Balen Shah UN Speech - नेपाल की बाढ़ से लेकर Climate Justice तक, UN में क्यों गूंजा ‘हिमालय’ का संदेश?
नेपाल PM बालेंद्र शाह ने UN में Bhotekoshi-Trishuli बाढ़ को जलवायु संकट की चेतावनी बताया। उन्होंने India-China के साथ Himalayan Climate Resilience Mechanism, ज्यादा climate finance, बेहतर early-warning systems और अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की मांग की।
नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। Balen Shah UN Speech में उन्होंने हाल की भयावह Bhotekoshi-Trishuli बाढ़ को सिर्फ नेपाल की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जलवायु संकट की चेतावनी बताया। उन्होंने Climate Justice, हिमालयी देशों के सहयोग, जलवायु वित्त और वैश्विक व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
Balen Shah UN Speech में बाढ़ बनी सबसे बड़ी चिंता

बालेंद्र शाह ने अपने भाषण की शुरुआत नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के जिक्र से की। उन्होंने बताया कि इस आपदा में कम से कम 1,400 लोगों की मौत हुई और 6,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। उनके अनुसार, शुरुआती आकलन में पुनर्वास और भौतिक पुनर्निर्माण की जरूरत नेपाल की जीडीपी के करीब 10 प्रतिशत के बराबर बताई गई है।शाह ने Bhotekoshi-Trishuli आपदा को “Himalayan Tsunami” कहे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल स्थानीय त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।
“Climate Change किसी सीमा को नहीं मानता”
शाह ने कहा कि बढ़ता तापमान हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को प्रभावित कर रहा है। ग्लेशियरों और पर्माफ्रॉस्ट में बदलाव से बर्फ-पत्थर के मलबे, बाढ़ और भूस्खलन जैसे खतरों का जोखिम बढ़ रहा है।उन्होंने खास तौर पर कहा कि बाढ़ का असर नेपाल-चीन सीमा के दोनों ओर दिखाई दिया और पानी आगे भारत की ओर भी बढ़ा। उनके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं पहचानता, इसलिए इसका मुकाबला भी क्षेत्रीय सहयोग से करना होगा।शाह ने यह भी कहा कि नेपाल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 0.1 प्रतिशत से भी कम योगदान देता है, फिर भी जलवायु संकट का बड़ा नुकसान झेल रहा है।
India-China के साथ Himalayan Climate Resilience Mechanism का प्रस्ताव
Balen Shah UN Speech का एक अहम हिस्सा हिमालयी देशों के बीच सहयोग का प्रस्ताव रहा। शाह ने Himalayan Climate Resilience Mechanism बनाने की बात कही, जिसमें नेपाल, भारत और चीन की भागीदारी हो।इसके तहत उपग्रह डेटा और विशेषज्ञता साझा करने, खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी, साझा Early Warning System मजबूत करने और आपदा के समय सीमा-पार राहत एवं सहयोग को बेहतर बनाने का प्रस्ताव रखा गया।शाह ने कहा कि हिमालय को ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए जहां अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत हो, न कि ऐसी सीमा जहां सूचनाएं और संसाधन अलग-अलग बंटे रहें।
Climate Finance पर क्या बोले Nepal PM?
नेपाल के प्रधानमंत्री ने विकसित देशों से कमजोर और जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए ज्यादा grant-based climate finance उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आपदा से तबाह गरीब देश को केवल बड़े कर्ज देकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।उन्होंने Loss and Damage Fund और Global Environment Facility जैसे मौजूदा वित्तीय तंत्रों को अपर्याप्त बताया और जलवायु वित्त हासिल करने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की मांग की।शाह ने अपने भाषण में छह शब्दों पर खास जोर दिया Relief, Rehabilitation, Reconstruction और Responsibility, Reparation, Resilience।
युद्ध के लिए तेज सप्लाई, किसानों के लिए क्यों नहीं?
Balen Shah UN Speech में नेपाल के प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यवस्था की असमानताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में हथियारों और सैन्य सामान की सप्लाई तेजी से हो सकती है, लेकिन नेपाल के किसान को समय पर खाद और ईंधन उपलब्ध कराने में दिक्कत होती है।उन्होंने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया ने युद्ध के लिए प्रभावी लॉजिस्टिक्स तैयार कर लिए हैं, लेकिन भोजन और किसानों की जरूरतों के लिए व्यवस्था उतनी प्रभावी नहीं है।शाह ने इसी संदर्भ में अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और मजबूत बहुपक्षवाद की जरूरत बताई।
Nepal के लिए UN में क्या रहा बड़ा संदेश?
अपने Balen Shah UN Speech में शाह ने कहा कि जलवायु न्याय सिर्फ पैसे की बात नहीं है। इसमें यह भी शामिल है कि जलवायु संकट की कीमत कौन चुका रहा है, फैसले लेने की प्रक्रिया में किसकी आवाज सुनी जा रही है और कमजोर देशों तथा आने वाली पीढ़ियों के हितों को कितना महत्व दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नेपाल आपदा के बाद बार-बार अपना अतीत दोहराने के बजाय भविष्य बनाने में सक्षम होना चाहता है। उन्होंने बेहतर आपदा-पूर्व चेतावनी, मजबूत बुनियादी ढांचे, बीमा, नवाचार और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया।
निष्कर्ष
Balen Shah UN Speech में नेपाल ने अपनी बाढ़ की त्रासदी को वैश्विक जलवायु संकट से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मुद्दा उठाया। हिमालयी देशों के साझा तंत्र, जलवायु वित्त, आपदा तैयारी और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार की उनकी मांगों ने भाषण को सिर्फ नेपाल की समस्या तक सीमित नहीं रखा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Balen Shah ने UN General Assembly में भाषण कब दिया?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया।
Balen Shah UN Speech में सबसे बड़ा मुद्दा क्या रहा?
नेपाल की विनाशकारी Bhotekoshi-Trishuli बाढ़ और उससे जुड़े जलवायु संकट को भाषण का प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
शाह ने India और China को लेकर क्या प्रस्ताव दिया?
उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के बीच Himalayan Climate Resilience Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा।
Climate Finance को लेकर नेपाल की मांग क्या है?
नेपाल ने ज्यादा grant-based सहायता और Loss and Damage जैसे वित्तीय तंत्रों से तेज तथा आसान मदद की मांग की।
Balen Shah UN Speech का मुख्य संदेश क्या था?मुख्य संदेश यह था कि हिमालयी देशों को बढ़ते जलवायु खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना होगा और कमजोर देशों के लिए वैश्विक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाना होगा।
मुख्य संदेश यह था कि हिमालयी देशों को बढ़ते जलवायु खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना होगा और कमजोर देशों के लिए वैश्विक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाना होगा।