One Nation One Election पर JPC का बड़ा कदम! 27 सवालों से खुलेगा चुनावी सिस्टम का कौन-सा राज?
One Nation One Election JPC ने केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से 27 सवालों वाली Questionnaire के जरिए राय मांगी है। इसमें चुनावों, MCC, कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी और सरकारी परियोजनाओं पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जाएगा।
नई दिल्ली में One Nation One Election JPC ने प्रस्तावित एक साथ चुनाव व्यवस्था को लेकर केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से राय मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 27 सवालों वाली एक Questionnaire तैयार की गई है, जिसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि बार-बार होने वाले चुनाव सरकारी कामकाज को कितना प्रभावित करते हैं और Simultaneous Elections से क्या बदलाव आ सकते हैं।
JPC Questionnaire में आखिर पूछे गए हैं कौन-कौन से सवाल?

One Nation One Election JPC की Questionnaire का फोकस केवल चुनाव कराने की प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज पर इसके असर को समझने पर है।मंत्रालयों से पूछा जा रहा है कि पिछले 10 वर्षों में अलग-अलग समय पर हुए चुनावों ने उनके कामकाज, परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं को किस तरह प्रभावित किया। उनसे प्रशासनिक, वित्तीय, संचालन और नीतिगत प्रभावों का आकलन भी मांगा गया है।मंत्रालयों को जहां संभव हो, अपने दावों के समर्थन में उदाहरण और प्रभाव का आंकड़ा देने के लिए भी कहा गया है।
One Nation One Election JPC किन बातों का जवाब चाहती है?
One Nation One Election को लेकर JPC यह जानना चाहती है कि लगातार होने वाले चुनावों के दौरान लागू Model Code of Conduct यानी MCC का सरकारी कामकाज पर क्या असर पड़ा।Questionnaire में खास तौर पर पूछा गया है कि क्या चुनावों के दौरान MCC की वजह से-
- नीतियां बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई?
- प्रशासनिक फैसलों में देरी हुई?
- मंजूरियों पर असर पड़ा?
- सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में रुकावट आई?
- परियोजनाओं को टालना, बदलना या चरणों में लागू करना पड़ा?
मंत्रालयों से इन सवालों के ठोस उदाहरण और जहां संभव हो, प्रभाव का आकलन भी मांगा गया है।
चुनावी ड्यूटी में Staff Deployment भी जांच के दायरे में
JPC ने सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी से जुड़े असर पर भी सवाल तैयार किए हैं।मंत्रालयों से पूछा गया है कि पिछले 10 वर्षों में चुनावी ड्यूटी के लिए कितने कर्मचारियों को तैनात किया गया और इस तैनाती का मंत्रालय के नियमित कामकाज पर क्या असर पड़ा।इसके अलावा यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि चुनावी ड्यूटी की वजह से बाकी कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ा या नहीं।यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Simultaneous Elections India के समर्थकों की एक प्रमुख दलील यह रही है कि बार-बार होने वाले चुनावों में सरकारी मशीनरी और कर्मचारियों की तैनाती प्रशासनिक काम को प्रभावित कर सकती है।
Medium और Long-Term Projects पर भी मांगी गई राय
Questionnaire में मंत्रालयों से यह भी पूछा गया है कि लगातार होने वाले चुनावों के कारण उनकी medium-term और long-term योजनाओं पर क्या प्रभाव पड़ा।JPC यह जानना चाहती है कि क्या किसी परियोजना, योजना, सुधार या अन्य पहल को चुनावों की वजह से- देरी हुई, टाला गया, बदला गया या चरणों में लागू किया गया।खास तौर पर कई वर्षों तक चलने वाली परियोजनाओं और नीतिगत पहलों की planning और execution पर पड़ने वाले असर का आकलन मांगा गया है।इससे समिति को यह समझने में मदद मिल सकती है कि चुनावी चक्र और सरकारी योजनाओं के बीच किस तरह का संबंध रहा है।
Housing Ministry से 15 सितंबर तक मांगा जवाब
लोकसभा सचिवालय ने आवास और शहरी कार्य मंत्रालय यानी Ministry of Housing and Urban Affairs से भी Questionnaire पर जवाब मांगा है।मंत्रालय के Department of Capital Development को भेजे गए कार्यालय ज्ञापन में प्रशासनिक, वित्तीय, संचालन और नीतिगत प्रभावों का आकलन करने को कहा गया है।विभाग को अपनी राय 15 सितंबर तक जमा करनी है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से जवाब मिलने के बाद JPC इन सुझावों को किस तरह अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी।
One Nation One Election का प्रस्ताव कहां तक पहुंचा?
