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Shehbaz Sharif UN Speech 2026 : पाकिस्तान के कश्मीर राग पर भारत का पलटवार, आतंकवाद पर इस्लामाबाद को क्या संदेश दिया?

UNGA में शहबाज शरीफ के कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 के भारत-पाकिस्तान टकराव संबंधी बयान पर भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई दिया। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद, दोहरे रवैये और गलत दावों का आरोप लगाते हुए आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही।

Shehbaz Sharif UN Speech 2026 : पाकिस्तान के कश्मीर राग पर भारत का पलटवार, आतंकवाद पर इस्लामाबाद को क्या संदेश दिया?

Shehbaz Sharif UN Speech 2026 : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दिए भाषण के बाद भारत ने 26 सितंबर 2026 को राइट ऑफ रिप्लाई के जरिए जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की परमानेंट मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर को लेकर लगाए आरोपों को खारिज करते हुए इस्लामाबाद पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने, दोहरे रवैये और गलत दावे करने का आरोप लगाया। भारत ने साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के उसके अधिकार का इस्तेमाल जारी रहेगा और पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद के परिणाम होंगे।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की कड़ी आलोचना की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की कड़ी आलोचना की।

UN में भारत ने कहा- आतंकवाद पर पाकिस्तान को परिणाम भुगतने होंगे

पेटल गहलोत ने कहा कि पूरे मामले के केंद्र में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले साल भी यह दिखाया था कि आतंकवादियों के लिए कहीं छिपना आसान नहीं होगा। भारत का आतंकवाद के खिलाफ खुद की रक्षा करने का अधिकार जारी रहेगा।गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बार-बार झूठ दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को “आतंकवाद, धोखे और दोहरेपन” से जोड़ते हुए कहा कि इससे न तो पाकिस्तान को फायदा होगा और न ही दुनिया को।
यह बयान ऐसे समय आया है जब शहबाज शरीफ ने अपने UNGA संबोधन में भारत के साथ 2025 के सैन्य टकराव, कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया था। शरीफ ने 2025 के संघर्ष के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “समय पर दखल” के लिए धन्यवाद भी दिया और कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा उस स्थिति तक पहुंचने से रोकने के लिए कश्मीर का “न्यायसंगत और उचित” समाधान जरूरी है।

कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने PoK की ओर ध्यान दिलाया

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तहत कश्मीर के लोगों के लिए जनमत संग्रह की मांग दोहराई और भारत पर जम्मू-कश्मीर की स्थिति बदलने तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाए। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह कश्मीर के लोगों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा।भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय जवाब में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया गया। भारत लंबे समय से पाकिस्तान के इस रुख को अस्वीकार करता रहा है कि कश्मीर विवाद को इस तरह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाए।
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से एक प्रमुख राजनयिक विवाद रहा है। दोनों देश इस मुद्दे पर एक-दूसरे के दावों को स्वीकार नहीं करते हैं।

ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर भारत ने पाकिस्तान से पूछा सवाल

भारतीय जवाब में 9/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का भी जिक्र आया। गहलोत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयानों को उस संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए कि 9/11 हमले की 25वीं बरसी हाल ही में दुनिया ने मनाई है।उन्होंने कहा कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की प्रमुख सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। भारत ने इसी तथ्य का हवाला देते हुए पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी दावों पर सवाल उठाया।
गहलोत ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को लेकर “फॉर्म 47 सरकार” का भी जिक्र किया। यह पाकिस्तान में 2024 के आम चुनावों के बाद चुनावी प्रक्रिया और सरकार की वैधता को लेकर विपक्ष की ओर से इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक आरोप है। भारत ने इसे पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी टिप्पणी के संदर्भ में इस्तेमाल किया।

