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मुंबई में ऑटो-टैक्सी क्यों हुईं गायब? मराठी टेस्ट के खिलाफ 3 दिन की हड़ताल

मुंबई में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों ने 3 दिन की हड़ताल शुरू की है। ड्राइवरों का आरोप है कि RTO के सवाल ट्रेनिंग से बाहर हैं। इससे बारिश के बीच यात्रियों को ऑटो-कैब के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

मुंबई में ऑटो-टैक्सी क्यों हुईं गायब? मराठी टेस्ट के खिलाफ 3 दिन की हड़ताल

मुंबई में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों ने 3 दिन की हड़ताल शुरू की है। ड्राइवरों का आरोप है कि RTO के सवाल ट्रेनिंग से बाहर हैं। इससे बारिश के बीच यात्रियों को ऑटो-कैब के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

Mumbai Auto Rickshaw Strike 2026: आखिर क्यों भड़का विवाद?

Mumbai Auto Rickshaw Strike 2026 महाराष्ट्र में कमर्शियल वाहन चालकों के लिए लागू मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर शुरू हुई है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन RTO जांच के दौरान पूछे जा रहे कुछ सवाल उनकी ट्रेनिंग से बाहर हैं।शुक्रवार से ही मुंबई में ऑटो और टैक्सी मिलना मुश्किल हो गया था। कई यात्रियों ने 40-50 मिनट तक इंतजार करने की बात कही। सोमवार शाम से ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी।

मराठी टेस्ट में क्या पूछा जा रहा है?

महाराष्ट्र सरकार के नियमों के तहत कमर्शियल पैसेंजर वाहन चालकों के लिए मराठी का working knowledge जरूरी किया गया है। टेस्ट में रोजमर्रा की स्थितियों से जुड़े सवाल शामिल हैं, जैसे-

यात्री से उसकी मंजिल पूछना
किराया और मीटर से जुड़ी बातचीत
रास्ते की जानकारी देना
CNG भरवाने के बारे में बताना
यात्री से सामान्य बातचीत करना
सरकार का कहना है कि टेस्ट का उद्देश्य ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों से बुनियादी बातचीत करने लायक बनाना है।लेकिन ड्राइवरों का आरोप है कि कुछ RTO अधिकारी ऐसे सवाल पूछ रहे हैं, जिनकी जानकारी उन्हें सरकारी ट्रेनिंग में नहीं दी गई।

1,200 से ज्यादा ड्राइवरों को नोटिस

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik के अनुसार, पहले दिन राज्यभर में 8,217 ड्राइवरों की जांच की गई, जिनमें से 1,268 को नोटिस जारी किए गए।मुंबई Metropolitan Region में 3,995 ड्राइवरों की जांच हुई और 604 में मराठी का आवश्यक working knowledge नहीं पाया गया।नोटिस मिलने वाले ड्राइवरों को एक महीने में जरूरी भाषा ज्ञान हासिल करने का समय दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।सरकार के मुताबिक, 1.65 लाख ड्राइवरों को पहले ही मराठी की ट्रेनिंग और प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं।

Image: Getty Images

ड्राइवरों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है?

ड्राइवरों का कहना है कि समस्या सिर्फ भाषा सीखने की नहीं है, बल्कि समय और कमाई की भी है।कई ड्राइवर रोज की कमाई पर निर्भर हैं। कुछ ड्राइवर किराए या कॉन्ट्रैक्ट पर ऑटो चलाते हैं और उन्हें रोजाना कमाई का लक्ष्य पूरा करना पड़ता है। ऐसे में क्लास में जाने का मतलब काम के घंटे और कमाई दोनों का नुकसान हो सकता है।ड्राइवरों का यह भी कहना है कि कम पढ़े-लिखे या उम्रदराज लोगों के लिए नई भाषा सीखना और परीक्षा की तैयारी करना ज्यादा मुश्किल है।

मुंबई की सड़कों पर क्यों बढ़ी परेशानी?

मुंबई में पहले से ही बारिश और पीक ऑवर के कारण यात्रा मुश्किल है। ऐसे में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता कम होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है।मुंबई में करीब 4.6 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी लाइसेंस धारक होने का आंकड़ा रिपोर्ट में उद्धृत किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार महाराष्ट्र में कुल licensed rickshaw और taxi drivers की संख्या करीब 9.65 लाख है।ऐसे में लंबे समय तक हड़ताल रहने पर इसका सीधा असर रोज ऑफिस जाने वाले लोगों, छात्रों और अन्य यात्रियों पर पड़ सकता है।

सरकार क्या कह रही है?

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा है कि सरकार हिंदी भाषी लोगों को मराठी का विशेषज्ञ नहीं बनाना चाहती, बल्कि केवल कामचलाऊ भाषा ज्ञान चाहती है।परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने भी कहा कि नियम का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और महाराष्ट्र की भाषा-संस्कृति की रक्षा करना है।सरकार के मुताबिक, कमर्शियल वाहन चालकों के लिए practical Marathi knowledge की शर्त 1989 के नियमों में पहले से मौजूद थी, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था। 2026 में नियमों में बदलाव कर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया।

क्या मुंबई में सिर्फ भाषा का मुद्दा है?

इस विवाद का एक दूसरा पहलू भी है। उत्तर प्रदेश और बिहार से मुंबई आने वाले कई ड्राइवरों ने Maharashtra Navnirman Sena (MNS) से जुड़े पुराने भाषा विवादों को लेकर भी चिंता जताई है।हालांकि मौजूदा हड़ताल का तत्काल मुद्दा RTO की भाषा जांच और उसके तरीके को लेकर ड्राइवरों की आपत्ति है।ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट और समान मानकों के आधार पर परीक्षा दी जानी चाहिए और ट्रेनिंग में जो सिखाया गया है, उसी के अनुरूप सवाल पूछे जाने चाहिए।

निष्कर्ष

Mumbai Auto Rickshaw Strike 2026 ने मुंबई में भाषा, रोजगार और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन की बहस को फिर सामने ला दिया है। सरकार मराठी के working knowledge को जरूरी बता रही है, जबकि ड्राइवरों की शिकायत टेस्ट के तरीके और रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर को लेकर है। अब बड़ा सवाल यही है कि सरकार और ड्राइवर संगठनों के बीच बातचीत से हड़ताल खत्म होती है या मुंबई की सड़कों पर संकट और बढ़ता है।

FAQ:

Mumbai Auto Rickshaw Strike क्यों हो रही है?

मराठी भाषा की अनिवार्यता और RTO जांच के दौरान पूछे जा रहे कथित out-of-syllabus सवालों के विरोध में।

Mumbai Auto Rickshaw Strike 2026 कितने दिन चलेगी?

ड्राइवरों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू की है।

क्या ड्राइवर मराठी सीखने के खिलाफ हैं?

ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, लेकिन टेस्ट और ट्रेनिंग के तरीके पर सवाल हैं।

मराठी टेस्ट में क्या पूछा जाता है?

यात्रियों से बातचीत, मंजिल, किराया, मीटर, रास्ते और CNG जैसी रोजमर्रा की स्थितियों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

हड़ताल का यात्रियों पर क्या असर पड़ा है?

मुंबई में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता कम हुई है और कई यात्रियों को 40-50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।

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