Nasha Mukt Bharat 2029 Roadmap: ‘नशा मुक्त भारत 2029’ का रोडमैप जारी, ड्रग्स के खिलाफ 3 साल में क्या-क्या बदलेगा?
केंद्र सरकार ने 2026 से 2029 तक नशा मुक्त भारत रोडमैप लागू किया है। ड्रग तस्करी, वित्तीय नेटवर्क और सिंथेटिक ड्रग्स पर कार्रवाई के साथ नशे की मांग घटाने और पुनर्वास पर जोर होगा। अभियान चार पिलर और 200 से ज्यादा एक्शन पॉइंट पर आधारित है।
Nasha Mukt Bharat 2029 Roadmap : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 सितंबर 2026 को गोवा के पणजी में ड्रग्स के खिलाफ नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप की घोषणा की। जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक चलने वाले इस तीन साल के रोडमैप को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। इसमें ड्रग तस्करी रोकने, ड्रग नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके कच्चे माल पर नियंत्रण, नशे की मांग कम करने और नशे से बाहर आ चुके लोगों के पुनर्वास पर एक साथ काम होगा। सरकार ने इसके लिए 4 पिलर, 25 प्रमुख घटक और 200 से ज्यादा एक्शन पॉइंट तय किए हैं।अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए भी किया जाता है और दुनिया के कई देशों में नार्को-टेरर मॉड्यूल सक्रिय हैं। इसी वजह से सरकार ने 2019 के बाद ड्रग्स के खिलाफ अलग-अलग एजेंसियों की कार्रवाई को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय स्तर का अभियान बनाने पर जोर दिया है।
2029 तक मिशन मोड में चलेगा अभियान
नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप के तहत 2026 से 2029 की अवधि को मिशन मोड में रखा गया है। अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी तय होगी, काम की समयसीमा तय की जाएगी और हर तिमाही में प्रगति की समीक्षा होगी। यानी अब सिर्फ ड्रग्स पकड़ने या छोटे आरोपियों की गिरफ्तारी तक अभियान सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क को ट्रैक करने पर जोर होगा।इस रोडमैप के चार मुख्य पिलर हैं। पहला है खुफिया जानकारी और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, दूसरा प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, तीसरा नशे की मांग और उससे होने वाले नुकसान को कम करना और चौथा क्षमता बढ़ाना तथा अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल।
अमित शाह ने कहा कि हर बड़े ड्रग नेटवर्क के पीछे मौजूद किंगपिन तक पहुंचने के लिए डोजियर तैयार किए जाएंगे। कमर्शियल मात्रा वाले मामलों में वित्तीय जांच को मजबूत किया जाएगा और ड्रग्स के पूरे बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंक को जोड़ा जाएगा।
ड्रग्स के आंकड़ों में कितना बदलाव आया?
अमित शाह के मुताबिक 2004 से 2014 के बीच देश में करीब 26 लाख किलो ड्रग्स जब्त किए गए थे, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपए थी। 2014 से 2026 के बीच यह मात्रा बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलो से ज्यादा हो गई, जिसकी कीमत करीब 1.89 लाख करोड़ रुपए बताई गई है।इसी तरह 2004 से 2014 के बीच करीब 3.36 लाख किलो ड्रग्स नष्ट किए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच 48.68 लाख किलो ड्रग्स नष्ट किए गए। सरकार के मुताबिक गोवा में भी इसी अवधि में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करीब तीन गुना बढ़ी है।
अमित शाह ने बताया कि 2019 में चार-स्तरीय NCORD सिस्टम बनाया गया। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में डेडिकेटेड एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स बनाने का मॉडल भेजा गया और ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गई। अब तक NCORD की 10 एपेक्स, 7 एग्जीक्यूटिव, 277 राज्य स्तरीय और 16,798 जिला स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। ड्रग्स के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए 46 देशों के साथ समझौते भी किए गए हैं।
छोटे पैकेट से लेकर बड़े तस्कर तक पूरी चेन होगी ट्रैक