पाकिस्तान के लोकतंत्र और 27वें संविधान संशोधन पर भी निशाना

भारतीय राजनयिक ने शहबाज शरीफ के लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों से जुड़े बयानों पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में सेना की भूमिका को लेकर कहा कि वास्तविक शक्ति किसके पास है, इसे लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।उन्होंने पाकिस्तान को “आर्मी का, आर्मी द्वारा और आर्मी के लिए शासन” बताते हुए दावा किया कि राजनीतिक चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन सत्ता का वास्तविक प्रभाव सेना के पास रहता है। यह भारत की ओर से किया गया राजनीतिक आकलन था, जिसे पाकिस्तान की सरकार या सेना की ओर से इस जवाब में स्वीकार किए गए तथ्य के रूप में नहीं पेश किया गया।
गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया। नवंबर 2025 में लागू हुए इस संशोधन ने फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की स्थापना, सैन्य कमान की संरचना में बदलाव और राष्ट्रपति की कानूनी प्रतिरक्षा समेत कई संवैधानिक बदलाव किए थे। संशोधन के तहत फील्ड मार्शल समेत कुछ उच्च सैन्य रैंकों के लिए पद और विशेषाधिकारों को जीवनभर बनाए रखने का प्रावधान भी किया गया था।
भारत ने इसी बदलाव को पाकिस्तान में सत्ता और संस्थागत व्यवस्था पर अपनी आलोचना के हिस्से के तौर पर सामने रखा।

अल्पसंख्यकों और ब्लासफेमी कानूनों पर भी भारत का हमला

भारत ने पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार और ब्लासफेमी कानूनों को लेकर भी सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से धार्मिक सहिष्णुता और मानव मूल्यों पर दिए गए भाषण उसके अपने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर दुनिया परिचित है और केवल धार्मिक या नैतिक उपदेशों से इस तस्वीर को बदला नहीं जा सकता। भारत ने पाकिस्तान के ब्लासफेमी कानूनों को भी इसी संदर्भ में उठाया।
यह हिस्सा भी भारत के जवाब का व्यापक राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी तर्क था। पाकिस्तान की ओर से इस जवाब पर अलग से प्रतिक्रिया आने पर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद और स्पष्ट हो सकते हैं।

सिंधु जल संधि और ऑपरेशन सिंदूर का भी आया संदर्भ

शहबाज शरीफ ने UNGA में सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, प्रभावित करने या मोड़ने की कोई कोशिश “युद्ध की कार्रवाई” मानी जाएगी। पाकिस्तान ने भारत के संधि को होल्ड पर रखने के फैसले को भी चुनौती दी।इसके अलावा शरीफ ने 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए सैन्य टकराव का जिक्र किया और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका को रेखांकित किया। भारत के जवाब का मुख्य जोर हालांकि कश्मीर के साथ-साथ आतंकवाद और पाकिस्तान की नीतियों पर था।
भारत की ओर से दिया गया यह राइट ऑफ रिप्लाई ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कश्मीर, आतंकवाद, सिंधु जल संधि और 2025 के सैन्य टकराव को लेकर मतभेद बने हुए हैं। UNGA में दोनों देशों के बयानों से एक बार फिर साफ हुआ कि दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन मुद्दों को अलग-अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Shehbaz Sharif ने UNGA 2026 में क्या कहा?

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कश्मीर के लिए “न्यायसंगत और उचित” समाधान की बात कही और सिंधु नदी के पानी को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा, ऐसा कहा।

Why did India respond to Shehbaz Sharif’s UN speech?

भारत ने पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर और भारत से जुड़े आरोपों का जवाब देने के लिए UN में राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल किया। भारत ने साथ ही पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का उसका अधिकार जारी रहेगा।

भारत ने Pakistan के UN address पर क्या प्रतिक्रिया दी?

भारत की ओर से पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों को खारिज करते हुए आतंकवाद, कश्मीर, लोकतांत्रिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और ब्लासफेमी कानूनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को “आतंकवाद, धोखे और दोहरेपन” से जोड़ा।

What issues were raised by Pakistan at the UN General Assembly?

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, कश्मीर में जनमत संग्रह, सिंधु जल संधि और 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया। शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस संघर्ष के दौरान भूमिका का भी उल्लेख किया।

Shehbaz Sharif के UN speech में India और Kashmir का जिक्र क्यों हुआ?

पाकिस्तान ने कश्मीर को दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए केंद्रीय मुद्दा बताते हुए इसका समाधान जरूरी बताया। भारत इसके विपरीत जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाता है।

What did India say in its right of reply?

भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ उसकी कार्रवाई और आत्मरक्षा का अधिकार जारी रहेगा। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के रिकॉर्ड, ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी, लोकतांत्रिक व्यवस्था, 27वें संविधान संशोधन और अल्पसंख्यकों के मुद्दे भी उठाए।

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