Subhash Chandra NCLT Liability: ₹22,000 करोड़ से सीधे ₹6.25 करोड़! NCLT के फैसले में क्या हुआ?
Subhash Chandra NCLT Liability से जुड़े मामले में NCLT के एक सदस्य ने करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims के मुकाबले सिर्फ ₹6.25 करोड़ creditors को देने वाले repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया है। यानी प्रस्तावित recovery मूल दावों का करीब 0.028% है और लगभग 99.97% का haircut बनता है। हालांकि अंतिम औपचारिक आदेश अभी मूल बेंच द्वारा दिया जाना है।
₹22,000 करोड़ की Liability का मामला आखिर क्या है?
यह मामला Essel Group के संस्थापक Subhash Chandra के personal guarantee से जुड़ा है। 2022 में Indiabulls Housing Finance Limited ने उनके खिलाफ Insolvency and Bankruptcy Code यानी IBC के तहत कार्रवाई शुरू की थी। यह कंपनी अब Sammaan Capital के नाम से जानी जाती है।मामला उस करीब ₹170 करोड़ के loan से जुड़ा है, जो Vivek Infracon को दिया गया था और जिसके default होने के बाद Chandra, बतौर personal guarantor, insolvency proceedings के दायरे में आए।NCLT ने इस petition को 2024 में admit किया था।इसके बाद creditors के claims का कुल admitted amount करीब ₹22,006.57 करोड़ बताया गया। अब proposed repayment plan में creditors के लिए सिर्फ ₹6.25 करोड़ रखे गए हैं।इसके अलावा insolvency resolution process की लागत के लिए ₹25 लाख का प्रावधान किया गया है।

Subhash Chandra NCLT Liability पर NCLT में क्यों हुआ मतभेद?
Repayment plan पर NCLT के दो सदस्यों की राय एक जैसी नहीं थी।Judicial Member Ashok Kumar Bhardwaj ने repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में राय दी थी, जबकि Technical Member Reena Sinha Puri ने plan में गंभीर कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियां बताईं।इस मतभेद के बाद NCLT President ने Companies Act, 2013 की Section 419(5) के तहत मामले को तीसरे सदस्य के पास भेजा।25 अगस्त को Judicial Member Nilesh Sharma ने repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। इससे plan को majority opinion का समर्थन मिला।अब मामला मूल बेंच के सामने रखा जाएगा, जो इस majority opinion को प्रभावी करने के लिए औपचारिक आदेश पारित करेगी।
Creditors को ₹22,000 करोड़ के दावे पर सिर्फ ₹6.25 करोड़ क्यों?
यही इस मामले का सबसे बड़ा सवाल है।प्रस्तावित plan में admitted claims करीब ₹22,006.57 करोड़ हैं, जबकि creditors के लिए उपलब्ध राशि सिर्फ ₹6.25 करोड़ है। इसका मतलब है कि creditors को उनके मूल claims का बेहद छोटा हिस्सा ही मिल पाएगा।उदाहरण के तौर पर LIC Housing Finance ने plan पर आपत्ति जताई थी। उसका admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ बताया गया, लेकिन प्रस्तावित recovery सिर्फ ₹38.09 लाख थी।Creditors ने यह भी सवाल उठाया कि plan में प्रस्तावित करीब ₹6.5 करोड़ की राशि को indicative और uncertain बताया गया था।हालांकि अंतिम recovery amount में बदलाव संभव है, क्योंकि NCLT ने कुछ unsupported claims को creditors की सूची से हटाने का निर्देश दिया है।
NCLT ने किन Claims पर सवाल उठाए?
NCLT Member Nilesh Sharma ने पाया कि creditors Anil Kumar और Sunil Jain की ओर से दाखिल कुछ बड़े claims के समर्थन में पर्याप्त documents मौजूद नहीं थे।Anil Kumar की ओर से 960 लोगों के claims और Sunil Jain की ओर से 300 लोगों के claims दाखिल किए गए थे।NCLT ने इन claims को creditors की revised list से बाहर करने का निर्देश दिया है।हालांकि tribunal ने यह भी कहा कि Resolution Professional द्वारा इन claims को बिना supporting documents के admit करना एक lapse था, लेकिन यह इतनी गंभीर कमी नहीं थी कि पूरे repayment plan को ही invalid कर दिया जाए।Revised list तैयार होने के बाद ₹6.25 करोड़ की राशि eligible creditors के बीच redistribute की जाएगी।
क्या Chandra से जुड़ी कंपनियों के Votes भी विवाद में थे?
