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₹28.87 करोड़ के चावल घोटाले का बड़ा खुलासा! CBI ने 8 लोगों पर दर्ज किया केस, जानिए कैसे हुआ Subsidised Rice का खेल

CBI ने ₹28.87 करोड़ के कथित चावल घोटाले में 8 लोगों पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि गरीबों के लिए रियायती दर पर दिया गया 50,645 मीट्रिक टन चावल निजी कारोबारियों तक पहुंचाकर मुनाफे में बेचा गया।

₹28.87 करोड़ के चावल घोटाले का बड़ा खुलासा! CBI ने 8 लोगों पर दर्ज किया केस, जानिए कैसे हुआ Subsidised Rice का खेल

सरकार की ओर से सस्ते दाम पर जरूरतमंदों तक पहुंचाए जाने वाले चावल में कथित हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। ₹28.87 Crore Rice Scam CBI Case में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन (NERAMAC) के अधिकारियों समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि सब्सिडी वाला चावल नियमों को दरकिनार कर निजी कारोबारियों तक पहुंचाया गया और फिर उसे मुनाफे के लिए आगे बेच दिया गया।

₹28.87 करोड़ के कथित Rice Scam में क्या है पूरा मामला?

CBI की 27 अगस्त 2026 को दर्ज FIR के मुताबिक, मामला सरकार की Open Market Sale Scheme (Domestic) यानी OMSS(D) के तहत चावल के आवंटन और वितरण से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी अधिकारियों और निजी कारोबारियों के बीच कथित मिलीभगत के जरिए रियायती दर पर चावल हासिल किया गया।मामले में FCI की दिल्ली रीजन और NERAMAC से जुड़े अधिकारियों के साथ निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों को आरोपी बनाया गया है। CBI का अनुमान है कि इस पूरी व्यवस्था से FCI को करीब ₹28.87 करोड़ का संभावित नुकसान हुआ।हालांकि, यह आरोप फिलहाल CBI की FIR का हिस्सा हैं और मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

Subsidised Rice Diversion Scam में 50,645 MT चावल का आरोप

CBI के अनुसार, 13 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच FCI की दिल्ली रीजन ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था। इसमें से लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल जारी किया गया।एजेंसी का आरोप है कि यह चावल उन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के बजाय निजी कारोबारियों ने FCI के डिपो से उठाया। इसके बाद इसे दूसरे कारोबारियों को कथित तौर पर ज्यादा कीमत पर बेच दिया गया।जिन लोगों के लिए यह सस्ता अनाज प्रस्तावित था, उनमें दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक और प्रवासी मजदूर जैसे कमजोर वर्ग शामिल थे। CBI का आरोप है कि चावल की वास्तविक बिक्री और वितरण को सही दिखाने के लिए रिकॉर्ड में कथित तौर पर फर्जी तारीखवार चार्ट भी तैयार किए गए।

FCI को कैसे हुआ ₹28.87 करोड़ का कथित नुकसान?

CBI ने FIR में चावल की कीमतों के अंतर को भी अपने आरोपों का आधार बनाया है। एजेंसी के मुताबिक करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल को अगर ₹28,900 प्रति मीट्रिक टन के आरक्षित मूल्य पर ई-नीलामी के जरिए बेचा जाता, तो FCI को ज्यादा रकम मिल सकती थी।इसके बजाय चावल को करीब ₹23,200 प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर जारी किया गया। CBI ने इसी अंतर के आधार पर लगभग ₹28.87 करोड़ के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया है।एजेंसी ने यह भी सवाल उठाया है कि OMSS(D) 2025-26 के नियमों के तहत NERAMAC को बिना ई-नीलामी के इस तरह चावल आवंटित किया जा सकता था या नहीं।

NERAMAC और निजी कारोबारियों पर क्या आरोप हैं?

CBI के मुताबिक NERAMAC ने तीन निजी संस्थाओं-Utapalakshi Agro Products Pvt Ltd, Dibesh Commercials Pvt Ltd और Super Grains-को कथित तौर पर चैनल पार्टनर बनाया था।FIR में आरोप लगाया गया है कि इन संस्थाओं के जरिए चावल को दिल्ली-NCR के कारोबारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। कारोबारियों से NERAMAC के बैंक खाते में लगभग ₹23.25 प्रति किलो की राशि जमा कराई गई, जबकि निजी संस्थाओं को कथित तौर पर 64 पैसे से लेकर ₹2.50 प्रति किलो तक कमीशन मिला।CBI का आरोप है कि इसके बाद चावल वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय दूसरे कारोबारियों को बेच दिया गया।एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि NERAMAC के रिकॉर्ड में 23 सब-डिस्ट्रीब्यूटरों की नियुक्ति दिखाने के लिए कथित तौर पर पहले की तारीख वाले नियुक्ति पत्र तैयार किए गए।

CBI ने किन 8 लोगों को बनाया आरोपी?

