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Iran Currency Crisis : ईरान की करेंसी धड़ाम, 1 डॉलर के लिए देने पड़ रहे 25 लाख रियाल - आखिर क्यों टूट रहा रियाल?

ईरान का रियाल खुले बाजार में रिकॉर्ड गिरावट के साथ 25 लाख प्रति डॉलर पहुंच गया है। युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध, तेल निर्यात में गिरावट और विदेशी मुद्रा की कमी से संकट गहरा रहा है। महंगाई बढ़ने से खाद्य पदार्थों और दवाओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है।

Iran Currency Crisis : ईरान की करेंसी धड़ाम, 1 डॉलर के लिए देने पड़ रहे 25 लाख रियाल - आखिर क्यों टूट रहा रियाल?

Iran Currency Crisis : ईरान की करेंसी रियाल मंगलवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। खुले बाजार में एक डॉलर खरीदने के लिए करीब 25 लाख रियाल देने पड़ रहे हैं। 27 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले एक डॉलर की कीमत करीब 17 लाख रियाल थी। यानी सात महीने में एक डॉलर खरीदने की लागत करीब 47% बढ़ गई है। इसके उलट रियाल की डॉलर के मुकाबले वास्तविक कीमत करीब 32% घटी है। ईरान के सेंट्रल बैंक की आधिकारिक दर करीब 16.5 लाख रियाल प्रति डॉलर है, लेकिन आम लोगों और कारोबारियों के लिए खुले बाजार की दर ज्यादा मायने रखती है।रियाल की इस कमजोरी के पीछे लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंध, युद्ध से अर्थव्यवस्था को हुआ नुकसान, ईरानी तेल की बिक्री और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता पर बढ़ता दबाव प्रमुख कारण हैं। सितंबर में Reuters ने बताया कि अमेरिकी दबाव और नाकाबंदी के बीच ईरान के तेल निर्यात में भी बड़ी गिरावट आई है।

ईरान की कमाई के सबसे बड़े स्रोत पर अमेरिकी दबाव

ईरान की विदेशी मुद्रा कमाई का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत तेल निर्यात है। इसलिए अमेरिकी प्रतिबंधों का बड़ा हिस्सा ईरान के तेल कारोबार को निशाना बना रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, चीन ईरान के करीब 90% तेल निर्यात का खरीदार है। इसी वजह से अमेरिका ने चीन की उन स्वतंत्र रिफाइनरियों और कारोबारियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरानी तेल खरीदते हैं।अमेरिका ने ईरानी तेल की ढुलाई करने वाले जहाजों और शैडो फ्लीट यानी प्रतिबंधों से बचकर तेल पहुंचाने वाले जहाजों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क में फ्रंट कंपनियां, बिचौलिए और अलग-अलग देशों में मौजूद कारोबारी ढांचे इस्तेमाल किए जाते हैं। अगस्त में शुरू किए गए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत इन नेटवर्क पर दबाव और बढ़ाया गया।
समस्या सिर्फ तेल बेचने की नहीं है। तेल से मिलने वाला पैसा ईरान तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरानी करेंसी एक्सचेंज, विदेशी कंपनियों और शैडो बैंकिंग नेटवर्क पर कार्रवाई की है। मई में अमेरिकी ट्रेजरी ने ऐसे नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए थे, जिनके जरिए अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा लेनदेन में मदद मिलने का आरोप था। अगस्त में भी ईरान के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर की रकम ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई की गई।
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर विदेशी कंपनियों और बैंकों तक भी पहुंचता है। अगर कोई विदेशी संस्था प्रतिबंधित ईरानी कारोबार में मदद करती है, तो उसके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है। इसे सेकेंडरी सैंक्शंस कहा जाता है। अमेरिकी ट्रेजरी ने हाल के महीनों में ऐसे जोखिम को और बढ़ाया है।

