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CCEA Railway Projects 2026: रेलवे का बड़ा विस्तार, ₹20,804 करोड़ की 8 परियोजनाएं मंजूर; 1.04 करोड़ लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?

CCEA ने 20,804 करोड़ रुपए की लागत से 9 राज्यों में 8 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे करीब 1,196 किमी रेल क्षमता बढ़ेगी, 1.04 करोड़ लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने से ट्रैफिक व लॉजिस्टिक्स दबाव कम होगा।

CCEA Railway Projects 2026: रेलवे का बड़ा विस्तार, ₹20,804 करोड़ की 8 परियोजनाएं मंजूर; 1.04 करोड़ लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?

CCEA Railway Projects 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी CCEA ने 9 सितंबर 2026 को रेलवे की 8 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनकी कुल लागत करीब 20,804 करोड़ रुपए है। परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में लागू होंगी। इनसे मौजूदा रेल नेटवर्क में कुल करीब 1,196 किलोमीटर की क्षमता बढ़ेगी। सरकार का मकसद व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना, यात्रियों और माल की आवाजाही आसान बनाना और लॉजिस्टिक्स लागत घटाना है।इन 8 परियोजनाओं में पहले चरण की 3 परियोजनाओं की लागत 10,783 करोड़ रुपए और दूसरे चरण की 5 परियोजनाओं की लागत 10,021 करोड़ रुपए है। पहली तीन परियोजनाएं 14 जिलों से होकर गुजरेंगी और करीब 4,790 गांवों को रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा। इन गांवों की कुल आबादी करीब 56 लाख है। दूसरी तरफ, पांच परियोजनाएं 17 जिलों को कवर करेंगी और करीब 2,121 गांवों तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी पहुंचाएंगी। इन गांवों की आबादी लगभग 52 लाख है। यानी सभी परियोजनाओं को मिलाकर करीब 104 लाख यानी 1.04 करोड़ लोगों वाले इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

कोयला, सीमेंट से लेकर स्टील तक की ढुलाई होगी तेज

पहले पैकेज में पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं। इसमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन बनाई जाएगी। इन परियोजनाओं से करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।ये मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसे महत्वपूर्ण सामान की ढुलाई के लिए अहम हैं। सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता तैयार होगी। इससे मौजूदा व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों के संचालन में दबाव कम होगा और मालगाड़ियों की आवाजाही ज्यादा सुचारु हो सकेगी।
इसका फायदा केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा। लाइन क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी ज्यादा जगह उपलब्ध हो सकती है। इसके अलावा परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की उम्मीद है।

दक्षिण भारत के चार राज्यों में 540 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा

दूसरे पैकेज में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना की पांच परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें अरक्कोनम-रेनिगुंटा की तीसरी और चौथी लाइन 77 किमी, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट की तीसरी और चौथी लाइन 47 किमी, होसुर-ओमलूर 147 किमी डबलिंग, सेलम-करूर-दिंडीगुल 159 किमी डबलिंग और सिकंदराबाद (घटकेसर)-काजीपेट 110 किमी मल्टी-ट्रैकिंग शामिल है। इन पांच परियोजनाओं से करीब 540 किलोमीटर रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।इन मार्गों पर कोयला, सीमेंट, लौह और स्टील के अलावा कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसे सामान की भी आवाजाही होती है। सरकार के अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से हर साल करीब 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बनेगी।
इस पैकेज से तिरुपति, तिरुत्तनी, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होसुर फोर्ट, मेट्टूर डैम, कोडाइकनाल और यदाद्रिगुट्टा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

रेलवे की क्षमता बढ़ेगी तो तेल आयात और प्रदूषण भी घटेगा

सरकार का कहना है कि रेलवे ऊर्जा की खपत और माल ढुलाई के लिहाज से सड़क परिवहन की तुलना में अधिक कुशल माध्यम है। पहली तीन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात कम होने और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन घटने का अनुमान है। सरकार ने इसे करीब 2.48 करोड़ पेड़ों द्वारा कार्बन अवशोषण के बराबर बताया है।दूसरी पांच परियोजनाओं से करीब 8 करोड़ लीटर तेल आयात कम होने और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन घटने का अनुमान है। यह करीब 2 करोड़ पेड़ों के कार्बन अवशोषण के बराबर बताया गया है। यानी दोनों पैकेजों को मिलाकर सरकार के अनुमान के अनुसार करीब 20 करोड़ लीटर तेल आयात और 104 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम हो सकता है।
इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। ज्यादा लाइनें उपलब्ध होने से ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और माल तथा यात्री ट्रेनों के संचालन की विश्वसनीयता बेहतर हो सकती है।

PM गति शक्ति के तहत बन रही हैं परियोजनाएं

इन सभी परियोजनाओं को PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना को आपस में जोड़कर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को बेहतर बनाना है। रेलवे के मुताबिक इन परियोजनाओं से लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही ज्यादा सुगम होगी।पहले पैकेज की परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। दूसरे पैकेज की पांचों परियोजनाओं को भी 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कुल मिलाकर देखें तो 20,804 करोड़ रुपए का यह निवेश सिर्फ नई रेल लाइन जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य पहले से व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाकर ट्रेनों की आवाजाही को ज्यादा सुचारु बनाना है। करीब 1,196 किलोमीटर की क्षमता वृद्धि, 31 जिलों और करीब 1.04 करोड़ आबादी वाले इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी और सालाना करीब 74 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता इसके बड़े प्रभाव होंगे।

FAQ (Frequently Asked Questions):

CCEA Railway Projects 2026 के तहत कितने रुपये के प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं?

CCEA ने 9 सितंबर 2026 को कुल 8 रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनकी कुल अनुमानित लागत करीब 20,804 करोड़ रुपए है।

Rs 20,804 Crore Railway Projects से किन राज्यों को फायदा होगा?

इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना को फायदा होगा। यानी कुल 9 राज्य इसमें शामिल हैं।

Railway Infrastructure Projects से कनेक्टिविटी कैसे बेहतर होगी?

अतिरिक्त और डबल रेल लाइन बनने से मौजूदा व्यस्त मार्गों की क्षमता बढ़ेगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, परिचालन दक्षता बढ़ेगी और यात्रियों तथा माल की आवाजाही ज्यादा सुचारु हो सकेगी।

Railway Multitracking Projects से कंजेशन कैसे कम होगा?

जब किसी व्यस्त मार्ग पर एक से ज्यादा लाइन उपलब्ध होती हैं तो यात्री और मालगाड़ियों को एक ही ट्रैक पर ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता। इससे ट्रेनों के संचालन में बाधाएं कम होती हैं और नेटवर्क की क्षमता बढ़ती है।

Indian Railways Projects 2026 से फ्रेट मूवमेंट पर क्या असर पड़ेगा?

दोनों पैकेजों को मिलाकर करीब 74 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बनने का अनुमान है। इससे कोयला, सीमेंट, स्टील, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, कंटेनर और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं की आवाजाही को फायदा मिलेगा।

PM Gati Shakti Railway Projects का उद्देश्य क्या है?

PM गति शक्ति का उद्देश्य अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल बनाकर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना है। इन रेलवे परियोजनाओं को भी इसी व्यापक योजना के तहत मंजूरी दी गई है।

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