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केदारनाथ में कचरे का बढ़ता बोझ: 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के बीच 5 महीने में 50.3 टन वेस्ट, सफाई के लिए जुटे कर्मचारी

केदारनाथ में 2026 के अप्रैल-अगस्त के दौरान 50.30 टन कचरा दर्ज हुआ, जो 2025 के पूरे साल के 21.40 टन से काफी अधिक है। प्लास्टिक कचरे के प्रसंस्करण और सफाई व्यवस्था के साथ प्रशासन के सामने बढ़ते कचरा दबाव को नियंत्रित करने की चुनौती है।

केदारनाथ में कचरे का बढ़ता बोझ: 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के बीच 5 महीने में 50.3 टन वेस्ट, सफाई के लिए जुटे कर्मचारी

केदारनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालु संख्या के साथ कचरे का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच यहां 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया, जो 2025 की पूरी यात्रा अवधि में दर्ज 21.40 टन कचरे से ढाई गुना से भी अधिक है। RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती पांच महीनों का कचरा पिछले तीन वर्षों के किसी भी पूरे साल के आंकड़े से ज्यादा है।

Kedarnath Dham Pollution Crisis: पांच महीने में 50.30 टन कचरा

PTI
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केदारनाथ धाम में Kedarnath Dham Pollution Crisis को लेकर सामने आए आंकड़े बढ़ते कचरा दबाव की तस्वीर दिखाते हैं। केदारनाथ नगर पंचायत से RTI के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कुल 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया।वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 32.58 टन, 2024 में 26.10 टन और 2025 में 21.40 टन था। यानी 2026 के केवल पांच महीनों में दर्ज कचरा 2023 के पूरे साल से करीब 54%, 2024 से करीब 93% और 2025 के मुकाबले करीब 135% अधिक है।

हर महीने बढ़ता गया कचरे का आंकड़ा

नगर पंचायत के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में 1.7 टन कचरा दर्ज हुआ। मई में यह बढ़कर 16.3 टन, जून में 11.5 टन, जुलाई में 10.5 टन और अगस्त में 10.3 टन रहा। इससे साफ है कि यात्रा सीजन के दौरान कचरे का दबाव लगातार बना रहा।

Kedarnath Waste Management के लिए क्या हो रहा है?

बढ़ते Kedarnath Waste Management दबाव के बीच कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में संभालने और उसके निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा भी दर्ज किया गया, जिसमें से लगभग 18.5 टन यानी 92.5% का प्रसंस्करण किया जा चुका था।सूखे कचरे को मशीनों की मदद से सिल्लियों में बदला जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 24 टन सूखे कचरे की सिल्लियां तैयार की गई हैं, जिन्हें धाम से नीचे लाया जा रहा है। बाकी कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया भी जारी है।केदारनाथ मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था के लिए शौचालय और डस्टबिन भी लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यात्रा मार्ग पर 31 सुलभ शौचालय, 71 स्टील फ्रेम शौचालय और 600 से अधिक डस्टबिन उपलब्ध हैं।

15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं की आवाजाही

2026 में केदारनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी 15 लाख से अधिक रही। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 24 सितंबर तक 15,42,236 श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके थे।इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच Kedarnath Plastic Waste और अन्य ठोस कचरे का प्रबंधन चुनौती बना हुआ है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर भी सफाई व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।इसी दिशा में श्रद्धालुओं को अपना सूखा कचरा वापस ले जाने के लिए ‘कैरी मी बैक’ जैसी पहल भी शुरू की गई है।

बद्रीनाथ में कचरे से हुई थी 8.89 लाख रुपये की आय

कचरे के निस्तारण को संसाधन में बदलने का उदाहरण बद्रीनाथ में भी सामने आया था। 2025 की यात्रा अवधि में नगर पंचायत ने करीब 230 टन कचरे का निस्तारण कर 8.89 लाख रुपये की आय अर्जित की थी।इसमें 133 टन सूखे कचरे के ब्लॉक तैयार किए गए, जबकि 97 टन गीले कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाई गई। इसके लिए एमआरएफ सेंटर, कॉम्पेक्टर और ऑर्गेनिक वेस्ट कनवर्टर जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

Kedarnath Environmental Crisis से निपटने में चुनौती

Kedarnath Environmental Crisis का मुद्दा केवल कचरे की मात्रा तक सीमित नहीं है। हिमालयी क्षेत्र में कचरे का संग्रह, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण सभी अपने-अपने स्तर पर चुनौतीपूर्ण हैं।इसलिए Kedarnath Dham Cleanliness के लिए केवल डस्टबिन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कचरा कम पैदा हो, स्रोत पर अलग किया जाए, प्लास्टिक का इस्तेमाल घटे और जो कचरा निकले उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो इन सभी स्तरों पर लगातार काम जरूरी है।

निष्कर्ष

2026 में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि Kedarnath Dham Pollution Crisis के बीच तीर्थयात्रा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पांच महीनों में 50.30 टन कचरे का आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ा है। ऐसे में प्रभावी Kedarnath Waste Management, प्लास्टिक नियंत्रण और श्रद्धालुओं की भागीदारी से ही केदारनाथ की प्राकृतिक और धार्मिक विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Kedarnath Dham में Pollution Crisis क्यों बढ़ रहा है?

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य ठोस कचरे की मात्रा बढ़ रही है।

Kedarnath में 2026 में कितना Waste जमा हुआ?

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच केदारनाथ में 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया।

Kedarnath Dham में Waste Management की क्या स्थिति है?

कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में संभालकर प्लास्टिक और सूखे कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है।

क्या Kedarnath pilgrimage से pollution बढ़ रहा है?

बढ़ती तीर्थयात्री संख्या के साथ कचरे का दबाव भी बढ़ा है, हालांकि इसका प्रबंधन करने के लिए प्रशासनिक और स्वच्छता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं।

Kedarnath में Plastic Waste को कैसे कम किया जा सकता है?

एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करना, कचरे को वापस लाना, स्रोत पर पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण इसके प्रमुख उपाय हैं।

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