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Ukraine Army of Robots : यूक्रेन ने शुरू की ‘रोबोट आर्मी’, 6 महीने में पहले ह्यूमनॉइड हमले के लक्ष्य के क्या हैं मायने?

यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने 26 सितंबर को “आर्मी ऑफ रोबोट्स” पहल शुरू की। इसका लक्ष्य डिफेंस-टेक कंपनियों के साथ रोबोटिक सिस्टम विकसित करना है। फेडोरोव ने 6 महीने में ह्यूमनॉइड रोबोट से हमला और 12 महीने में कब्जे का लक्ष्य बताया।

Ukraine Army of Robots : यूक्रेन ने शुरू की ‘रोबोट आर्मी’, 6 महीने में पहले ह्यूमनॉइड हमले के लक्ष्य के क्या हैं मायने?

Ukraine Army of Robots : रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में इंसानों की जगह मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है। यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने 26 सितंबर 2026 को ल्वीव में हुए आईटी एरीना कॉन्फ्रेंस के दौरान “आर्मी ऑफ रोबोट्स” नाम का डिफेंस-टेक इनिशिएटिव लॉन्च किया। इसका मकसद ऐसे रोबोटिक सिस्टम विकसित करना है जो भविष्य में सैनिकों को सबसे खतरनाक मिशनों से दूर रख सकें और कुछ मामलों में उनकी जगह ले सकें। फेडोरोव ने इसे किसी एक कंपनी के बजाय एक ऐसे “इकोसिस्टम” के रूप में पेश किया है, जिसमें डिफेंस-टेक कंपनियों में निवेश, नए प्रोजेक्ट, आरएंडडी, सेना के साथ टेस्टिंग और सफल तकनीक को तेजी से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना शामिल होगा।

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ड्रोन से रोबोट तक पहुंची फेडोरोव की रणनीति

फेडोरोव का नया प्रोजेक्ट उनके पुराने “आर्मी ऑफ ड्रोन” मॉडल पर आधारित है। उन्होंने 2022 में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री रहते हुए इस कार्यक्रम को शुरू किया था। इसका उद्देश्य यूक्रेन में ड्रोन टेक्नोलॉजी के विकास, उत्पादन और सैन्य इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाना था।अब फेडोरोव उसी सोच को जमीन पर इस्तेमाल होने वाली रोबोटिक टेक्नोलॉजी तक ले जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि आर्मी ऑफ रोबोट्स के तहत डिफेंस-टेक कंपनियों में निवेश किया जाएगा, नए तकनीकी प्रोजेक्ट शुरू होंगे, आरएंडडी क्षमता तैयार की जाएगी और सेना के साथ मिलकर सिस्टम की टेस्टिंग होगी। जो तकनीक युद्ध के मैदान में काम करती दिखाई देगी, उसे तेजी से बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि, फेडोरोव ने अभी यह नहीं बताया है कि इस इनिशिएटिव के पीछे कौन-सा संगठन औपचारिक रूप से काम करेगा। उनकी प्रेस टीम ने इस बारे में पूछे गए सवालों का भी तत्काल जवाब नहीं दिया था। उन्होंने अनुभवी रोबोटिक्स इंजीनियरों से इस पहल में शामिल होने की अपील की है।

रक्षा मंत्री पद से हटने के बाद टेक्नोलॉजी पर फोकस

फेडोरोव को जुलाई 2026 में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री के पद से हटा दिया था। उनके हटने के बाद यूक्रेन के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनमें हजारों लोगों ने टेक्नोलॉजी पर फोकस करने वाले फेडोरोव की वापसी की मांग की थी।अगस्त में उन्होंने युद्ध के दौरान चुनाव कराने की मांग भी उठाई थी। इसके बाद उनका फोकस फिर डिफेंस टेक्नोलॉजी की तरफ जाता दिखा। अगस्त के अंत में अमेरिका की यात्रा के दौरान उन्होंने डिफेंस इनोवेशन और उत्पादन बढ़ाने के लिए एक फंड की घोषणा की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपनी डिफेंस-टेक कंपनी शुरू करने की योजना बताई। इसमें पालान्टिर के सीईओ एलेक्स कार्प को शुरुआती निवेशकों में शामिल बताया गया था। पालान्टिर के उत्पाद यूक्रेन के युद्ध प्रयासों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
अब आर्मी ऑफ रोबोट्स इसी व्यापक डिफेंस-टेक रणनीति का अगला हिस्सा है।

6 महीने में ह्यूमनॉइड रोबोट से हमला करने का लक्ष्य

फेडोरोव की योजना का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा ह्यूमनॉइड रोबोट हैं। उन्होंने कहा है कि पहल का लक्ष्य अगले 6 महीनों में किसी दुश्मन सैनिक को ह्यूमनॉइड रोबोट से मारने की क्षमता हासिल करना है। इसके बाद 12 महीनों के भीतर ऐसा पहला हमला करने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें किसी दुश्मन की पोजिशन पर कब्जे के लिए इंसानी इन्फैंट्री की जरूरत न पड़े।यह फिलहाल फेडोरोव द्वारा घोषित लक्ष्य है, इसे हासिल हो चुका सैन्य परिणाम नहीं माना जा सकता। उनके साथ जारी वीडियो में भविष्य के कई तरह के रोबोट दिखाए गए, जिनमें ह्यूमनॉइड, गोलाकार, कुत्ते जैसे और मकड़ी जैसे डिजाइन शामिल थे। इनमें से कई डिजाइन अभी यूक्रेन के युद्ध मैदान में इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
वीडियो में दिखाया गया कि रोबोट दुश्मन की गतिविधियों को रोकेंगे, हमलों से बचाव करेंगे, टारगेट पर हमला करेंगे और आगे बढ़कर पोजिशन को सुरक्षित करेंगे। इंसान इन सिस्टम को सुरक्षित दूरी से नियंत्रित करेंगे और इलाके को सुरक्षित किए जाने के बाद ही वहां पहुंचेंगे।