सरकार अब ड्रग्स की जांच में बॉटम-टू-टॉप और टॉप-टू-बॉटम दोनों तरीके अपना रही है। इसका मतलब है कि अगर किसी इलाके में ड्रग्स का छोटा पैकेट पकड़ा जाता है तो जांच यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वह देश में कहां से आया। वहीं सीमा पर बड़ी खेप पकड़े जाने पर यह पता लगाया जाएगा कि उसे आगे किन इलाकों में छोटे पैकेट के रूप में पहुंचाया जाना था।NCB का कैडर दोबारा व्यवस्थित किया गया है और नार्कोटिक्स अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस NIDAAN पोर्टल के जरिए बनाया गया है। CCTNS के डेटा और इंटीग्रेटेड डेटा फ्यूजन की मदद से देशभर में ड्रग हॉटस्पॉट, तस्करी का तरीका और जब्ती के पैटर्न का डेटा मैप तैयार किया गया है।
डार्क नेट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और डेड ड्रॉप डिलीवरी पर भी टेक्नोलॉजी आधारित जांच शुरू की गई है। एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स में डेडिकेटेड डार्क नेट-क्रिप्टो सेल बनाने पर काम हो रहा है। प्रीकर्सर केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स पर नजर रखने के लिए इंटर-मिनिस्ट्री सिस्टम भी बनाया गया है।
नशे से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भी विशेष ध्यान रहेगा। ड्रग्स की कमाई का पैसा कहां जा रहा है, इसे पकड़ने के लिए वित्तीय जांच को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
बॉर्डर से लेकर बैंक अकाउंट तक निगरानी
2029 के रोडमैप में सीमा और बंदरगाहों पर निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। BSF, CISF, इंडियन कोस्ट गार्ड, कस्टम्स और DRI जमीन की सीमाओं, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और कार्गो पर रिस्क-बेस्ड प्रोफाइलिंग करेंगे और जरूरत के मुताबिक स्कैनर लगाए जाएंगे।दूसरी तरफ CBI, विदेश मंत्रालय और इंटरपोल विदेश भागे आरोपियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में काम करेंगे। ED, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और बैंकिंग सिस्टम ड्रग्स के पैसे के ट्रेल को ट्रैक करेंगे।
सरकार की कार्रवाई सिर्फ ड्रग तस्करों तक सीमित नहीं है। 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, ड्रग्स और गैंगवार से जुड़े आरोपी भी शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए, जिनमें 2026 में जुलाई तक 182 नोटिस की प्रक्रिया पूरी हुई। BHARATPOL के जरिए 14 से ज्यादा केंद्रीय एजेंसियों और सभी राज्यों की पुलिस को जोड़ा गया है। 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की करीब 17,874 करोड़ रुपए की संपत्तियां सीज या जब्त की गईं।
नशा छोड़ने वालों के लिए बढ़ेंगे सेंटर
नशा मुक्त भारत अभियान में सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि नशे की मांग कम करने और इलाज पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार के मुताबिक अब तक 25 करोड़ लोगों को ड्रग्स के खिलाफ शपथ दिलाई गई है और इलाज व पुनर्वास के जरिए 5.70 लाख लोगों को नशे से बाहर लाया गया है।नई योजना के तहत सोशल जस्टिस, हेल्थ और जेल प्रशासन मिलकर डी-एडिक्शन सेंटरों की संख्या तीन गुना बढ़ाकर 1,751 करने की दिशा में काम करेंगे। करीब 10 हजार वॉलंटियर्स भी इस अभियान से जुड़ेंगे। NCC, NSS और My Bharat के जरिए बड़ी संख्या में ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को ड्रग-फ्री बनाने का अभियान भी चलाया जाएगा। हर राज्य में पूरी तरह सक्षम एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स तैयार करने के लिए मार्च 2027 तक 7 प्रतिशत केंद्रीय सहायता देने की बात कही गई है। गृह मंत्रालय फॉरेंसिक रिपोर्ट 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी करेगा।
2047 का बड़ा लक्ष्य, 2029 पहला पड़ाव
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि 2047 तक नशामुक्त युवा शक्ति विकसित भारत की नींव बने। इसके लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप पहला बड़ा मिशन है।ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए सरकार ने डेथ ट्रायंगल और डेथ क्रिसेंट से जुड़े रास्तों पर क्वाड्रेंगुलर अप्रोच अपनाने की बात कही है। शाह ने कहा कि जिस संकल्प के साथ नक्सलवाद को खत्म किया गया, उसी संकल्प के साथ ड्रग्स की समस्या को भी खत्म किया जाएगा। उन्होंने साफ संदेश दिया कि विदेशियों का भारत में स्वागत है, लेकिन ड्रग्स के साथ नहीं।
