Afghanistan Pakistan Conflict : करीब 30 लड़ाके मारे गए, 32 पकड़े गए: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच फिर क्यों हो रही है लड़ाई?
अफगानिस्तान ने नूरिस्तान के कमदेश जिले में पाकिस्तान से आए कथित लड़ाकों के खिलाफ कार्रवाई में 28 लोगों के मारे जाने और 32 को पकड़े जाने का दावा किया। काबुल ने पाकिस्तानी समर्थन का आरोप लगाया, जबकि इस्लामाबाद ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया।
Afghanistan Pakistan Conflict : अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर सैन्य टकराव में बदल गया है। अफगानिस्तान के डिफेंस मिनिस्ट्री ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को दावा किया कि पूर्वी नूरिस्तान प्रांत के कमदेश जिले में उसके सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान की तरफ से सीमा पार कर आए लड़ाकों के एक समूह के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें 28 लड़ाके मारे गए और 32 को पकड़ लिया गया। अफगान पक्ष का कहना है कि इस समूह में इस्लामिक स्टेट से जुड़े लड़ाके और पूर्व अफगान सरकार के सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल थे और उन्हें पाकिस्तानी मिलिशिया का समर्थन हासिल था। पाकिस्तान ने इन आरोपों को “फ्रिवोलस, बेसलेस एंड डिवॉइड ऑफ एनी ट्रुथ” बताते हुए पूरी तरह खारिज किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नूरिस्तान में हुआ टकराव, अफगानिस्तान ने लगाया पाकिस्तान पर सीधा आरोप
अफगान डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक लड़ाकों का यह समूह शनिवार को पाकिस्तान की तरफ से नूरिस्तान के कमदेश जिले में दाखिल हुआ था। अफगान पक्ष का आरोप है कि कई इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों को पाकिस्तानी अधिकारियों के समर्थन से अफगानिस्तान भेजा गया था, ताकि वहां अस्थिरता पैदा की जा सके।अफगान मंत्रालय ने दावा किया कि उसके सुरक्षा बलों ने तुरंत ऑपरेशन शुरू किया। इसमें 28 लोग मारे गए और 32 को जिंदा पकड़ा गया, जबकि बाकी लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की तरफ मौजूद मिलिशिया के ठिकानों की ओर भाग गए। अफगान पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी हथियारबंद कर्मी और मिलिशिया के सदस्य लड़ाकों के साथ मौजूद थे, लेकिन लड़ाई शुरू होते ही पीछे हट गए।
अफगानिस्तान के मुताबिक पकड़े गए लोगों में बड़ी संख्या उन पूर्व सुरक्षा कर्मियों की थी, जो अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने से पहले अफगान सरकार की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थे। अफगान डिफेंस मिनिस्ट्री का आरोप है कि पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इन पूर्व सैनिकों को विदेश में शरण और अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पाकिस्तान बुलाया, लेकिन बाद में उन्हें सैन्य और इंटेलिजेंस से जुड़े कैंपों में प्रशिक्षण दिया गया और नूरिस्तान में भेजा गया।
यह गंभीर आरोप है, लेकिन अभी यह अफगान सरकार का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान ने कहा- सबूत कहां हैं?
काबुल के आरोपों के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान के इन्फॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने इन्हें खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा या इंटेलिजेंस एजेंसियों की नूरिस्तान या अफगानिस्तान के किसी दूसरे हिस्से में हुई इन झड़पों में कोई भूमिका नहीं है।पाकिस्तान ने पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों को भर्ती या ट्रेनिंग देने और इस्लामिक स्टेट या किसी दूसरे आतंकी संगठन को सुविधा देने के आरोपों को भी नकार दिया। इस्लामाबाद ने कहा कि अफगानिस्तान ने अपने दावों के समर्थन में पहचान, दस्तावेज, कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, फॉरेंसिक सबूत या स्वतंत्र सत्यापन पेश नहीं किया है।
पाकिस्तान ने सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो को भी सबूत मानने से इनकार किया। उसके मुताबिक वीडियो में कुछ निहत्थे लोग दिखाई देते हैं और इससे पाकिस्तानी एजेंसियों की कथित भूमिका साबित नहीं होती। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में इसलिए फिलहाल दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। अफगानिस्तान इसे पाकिस्तान समर्थित घुसपैठ और सशस्त्र कार्रवाई बता रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे बिना सबूत का आरोप कह रहा है।
तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते कैसे बिगड़े?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव की जड़ सिर्फ नूरिस्तान की इस घटना में नहीं है। अगस्त 2021 में अमेरिका और उसके सहयोगी बलों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान फिर सत्ता में आया था। उस समय पाकिस्तान ने तालिबान की वापसी को सकारात्मक घटनाक्रम के तौर पर देखा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तालिबान की वापसी पर अफगानों के “गुलामी की बेड़ियां तोड़ने” जैसी टिप्पणी की थी।लेकिन इसके बाद पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति बिगड़ने लगी। खास तौर पर पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी से जुड़े हमले बढ़े। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में हमले करते हैं।
