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GDP Growth पर बड़ा विवाद! Subhash Garg के 2.6% दावे को सरकार ने क्यों बताया ‘सांख्यिकीय रूप से अर्थहीन’?

पूर्व वित्त सचिव Subhash Garg ने जून तिमाही की GDP growth 7.8% के बजाय 2.6% होने का दावा किया। सरकारी सूत्रों ने इसे सांख्यिकीय रूप से अर्थहीन बताया और कहा कि दावा नई और पुरानी GDP series के आंकड़ों को मिलाकर निकाला गया है।

GDP Growth पर बड़ा विवाद! Subhash Garg के 2.6% दावे को सरकार ने क्यों बताया ‘सांख्यिकीय रूप से अर्थहीन’?

भारत की GDP growth को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने दावा किया कि जून तिमाही में भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि 7.8% नहीं, बल्कि सिर्फ 2.6% रही। इसके बाद सरकारी सूत्रों ने उनके हिसाब को “statistically meaningless” बताया और कहा कि इसमें अलग-अलग GDP series के आंकड़ों की तुलना की गई है।

Subhash Garg GDP calculation पर सरकार ने क्या आपत्ति जताई?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सुभाष गर्ग ने जून तिमाही के लिए नई 2022-23 base-year series के तहत जारी nominal GDP को पुरानी 2011-12 series के आंकड़े से तुलना की।गर्ग ने Q1 का ₹88.27 लाख करोड़ nominal GDP आंकड़ा लिया, जो नई series के तहत है, और इसकी तुलना Q1 FY26 के ₹86.05 लाख करोड़ से की, जो पुरानी series के तहत प्रकाशित हुआ था।सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस तरह अलग-अलग statistical series के आंकड़ों को मिलाने पर 2.6% का आंकड़ा निकलता है, लेकिन ऐसी तुलना सांख्यिकीय रूप से उचित नहीं है।उनके मुताबिक, दोनों अवधियों की तुलना के लिए एक ही methodology और data sources का इस्तेमाल होना चाहिए।

क्या Subhash Garg का 2.6% GDP growth claim सही है?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2.6% GDP growth का आंकड़ा सही तुलना पर आधारित नहीं है, क्योंकि इसमें नई और पुरानी GDP series के आंकड़ों को एक साथ इस्तेमाल किया गया। नई series के तहत nominal GDP ₹80.00 लाख करोड़ से बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ और real GDP ₹75.46 लाख करोड़ से बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ हुई, जिससे real growth 7.8% निकलती है।

GDP growth 2.6 percent का आंकड़ा कैसे आया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, गर्ग की गणना में नई series के numerator को पुरानी series के denominator के साथ जोड़ा गया। इसी से 2.6% की growth सामने आई।सरकार का तर्क है कि base-year revision के बाद पूरी GDP series में कई बदलाव किए गए हैं। इनमें अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का coverage, sectoral weights, estimation procedures, price treatment और data sources शामिल हैं।इसलिए पुरानी series के किसी एक आंकड़े को नई series के आंकड़े के साथ रखकर सीधे growth rate निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

India GDP growth official data क्या कहता है?

नई GDP series के अनुसार, nominal GDP ₹80.00 लाख करोड़ से बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ हो गई। यह करीब 10.3% की nominal growth है।वहीं real GDP ₹75.46 लाख करोड़ से बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ रही, जो 7.8% की वास्तविक वृद्धि को दर्शाती है।यही वह आंकड़ा है जिसे सरकारी पक्ष आधिकारिक GDP growth rate के तौर पर सामने रख रहा है।सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा अगस्त 2025 में पुरानी series के तहत प्रकाशित हुआ था। बाद में base-year revision के साथ पूरी GDP series को नए तरीके से तैयार किया गया।

GDP data controversy में Statistical Discrepancy का क्या रोल है?