आंतरिक सुरक्षा में भी सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां
पणजी में अमित शाह ने ड्रग्स के साथ देश की व्यापक आंतरिक सुरक्षा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद कम हुआ है और आतंकवाद के आंकड़े लगातार घटे हैं। उन्होंने नक्सलवाद को लगभग अतीत की समस्या बताया और कहा कि रेड कॉरिडोर की कल्पना करने वाले ज्यादातर लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।पूर्वोत्तर में भी करीब 11 हजार युवाओं के हथियार छोड़ने और केंद्र सरकार द्वारा 14 से ज्यादा समझौते किए जाने की बात कही गई। साइबर अपराध के लिए 1930 हेल्पलाइन और नए आपराधिक कानूनों के पुलिस स्टेशन स्तर तक लागू होने का भी जिक्र किया गया। गोवा पुलिस और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की तारीफ करते हुए शाह ने कहा कि नए न्याय संहिता समेत तीन नए आपराधिक कानूनों को तेजी से लागू करने के बाद राज्य में कन्विक्शन रेट 53.2 प्रतिशत तक पहुंचा है।
कंज्यूमर नहीं, अब नार्कोटिक्स पर पूरा नेटवर्क तोड़ने की तैयारी
सरकार के इस रोडमैप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ड्रग्स की समस्या को सिर्फ जब्ती और गिरफ्तारी के नजरिए से नहीं देखा जा रहा। तस्करी के स्रोत, अंतरराष्ट्रीय लिंक, सिंथेटिक ड्रग्स के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर, डिजिटल नेटवर्क, पैसा और नशे के बाद पुनर्वास - इन सभी को एक ही रणनीति में जोड़ा गया है।यही वजह है कि नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप में 2029 तक ड्रग्स के खिलाफ ठोस परिणाम हासिल करने के लिए समयसीमा और जिम्मेदारी तय की गई है। इसके साथ 2047 तक नशामुक्त युवा शक्ति को विकसित भारत की आधारशिला बनाने का लंबा लक्ष्य भी जोड़ा गया है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप क्या है?
यह जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक चलने वाला तीन साल का राष्ट्रीय रोडमैप है, जिसका उद्देश्य ड्रग्स की तस्करी और नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ नशे की मांग कम करना और नशे से प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना है।
अमित शाह ने नशा मुक्त भारत रोडमैप 2029 कब लॉन्च किया?
अमित शाह ने 6 सितंबर 2026 को गोवा की राजधानी पणजी में नार्कोटिक्स कंट्रोल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तीन साल के रोडमैप की घोषणा की।
नशा मुक्त भारत 2029 का मुख्य टारगेट क्या है?
मुख्य लक्ष्य 2029 तक भारत को ड्रग्स के खिलाफ प्रभावी रूप से नशामुक्त बनाने के लिए तस्करी, सप्लाई नेटवर्क, वित्तीय लिंक, नशे की मांग और पुनर्वास पर एक साथ काम करना है। व्यापक लक्ष्य 2047 तक नशामुक्त युवा शक्ति को विकसित भारत की नींव बनाना है।
इंडिया में जीरो नार्कोटिक्स अक्रॉस बॉर्डर्स का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि सरकार भारत की सीमाओं से ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए सीमा, एयरपोर्ट, पोर्ट और कार्गो नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाएगी और डेथ ट्रायंगल व डेथ क्रिसेंट से आने वाले ड्रग रूट पर कार्रवाई करेगी।
ड्रग-फ्री इंडिया बनाने के लिए सरकार की क्या स्ट्रैटेजी है?
रणनीति चार पिलर पर आधारित है—इंटेलिजेंस और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, डिमांड और हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण और कोऑर्डिनेशन।
नशा मुक्त भारत अभियान में NCB की क्या भूमिका है?
NCB को ड्रग नेटवर्क की जांच और केंद्रीय स्तर पर समन्वय की अहम जिम्मेदारी दी गई है। इसका कैडर पुनर्गठित किया गया है और NIDAAN पोर्टल के जरिए नार्कोटिक्स अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है। CCTNS और डेटा फ्यूजन के जरिए ड्रग हॉटस्पॉट, तस्करी के तरीके और जब्ती के पैटर्न को भी मैप किया जा रहा है।