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Tahir Ashrafi Archbishop Award : पाकिस्तानी मौलवी का अंतरराष्ट्रीय सम्मान रद्द, ओसामा के साथ कनेक्शन से क्यों बढ़ा विवाद?

पाकिस्तानी धार्मिक नेता ताहिर अशरफी को सितंबर 2026 में मिला ह्यूबर्ट वाल्टर अवॉर्ड पुरानी ओसामा बिन लादेन संबंधी टिप्पणी सामने आने पर वापस ले लिया गया। अब उनके भाई हसन मुआविया पर कथित ब्लासफेमी ब्लैकमेल नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगे हैं, जिनसे अशरफी इनकार करते हैं।

Tahir Ashrafi Archbishop Award : पाकिस्तानी मौलवी का अंतरराष्ट्रीय सम्मान रद्द, ओसामा के साथ कनेक्शन से क्यों बढ़ा विवाद?

Tahir Ashrafi Archbishop Award : कैंटरबरी के आर्चबिशप से सम्मान पाने वाले पाकिस्तानी मौलवी ताहिर अशरफी पर ईशनिंदा के नाम पर ब्लैकमेल करने वाले एक गैंग को संरक्षण देने का आरोप लगा है। यह आरोप टेलीग्राफ की एक जांच में सामने आया है। पाकिस्तान के इंटरफेथ हार्मनी के विशेष दूत ताहिर अशरफी को डेम सारा मुलाली ने सितंबर 11 हमलों की बरसी पर आयोजित एक समारोह में ह्यूबर्ट वाल्टर अवॉर्ड दिया था। यह सम्मान उन्हें धार्मिक सहिष्णुता के प्रति उनके “अटूट समर्पण” के लिए दिया गया था।पिछले सप्ताह यह सामने आने के बाद अवॉर्ड वापस ले लिया गया कि ब्रिटेन की दोहरी नागरिकता रखने वाले अशरफी ने पहले ओसामा बिन लादेन को सम्मानित किया था।अब टेलीग्राफ की जांच में उनके भाई को एक ऐसे गैंग से जोड़कर देखा गया है, जिस पर दर्जनों लोगों को ईशनिंदा के आरोप में अगवा करने, प्रताड़ित करने और ब्लैकमेल करने का आरोप है।

हाफ़िज़ मुहम्मद ताहिर महमूद अशरफ़ी और उनकी पत्नी को 'ह्यूबर्ट वाल्टर अवॉर्ड' दिया गया। (Image : X/@UnityNewsNet)
हाफ़िज़ मुहम्मद ताहिर महमूद अशरफ़ी और उनकी पत्नी को 'ह्यूबर्ट वाल्टर अवॉर्ड' दिया गया। (Image : X/@UnityNewsNet)

जांच में क्या दावा किया गया है?

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अशरफी के भाई हसन मुअविया अशरफी कथित तौर पर एक ऐसे ईशनिंदा गैंग के नेता हैं, जो पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर लोगों को अगवा करने, प्रताड़ित करने और ब्लैकमेल करने का काम करता था।रिपोर्ट में कहा गया है कि अशरफी ने सार्वजनिक रूप से अपने भाई का बचाव किया, पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों पर “ईशनिंदा करने वालों को बचाने” का आरोप लगाया और गैंग की जांच कर रहे एक जज को “कुत्ता” तक कहा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अशरफी के पास ब्रिटेन की नागरिकता होने के कारण वह लंदन से पाकिस्तान और पाकिस्तान से लंदन के बीच स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सके हैं।
पाकिस्तान में ईशनिंदा के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। पुलिस का कहना है कि ऐसे गैंग सोशल मीडिया पर “हनी ट्रैप” का इस्तेमाल करते हैं। इसमें युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए फंसाया जाता है और कथित तौर पर ईशनिंदा से जुड़ा अपराध करने के लिए उकसाया जाता है। इसके बाद उनसे पैसे की वसूली की जाती है।
पाकिस्तान के नेशनल कमीशन फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, 2020 और 2021 में हर साल करीब 10 लोगों को ईशनिंदा के मामलों में जेल भेजा गया था। 2023 में यह संख्या बढ़कर 200 से ज्यादा हो गई।

कथित गैंग कैसे काम करता था?

