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Rice Waste to Organic Ethanol Japan: चावल के कचरे से जापान में बन रहा एथेनॉल, खपत घटने के बीच क्यों चर्चा में आया मॉडल?

जापान में फर्मेनस्टेशन ऑर्गेनिक चावल को फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन से एथेनॉल में बदल रही है। इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स और एरोमा उत्पादों में होता है, जबकि बचे अवशेष पशु आहार में उपयोग होते हैं। यह मॉडल घटती चावल खपत और खाली कृषि भूमि को नई आर्थिक उपयोगिता देता है।

Rice Waste to Organic Ethanol Japan: चावल के कचरे से जापान में बन रहा एथेनॉल, खपत घटने के बीच क्यों चर्चा में आया मॉडल?

Rice Waste to Organic Ethanol Japan: जापान में जिस चावल का इस्तेमाल खाने के लिए नहीं हो पा रहा है, उसे बेकार छोड़ने के बजाय उससे ऑर्गेनिक एथेनॉल तैयार किया जा रहा है। जापानी कंपनी फर्मेनस्टेशन ने इवाते प्रांत के ओशू में ऐसी प्रक्रिया विकसित की है, जिसमें ऑर्गेनिक चावल को फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन के जरिए एथेनॉल में बदला जाता है। इस एथेनॉल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स, एरोमा प्रोडक्ट्स और रोजमर्रा के कुछ घरेलू सामानों में किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया से बचा हुआ पदार्थ भी बेकार नहीं जाता, बल्कि उसका इस्तेमाल पशु आहार और ऑर्गेनिक ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जाता है।यह मॉडल सिर्फ चावल से एथेनॉल बनाने की कहानी नहीं है। इसके पीछे जापान की एक बड़ी समस्या भी है। देश में चावल की घरेलू खपत लंबे समय से घट रही है। जापान के कृषि मंत्रालय के मुताबिक 1962 में प्रति व्यक्ति सालाना चावल की खपत 118 किलो के स्तर पर थी, जो 2021 में घटकर 51.5 किलो रह गई। इसी दौरान कई खेतों का इस्तेमाल भी कम हुआ। ऐसे में फर्मेनस्टेशन का मॉडल खेती, स्थानीय उद्योग और नए बाजार को एक साथ जोड़ने की कोशिश है।

चावल से एथेनॉल बनाने का पूरा खेल

फर्मेनस्टेशन के मुताबिक ओशू में खाली या इस्तेमाल से बाहर हो चुके धान के खेतों को दोबारा उपयोग में लाकर वहां जेएएस-प्रमाणित ऑर्गेनिक चावल उगाया जाता है। कंपनी इस चावल को अपने संयंत्र में ले जाकर विशेष यीस्ट और कोजी की मदद से फर्मेंट करती है। इससे एक तरह का मोरोमी यानी किण्वित मिश्रण तैयार होता है। इसके बाद डिस्टिलेशन के जरिए उसमें से एथेनॉल अलग किया जाता है।यानी सामान्य तौर पर जिस चावल को सिर्फ खाद्य उत्पाद के तौर पर देखा जाता है, यहां उसी फसल को एक औद्योगिक कच्चे माल में बदला जा रहा है। कंपनी के मुताबिक यह एथेनॉल पूरी तरह ट्रेसेबल है और इसे ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
फर्मेनस्टेशन की खासियत यह है कि उसका काम सिर्फ एथेनॉल निकालकर खत्म नहीं होता। उत्पादन के बाद बचने वाले चावल के फर्मेंटेशन अवशेष को भी इस्तेमाल किया जाता है। यही इस मॉडल को सामान्य एथेनॉल उत्पादन से अलग बनाता है।

