UNICORN Naval Radar India Japan : भारत-जापान का यूनिकॉर्न सिस्टम, नौसेना के जहाजों की कैसे बढ़ाएगा ताकत?
भारत और जापान यूनिकॉर्न सिस्टम का भारत में ट्रांसफर और भारतीय नौसेना के जहाजों पर जल्द इस्तेमाल की प्रक्रिया तेज कर रहे हैं। यह इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एंटीना सिस्टम कई एंटीना को एकीकृत कर जहाजों का रडार क्रॉस सेक्शन घटाने में मदद कर सकता है।
UNICORN Naval Radar India Japan : भारत और जापान ने अपने रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए यूनिकॉर्न सिस्टम के ट्रांसफर और इसे भारतीय नौसेना के जहाजों पर लगाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर जोर दिया है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। जापानी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश यूनिकॉर्न को भारत में जल्द ट्रांसफर करने के लिए भारत की घरेलू प्रक्रियाओं समेत जरूरी कदमों पर मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों ने इसे अपने बीच पहला रक्षा उपकरण ट्रांसफर प्रोजेक्ट बताया है।

यूनिकॉर्न रडार नहीं, एक इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस सिस्टम है
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यूनिकॉर्न को सिर्फ नेवल रडार कहना सही नहीं है। यूनिकॉर्न यानी यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना एक जहाज पर लगाया जाने वाला इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एंटीना सिस्टम है। इसका मकसद कई कम्युनिकेशन और दूसरे एंटीना सिस्टम को एक ही मास्ट और रैडोम स्ट्रक्चर में एकीकृत करना है। भारत के रक्षा विभाग से जुड़े दस्तावेज के मुताबिक इसमें वी/यूएचएफ कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आईएफएफ, टैकैन, वाई-फाई और लिंक-16 जैसी क्षमताओं को एकीकृत करने की योजना है।ऐसी व्यवस्था से युद्धपोत के ऊपर अलग-अलग जगहों पर लगे कई एंटीना कम किए जा सकते हैं। इससे जहाज का रडार क्रॉस सेक्शन घटाने में मदद मिल सकती है और उसकी स्टील्थ क्षमता बेहतर हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि जहाज रडार से पूरी तरह गायब हो जाएगा, बल्कि उसका पता लगाना अपेक्षाकृत मुश्किल बनाने में मदद मिल सकती है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने भी यूनिकॉर्न को ऐसी प्रणाली बताया है जो नौसैनिक प्लेटफॉर्म की स्टील्थ विशेषताओं को बेहतर करने में मदद करेगी।
2024 में हुआ था समझौता, अब ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज करने पर जोर
भारत और जापान ने 15 नवंबर 2024 को टोक्यो में यूनिकॉर्न मास्ट के सह-विकास के लिए मेमोरेंडम ऑफ इम्प्लीमेंटेशन पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए इस सिस्टम को विकसित करने की व्यवस्था की गई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बीईएल को जापानी सहयोग के साथ भारत में इसके विकास और उत्पादन में भूमिका दी गई है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने उस समय कहा था कि इसके लागू होने पर यह भारत-जापान के बीच रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन का पहला मामला होगा।जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूनिकॉर्न के ट्रांसफर से जुड़ी बातचीत पहले से चल रही थी और 2024 में इसके लिए जरूरी एमओआई पर हस्ताक्षर हो चुके थे। अगस्त 2026 में दोनों देशों ने अब इसके जल्द क्रियान्वयन पर जोर दिया। जापान ने साफ कहा कि इसके लिए भारत की घरेलू प्रक्रियाओं पर भी मिलकर काम किया जाएगा।
जुलाई की समिट में तकनीकी मुद्दों पर बनी सहमति
यूनिकॉर्न प्रोजेक्ट को जुलाई 2026 में हुई 16वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक में भी अहम जगह मिली थी। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने यूनिकॉर्न से जुड़े बाकी तकनीकी मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनने का स्वागत किया और प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की उम्मीद जताई। साथ ही दोनों देशों ने रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दूसरे प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई।इसके पीछे जापान की रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नीति में किया गया बदलाव भी महत्वपूर्ण है। जुलाई की बैठक में भारत ने जापान की ट्रांसफर नीति की समीक्षा का स्वागत किया था। अगस्त की रक्षा मंत्री स्तर की बैठक में भी राजनाथ सिंह ने जापान के इस बदलाव को भारत-जापान रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