तालिबान प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा समस्याओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। टीटीपी और अफगान तालिबान अलग संगठन हैं, हालांकि दोनों के बीच संबंध और वैचारिक नजदीकी का मुद्दा लंबे समय से पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद का हिस्सा रहा है।
एयरस्ट्राइक से बढ़ा तनाव, अब जमीनी टकराव तक पहुंचा मामला
दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने सितंबर में अफगानिस्तान के भीतर सैन्य कार्रवाई की है और उसका कहना रहा है कि उसने ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया जहां से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।21 सितंबर को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तीन ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर 28 आतंकियों को मारने का दावा किया था। अफगान अधिकारियों ने इसके जवाब में नागरिकों की मौत की बात कही थी। संयुक्त राष्ट्र ने अफगान पक्ष की ओर से बताए गए तीन नागरिकों की मौत की पुष्टि की थी।
24 सितंबर को भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 10 जगहों पर एयरस्ट्राइक की बात कही। पाकिस्तान के अनुसार ये स्थान ड्रोन लॉन्च और स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। अफगानिस्तान ने इन हमलों की आलोचना की और नागरिकों के मारे जाने का दावा किया।
नूरिस्तान की घटना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसमें अफगान पक्ष ने सीधे सीमा पार से लड़ाकों के आने और उन्हें पाकिस्तानी समर्थन मिलने का आरोप लगाया है। अगर दोनों पक्षों के दावे आगे भी जारी रहते हैं तो इससे पहले से तनावपूर्ण सीमा स्थिति और जटिल हो सकती है।
पाकिस्तान की शिकायत भी यही है- अफगान जमीन से हो रहे हमले
पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन से टीटीपी और दूसरे आतंकी समूह पाकिस्तान को निशाना बना रहे हैं। हाल के हफ्तों में पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में कई हमले हुए हैं।18 सितंबर को कोहाट में एक पुलिस परिसर पर हमले में 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 17 पुलिस अधिकारी शामिल थे। बाद में डेरा इस्माइल खान इलाके में भी एक हमले की जिम्मेदारी टीटीपी ने ली थी, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान इन घटनाओं को अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क से जोड़ता है, जबकि काबुल पाकिस्तान के इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता।
इस तरह दोनों देशों के बीच विवाद का मुख्य केंद्र सीमा पार मौजूद कथित आतंकी ठिकाने और एक-दूसरे पर सशस्त्र समूहों को समर्थन देने के आरोप हैं। नूरिस्तान की ताजा घटना ने इसी पुराने विवाद को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Afghanistan और Pakistan के बीच फिर लड़ाई क्यों हो रही है?
मुख्य विवाद सीमा पार आतंकवाद और मिलिटेंट गतिविधियों को लेकर है। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी और दूसरे समूह अफगानिस्तान से पाकिस्तान में हमले करते हैं। अफगानिस्तान पाकिस्तान पर अपने क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और सशस्त्र समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाता है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के आरोपों को खारिज करते हैं।
Afghanistan Pakistan conflict में कितने fighters मारे गए?
अफगानिस्तान के डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक नूरिस्तान के कमदेश जिले में हुई कार्रवाई में 28 लड़ाके मारे गए और 32 को पकड़ा गया। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Nuristan में 32 fighters को क्यों पकड़ा गया?
अफगान डिफेंस मिनिस्ट्री का दावा है कि ये लड़ाके पाकिस्तान की तरफ से सीमा पार करके कमदेश जिले में आए थे और वहां अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। अफगान पक्ष ने इनमें इस्लामिक स्टेट से जुड़े लोगों और पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों के शामिल होने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया है।
Pakistan पर Afghanistan ने क्या आरोप लगाए हैं?
अफगानिस्तान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी मिलिशिया और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों तथा इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों को समर्थन दिया, उन्हें प्रशिक्षण दिया और नूरिस्तान की तरफ भेजा। काबुल ने इसे अफगानिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बताया है।
Pakistan ने Afghanistan के आरोपों पर क्या कहा?
पाकिस्तान के इन्फॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने आरोपों को “फ्रिवोलस, बेसलेस एंड डिवॉइड ऑफ एनी ट्रुथ” बताते हुए खारिज किया। पाकिस्तान ने कहा कि उसकी सुरक्षा या इंटेलिजेंस एजेंसियों की नूरिस्तान की झड़प में कोई भूमिका नहीं थी और अफगानिस्तान ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र सबूत नहीं दिया है।