एथेनॉल निकलने के बाद भी चावल बेकार नहीं होता

चावल को फर्मेंट और डिस्टिल करने के बाद जो राइस मोरोमी लीस यानी फर्मेंटेड अवशेष बचता है, उसमें चावल की भूसी, कोजी और यीस्ट से जुड़े पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। फर्मेनस्टेशन इसे अलग-अलग उत्पादों में इस्तेमाल करने पर काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक सामग्री के तौर पर किया जा सकता है और इसे ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक सामग्री के रूप में प्रमाणित भी किया गया है।इसके अलावा इस तरह के फर्मेंटेड अवशेष का इस्तेमाल स्थानीय मुर्गी और पशुपालकों के लिए फीड के तौर पर भी किया जाता है। कंपनी के मुताबिक इससे उत्पादन संयंत्र और आसपास के किसानों के बीच एक स्थानीय संसाधन चक्र बनता है। पशुओं से मिलने वाला गोबर दोबारा खेतों में खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी खेत से निकला संसाधन एथेनॉल प्लांट तक पहुंचता है और प्लांट से बचा पदार्थ फिर खेती और पशुपालन में लौट सकता है।
इसी सोच को सर्कुलर इकोनॉमी कहा जाता है, जहां किसी संसाधन को इस्तेमाल के बाद फेंकने के बजाय उसे फिर किसी दूसरे काम में लगाया जाता है।

अब यही चावल कॉस्मेटिक्स और घर के सामान में पहुंच रहा

चावल से तैयार एथेनॉल का इस्तेमाल सिर्फ औद्योगिक स्तर पर नहीं हो रहा। फर्मेनस्टेशन के मुताबिक इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स और एरोमा प्रोडक्ट्स के कच्चे माल के रूप में किया जाता है। ओशू शहर की आधिकारिक वेबसाइट भी बताती है कि इस ऑर्गेनिक राइस एथेनॉल का इस्तेमाल हाथ से बनाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स, बॉडी केयर और एरोमा स्प्रे जैसे उत्पादों में किया जा सकता है।कंपनी ने राइस फर्मेंट लीस से भी कॉस्मेटिक सामग्री विकसित की है। इसका मतलब है कि एक ही उत्पादन प्रक्रिया से एथेनॉल के साथ दूसरा उपयोगी कच्चा माल भी तैयार हो सकता है।
फर्मेनस्टेशन के राइस एथेनॉल को नवंबर 2019 में यूएसडीए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और जनवरी 2020 में इकोसर्ट कॉसमॉस ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक सर्टिफिकेशन मिला था। बाद में राइस फर्मेंट लीस एक्सट्रैक्ट को भी कॉसमॉस ऑर्गेनिक प्रमाणन मिला।
इस सर्टिफिकेशन की वजह से यह सामग्री उन कॉस्मेटिक कंपनियों के लिए ज्यादा उपयोगी हो जाती है, जो ऑर्गेनिक और ट्रेसेबल कच्चे माल का इस्तेमाल करना चाहती हैं। कॉसमॉस के मौजूदा प्रमाणित कच्चे माल के डेटाबेस में भी फर्मेनस्टेशन का ऑर्गेनिक राइस एथेनॉल दर्ज है।

जापान को इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

जापान में चावल की खपत कई दशकों से घट रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक प्रति व्यक्ति सालाना खपत 1962 के 118 किलो से घटकर 2021 में 51.5 किलो रह गई। 2022 में मुख्य खाद्य चावल का उत्पादन भी 1967 के शिखर की तुलना में आधे से कम था। दूसरी तरफ जापान में खेती करने वालों की संख्या घट रही है और कई जमीनें खेती से बाहर जा रही हैं।ऐसे माहौल में खाली पड़े धान के खेतों और कम उपयोग वाले कृषि संसाधनों को किसी नए आर्थिक इस्तेमाल से जोड़ना एक विकल्प बन सकता है। फर्मेनस्टेशन ने ओशू में इसी दिशा में काम शुरू किया। कंपनी के मुताबिक उसका उद्देश्य ऐसे संसाधनों में नई वैल्यू पैदा करना है, जिन्हें पहले पर्याप्त उपयोग नहीं मिल रहा था।
यहां एक और अहम बात है। इसे जापान में पैदा होने वाले हर तरह के चावल के कचरे को एथेनॉल में बदलने वाला मॉडल नहीं समझना चाहिए। फर्मेनस्टेशन का सिस्टम खास तरह के स्थानीय चावल, फर्मेंटेशन सुविधा और आसपास मौजूद कृषि नेटवर्क से जुड़ा है। अलग-अलग कृषि अवशेषों के लिए अलग प्रोसेसिंग तकनीक की जरूरत हो सकती है।
यानी मॉडल दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसे हर जगह उसी रूप में लागू करने के लिए कच्चे माल, प्रमाणन, प्रोसेसिंग सुविधा और स्थानीय साझेदारों की जरूरत होगी।

