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Trump Renames AI : ट्रंप ने AI को दिया नया नाम ‘सुपर इंटेलिजेंस’, आखिर क्यों लिया ये फैसला ?

डोनाल्ड ट्रंप ने 29 सितंबर 2026 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर अमेरिकी संघीय सरकार के आधिकारिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जगह “सुपर इंटेलिजेंस” और “एसआई” शब्द इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। 60 दिनों में इसकी नई कानूनी परिभाषा का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा।

Trump Renames AI : ट्रंप ने AI को दिया नया नाम ‘सुपर इंटेलिजेंस’, आखिर क्यों लिया ये फैसला ?

Trump Renames AI : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। ट्रंप ने 29 सितंबर 2026 को ‘इनॉगरेटिंग द एरा ऑफ सुपर इंटेलिजेंस’ नाम से एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया। इसके तहत अमेरिकी फेडरल सरकार के विभागों और एजेंसियों को आधिकारिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एआई की जगह सुपर इंटेलिजेंस और एसआई शब्दों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। यह बदलाव सरकारी पत्राचार, सार्वजनिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि इसे कानून की अनुमति वाली अधिकतम सीमा तक लागू किया जाएगा।

[1/6] 29 सितंबर, 2026 को वॉशिंगटन D.C. में व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने टेक लीडर्स के लिए एक लंच का आयोजन किया। इसमें US हाउस स्पीकर माइक जॉनसन, US कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक, मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग, SpaceX और AI कंपनी के फाउंडर और CEO एलन मस्क, Nvidia के प्रेसिडेंट और CEO जेन्सेन हुआंग और AMD की CEO लिसा सु शामिल हुए। Image Credit -REUTERS
[1/6] 29 सितंबर, 2026 को वॉशिंगटन D.C. में व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने टेक लीडर्स के लिए एक लंच का आयोजन किया। इसमें US हाउस स्पीकर माइक जॉनसन, US कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक, मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग, SpaceX और AI कंपनी के फाउंडर और CEO एलन मस्क, Nvidia के प्रेसिडेंट और CEO जेन्सेन हुआंग और AMD की CEO लिसा सु शामिल हुए। Image Credit -REUTERS

सरकारी कामकाज में अब AI की जगह SI

ट्रंप के आदेश का दायरा अमेरिकी एग्जीक्यूटिव ब्रांच यानी संघीय सरकार के विभागों और एजेंसियों तक है। उन्हें आधिकारिक पत्राचार, सार्वजनिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में सुपर इंटेलिजेंस और एसआई शब्द इस्तेमाल करने को कहा गया है। संबंधित आधिकारिक परिस्थितियों में सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एआई शब्दों को इस्तेमाल नहीं करेगी।हालांकि यह बदलाव पुराने दस्तावेजों पर पीछे से लागू नहीं होगा। पहले से मौजूद सरकारी नियम, कॉन्ट्रैक्ट, ग्रांट और ऐतिहासिक रिकॉर्ड को सिर्फ नाम बदलने के कारण दोबारा नहीं बदला जाएगा। यानी पुराने दस्तावेजों में एआई शब्द मौजूद रह सकता है।
यह बदलाव दुनिया भर में एआई का नाम बदलने वाला फैसला भी नहीं है। इसका तत्काल दायरा अमेरिकी संघीय सरकार के आधिकारिक कामकाज तक है। दूसरे देशों की सरकारों, निजी कंपनियों या आम लोगों के लिए एआई शब्द पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

करीब 70 साल पुराने शब्द को बदलने के पीछे ट्रंप प्रशासन का तर्क

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि आज के फ्रंटियर सिस्टम्स उस समय की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवधारणा से काफी आगे निकल चुके हैं, जब करीब 70 साल पहले इस क्षेत्र को नाम दिया गया था।एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है कि आज के आधुनिक सिस्टम इंसानी बुद्धिमत्ता के अलग-अलग हिस्सों की सिर्फ नकल या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं हैं। प्रशासन के मुताबिक, ये इंसानी क्षमता को बढ़ाने, नई तरह की क्रिएटिविटी को संभव बनाने और साइंस, मेडिसिन समेत कई क्षेत्रों में ऐसे काम करने में मदद कर रहे हैं, जो पहले संभव नहीं थे। इसी वजह से सरकारी शब्दावली में भी इस बदलाव को दिखाने की जरूरत बताई गई है।
हालांकि फिलहाल सुपर इंटेलिजेंस के लिए अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मौजूदा कानूनी परिभाषा ही लागू रहेगी। यानी सिर्फ शब्द बदलने से मौजूदा कानूनी परिभाषा खत्म नहीं हुई है।

60 दिन में नई कानूनी परिभाषा का प्रस्ताव

ट्रंप प्रशासन ने सुपर इंटेलिजेंस को आगे अमेरिकी कानून में अलग पहचान देने की प्रक्रिया भी शुरू की है। आदेश के मुताबिक, राष्ट्रपति के साइंस एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानून का मसौदा रखने के लिए कहा गया है।इसमें सुपर इंटेलिजेंस की नई संघीय कानूनी परिभाषा तय करने और मौजूदा कानूनों में जरूरी बदलाव सुझाने की बात है। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सही होगा कि अमेरिकी सरकार ने अपने प्रशासनिक कामकाज में एआई की जगह सुपर इंटेलिजेंस शब्द अपनाया है, जबकि इसे अलग कानूनी परिभाषा देने की प्रक्रिया अभी आगे बढ़नी है।