यूक्रेन में ग्राउंड रोबोट पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं

हालांकि ह्यूमनॉइड रोबोट अभी भविष्य की तकनीक हैं, लेकिन यूक्रेन के युद्ध में अनमैंड ग्राउंड व्हीकल्स यानी यूजीवी का इस्तेमाल नया नहीं है। यूक्रेन इन्हें “ग्राउंड रोबोटिक कॉम्प्लेक्स” कहता है और इनका इस्तेमाल खास तौर पर लॉजिस्टिक्स में बढ़ा है।फर्स्ट-पर्सन-व्यू ड्रोन के व्यापक इस्तेमाल ने फ्रंटलाइन के पास सैनिकों और वाहनों से सामान पहुंचाना तथा घायल सैनिकों को निकालना बेहद जोखिम भरा बना दिया है। इसलिए गोला-बारूद, सामान और कुछ मामलों में घायल सैनिकों की निकासी जैसे कामों के लिए ग्राउंड रोबोट का इस्तेमाल बढ़ा है।
कुछ यूजीवी को दुश्मन की पोजिशन पर हमला करने और सीधे लड़ाई में इस्तेमाल करने की कोशिश भी हुई है। लेकिन इन्हें पूरी तरह ऑटोनॉमस कहना सही नहीं होगा। ज्यादातर सिस्टम अभी इंसानी ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं और कई मामलों में स्टारलिंक जैसे कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है।
रोबोट होने के बावजूद इन मशीनों की अपनी सीमाएं हैं। उन्हें ऊर्जा और गोला-बारूद की जरूरत होती है, बैटरी चार्ज करनी पड़ती है और मैदान में इंसानों को ही इनकी सर्विसिंग व री-लोडिंग करनी होती है। फ्रंटलाइन के पास दुश्मन के ड्रोन भी इन ग्राउंड सिस्टम को निशाना बना सकते हैं।
यही वजह है कि फिलहाल युद्ध में रोबोट सैनिकों की जगह पूरी तरह नहीं ले पाए हैं। मौजूदा तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा खतरनाक और दोहराए जाने वाले कामों में इंसानी सैनिकों का जोखिम कम करने के लिए हो रहा है।

क्या रोबोट इंसानी सैनिकों की जगह ले पाएंगे?

फेडोरोव का विजन काफी आगे का है, जिसमें जमीन, हवा और दूसरी सैन्य तकनीकों को एक साथ जोड़कर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश है जहां इंसानों को सीधे फायरिंग लाइन में कम भेजना पड़े। लेकिन युद्ध के मैदान में रोबोट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तकनीकी विश्वसनीयता, कम्युनिकेशन, ऊर्जा, गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और दुश्मन के ड्रोन से सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां हैं।इसलिए आर्मी ऑफ रोबोट्स को अभी रोबोट सैनिकों की तैयार सेना नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध के लिए डिफेंस-टेक डेवलपमेंट प्रोग्राम के तौर पर देखना ज्यादा सही है। फेडोरोव के 6 और 12 महीने के लक्ष्य यह बताते हैं कि यूक्रेन जमीन पर अनमैंड सिस्टम के इस्तेमाल को कितनी तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन इन लक्ष्यों का वास्तविक परिणाम आने वाले महीनों में ही स्पष्ट होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Ukraine का “Army of Robots” initiative क्या है?

यह पूर्व यूक्रेनी रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव का डिफेंस-टेक इनिशिएटिव है। इसका उद्देश्य रोबोटिक सिस्टम विकसित करना, उनका सेना के साथ परीक्षण करना और सफल तकनीकों को युद्ध के मैदान में बड़े स्तर पर इस्तेमाल करना है। फेडोरोव इसे किसी एक कंपनी के बजाय एक “इकोसिस्टम” बताते हैं।

Army of Robots initiative किसने शुरू किया है?

इसे यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने 26 सितंबर 2026 को ल्वीव में आईटी एरीना कॉन्फ्रेंस के दौरान लॉन्च किया।

Mykhailo Fedorov कौन हैं?

फेडोरोव यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री और टेक्नोलॉजी-केंद्रित सरकारी पहलों से जुड़े नेता हैं। उन्होंने 2022 में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री रहते हुए “आर्मी ऑफ ड्रोन” कार्यक्रम शुरू किया था। जुलाई 2026 में उन्हें रक्षा मंत्री पद से हटा दिया गया।

Ukraine battlefield में robots का इस्तेमाल क्यों बढ़ा रहा है?

फ्रंटलाइन के पास सप्लाई पहुंचाना, घायल सैनिकों को निकालना और कुछ खतरनाक सैन्य मिशन इंसानों के लिए जोखिम भरे हैं। यूजीवी ऐसे कामों में सैनिकों की सीधी मौजूदगी कम कर सकते हैं। हालांकि मौजूदा ग्राउंड रोबोटों में ज्यादातर इंसानी ऑपरेटर की जरूरत होती है।

क्या robots future में human soldiers की जगह ले सकते हैं?

फेडोरोव का लक्ष्य कुछ युद्ध अभियानों में इंसानी सैनिकों की जरूरत कम करना है, लेकिन मौजूदा तकनीक अभी पूरी तरह मानव सैनिकों की जगह लेने की स्थिति में नहीं है। ऊर्जा, कम्युनिकेशन, री-लोडिंग, सर्विसिंग और दुश्मन के ड्रोन जैसे जोखिमों के कारण इंसानी सपोर्ट अभी भी जरूरी है।

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