खेत से कॉस्मेटिक तक बना एक पूरा चक्र

फर्मेनस्टेशन का मॉडल इसलिए खास है क्योंकि इसमें चावल सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाला संसाधन नहीं रह जाता। पहले खाली पड़ी जमीन पर ऑर्गेनिक चावल उगाया जाता है। फिर उसे फर्मेंट करके एथेनॉल तैयार किया जाता है। एथेनॉल कॉस्मेटिक्स और एरोमा जैसे उत्पादों में जाता है, जबकि बचा हुआ फर्मेंटेड पदार्थ पशु आहार या कॉस्मेटिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन से निकलने वाले अवशेष को भी उपयोग में लाना है।इसका बड़ा मतलब यह है कि जिसे पहले सिर्फ कम उपयोग वाला कृषि संसाधन समझा जा सकता था, उससे एक पूरी स्थानीय वैल्यू चेन तैयार की जा रही है। खेत, किसान, एथेनॉल उत्पादन, कॉस्मेटिक्स और पशुपालन - सभी एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।
जापान में चावल की घटती घरेलू खपत और खाली होती कृषि भूमि की समस्या के बीच ऐसा मॉडल यह दिखाता है कि किसी पारंपरिक फसल को सिर्फ भोजन के नजरिए से देखने के बजाय उससे नए उद्योग और उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। हालांकि इसकी सफलता स्थानीय परिस्थितियों और आर्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

जापान rice waste को organic ethanol में कैसे बदल रहा है?

फर्मेनस्टेशन ऑर्गेनिक चावल को यीस्ट और कोजी की मदद से फर्मेंट करती है। इससे बने मोरोमी को डिस्टिल करके एथेनॉल तैयार किया जाता है। यह एथेनॉल कॉस्मेटिक्स और एरोमा प्रोडक्ट्स के कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

Rice-derived ethanol का cosmetics में क्या इस्तेमाल होता है?

राइस एथेनॉल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स, स्किनकेयर, एरोमा और कुछ होम-केयर उत्पादों के कच्चे माल के रूप में किया जाता है। ओशू शहर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसका इस्तेमाल हाथ से बनाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स और एरोमा स्प्रे में भी किया जा सकता है।

Fermenstation Japan में rice ethanol कैसे produce करती है?

कंपनी ओशू में जेएएस-प्रमाणित ऑर्गेनिक चावल को फर्मेंट और फिर डिस्टिल करती है। इसके लिए कंपनी अपनी फर्मेंटेशन तकनीक, यीस्ट और कोजी का इस्तेमाल करती है।

क्या unused rice से organic ethanol बनाया जा सकता है?

हां, लेकिन हर तरह के चावल या कृषि कचरे को एक ही तरीके से एथेनॉल में नहीं बदला जा सकता। फर्मेनस्टेशन का मॉडल विशेष रूप से ऑर्गेनिक चावल और स्थानीय उत्पादन व्यवस्था से जुड़ा है।

Rice production waste को recycle करने से environment को क्या फायदा है?

इस तरह के मॉडल में उत्पादन के बाद बचा फर्मेंटेड पदार्थ भी उपयोग में आता है, जिससे कचरा कम करने और स्थानीय संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। फर्मेनस्टेशन अपने मॉडल को नो-वेस्ट और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में रखती है।

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