टेलीग्राफ ने इस गैंग के निशाने पर आए कई लोगों के परिवारों से बात की। सभी ने बदले की कार्रवाई के डर से अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने को कहा।एक व्यक्ति ने बताया कि उसके रिश्तेदार ने फेसबुक के एक ग्रुप को जॉइन किया था। वहां उसकी एक युवती से दोस्ती हुई। बाद में उस युवती ने कथित तौर पर उसे एक ऐसी तस्वीर शेयर करने के लिए तैयार किया, जिसमें एक महिला के स्तनों की तस्वीर को कुरान की एक आयत के साथ जोड़ा गया था।
इसके बाद उस व्यक्ति को कथित तौर पर अगवा कर लिया गया। गैंग ने उसे छोड़ने के बदले 10 लाख पाकिस्तानी रुपये, यानी करीब 2,700 ब्रिटिश पाउंड, की मांग की। बाद में उसके खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया गया और उसे जेल भेज दिया गया।
निर्वासित पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट फैक्ट फोकस ने दावा किया है कि इस गैंग के कम से कम चार पीड़ितों की यातना के कारण मौत हुई। एक मामले में कथित तौर पर लकड़ी के डंडे से बलात्कार किए जाने का आरोप है। दूसरे मामले में जेल में किए गए पोस्टमार्टम में कमर के निचले हिस्से के आसपास गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया, लेकिन मौत की वजह “यूरिन रिटेंशन” यानी पेशाब रुकना बताई गई।

“हमारे पास जो कुछ था, उसने सब ले लिया”

टेलीग्राफ से बातचीत में पीड़ितों के परिवारों ने कहा कि वे यह देखकर हैरान थे कि आर्चबिशप ने ताहिर अशरफी को सम्मान दिया।एक परिवार के सदस्य ने कहा, “हम उन्हें यह अवॉर्ड मिलता देखकर हैरान थे।”
परिवारों का आरोप है कि अशरफी और उनके भाई ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। एक व्यक्ति ने कहा कि अशरफी ने उनके परिवार को “ऐसी खाई में डाल दिया, जिससे हम बाहर नहीं निकल सकते।” परिवार ने यह भी बताया कि अपने रिश्तेदार को बचाने की कोशिश में उन्हें भारी आर्थिक और व्यक्तिगत जोखिम उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा, “हमारे पास जो कुछ था, उसने सब ले लिया।”
एक सूत्र ने आरोप लगाया कि अशरफी इस पूरे मामले में “गुड कॉप” की भूमिका निभाते थे, जबकि उनका भाई “बैड कॉप” की तरह काम करता था और लोगों को फंसाने का काम करता था।
सूत्र ने कहा कि मुअविया के लिए ऐसा करना तभी संभव है, जब उसे अपने भाई का समर्थन हासिल हो। उसके मुताबिक, अशरफी के खुफिया एजेंसियों, नेताओं और नौकरशाहों से संपर्क हैं।

अशरफी ने क्या जवाब दिया?

