महाराष्ट्र में सूखे का बड़ा संकट: 265 तहसीलें सूखाग्रस्त, 75% राज्य पर असर; किसानों के लिए क्या-क्या राहत?
महाराष्ट्र की 265 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित होने के साथ राज्य का करीब 74–75% हिस्सा सूखे के दायरे में आया है। बारिश की कमी से खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। सरकार ने किसानों के लिए कर्ज, बिजली, फीस, रोजगार, पानी, चारा और मुआवजे से जुड़े राहत उपाय घोषित किए हैं।
महाराष्ट्र में सूखे का संकट इस साल गंभीर होता दिख रहा है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। यानी राज्य के करीब 74–75% हिस्से को सूखे की स्थिति के दायरे में लाया गया है। कम बारिश से खरीफ फसलें प्रभावित हैं और किसानों के सामने पानी, कर्ज और फसल नुकसान की चुनौती बढ़ गई है।
महाराष्ट्र में सूखे का संकट इतना गहराया क्यों?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून से 18 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में सामान्य 932.3 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 755.9 मिमी बारिश हुई। यानी राज्य में कुल बारिश करीब 18.8% कम रही।सबसे ज्यादा असर मराठवाड़ा और विदर्भ के कई हिस्सों में दिखाई दिया। छत्रपति संभाजीनगर डिविजन में सामान्य 613.1 मिमी के मुकाबले 424.5 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो करीब 30.8% की कमी है। पुणे और नासिक डिविजन में भी लगभग 30% बारिश की कमी बताई गई है।सोलापुर, लातूर, अमरावती समेत कई जिलों में बारिश की कमी 40–50% तक पहुंचने की बात सरकारी आंकड़ों में सामने आई है।
265 तहसीलें सूखाग्रस्त, 'Trigger-1' लागू
राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन नियमावली 2016, जिसमें 2020 में संशोधन किया गया था, के तहत 'Trigger-1' लागू किया है।इस व्यवस्था के तहत किसी क्षेत्र में सामान्य से 25% से अधिक बारिश की कमी और लगातार 21 दिनों का सूखा स्पेल जैसे संकेत मिलने पर सूखा प्रबंधन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर 32 जिलों की 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें सोलापुर, अहिल्यानगर, नासिक, लातूर, बीड, बुलढाणा, अमरावती, यवतमाल, नागपुर और चंद्रपुर जैसे जिले शामिल हैं।
फसलों पर सबसे बड़ा असर
कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का और तुअर जैसी फसलों को नुकसान हुआ है। कई क्षेत्रों में फसलें सूखने के साथ कीट और बीमारियों का भी प्रकोप बताया गया है।
सूखा घोषित होने के बाद किसानों को क्या राहत मिलेगी?
सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की है।
- फसल ऋण पुनर्गठन: मौजूदा फसल ऋणों का पुनर्गठन किया जाएगा।
- कर्ज वसूली पर राहत: कृषि से जुड़े कुछ कर्जों की वसूली स्थगित की जाएगी।
- बिजली बिल में छूट: कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत दी जाएगी। 7.5 HP तक के पंपों के बिल पहले ही माफ किए जा चुके हैं।
- लगान में छूट: प्रभावित किसानों को जमीन के लगान में राहत मिलेगी।
- शिक्षा शुल्क माफी: प्रभावित किसानों के बच्चों की स्कूल-कॉलेज परीक्षा फीस माफ करने का प्रावधान किया गया है।
- रोजगार: मनरेगा के तहत अधिक काम उपलब्ध कराने के लिए नियमों में ढील दी जाएगी।
- पानी और चारा: ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जाएगी।
- फसल नुकसान का आकलन: कलेक्टरों को GPS और तस्वीरों के साथ पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुआवजे के लिए अलग वित्तीय प्रावधान से संबंधित सरकारी आदेश भी जारी किया जाना है।
क्या अल नीनो भी बना वजह?
इस साल महाराष्ट्र में बारिश की कमी के पीछे अल नीनो के प्रभाव को भी चर्चा में रखा गया है। हालांकि किसी एक मौसमीय घटना को पूरे सूखे का अकेला कारण मानने के बजाय बारिश के पैटर्न और क्षेत्रीय परिस्थितियों को साथ देखना जरूरी है।राज्य में किसानों की परेशानी के बीच 16 सितंबर को कई स्थानों पर प्रदर्शन भी हुए थे। इसके बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों का आकलन और राहत उपाय तेज किए।
Maharashtra Drought Crisis: आगे की चुनौती क्या?
महाराष्ट्र में सूखे का संकट सिर्फ फसल नुकसान तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक बारिश की कमी रहने पर भूजल, पेयजल, पशुधन, ग्रामीण रोजगार और किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।सरकार की ओर से घोषित राहत तत्काल दबाव कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि फसल नुकसान का आकलन, मुआवजा, पानी की आपूर्ति और ऋण राहत कितनी तेजी से जमीन पर लागू होती है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र में 265 तहसीलों का सूखाग्रस्त घोषित होना राज्य के लिए गंभीर जल और कृषि संकट का संकेत है। कम बारिश ने खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। अब राहत पैकेज के साथ सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित किसानों तक समय पर मुआवजा, पानी, चारा और कर्ज राहत पहुंचाना है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
महाराष्ट्र में कितनी तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हुई हैं?
राज्य की 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
महाराष्ट्र में कितनी बारिश कम हुई?
जून से 18 सितंबर के बीच सामान्य 932.3 मिमी के मुकाबले 755.9 मिमी बारिश हुई, यानी करीब 18.8% कमी।
किन फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है?
सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का और तुअर जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ा है।
किसानों को क्या राहत मिलेगी?
ऋण पुनर्गठन, कर्ज वसूली में राहत, बिजली बिल में छूट, लगान और परीक्षा फीस में राहत, मनरेगा के तहत रोजगार तथा पानी और चारे की व्यवस्था जैसे उपाय घोषित किए गए हैं।
सूखे की स्थिति में 'Trigger-1' क्या है?
यह सूखा प्रबंधन व्यवस्था का शुरुआती चरण है, जिसे बारिश की गंभीर कमी और लगातार सूखे की स्थिति जैसे संकेतों के आधार पर लागू किया जाता है।