रियाल गिरा तो खाने-पीने का सामान भी महंगा हुआ

कमजोर रियाल का सबसे सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। Reuters के मुताबिक जुलाई में ईरान की सालाना महंगाई करीब 66% थी और खाने की कीमतें एक साल में 128% तक बढ़ गई थीं। युद्ध और अमेरिकी नाकाबंदी से आयात, परिवहन और उत्पादन पर दबाव बढ़ने के कारण महंगाई और तेज हुई।अल जजीरा ने तेहरान में रोजमर्रा की चीजों की कीमतों की तुलना की। युद्ध से पहले 20 लाख रियाल में करीब 4 किलो टमाटर, आधा किलो चिकन और लगभग 1 लीटर खाना पकाने का तेल खरीदा जा सकता था। अगस्त तक इतनी ही रकम में इन चीजों की करीब आधी मात्रा मिल रही थी। टमाटर की कीमत 71%, चिकन 74% और खाना पकाने के तेल की कीमत करीब 177% बढ़ी।
दवाओं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ा है। अल जजीरा के अनुसार इंसुलिन की कीमत युद्ध से पहले की तुलना में करीब 642% बढ़ गई थी, जबकि पैरासिटामोल करीब 93% महंगा हुआ। रिपोर्ट में करीब 800 दवाओं की कमी की बात भी सामने आई थी, जिनमें जरूरी और जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं।
रोजगार पर भी युद्ध और आर्थिक संकट का असर पड़ा है। Reuters के अनुसार वसंत में बेरोजगारी दर करीब 9.1% थी और काम करने वालों की संख्या एक साल में लगभग 4.5 लाख कम हुई। निर्माण, उद्योग और दूसरे कारोबारों में गतिविधियां प्रभावित होने से परिवारों की आमदनी पर दबाव बढ़ा है।

होर्मुज पर बातचीत से जुड़ी ईरान की उम्मीद

आर्थिक संकट के बीच ईरान की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर चल रही बातचीत पर भी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत तेज हो रही है और होर्मुज को फिर खोलने का मुद्दा इसका केंद्र है। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है।ईरान ने अमेरिका के सामने 7 दिन का रोडमैप रखा था। इसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई। ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फ्रीज करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग की थी। यह प्रस्ताव कतर की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था।
लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 सितंबर को ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बावजूद बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क जारी है।

28 फरवरी से युद्ध और अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्य अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है और परमाणु तकनीक के इस्तेमाल के अपने अधिकार की बात करता है।सात महीने से ज्यादा चले इस संघर्ष ने पहले से प्रतिबंधों से दबाव में चल रही ईरानी अर्थव्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिकी नाकाबंदी और तेल निर्यात में गिरावट से डॉलर की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जबकि युद्ध से उत्पादन और व्यापार पर असर पड़ा है। Reuters के मुताबिक ईरान का तेल निर्यात युद्ध से पहले के करीब 17 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर सितंबर की शुरुआत में करीब 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था।
इसका असर रियाल पर साफ दिखाई दे रहा है। अगर खुले बाजार में डॉलर के लिए 25 लाख रियाल की जरूरत बनी रहती है, तो आयातित सामान, दवाएं, खाद्य पदार्थ और विदेशी मुद्रा में भुगतान करने वाले कारोबारों पर दबाव और बढ़ सकता है। ईरान के लिए आगे की चुनौती युद्ध, तेल आय, प्रतिबंध और महंगाई के बीच अपनी विदेशी मुद्रा व्यवस्था को संभालने की है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Iran Currency Crisis क्यों बढ़ रहा है?

ईरान का करेंसी संकट युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल निर्यात पर दबाव, विदेशी मुद्रा की कमी और पहले से मौजूद आर्थिक समस्याओं के कारण गहरा हुआ है। सितंबर 2026 में खुले बाजार में डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ऊपर पहुंच गई।

Iranian Rial की value में इतनी गिरावट क्यों आई?

ईरान की डॉलर कमाई और विदेशी मुद्रा तक पहुंच प्रभावित हुई है। तेल निर्यात में गिरावट, अमेरिकी प्रतिबंध और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई से डॉलर की उपलब्धता कम हुई, जिससे खुले बाजार में रियाल पर दबाव बढ़ा।

Iran की Currency Collapse के पीछे कौन-कौन से कारण हैं?

लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, 28 फरवरी से चल रहा युद्ध, तेल निर्यात पर अमेरिकी दबाव, विदेशी मुद्रा की कमी, महंगाई और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट इसके प्रमुख कारण हैं।

US Sanctions on Iran का rial पर क्या असर पड़ा है?

अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान के तेल कारोबार, शिपिंग, बैंकों, करेंसी एक्सचेंज और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच पर दबाव बढ़ाया है। इससे ईरान के लिए विदेशी मुद्रा हासिल करना और उसे देश में लाना मुश्किल हुआ है।

Iran में Inflation Crisis कितनी गंभीर है?

Reuters के मुताबिक जुलाई 2026 में सालाना महंगाई करीब 66% और खाद्य महंगाई करीब 128% थी। कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में युद्ध के बाद तेज वृद्धि दर्ज की गई।

Iranian Rial Exchange Rate में गिरावट का आम लोगों पर क्या असर है?

रियाल कमजोर होने से आयातित सामान और जरूरी वस्तुएं महंगी होती हैं। ईरान में खाद्य पदार्थों, दवाओं और दूसरी आवश्यक चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे समान रकम में पहले की तुलना में कम सामान मिल रहा है।

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