US Sanctions India Based Firms: ईरान से तेल खरीदना पड़ा भारी - अमेरिका ने 4 भारतीय कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर - जानिए क्या है मामला ?
अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में 4 भारत-आधारित कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत-ईरान कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है।
US Sanctions India Based Firms: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए चार भारत-आधारित कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कार्रवाई ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार से जुड़ी बताई गई है।
अमेरिका के मुताबिक, इन तीन कंपनियों से जुड़े जिन लेनदेन का उल्लेख किया गया है, उनकी कुल कीमत करीब 119 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,000 करोड़ रुपए बैठती है। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत हुई है।
अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, इस अभियान का मकसद ईरान की कमाई के उन रास्तों को बंद करना है, जिनसे उसे तेल, पेट्रोकेमिकल और दूसरे कारोबार से विदेशी मुद्रा मिलती है। 24 अगस्त को शुरू किए गए इस अभियान में करीब 60 कंपनियों, व्यक्तियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों और कंपनियों पर भी आगे कार्रवाई हो सकती है।
4 भारतीय कंपनियां कौन-सी हैं?
अमेरिका ने जिन चार भारत-आधारित कंपनियों को प्रतिबंधित किया है, उनमें सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड, प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और पोर्टईज़ पार्टनर्स एलएलपी शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई के तहत इन कंपनियों की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों और संपत्ति से जुड़े हितों को ब्लॉक किया जा सकता है और अमेरिकी व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ लेनदेन पर रोक लगती है।
इनमें सदाशिवा ओवरसीज पर सबसे बड़ी रकम से जुड़े लेनदेन का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। अमेरिका के मुताबिक इनमें से कुछ शिपमेंट बोंजोर कमोडिटी एफजेडई से जुड़े थे, जिसे अमेरिका पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है।
पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड पर जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने का आरोप लगाया गया है। वहीं प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप है। अमेरिकी दस्तावेज के मुताबिक, प्रकृतिस के कुछ कारोबार भी बोंजोर कमोडिटी एफजेडई समेत उन कंपनियों से जुड़े थे, जिन्हें अमेरिका ने पहले प्रतिबंधित किया था।
चौथी कंपनी पोर्टईज़ पार्टनर्स एलएलपी पर सीधे किसी एक आयात की रकम नहीं बताई गई है। अमेरिका के मुताबिक, यह भारत में ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों के आयात को सुविधाजनक बनाने वाला कस्टम्स ब्रोकर था। यानी कंपनी पर आरोप है कि उसने ईरान से आने वाले पेट्रोकेमिकल कारोबार में लॉजिस्टिक और कस्टम्स से जुड़ी मदद की।
3 भारतीय नागरिक भी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में
कंपनियों के साथ तीन भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाया गया है। इनमें पीपी सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग और पोर्टईज़ पार्टनर्स से जुड़े इंद्रस्मिया अशरफमिया शेख तथा हरिश रामचंद्र रंगी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इन्हें संबंधित कंपनियों की गतिविधियों से जोड़ते हुए प्रतिबंध सूची में शामिल किया है।
यहां यह समझना जरूरी है कि अमेरिका का प्रतिबंध किसी भारतीय अदालत का फैसला नहीं है। यह अमेरिकी सरकार की ओर से लगाया गया आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध है। अमेरिका जिन कंपनियों या लोगों को अपनी प्रतिबंध सूची में डालता है, उनके अमेरिकी वित्तीय सिस्टम और अमेरिकी व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ कारोबार पर गंभीर पाबंदियां लग सकती हैं।
अमेरिका ने अचानक इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?
इस कार्रवाई को ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 24 अगस्त को ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य ईरान की वैश्विक वित्तीय कड़ियों को तोड़ना है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद बेचकर ऐसी कमाई करता है, जिसका इस्तेमाल उसकी सरकार और उससे जुड़े सैन्य कार्यक्रमों को चलाने में होता है। इसलिए वॉशिंगटन अब केवल ईरान के अंदर मौजूद कंपनियों को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि दूसरे देशों में मौजूद उन कंपनियों और बिचौलियों पर भी कार्रवाई कर रहा है जो ईरान के कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी ने यह भी कहा है कि ईरान से जुड़े कारोबार के लिए डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग जैसे क्षेत्रों में भी आगे प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।
'इकोनॉमिक डी-डे' क्यों कहा गया?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस अभियान को बेहद कड़े शब्दों में पेश किया है। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया और कहा कि अमेरिका ईरान की दुनिया भर में मौजूद आर्थिक कड़ियों पर दबाव बढ़ाएगा। वॉशिंगटन ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ सकता है।
यानी अमेरिका का निशाना केवल ईरान नहीं है। वह उन विदेशी कंपनियों पर भी दबाव बनाना चाहता है जो ईरान के लिए तेल बेचने, खरीदने, ढुलाई करने, भुगतान कराने या दूसरे तरीके से कारोबार को संभव बनाती हैं।
ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया?
