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नेपाल में तबाही के बीच भारत सबसे पहले पहुंचा, 3 विमानों से 62 टन राहत सामग्री भेजी; जानिए किस देश ने कितनी मदद दी?

नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने सबसे तेज राहत पहुंचाते हुए 3 एयरलिफ्ट में 62 टन इमरजेंसी सामग्री भेजी है। टेंट, दवाइयों और खाने के सामान के साथ मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी पहुंची। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी मदद का ऐलान किया।

नेपाल में तबाही के बीच भारत सबसे पहले पहुंचा, 3 विमानों से 62 टन राहत सामग्री भेजी; जानिए किस देश ने कितनी मदद दी?

India 62 Tonne Aid to Nepal: नेपाल-चीन बॉर्डर पर 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद तबाही का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 29 अगस्त तक नेपाल में मौतों का आंकड़ा 626 पहुंच गया है और 2,426 लोग अब भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में 7 लोगों की मौत और 554 लोगों के लापता होने की जानकारी है। हालांकि दोनों तरफ के आंकड़ों में संभावित ओवरलैप को लेकर पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है।

इस आपदा के बीच भारत ने नेपाल को सबसे तेजी से जमीन पर राहत पहुंचाने वाले प्रमुख देशों में अपनी जगह बनाई है। भारत ने तीन एयरलिफ्ट के जरिए अब तक 62 टन इमरजेंसी राहत सामग्री नेपाल भेजी है। इसके साथ भारत ने मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी भेजी है।

3 विमानों से पहुंची 62 टन मदद, दवाइयों से लेकर टेंट तक शामिल

भारत की पहली राहत खेप भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से काठमांडू पहुंची। इसमें 10 टन सामग्री थी। इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाइयां शामिल थीं।

इसके बाद भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से 37.5 टन की दूसरी खेप भेजी गई। इसमें 28.5 टन राहत सामग्री, 8 टन दवाइयां और 1 टन खाद्य सामग्री थी। राहत सामग्री में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट और जनरेटर सेट शामिल थे।

तीसरी उड़ान शुक्रवार को काठमांडू के लिए रवाना हुई, जिसमें 10 टन और मानवीय सहायता भेजी गई। इस तरह तीनों एयरलिफ्ट में भारत ने कुल 62 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई।

भारत की सहायता फिलहाल मुख्य रूप से फिजिकल रिलीफ सप्लाई के रूप में है, यानी सीधे जरूरत का सामान पहुंचाया गया है, न कि किसी बड़ी कैश सहायता की घोषणा के रूप में।

PM मोदी ने बालेन शाह से बात की, भारत बोला- हरसंभव मदद देंगे

आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया।

भारत ने राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय भी बढ़ाया। भारतीय टीमों ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के लिए जरूरी सहायता पहुंचाना शुरू किया।

भारत की ओर से भेजी गई तीसरी खेप के साथ मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल पहुंची। इस टीम का मकसद उन जगहों पर मदद करना है, जहां बाढ़ और मलबे के कारण लोग सुरंगों या दूसरे मुश्किल इलाकों में फंस गए हैं।

भारत को क्यों कहा जाता है ‘First Responder’?

आपदा के समय किसी देश की ओर से सबसे पहले मौके पर पहुंचकर राहत सामग्री, मेडिकल टीम या दूसरी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की भूमिका को आम तौर पर First Responder (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) कहा जाता है।

नेपाल में इस बार भारत ने इसी भूमिका को तेजी से निभाया। फ्लैश फ्लड के कुछ ही समय बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी और इसके बाद लगातार दो और एयरलिफ्ट किए।

भारत पहले भी तुर्किये, सीरिया, म्यांमार, श्रीलंका और वेनेजुएला जैसी आपदाओं में राहत और मानवीय सहायता पहुंचा चुका है। नेपाल में भी तेज प्रतिक्रिया इसी व्यापक Humanitarian Assistance (मानवीय सहायता) और आपदा प्रतिक्रिया नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

नेपाल को बाकी देशों से भी मदद, किसने कितनी सहायता दी?

भारत के अलावा कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नेपाल के लिए राहत और आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

नेपाल सरकार ने बताया है कि वह आपदा राहत के लिए करीब 229 मिलियन डॉलर तक जुटा सकती है। इसमें प्रधानमंत्री के नेचुरल डिजास्टर रिलीफ फंड और प्रधानमंत्री रिलीफ फंड के संसाधन शामिल हैं। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक की ओर से करीब 164 मिलियन डॉलर की इमरजेंसी सहायता जुटाए जाने की संभावना है।

चीन ने नेपाल को इमरजेंसी सामान और कैश सहायता देने की घोषणा की है। चीनी राजदूत झांग माओमिंग के मुताबिक सहायता के लिए समन्वय पूरा कर लिया गया है, हालांकि कैश ट्रांसफर और फिजिकल सामान पहुंचाने की व्यवस्था पर काम चल रहा था।

UAE ने UAE Aid Agency के जरिए 10 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है। यह राशि तत्काल राहत कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।

ब्रिटेन ने राहत और रिकवरी के लिए 5 मिलियन पाउंड यानी करीब 6.8 मिलियन डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने अपने नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए Rapid Deployment Team भी नेपाल भेजी है।

ऑस्ट्रेलिया ने 5 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता का पैकेज घोषित किया है। इसमें 2 मिलियन डॉलर World Food Programme, 2 मिलियन डॉलर Australian NGOs और 1 मिलियन डॉलर स्थानीय स्तर पर रिकवरी और पुनर्वास के लिए दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय सहायता विशेषज्ञों की टीम भेजने की भी घोषणा की है।

