manipur Unnatural Deaths पर अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को केवल मौतों का आंकड़ा देने के बजाय प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और जांच की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।कोर्ट ने Manipur Legal Services Authority को भी तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। उसे संदिग्ध मौतों के मामलों में FIR दर्ज होने और मौत के कारणों की उचित जांच सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना है।इससे यह स्पष्ट है कि अदालत का फोकस सिर्फ राहत या मुआवजे पर नहीं, बल्कि मौतों के कारण, आपराधिक जांच और राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा पर भी है।
Manipur Violence Cases की जांच कहां तक पहुंची?
सुनवाई के दौरान Additional Solicitor General Aishwarya Bhati ने जांच की स्थिति के बारे में अदालत को जानकारी दी। उनके अनुसार आठ जिलों में 42 Special Investigation Teams (SITs) गठित की गई हैं और कुल 3,020 मामले जांच के दायरे में हैं।इनमें 302 मामलों में charge sheets दाखिल होने की जानकारी दी गई, जबकि 1,583 मामलों में closure reports दाखिल की गई हैं। 1,135 मामलों की जांच जारी है और 33 मामलों में trial शुरू हो चुके हैं।सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि Guwahati की special court में CBI से जुड़े मामलों की सुनवाई सप्ताह में दो दिन हो रही है। कोर्ट ने कहा कि इससे trial आगे बढ़ सकता है, लेकिन दो special courts बनाने की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए।
2023 की हिंसा से जुड़े मामलों पर Supreme Court की नजर
यह सुनवाई 2023 में हुई Manipur ethnic violence से जुड़े उन मामलों की सुनवाई का हिस्सा है, जिनमें जांच, सुरक्षा, राहत और rehabilitation से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। कोर्ट के सामने पूर्व Jammu & Kashmir High Court Chief Justice Gita Mittal की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भी रखी गई थी।इसी रिपोर्ट के आधार पर राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और वहां हुई मौतों को लेकर सवाल उठे। अदालत ने अब राज्य सरकार से दस्तावेजों के साथ विस्तृत जवाब मांगा है।
निष्कर्ष
Manipur Violence Hearing में सुप्रीम कोर्ट का फोकस राहत शिविरों में हुई संदिग्ध मौतों की वास्तविक वजह और उनकी जांच पर है। कोर्ट ने Chief Secretary से 25 मामलों की विस्तृत रिपोर्ट, पोस्टमार्टम दस्तावेज और preventive measures की जानकारी मांगी है। साथ ही FIR और जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Manipur violence hearing में Supreme Court ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में हुई संदिग्ध और अप्राकृतिक मौतों पर चिंता जताई और राज्य के Chief Secretary से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
Manipur relief camps में कितनी unnatural deaths की रिपोर्ट सामने आई?
कोर्ट ने विशेष रूप से 25 रिपोर्टेड अप्राकृतिक मौतों के मामलों की जानकारी मांगी है। हालांकि, अदालत के सामने राहत शिविरों में मौतों के अलग-अलग आंकड़े भी रखे गए हैं।
Supreme Court ने Manipur Chief Secretary से कौन-सी report मांगी है?
रिपोर्ट में मौतों की परिस्थितियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौत के कारण और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है।
Manipur violence cases में post-mortem reports क्यों मांगी गई हैं?
ताकि मौतों के कारणों की स्पष्ट पहचान हो सके और जहां आवश्यक हो, वहां आपराधिक जांच आगे बढ़ाई जा सके।
Relief camps में मृत IDPs के families को कितना compensation मिला?
सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में ₹20,000 से ₹30,000 तक के मुआवजे पर भी सवाल उठे। अदालत ने इस संबंध में राज्य से स्पष्टीकरण मांगा है।