ट्रंप ने कहा- इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है बदलाव

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों के साथ लंच बैठक की। इसमें एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेनसन हुआंग समेत टेक इंडस्ट्री के कई बड़े नाम शामिल हुए।ट्रंप ने इस तकनीकी बदलाव को अमेरिका के लिए बहुत बड़ा अवसर बताया और कहा कि यह इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। बैठक के बाद टेक कंपनियों और प्रशासन के अधिकारियों ने सुपर इंटेलिजेंस को सुरक्षित तरीके से विकसित करने को लेकर व्हाइट हाउस एकॉर्ड की जानकारी भी दी।
इस समझौते में कंपनियों से अपने सिस्टम पर मजबूत आंतरिक नियंत्रण रखने और स्वतंत्र ऑडिट या मूल्यांकन कराने जैसे सुरक्षा उपायों पर काम करने को कहा गया है। कंपनियों से यह भी सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि उनके सिस्टम अनधिकृत तरीके से दूसरे तकनीकी सिस्टम तक पहुंच न बनाएं।
मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि लोगों को इस टेक्नोलॉजी पर भरोसा होना चाहिए और कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम उसी तरह काम करें, जैसा उन्हें बनाया गया है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने भी सरकार और टेक इंडस्ट्री के बीच सहयोग की जरूरत बताई।

अमेरिका की टेक्नोलॉजी रेस और नेशनल सिक्योरिटी भी एजेंडे में

सुपर इंटेलिजेंस का मुद्दा सिर्फ सरकारी शब्दावली बदलने तक सीमित नहीं है। ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका की टेक्नोलॉजी क्षमता और नेशनल सिक्योरिटी से भी जोड़ रहा है।नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जे क्लेटन ने कहा कि अमेरिका का एआई में नेतृत्व करना नेशनल सिक्योरिटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। ट्रंप प्रशासन पहले भी अमेरिका को उन्नत एआई टेक्नोलॉजी में आगे रखने की रणनीति पर जोर देता रहा है।
ट्रंप ने इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कहा था कि अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में आर्टिफिशियल की जगह सुपर इंटेलिजेंस शब्द इस्तेमाल किया जाएगा। अब 29 सितंबर के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से इस घोषणा को औपचारिक प्रशासनिक निर्देश मिल गया है।
फिलहाल इसका सीधा असर अमेरिकी संघीय सरकार की भाषा और दस्तावेजों पर पड़ेगा। एआई का नाम पूरी दुनिया में नहीं बदला है और न ही मौजूदा अमेरिकी कानूनी परिभाषा तुरंत खत्म हुई है। अगले 60 दिनों में प्रस्तावित कानून और उसके बाद कांग्रेस की कार्रवाई से यह साफ होगा कि सुपर इंटेलिजेंस को अमेरिकी कानून में अलग और स्थायी पहचान मिलती है या नहीं।

FAQ (Frequently Asked Questions):

ट्रंप ने AI को Super Intelligence क्यों कहा?

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि आज के आधुनिक फ्रंटियर सिस्टम पुराने AI की अवधारणा से कहीं ज्यादा क्षमताएं रखते हैं। वे इंसानी क्षमता को बढ़ाने और साइंस, मेडिसिन तथा दूसरे क्षेत्रों में नए काम संभव बनाने में मदद कर रहे हैं। इसलिए सरकार की शब्दावली में भी इस बदलाव को दिखाने की कोशिश की गई है।

क्या Artificial Intelligence का नाम आधिकारिक तौर पर Super Intelligence कर दिया गया है?

अमेरिकी फेडरल सरकार के आधिकारिक कामकाज के लिए ट्रंप ने ऐसा निर्देश दिया है, लेकिन दुनिया भर में AI का नाम नहीं बदला है। इसके अलावा मौजूदा अमेरिकी कानून में AI की परिभाषा अभी मौजूद है। नई कानूनी परिभाषा के लिए कांग्रेस के सामने प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

ट्रंप ने Super Intelligence को Internet से बड़ा क्यों बताया?

ट्रंप ने एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी की संभावित आर्थिक और तकनीकी क्षमता को बहुत बड़ा बताते हुए इसकी तुलना इंटरनेट से की। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए बड़े विकास और तकनीकी बदलाव का अवसर बताया।

Trump AI Executive Order में क्या बदलाव किए गए हैं?

फेडरल विभागों और एजेंसियों को आधिकारिक पत्राचार, वेबसाइट, रिपोर्ट, सार्वजनिक संचार और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में AI और Artificial Intelligence की जगह Super Intelligence और SI का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। पुराने नियम, कॉन्ट्रैक्ट, ग्रांट और ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

Super Intelligence (SI) का क्या मतलब है?

इस आदेश के संदर्भ में Super Intelligence आधुनिक एडवांस्ड AI सिस्टम के लिए इस्तेमाल किया गया नया सरकारी शब्द है। फिलहाल इसके लिए मौजूदा अमेरिकी कानून में AI की परिभाषा लागू होगी। आगे कांग्रेस के लिए प्रस्तावित कानून में SI की अलग कानूनी परिभाषा तय करने की बात कही गई है।

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