ताहिर अशरफी ने खुद और अपने भाई के किसी ईशनिंदा ब्लैकमेल गैंग का हिस्सा होने से इनकार किया है। उन्होंने आलोचकों से कथित जबरन वसूली के सबूत पेश करने को कहा है।टेलीग्राफ ने यह भी बताया कि पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपियों का बचाव करना बेहद जोखिम भरा है। पिछले 30 वर्षों में 100 से ज्यादा वकील, जज और सीनेटर कथित तौर पर भीड़ की हिंसा में मारे जा चुके हैं।
पश्चिमी देशों में ताहिर अशरफी को पाकिस्तान के ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संपर्क रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। वह कट्टरपंथी समूहों और आतंकवादी संगठन के रूप में नामित संगठनों से भी संवाद करते रहे हैं।
वह पहले एक एंटी-शिया संगठन के सदस्य रह चुके हैं। हालांकि बाद में उन्होंने पोलियो वैक्सीनेशन अभियानों का समर्थन किया, इस्लामिक स्टेट को “आतंकवादी संगठन” बताया और इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनाए जाने का समर्थन किया।
वह पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के चेयरमैन भी हैं। यह संगठन इस्लाम की अलग-अलग धाराओं से जुड़े मौलवियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसी वजह से पाकिस्तान में उनके बयानों को खासा महत्व दिया जाता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Tahir Ashrafi कौन हैं और उन्हें Archbishop ने award क्यों दिया था?

हाफिज मुहम्मद ताहिर महमूद अशरफी पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के चेयरमैन और इंटरफेथ हार्मनी से जुड़े धार्मिक नेता हैं। सितंबर 2026 में उन्हें लैम्बेथ पैलेस में ह्यूबर्ट वाल्टर अवॉर्ड फॉर रिकन्सिलिएशन एंड इंटरफेथ कोऑपरेशन दिया गया था। लैम्बेथ पैलेस के अनुसार सम्मान पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय के समर्थन के लिए दिया गया था।

Why was the Hubert Walter Award given to Tahir Ashrafi?

लैम्बेथ पैलेस के आधिकारिक बयान के मुताबिक यह अवॉर्ड अशरफी के पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के समर्थन और इंटरफेथ कोऑपरेशन के लिए दिया गया था। विशेष रूप से पाकिस्तान के ईसाई समुदाय के साथ उनके काम का उल्लेख किया गया था।

Tahir Ashrafi को लेकर blasphemy blackmail gang के क्या आरोप हैं?

Telegraph की जांच में आरोप लगाया गया है कि उनके भाई हसन मुआविया एक ऐसे कथित नेटवर्क से जुड़े थे जो सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाकर उनके खिलाफ ब्लासफेमी मामले दर्ज करवाता और पैसे की मांग करता था। रिपोर्ट में ताहिर अशरफी पर अपने भाई को संरक्षण देने और पीड़ितों के वकीलों की आलोचना करने के आरोप भी लगाए गए हैं। अशरफी ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि जबरन वसूली का सबूत पेश किया जाए।

Why was Tahir Ashrafi’s award later withdrawn?

लैम्बेथ पैलेस ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि अशरफी की कुछ पुरानी टिप्पणियां सामने आने के बाद अवॉर्ड वापस ले लिया गया। ब्रिटिश मीडिया ने इसे 2007 की ओसामा बिन लादेन से जुड़ी उनकी टिप्पणी से जोड़ा, जिसमें उन्होंने बिन लादेन को “सैफुल्लाह” जैसा सम्मान देने की बात कही थी।

Tahir Ashrafi का Osama bin Laden से जुड़ा controversy क्या है?

2007 में सलमान रुश्दी को ब्रिटेन द्वारा नाइटहुड दिए जाने के विरोध के दौरान अशरफी ने ओसामा बिन लादेन को “सैफुल्लाह” यानी “अल्लाह की तलवार” जैसा सम्मान देने की बात कही थी। बाद में अशरफी ने कहा कि उनकी टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और वह रुश्दी को सम्मान दिए जाने के विरोध में एक उदाहरण दे रहे थे।

What did Lambeth Palace say about the award controversy?

लैम्बेथ पैलेस ने कहा कि अवॉर्ड अशरफी के धार्मिक अल्पसंख्यकों के समर्थन के लिए दिया गया था, लेकिन उनकी कुछ पुरानी टिप्पणियां सामने आने के बाद पैलेस ने सम्मान की समीक्षा की और उसे वापस लेने का फैसला किया। पैलेस ने यह भी कहा कि इंटरफेथ संवाद और सहयोग जारी रहना चाहिए।

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