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को स्वीकार करने से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिजादेह ने कहा कि देश इन प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसके पास इससे निपटने की दो साल की योजना है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने भी अमेरिकी धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के व्यापारिक साझेदार इन बयानों को गंभीर नहीं मानते। उनका कहना था कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के साझेदारों को व्यापार जारी रखने से रोकना आसान नहीं होगा।
भारत-ईरान कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?
इस कार्रवाई का असर सिर्फ प्रतिबंधित कंपनियों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। ईरान के साथ कारोबार करने वाली दूसरी भारतीय कंपनियों के लिए भी अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर बैंकिंग, भुगतान, शिपिंग और बीमा जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
Reuters के मुताबिक, अमेरिका की नई कार्रवाई और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से ईरान से जुड़े व्यापार और वित्तीय लेनदेन पर रोक के कारण भारत का ईरान को निर्यात और प्रभावित हो सकता है। भारत का ईरान के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2018-19 में करीब 17 अरब डॉलर था, लेकिन अब इसमें 90% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। 2026 की शुरुआत में भारत ने ईरान को करीब 383 मिलियन डॉलर का चावल और 14 मिलियन डॉलर की चाय निर्यात की थी।
भारत के लिए ईरान से जुड़े ऊर्जा कारोबार का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। Reuters के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत ने करीब 707 मिलियन डॉलर का ईरानी तेल आयात किया था। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंध आगे भारतीय कंपनियों के लिए तेल खरीदने, भुगतान करने और शिपमेंट की व्यवस्था को और जटिल बना सकते हैं।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत सरकार या भारत की सभी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लग गए हैं। मौजूदा कार्रवाई विशिष्ट कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ है। इसका व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका आगे किन भारतीय या दूसरे देशों की कंपनियों को निशाना बनाता है और भारत-ईरान कारोबार के लिए क्या छूट या रास्ते उपलब्ध रहते हैं।
FAQ:
US ने 4 India-Based Firms और 3 Indians पर Sanctions क्यों लगाए?
अमेरिका के मुताबिक इन कंपनियों और व्यक्तियों ने ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली विदेशी कमाई को रोकना है।
US Iran Sanctions 2026 के तहत किन Indian Firms को Target किया गया?
सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड, प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और पोर्टईज़ पार्टनर्स एलएलपी को निशाना बनाया गया है।
US ने Indian Nationals पर Sanctions क्यों लगाए?
प्रशांत गर्ग को पीपी सॉफ्टटेक के निदेशक के रूप में और इंद्रस्मिया अशरफमिया शेख तथा हरिश रामचंद्र रंगी को पोर्टईज़ पार्टनर्स से जुड़े होने के कारण अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है।
इन Sanctions का Iran से क्या संबंध है?
अमेरिका का आरोप है कि संबंधित कंपनियां ईरानी मूल के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद या उनके आयात को सुविधाजनक बनाने में शामिल थीं। तीन कंपनियों से जुड़े आयातों की अमेरिकी ओर से बताई गई कुल रकम करीब 119 मिलियन डॉलर है।
US Treasury Department ने Indian Companies पर क्या आरोप लगाए?
सदाशिवा ओवरसीज पर करीब 69 मिलियन डॉलर, पीपी सॉफ्टटेक पर करीब 25 मिलियन डॉलर और प्रकृतिस इन्फ्रा पर करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात से जुड़े होने का आरोप है। पोर्टईज़ पर कई ईरानी पेट्रोकेमिकल शिपमेंट को सुविधाजनक बनाने का आरोप है।
क्या इन Sanctions का India-Iran Trade पर असर पड़ेगा?
सीधा असर फिलहाल प्रतिबंधित कंपनियों पर है, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई से ईरान के साथ कारोबार करने वाली दूसरी भारतीय कंपनियों के लिए बैंकिंग, भुगतान, शिपिंग और बीमा से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। Reuters के मुताबिक भारत-ईरान व्यापार पहले ही काफी घट चुका है और नई पाबंदियां इसे और प्रभावित कर सकती हैं।
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