इस विवाद में statistical discrepancy का मुद्दा भी सामने आया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह उत्पादन के आधार पर निकाली गई GDP और स्वतंत्र रूप से अनुमानित expenditure components के बीच का अंतर होता है।Q1 FY26 में यह discrepancy ₹1.37 लाख करोड़ positive थी, जबकि Q1 FY27 में यह ₹1.06 लाख करोड़ negative रही।सरकारी सूत्रों का दावा है कि इस बदलाव ने नवीनतम GDP growth rate को करीब 3.2 percentage points नीचे खींचा। यानी उनके मुताबिक discrepancy ने 7.8% की headline growth को कृत्रिम रूप से बढ़ाया नहीं, बल्कि उसे कम किया।उन्होंने कहा कि अगर discrepancy को यांत्रिक रूप से हटा दिया जाए तो expenditure components ₹74.10 लाख करोड़ से बढ़कर ₹82.42 लाख करोड़ हो जाते हैं, जो करीब 11.2% की वृद्धि है।

GDP Growth Methodology में Deflator को लेकर क्या समझना जरूरी है?

सरकारी पक्ष ने GDP deflator को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। 10.3% nominal GDP growth और 7.8% real growth से aggregate GDP deflator करीब 2.3% निकलता है।हालांकि, GDP deflator को सीधे CPI या WPI के बराबर नहीं माना जा सकता। CPI मुख्य रूप से households द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को मापता है, जबकि WPI या PPI का फोकस मुख्य रूप से goods की wholesale या producer prices पर होता है।GDP में household consumption के साथ government services, investment, exports और घरेलू उत्पादन से जुड़ा value added भी शामिल होता है। आयातित महंगाई का असर भी अलग तरीके से दर्ज होता है क्योंकि imports को GDP से घटाया जाता है।

Double Deflation से कैसे बदलती है GDP की गणना?

नई GDP series में manufacturing के लिए double deflation का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें output और intermediate inputs की कीमतों को अलग-अलग adjust किया जाता है।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगर input prices output prices की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं तो nominal value added, real value added की तुलना में धीमी गति से बढ़ सकता है। इससे implicit GVA deflator negative भी हो सकता है।सरकारी पक्ष का कहना है कि supply-side और commodity-price shocks के दौरान यह एक मान्य सांख्यिकीय परिणाम है और इसे GDP calculation में असामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

Congress ने GDP growth data पर क्या आरोप लगाया?

Subhash Garg के दावे के बाद कांग्रेस ने सरकार पर GDP आंकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने दावा किया कि सरकार ने पिछले साल के GDP आंकड़ों को जानबूझकर कम किया, जिससे मौजूदा साल की growth rate ज्यादा दिखाई दे रही है।कांग्रेस ने गर्ग के हवाले से कहा कि अगर आंकड़ों में बदलाव नहीं किया गया होता तो वास्तविक GDP growth 7.8% के बजाय 2.6% होती।सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2.6% का आंकड़ा ही गलत सांख्यिकीय तुलना से निकला है।

निष्कर्ष

GDP growth को लेकर Subhash Garg का 2.6% का दावा और सरकार का 7.8% का आधिकारिक आंकड़ा अब राजनीतिक और आर्थिक बहस का विषय बन गया है। सरकारी सूत्रों का मुख्य तर्क है कि 2.6% निकालने के लिए अलग-अलग GDP series को मिलाया गया, जबकि नई series में समान methodology के तहत real GDP growth 7.8% है। विवाद का केंद्र इसलिए सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि GDP growth calculation की पद्धति भी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

सुभाष गर्ग ने भारत की GDP growth को लेकर क्या दावा किया?

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने दावा किया कि जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP growth 7.8% नहीं, बल्कि 2.6% रही।

2.6% GDP growth के दावे को सांख्यिकीय रूप से अर्थहीन क्यों बताया गया?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस गणना में नई GDP series के आंकड़े की तुलना पुरानी series के आंकड़े से की गई। सरकार का कहना है कि अलग-अलग methodology वाली series को मिलाकर meaningful growth rate नहीं निकाली जा सकती।

भारत की GDP growth कितनी है?

दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नई GDP series में Q1 की real GDP growth 7.8% रही, जबकि nominal GDP growth 10.3% रही।

GDP growth की गणना कैसे की जाती है?

GDP growth की गणना के लिए समान statistical methodology के तहत अलग-अलग अवधियों की GDP की तुलना की जाती है। इसमें nominal और real GDP तथा कीमतों में बदलाव को अलग-अलग ध्यान में रखा जाता है।

GDP में Statistical Discrepancy क्या होती है?

Statistical discrepancy उत्पादन और expenditure के आधार पर की गई GDP गणनाओं के बीच का residual अंतर है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इसे पारदर्शिता के लिए आंकड़ों में दिखाया जाता है और यह अपने आप में कोई अतिरिक्त उत्पादन नहीं है।

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