FIR में कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें FCI दिल्ली रीजन के तत्कालीन अधिकारी, NERAMAC के अधिकारी और निजी कारोबारियों से जुड़े लोग शामिल हैं।आरोपियों में FCI दिल्ली रीजन की तत्कालीन जनरल मैनेजर Kunhiraman Padmini Asha, तत्कालीन AGM (Sales) Brahm Prakash और तत्कालीन Manager (Sales) Amarendra Vikram के नाम शामिल हैं।NERAMAC से तत्कालीन Managing Director Bhaskar Barua, तत्कालीन Additional General Manager Anjal Kumar Dutta और तत्कालीन Deputy Manager (Agri-Business) Dilip Saha को आरोपी बनाया गया है।इसके अलावा Utapalakshi Agro Products और Dibesh Commercials के निदेशक Rajesh Bajaj तथा Super Grains के पार्टनर Pankaj Saraf भी FIR में आरोपी हैं। CBI ने कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों को भी मामले में शामिल किया है।

आखिर कैसे सामने आया कथित चावल वितरण घोटाला?

CBI के अनुसार, NERAMAC के एक अधिकारी ने दिल्ली सरकार के सामने हर सप्ताह 31,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित करने का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में दावा किया गया था कि चावल को कमजोर वर्गों के लिए सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा।इसके बाद यह प्रस्ताव FCI तक पहुंचा। CBI का आरोप है कि NERAMAC ने निजी संस्थाओं के साथ समझौते किए और इन समझौतों में यह दावा किया गया कि उसके पास OMSS(D) के तहत चावल खरीदने और वितरित करने का अधिकार है।जांच एजेंसी का कहना है कि FCI ने ऐसा कोई अधिकार दिए जाने की पुष्टि नहीं की थी। इसके बावजूद कथित तौर पर चावल के आवंटन और रिलीज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।CBI का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने पात्रता और नियमों की पर्याप्त जांच किए बिना प्रस्ताव को मंजूरी दी और चावल जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी से लेकर निजी बिक्री तक

जांच एजेंसी के मुताबिक, चावल को FCI के Ghevra, Mayapuri और Narela डिपो से उठाया गया। आरोप है कि इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय निजी व्यापारियों के नेटवर्क के जरिए आगे बेचा गया।CBI ने दावा किया है कि रिकॉर्ड में चावल के वितरण को वास्तविक दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इससे यह सवाल उठता है कि सरकारी सब्सिडी के तहत उपलब्ध कराए गए खाद्यान्न की निगरानी और वितरण व्यवस्था में कितनी बड़ी चूक हुई।हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

₹28.87 Crore Rice Scam CBI Case में अब आगे क्या होगा?

CBI ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी अब कथित चावल आवंटन, सरकारी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, निजी कंपनियों के समझौते और चावल उठाने वाले कारोबारियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती है।मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान कथित आर्थिक नुकसान, चावल की वास्तविक बिक्री और अधिकारियों तथा निजी संस्थाओं के बीच कथित संबंधों के बारे में क्या सबूत सामने आते हैं।फिलहाल Subsidised Rice Diversion Scam के आरोप जांच के दायरे में हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।

निष्कर्ष

₹28.87 Crore Rice Scam CBI Case ने सरकारी सब्सिडी वाले खाद्यान्न के वितरण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CBI ने FCI और NERAMAC से जुड़े अधिकारियों समेत 8 लोगों पर कथित मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि 50,645 मीट्रिक टन चावल की कथित हेराफेरी में किसकी क्या भूमिका थी और सरकारी खजाने को वास्तव में कितना नुकसान हुआ।

FAQ (Frequently Asked Questions):

₹28.87 Crore Rice Scam Case क्या है?

यह CBI की ओर से दर्ज वह मामला है जिसमें सब्सिडी वाले चावल को नियमों के खिलाफ निजी कारोबारियों तक पहुंचाने और उससे FCI को संभावित नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

CBI ने Rice Scam में कितने लोगों को आरोपी बनाया है?

CBI ने FIR में कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें FCI और NERAMAC के अधिकारी तथा निजी कारोबारियों से जुड़े लोग शामिल हैं।

Subsidised Rice को कैसे Divert करने का आरोप है?

CBI के मुताबिक चावल जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय निजी कारोबारियों ने FCI के डिपो से उठाया और कथित तौर पर दूसरे व्यापारियों को ज्यादा कीमत पर बेच दिया।

CBI ने कितना नुकसान होने का अनुमान लगाया है?

जांच एजेंसी ने करीब ₹28.87 करोड़ के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया है। यह अनुमान चावल की रियायती कीमत और संभावित ई-नीलामी मूल्य के अंतर पर आधारित है।

क्या मामले में आरोप साबित हो चुके हैं?

नहीं। फिलहाल ये CBI की FIR में लगाए गए आरोप हैं। मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों पर अंतिम फैसला होगा।

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