दक्षिण कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए 1 मिलियन डॉलर की सहायता देने का ऐलान किया है। उसने अपने 9 लापता नागरिकों की तलाश के लिए Rapid Response Team भी भेजी है।

श्रीलंका ने नेपाल के तत्काल राहत और मानवीय कार्यों के लिए 1 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया है।

अमेरिका ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 5 लाख डॉलर की तत्काल सहायता दी है। इसका इस्तेमाल इमरजेंसी शेल्टर, राहत सामग्री, साफ पानी और हाइजीन की जरूरतों के लिए किया जाएगा। अमेरिका ने एक Disaster Response Adviser भी भेजने की घोषणा की है।

World Bank से लेकर UN तक, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मदद में जुटीं

World Bank ने नेपाल के राहत और रिकवरी अभियान के लिए करीब 25 अरब नेपाली रुपये यानी 163.55 मिलियन डॉलर तक की इमरजेंसी सहायता उपलब्ध कराने की संभावना जताई है।

UN Central Emergency Response Fund (CERF) ने नेपाल के नेतृत्व वाले राहत अभियान के लिए 2.5 मिलियन डॉलर की इमरजेंसी फंडिंग जारी की है।

International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies (IFRC) ने नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के तत्काल राहत अभियान के लिए करीब 1 मिलियन स्विस फ्रैंक जारी किए हैं। इसके अलावा लंबे राहत अभियान के लिए 25 मिलियन स्विस फ्रैंक का Emergency Appeal शुरू किया गया है।

जर्मनी की मानवीय संस्था Welthungerhilfe ने अपने Emergency Relief Fund से 1 लाख यूरो की सहायता देने की बात कही है।

World Health Organization (WHO) ने जरूरी दवाइयां, Emergency Health Kit और Multipurpose Tents भेजे हैं। WHO ने अपने South-East Asia Regional Health Emergency Fund से 1.5 लाख डॉलर भी जुटाए हैं।

Médecins Sans Frontières (MSF) की Emergency Response Team भी नेपाल पहुंच गई है। टीम प्रभावित इलाकों की जरूरतों का आकलन कर रही है और मेडिकल सहायता के लिए तैयार है।

तबाही की वजह ग्लेशियर टूटना, गांवों से सड़क-पुल तक बह गए

26 अगस्त को नेपाल-चीन बॉर्डर के पास अचानक आई बाढ़ को लेकर शुरुआती तौर पर अलग-अलग वजहों की चर्चा हुई थी। बाद की जानकारी में हाई-एल्टीट्यूड ग्लेशियर के टूटने या ग्लेशियल कोलैप्स को इस आपदा का संभावित ट्रिगर बताया गया।

ग्लेशियर और बर्फ-चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। इसने रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। वैज्ञानिक और अधिकारी अभी भी घटना के पूरे क्रम और सटीक कारणों का आकलन कर रहे हैं।

इस आपदा में नेपाल में अब तक हजारों लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है, लेकिन खराब मौसम, भारी मलबे और मुश्किल पहाड़ी इलाके के कारण राहत अभियान में लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। शनिवार को खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ।

भारत की तरफ से लगातार राहत सामग्री पहुंचाए जाने के साथ अब फोकस प्रभावित इलाकों तक मदद पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने पर है। नेपाल में आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका पूरा आकलन रेस्क्यू और रिकवरी ऑपरेशन आगे बढ़ने के बाद ही साफ हो सकेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

1. India ने Nepal को 62 टन Aid क्यों भेजी है?

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बड़ी संख्या में लोगों को राहत, मेडिकल सहायता और जरूरी सामान की जरूरत है। इसी वजह से भारत ने तेजी से 62 टन इमरजेंसी राहत सामग्री नेपाल भेजी है।

2. India ने Nepal को किस तरह की Relief Assistance भेजी?

भारत ने टेंट, अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाइयां, खाद्य सामग्री, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट और जनरेटर सेट भेजे हैं। इसके अलावा मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी भेजी गई है।

3. 62-Tonne Aid में कौन-कौन सी जरूरी चीजें शामिल हैं?

पहली खेप में 10 टन सामग्री थी। दूसरी खेप में 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और भोजन था। तीसरी खेप में 10 टन और सहायता भेजी गई। कुल मिलाकर तीन एयरलिफ्ट में 62 टन सहायता नेपाल पहुंचाई गई।

4. India की First Responder Policy क्या है?

First Responder का मतलब आपदा के बाद तेजी से प्रभावित देश तक राहत, मेडिकल सहायता, बचाव टीम या जरूरी सामग्री पहुंचाना है। भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय आपदाओं के दौरान ऐसी भूमिका निभाई है।

5. Nepal के लिए India को First Responder क्यों कहा जाता है?

इस बार भारत ने नेपाल में आपदा के तुरंत बाद राहत सामग्री की पहली खेप पहुंचाई और उसके बाद लगातार दो और एयरलिफ्ट किए। इसी तेज प्रतिक्रिया की वजह से भारत को First Responder की भूमिका में देखा जा रहा है।

6. India और Nepal के बीच Humanitarian Cooperation कितना महत्वपूर्ण है?

भारत और नेपाल पड़ोसी देश हैं और दोनों के बीच लोगों, व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों का लगातार संपर्क है। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के समय भारत की तेज मानवीय सहायता नेपाल के राहत और बचाव अभियान को जरूरी लॉजिस्टिक और मेडिकल सपोर्ट देती है।

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