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One Nation One Election: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, JPC से होने वाली बैठक क्यों हुई रद्द? सामने आया Judicial Review का पेच

One Nation One Election पर विचार कर रही संसदीय समिति की 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के CJI और अन्य जजों से प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में Judicial Review का विषय बन सकता है, इसलिए ऐसी प्रशासनिक स्तर की चर्चा उचित नहीं होगी।

One Nation One Election: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, JPC से होने वाली बैठक क्यों हुई रद्द? सामने आया Judicial Review का पेच

भारत में Lok Sabha और State Assemblies के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव One Nation One Election को लेकर गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने Chief Justice of India और अन्य जजों के साथ संसदीय समिति की 6 अक्टूबर को प्रस्तावित बातचीत को रद्द कर दिया। कोर्ट की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित संशोधन भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में Judicial Review का विषय बन सकता है।

One Nation One Election पर सुप्रीम कोर्ट ने बैठक क्यों रद्द की?

सुप्रीम कोर्ट के Secretary General's Office की ओर से भेजे गए आधिकारिक communication में कहा गया कि वरिष्ठ जजों ने प्रस्तावित बैठक पर विचार किया। चूंकि प्रस्तावित Constitutional Amendment आगे चलकर Supreme Court में Judicial Review के दायरे में आ सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर Administrative Side में चर्चा करना “उचित या वांछनीय” नहीं माना गया। इसी आधार पर 6 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई। यह बैठक Joint Parliamentary Committee और सुप्रीम कोर्ट के Chief Justice तथा अन्य Judges के बीच प्रस्तावित थी।

Parliamentary Panel Supreme Court क्यों जाना चाहता था?

रिपोर्ट के मुताबिक, Election Commission ने 28 सितंबर को एक “Informal Interaction” का प्रस्ताव रखा था, जिसे “Local Study Visit” बताया गया था। अनुरोध Department of Legislative Affairs के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था। समिति के Chairman और BJP MP P.P. Chaudhary ने कहा था कि यात्रा का उद्देश्य Bill पर चर्चा करना नहीं, बल्कि सदस्यों को Supreme Court परिसर और उसकी Library से परिचित कराना था। उनके मुताबिक समिति के कुछ सदस्य पहले कभी सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे। हालांकि, इस प्रस्तावित बातचीत पर कुछ सदस्यों और नेताओं ने आपत्ति जताई थी। Rajya Sabha MP और Senior Advocate Kapil Sibal ने भी Sitting Judges से इस तरह की बातचीत के औचित्य पर सवाल उठाया था, क्योंकि भविष्य में इस कानून की Constitutional Validity अदालत के सामने आ सकती है।

One Nation One Election Bill में क्या प्रस्ताव है?

One Nation One Election का उद्देश्य Lok Sabha और State Legislative Assemblies के चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था बनाना है। इसके लिए Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 और Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2024 दिसंबर 2024 में Lok Sabha में पेश किए गए थे। दोनों Bills फिलहाल Joint Parliamentary Committee के पास हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Lok Sabha और सभी State Assemblies के चुनाव एक साथ कराने का ढांचा तैयार किया जाना है। यदि Lok Sabha या किसी State Assembly को पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग किया जाता है, तो प्रस्तावित प्रावधानों के तहत होने वाला चुनाव शेष कार्यकाल के लिए होगा, ताकि अगला चुनाव निर्धारित simultaneous-election cycle के साथ हो सके। किसी राज्य में एक साथ चुनाव कराना संभव न होने की स्थिति में Election Commission राष्ट्रपति को चुनाव टालने की सिफारिश कर सकता है।

129th Constitutional Amendment Bill अभी कहां है?

Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 को 17 दिसंबर 2024 को Lok Sabha में पेश किया गया था और बाद में इसे 39 सदस्यीय Joint Parliamentary Committee को भेजा गया। PRS Legislative Research के अनुसार, Bill अभी Committee के स्तर पर है। इस समिति की अध्यक्षता BJP MP और पूर्व Law Minister P.P. Chaudhary कर रहे हैं। समिति का कार्यकाल भी बढ़ाया जा चुका है और अब यह Winter Session के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक जारी रहने वाला है। पिछले एक साल में चार पूर्व Chief Justices of India-J.S. Khehar, Ranjan Gogoi, D.Y. Chandrachud और U.U. Lalit-समिति के सामने अपनी राय रख चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संवैधानिक संशोधनों के बाद simultaneous elections की संवैधानिक व्यवहार्यता पर विचार रखे, साथ ही प्रस्तावित व्यवस्था में Election Commission को मिलने वाली व्यापक शक्तियों को लेकर भी मुद्दे उठाए।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित बैठक रद्द किए जाने से One Nation One Election पर संसदीय समिति की प्रक्रिया अपने आप खत्म नहीं होती। दोनों संबंधित Bills अभी Joint Parliamentary Committee के पास हैं और समिति विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श के आधार पर अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिया गया मौजूदा निर्णय मुख्य रूप से प्रस्तावित बैठक के प्रशासनिक पक्ष से जुड़ा है। कोर्ट ने यह कहते हुए बैठक से दूरी बनाई है कि प्रस्तावित संशोधन भविष्य में Judicial Review के सामने आ सकता है। इससे विधायी प्रक्रिया और न्यायिक भूमिका के बीच संस्थागत दूरी का सवाल भी चर्चा में आया है।

निष्कर्ष

One Nation One Election पर सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित बैठक रद्द होने से अब बहस का केंद्र Judicial Review और न्यायपालिका की संस्थागत भूमिका पर भी आ गया है। हालांकि, इससे संबंधित Bills अभी संसदीय समिति के पास हैं और उनकी विधायी प्रक्रिया जारी है। प्रस्तावित व्यवस्था पर अंतिम स्थिति आगे की संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक समीक्षा पर निर्भर करेगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

One Nation One Election Supreme Court मामला क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को Chief Justice और अन्य Judges के साथ One Nation One Election पर संसदीय समिति की प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी। कोर्ट ने संभावित Judicial Review को इसका कारण बताया।

Supreme Court Judges ने Parliamentary Panel से मिलने से क्यों इनकार किया?

कोर्ट के अनुसार प्रस्तावित Constitutional Amendment भविष्य में Judicial Review का विषय बन सकता है। इसलिए Administrative Side पर इस मुद्दे पर चर्चा को उचित या वांछनीय नहीं माना गया।

One Nation One Election क्या है?

यह Lok Sabha और State Legislative Assemblies के चुनाव एक साथ कराने की प्रस्तावित व्यवस्था है। इसे लागू करने के लिए संविधान में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।

One Nation One Election Bill 2026 क्या है?

मौजूदा प्रस्ताव का आधिकारिक नाम Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 है। इसे 2024 में पेश किया गया था और यह अभी Joint Parliamentary Committee के पास विचाराधीन है।

Parliamentary Panel Supreme Court Judges से क्यों मिलना चाहता था?

समिति की ओर से इसे Supreme Court का Local Study Visit और परिसर व Library से परिचित होने का कार्यक्रम बताया गया था। प्रस्तावित Informal Interaction को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं।

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