No UPI Day Protest से पीछे हटे Traders, UPI Charges पर मांग बरकरार
2 अक्टूबर 2026 का No UPI Day protest व्यापारियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद वापस ले लिया है। हालांकि, Rs 2,000 से अधिक के merchant UPI payments पर प्रस्तावित 0.4% MDR को लेकर व्यापारियों की चिंताएं और कई मांगें अभी जारी हैं।
2 अक्टूबर को प्रस्तावित No UPI Day को लेकर व्यापारिक संगठनों ने अपना विरोध वापस ले लिया है। यह फैसला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई अहम बैठक के बाद आया है। हालांकि, व्यापारियों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। प्रस्तावित 0.4% MDR और UPI Merchant Charges को लेकर उनकी कई मांगें अभी भी सरकार के सामने हैं। ऐसे में अब इस पूरे मामले में आगे क्या बदलाव होते हैं, इस पर कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है।
No UPI Day Protest क्यों वापस लिया गया?
No UPI Day का call All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF) और All India Mobile Retailers Association (AIMRA) की ओर से दिया गया था। इसका उद्देश्य प्रस्तावित UPI Merchant Discount Rate यानी MDR के खिलाफ व्यापारियों की चिंताओं को सामने रखना था। 30 सितंबर को करीब 20 वरिष्ठ व्यापारी और खुदरा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व Confederation of All India Traders (CAIT) के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने किया। बैठक में छोटे और मध्यम कारोबारों पर प्रस्तावित शुल्क के संभावित असर को लेकर चर्चा हुई। बैठक के बाद व्यापारिक संगठनों ने कहा कि सरकार की ओर से उनकी चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने 2 अक्टूबर के No UPI Day का call वापस लेने का फैसला किया है।
आखिर किस बात का था Traders UPI Protest?
व्यापारी संगठनों का मुख्य विरोध प्रस्तावित 0.4% UPI Merchant Discount Rate को लेकर था। नए framework के तहत 15 अक्टूबर 2026 से Rs 2,000 से अधिक के पात्र merchant UPI payments पर 0.4% MDR लागू होना प्रस्तावित है। प्रति transaction MDR की अधिकतम सीमा Rs 300 रखी गई है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि इस तरह का शुल्क खासकर छोटे और मध्यम कारोबारों की लागत बढ़ा सकता है। इसी चिंता को लेकर October 2 No UPI Day का ऐलान किया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 2 अक्टूबर को UPI सेवा देशभर में बंद नहीं होने वाली थी। यह व्यापारियों द्वारा UPI payments स्वीकार न करने का प्रस्तावित विरोध था, न कि UPI network के बंद होने की घोषणा। अब यह protest call भी वापस ले लिया गया है।
UPI Payment Charges को लेकर Traders की क्या मांग है?
बैठक में व्यापारियों ने केवल proposed MDR को टालने की मांग नहीं की, बल्कि framework में कई बदलाव सुझाए हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
- आगामी festive season और बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए MDR implementation को टाला जाए।
- Rs 1 लाख की proposed threshold limit की समीक्षा की जाए और इसे बढ़ाकर Rs 5 लाख किया जाए।
- Merchant-to-Merchant यानी M2M transactions को MDR framework से बाहर रखा जाए।
- व्यापारियों की चिंताओं और MDR framework की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति बनाई जाए।
- Digital payments को बढ़ावा देते हुए merchants पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सीमित किया जाए।
व्यापारी संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य UPI या Digital India का विरोध करना नहीं है। वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें digital payments को बढ़ावा मिले और कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का दबाव भी न बढ़े।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
प्रस्तावित framework के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से Rs 2,000 से अधिक के eligible merchant UPI payments पर 0.4% MDR लागू होगा। यह शुल्क merchant side पर होगा और प्रति transaction अधिकतम Rs 300 तक सीमित रहेगा। उदाहरण के लिए Rs 10,000 के eligible transaction पर 0.4% के हिसाब से MDR Rs 40 बनता है। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि MDR और UPI payment के सामान्य user experience को एक ही चीज नहीं माना जाना चाहिए। प्रस्तावित शुल्क merchant transactions के लिए है। उपलब्ध framework के अनुसार person-to-person payments और छोटे-value payments इस MDR व्यवस्था से बाहर रखे गए हैं। इस प्रस्ताव का प्रभाव मुख्य रूप से उन कारोबारियों पर चर्चा का विषय बना हुआ है जो बड़े मूल्य के merchant UPI transactions पर निर्भर हैं।

Finance Minister Nirmala Sitharaman से Meeting में क्या हुआ?