One Nation One Election से जुड़े दो विधेयक-Constitution (One Hundred and Twenty-Ninth Amendment) Bill, 2024 और Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2024—17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पेश किए गए थे।इसके बाद दोनों विधेयकों को दोनों सदनों की संयुक्त समिति यानी Joint Parliamentary Committee के पास व्यापक विचार-विमर्श के लिए भेजा गया।समिति की अध्यक्षता लोकसभा सांसद पी.पी. चौधरी कर रहे हैं। अब मंत्रालयों और विभागों से Questionnaire के जरिए राय मांगना इसी व्यापक consultation process का हिस्सा है।
One Nation One Election Suggestions क्यों महत्वपूर्ण हैं?
One Nation One Election Suggestions के जरिए JPC केवल राजनीतिक दलों की राय ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के व्यावहारिक अनुभव को भी समझने की कोशिश कर रही है।मंत्रालयों के जवाब से समिति को यह आकलन करने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव वास्तव में सरकारी योजनाओं, कर्मचारियों की उपलब्धता और नीतिगत फैसलों को किस हद तक प्रभावित करते हैं।दूसरी ओर, Simultaneous Elections लागू होने पर प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर संभावित फायदे और चुनौतियां क्या हो सकती हैं, इसका आकलन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
निष्कर्ष
One Nation One Election JPC ने अब इस बहस को सरकारी कामकाज के व्यावहारिक पहलू से जोड़ दिया है। 27 सवालों वाली Questionnaire के जरिए मंत्रालयों से चुनावी चक्र, MCC, कर्मचारी तैनाती और लंबी अवधि की परियोजनाओं पर असर की जानकारी मांगी जा रही है। इन जवाबों से One Nation One Election पर JPC की आगे की सिफारिशों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार हो सकता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
One Nation One Election पर JPC departments से suggestions क्यों मांग रही है?
JPC यह समझना चाहती है कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों का मंत्रालयों के कामकाज, योजनाओं, नीतिगत फैसलों और सरकारी सेवाओं पर क्या असर पड़ता है।
JPC Questionnaire में किन मुद्दों पर राय मांगी गई है?
Questionnaire में MCC, प्रशासनिक और वित्तीय असर, सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी, परियोजनाओं में देरी और medium तथा long-term योजनाओं के execution से जुड़े सवाल शामिल हैं।
One Nation One Election JPC ने कितने सवाल पूछे हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार JPC ने मंत्रालयों और विभागों के लिए 27 सवालों वाली Questionnaire तैयार की है।
One Nation One Election से सरकारी कामकाज पर क्या असर पड़ सकता है?
JPC यह आकलन कर रही है कि बार-बार होने वाले चुनाव और MCC सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों, मंजूरियों और कर्मचारियों की उपलब्धता को किस हद तक प्रभावित करते हैं।
One Nation One Election Suggestions को आगे कैसे इस्तेमाल किया जाएगा?
मंत्रालयों और विभागों से मिले जवाब JPC की व्यापक consultation process का हिस्सा होंगे। उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक सुझाव को अंतिम रिपोर्ट में किस रूप में शामिल किया जाएगा।