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BRICS 2026 India Diplomacy की सबसे बड़ी परीक्षा! Iran-UAE आमने-सामने, क्या Delhi दोनों को एक मंच पर ला पाएगा?

BRICS 2026 India Diplomacy के सामने सबसे बड़ी चुनौती Iran और UAE के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद साझा Delhi Declaration तैयार करना है। पश्चिम एशिया संघर्ष और Strait of Hormuz संकट के बीच भारत दोनों देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।

BRICS 2026 India Diplomacy की सबसे बड़ी परीक्षा! Iran-UAE आमने-सामने, क्या Delhi दोनों को एक मंच पर ला पाएगा?

नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit 2026 भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बन गया है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान, UAE और Saudi Arabia एक ही BRICS मंच पर मौजूद होंगे। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल है-क्या वह इन देशों के बीच मतभेद दूर कर एक साझा Delhi Declaration तैयार करा पाएगा?

BRICS Summit 2026 में Iran और UAE के बीच क्यों फंसा है पेंच?

BRICS 2026 India Diplomacy के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर साझा भाषा तैयार करना है। ईरान और UAE इस संकट को लेकर अलग-अलग पक्षों में खड़े हैं और दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों में तनाव बढ़ा है। स्रोत के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें UAE भी शामिल रहा। इसके बाद ईरान और UAE के बीच तनाव और गहरा गया। अब समस्या यह है कि BRICS की दिल्ली घोषणा एक consensus document होनी है। यानी सभी सदस्य देशों को उसके पैराग्राफों पर सहमति बनानी होगी। भारत इसी वजह से ईरान और UAE के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर दोनों को एक साझा स्थिति पर लाने की कोशिश कर रहा है।

BRICS 2026 India Diplomacy में भारत के लिए कितना बड़ा दांव?

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि India Iran Relations और India UAE Relations, दोनों ही रणनीतिक रूप से अहम हैं। एक तरफ ईरान के साथ भारत के लंबे समय से ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े हित हैं। दूसरी तरफ UAE भारत का प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। इसलिए भारत किसी एक पक्ष के साथ खड़ा दिखाई देने से बचते हुए दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना चाहता है।इसी को भारत की India Diplomatic Challenge कहा जा सकता है - BRICS के भीतर ऐसा रुख तैयार करना, जिससे ईरान और UAE दोनों उसे स्वीकार कर सकें। मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी इस मतभेद को दूर करने की कोशिश हुई थी। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने ईरान और UAE के मंत्रियों से सीधे बातचीत करने को कहा था। लेकिन उस बैठक के बाद साझा बयान जारी नहीं हो सका था। भारत ने तब Chair Statement और Outcome Document जारी कर अलग-अलग देशों के मतों को जगह दी थी।

West Asia Conflict के बीच Delhi Declaration क्यों है इतनी अहम?

इस बार भारत चाहता है कि BRICS Delhi Declaration में पश्चिम एशिया संकट पर स्पष्ट और साझा भाषा सामने आए। इसके पीछे एक और बड़ी वजह है - Strait of Hormuz। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा कीमतों पर पड़ रहा है। भारत के लिए भी ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में BRICS West Asia Conflict पर अगर सदस्य देशों की साझा सहमति बनती है, तो यह समूह की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को दिखाएगा। लेकिन अगर Iran-UAE मतभेद फिर हावी हुए, तो भारत के लिए consensus document तैयार करना मुश्किल हो सकता है।

Putin और Pezeshkian से Modi की मुलाकात पर भी नजर

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी तय हैं। रूस, ईरान और भारत के बीच पहले से ही कई रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत होती रही है। ऐसे में Pezeshkian के साथ मोदी की बैठक India Iran Relations के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। वहीं रूस के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए Putin के साथ बातचीत भी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अहम मानी जा रही है।

BRICS Summit 2026 में भारत किन मुद्दों पर देगा जोर?

भारत की BRICS अध्यक्षता का फोकस चार प्रमुख स्तंभों पर है-Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability। इनके तहत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला, स्टार्टअप, MSME, विज्ञान-तकनीक, Artificial Intelligence, Digital Public Infrastructure और जलवायु कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश है। सम्मेलन में ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड, शहरी बुनियादी ढांचे तथा MSME सहयोग पोर्टल जैसे परिणाम सामने आने की उम्मीद भी है।पहले दिन सदस्य देशों के बीच बंद कमरे में चर्चा होगी। इसके बाद Bharat Innovates Exhibition, सामूहिक तस्वीर और वृक्षारोपण कार्यक्रम होगा। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से रात्रिभोज भी आयोजित किया जाएगा।दूसरे दिन BRICS सदस्य देशों के साथ Partner Nations और Outreach Invitees की मौजूदगी में खुला सत्र होगा।

निष्कर्ष

BRICS 2026 India Diplomacy के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल सम्मेलन को सफलतापूर्वक आयोजित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा मंच पर बनाए रखना है। खासकर Iran UAE BRICS 2026 के बीच तनाव के बावजूद अगर भारत सर्वसम्मति से Delhi Declaration तैयार कराने में सफल होता है, तो यह उसकी कूटनीतिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि होगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

BRICS 2026 में India के सामने सबसे बड़ी Diplomatic Challenge क्या है?

ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मतभेदों के बावजूद साझा Delhi Declaration पर सहमति बनाना भारत की प्रमुख चुनौती है।

Iran UAE BRICS 2026 में विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद Iran और UAE के बीच तनाव बढ़ा है।

BRICS Summit 2026 में Modi किन नेताओं से मिलेंगे?

स्रोत के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Vladimir Putin और Masoud Pezeshkian के साथ द्विपक्षीय बैठकें शुक्रवार को तय हैं।

India Iran Relations के लिए BRICS 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?

ईरान BRICS का सदस्य है और पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष के बीच भारत के लिए उसके साथ संवाद बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

BRICS 2026 की India की अध्यक्षता का Theme क्या है?

भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है।

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