वित्त मंत्री के साथ बैठक में करीब 20 वरिष्ठ trade और retail representatives ने अपने सुझाव और चिंताएं रखीं। व्यापारियों ने सरकार से proposed MDR को festive season के बाद तक defer करने और threshold समेत framework की समीक्षा करने का आग्रह किया। बैठक के बाद व्यापारिक संगठनों ने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं पर उचित विचार करने का आश्वासन दिया है। इसी के बाद Traders Withdraw No UPI Day का फैसला सामने आया। सरकार की ओर से digital transactions को बढ़ावा देने और सभी stakeholders के हितों को ध्यान में रखने की बात कही गई है। हालांकि, प्रस्तावित MDR को पूरी तरह वापस लेने का कोई अंतिम निर्णय इस बैठक के बाद घोषित नहीं हुआ है।
UPI Protest पर अब आगे क्या होगा?
2 अक्टूबर का प्रस्तावित No UPI Protest अब वापस लिया जा चुका है, इसलिए इस दिन व्यापारियों द्वारा nationwide UPI boycott का call लागू नहीं होगा। लेकिन 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR को लेकर बातचीत आगे जारी रहने की संभावना है। व्यापारी संगठन चाहते हैं कि सरकार threshold, M2M transactions और implementation timeline जैसे मुद्दों पर पुनर्विचार करे। दूसरी ओर, digital payments ecosystem में UPI की भूमिका को देखते हुए MDR framework का असर merchants और payment ecosystem दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
निष्कर्ष
No UPI Day का 2 अक्टूबर 2026 के लिए प्रस्तावित protest अब व्यापारिक संगठनों ने वापस ले लिया है। यह फैसला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक और सरकार की ओर से व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करने के आश्वासन के बाद आया। हालांकि, UPI पर प्रस्तावित 0.4% MDR को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। व्यापारियों ने festive season के बाद implementation, threshold बढ़ाने और M2M transactions को MDR से बाहर रखने जैसी मांगें रखी हैं। इसलिए अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन सुझावों पर आगे क्या फैसला करती है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
No UPI Day October 2 2026 क्या था?
No UPI Day 2 अक्टूबर 2026 को व्यापारियों द्वारा प्रस्तावित एक विरोध कार्यक्रम था। इसका उद्देश्य Rs 2,000 से अधिक के eligible merchant UPI transactions पर प्रस्तावित 0.4% MDR का विरोध करना था। हालांकि, वित्त मंत्री से बैठक के बाद व्यापारी संगठनों ने यह call वापस ले लिया।
Traders ने No UPI Day का call क्यों दिया था?
व्यापारी संगठनों ने प्रस्तावित UPI Transaction Charges यानी 0.4% MDR को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इससे खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।
Traders ने No UPI Day protest वापस क्यों लिया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक में व्यापारियों ने अपनी चिंताएं और सुझाव रखे। बैठक के बाद सरकार की ओर से इन चिंताओं पर विचार करने के आश्वासन के चलते AICPDF और AIMRA ने 2 अक्टूबर के protest का call वापस ले लिया।
Nirmala Sitharaman से traders की meeting में क्या हुआ?
करीब 20 व्यापार और retail representatives ने proposed MDR को लेकर चर्चा की। व्यापारियों ने MDR को defer करने, threshold को Rs 1 लाख से बढ़ाकर Rs 5 लाख करने और M2M transactions को MDR framework से बाहर रखने की मांग की।
Traders की UPI charges को लेकर क्या मांग है?
व्यापारी संगठन proposed MDR को defer करने, threshold बढ़ाने, M2M transactions को framework से बाहर रखने और उनकी चिंताओं की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग कर रहे हैं।