हां। कुछ creditors ने आरोप लगाया था कि Chandra से कथित रूप से जुड़े entities ने voting process में हिस्सा लिया था, इसलिए उनके votes को exclude किया जाना चाहिए।इस argument में Veena Investments Private Limited, Direct Media Distribution Ventures Private Limited, World Crest Advisors LLP, Lemonade Capital Advisors LLP और Corpcall Capital Advisors LLP का उल्लेख हुआ।लेकिन NCLT Member Sharma ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।उनके अनुसार केवल family, business या commercial proximity के आधार पर इन entities को IBC की Section 79(2)(g) के तहत Chandra के “associates” नहीं माना जा सकता।इसलिए उनके votes को सिर्फ इसी आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता।
Creditors ने Subhash Chandra की Net Worth का भी मुद्दा उठाया
Repayment plan का विरोध करने वाले कुछ creditors ने Chandra की कथित net worth को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने ऐसे net-worth certificates का हवाला दिया, जिनमें Chandra की net worth 2017 में करीब ₹45,888 करोड़ और 2018 में करीब ₹40,562 करोड़ बताई गई थी।इसके मुकाबले वर्तमान net worth करीब ₹31.79 करोड़ बताई गई।Creditors ने इसी अंतर को repayment plan के खिलाफ अपनी आपत्तियों में महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया।हालांकि NCLT के तीसरे सदस्य ने repayment plan को approve करने के पक्ष में फैसला दिया है।
क्या यह ₹22,000 करोड़ की पूरी Liability खत्म होने का मतलब है?
ऐसा सीधे तौर पर कहना सही नहीं होगा।NCLT का फैसला एक repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में है, जिसके तहत eligible creditors के लिए ₹6.25 करोड़ की राशि निर्धारित है। यह मूल admitted claims और proposed recovery के बीच भारी अंतर को दिखाता है।साथ ही अंतिम औपचारिक आदेश अभी मूल बेंच द्वारा दिया जाना है और कुछ claims हटाए जाने के बाद recovery amount का वितरण बदल सकता है।इसलिए इसे फिलहाल यह कहना अधिक सटीक होगा कि NCLT की majority opinion ने proposed repayment plan को मंजूरी देने का रास्ता साफ किया है, न कि यह कि ₹22,000 करोड़ की रकम को सीधे ₹6.25 करोड़ की नई liability में बदल दिया गया है।
इस फैसले का Creditors पर क्या असर पड़ेगा?
अगर repayment plan अंतिम रूप से लागू होता है, तो कई creditors को अपने admitted claims की तुलना में बहुत छोटी राशि recover होगी।यही वजह है कि कई banks और financial institutions ने plan का विरोध किया था। उनकी प्रमुख चिंताएं थीं-
Recovery की बेहद कम राशि
Creditors के claims की verification
Voting process में कुछ entities की भागीदारी
Repayment amount की निश्चितता
NCLT ने इन objections में से कुछ को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें पूरे plan को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
निष्कर्ष
Subhash Chandra NCLT Liability का यह मामला भारत की insolvency व्यवस्था में बड़े corporate claims और वास्तविक recovery के बीच के अंतर को सामने लाता है। करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims के मुकाबले ₹6.25 करोड़ की proposed recovery बेहद बड़ा haircut दर्शाती है। हालांकि NCLT के तीसरे सदस्य ने repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में राय दी है, अंतिम औपचारिक आदेश अभी बाकी है। इसलिए मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव मूल NCLT बेंच का final order होगा।
FAQ:
1. NCLT ने Subhash Chandra की Liability को ₹22,000 करोड़ से ₹6.25 करोड़ क्यों किया?
NCLT ने repayment plan को मंजूरी देने के पक्ष में राय दी है, जिसमें eligible creditors के लिए ₹6.25 करोड़ की राशि प्रस्तावित है। इसे सीधे नई liability मानना सही नहीं होगा।
2. Subhash Chandra NCLT Case किससे जुड़ा है?
यह मामला Vivek Infracon को दिए गए करीब ₹170 करोड़ के loan में Subhash Chandra की personal guarantee और उसके default के बाद शुरू हुई insolvency proceedings से जुड़ा है।
3. Subhash Chandra पर कितने रुपये के Claims थे?
NCLT के सामने admitted claims की कुल राशि करीब ₹22,006.57 करोड़ बताई गई थी।
4. NCLT Ruling के बाद Creditors को कितनी रकम मिल सकती है?
प्रस्तावित repayment plan में creditors के लिए ₹6.25 करोड़ रखे गए हैं। कुछ unsupported claims हटने के बाद इसका वितरण revise किया जाएगा।
5. क्या NCLT का फैसला अंतिम है?
अभी मूल बेंच को majority opinion के आधार पर औपचारिक आदेश देना बाकी है। इसलिए प्रक्रिया का अगला चरण final order है।
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