यूनिकॉर्न के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग भी बढ़ा
20 अगस्त की बैठक सिर्फ यूनिकॉर्न तक सीमित नहीं थी। भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट पर भी हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस से जुड़ी सूचना साझा करने, सर्च एंड रेस्क्यू तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत में सहयोग बढ़ाने की व्यवस्था की गई।दोनों देशों ने समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों की पारस्परिक यात्राएं, संयुक्त अभ्यास, सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान तथा बंदरगाहों और मेंटेनेंस-रिपेयर सुविधाओं के इस्तेमाल को भी बढ़ाने पर सहमति जताई। माइन काउंटरमेजर्स और नौसैनिक जहाजों के संयुक्त डिजाइन व विकास की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। इसमें जापान की टेक्नोलॉजी और भारत की उत्पादन क्षमता को साथ लाने पर जोर दिया गया है।
भारत में बनेगा सिस्टम, आगे दूसरे रक्षा प्रोजेक्ट का रास्ता खुल सकता है
यूनिकॉर्न प्रोजेक्ट भारत के लिए सिर्फ एक नौसैनिक उपकरण हासिल करने का मामला नहीं है। 2024 के समझौते में भारत में इसके सह-विकास और सह-उत्पादन की व्यवस्था की गई थी। इससे भारतीय कंपनियों को जटिल नौसैनिक सिस्टम के विकास और उत्पादन में अनुभव हासिल करने का अवसर मिल सकता है। यह भारत की मेक इन इंडिया नीति और घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा से भी जुड़ा है।इसी बैठक में दोनों देशों ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ और जापान की एक्विजिशन, टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी यानी एटीएलए के बीच अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही। रक्षा उद्योग के लिए एक डिफेंस इंडस्ट्री फोरम आयोजित करने की भी योजना है।
इसके अलावा दोनों देशों ने एक नया वरिष्ठ स्तर का वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है। यह ग्रुप ऑपरेशनल, इंटेलिजेंस, उपकरण, टेक्नोलॉजी और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाने और अलग-अलग पहलों के क्रियान्वयन में तेजी लाने का काम करेगा।
भारत और जापान आगे नौसैनिक जहाजों के संयुक्त डिजाइन और निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। ऐसे में यूनिकॉर्न प्रोजेक्ट को दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी सहयोग की शुरुआती बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इसकी अंतिम डिलीवरी और भारतीय नौसेना के जहाजों पर व्यापक इस्तेमाल के लिए अभी संबंधित घरेलू मंजूरियां और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
UNICORN Naval Radar System क्या है?
यूनिकॉर्न को नेवल रडार कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। यह यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना यानी इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एंटीना सिस्टम है, जिसे युद्धपोत पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य कई एंटीना और कम्युनिकेशन सिस्टम को एकीकृत करना और जहाज की स्टील्थ विशेषताओं को बेहतर करने में मदद करना है।
Japan ने India से UNICORN Agreement की प्रक्रिया तेज करने को क्यों कहा?
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त 2026 की बैठक के बाद कहा कि यूनिकॉर्न को भारत में जल्द ट्रांसफर करने के लिए दोनों देश भारत की घरेलू प्रक्रियाओं समेत जरूरी कदमों पर मिलकर काम करेंगे। दोनों देश इस प्रोजेक्ट को जल्द लागू करना चाहते हैं।
India और Japan के बीच UNICORN Agreement क्या है?
15 नवंबर 2024 को दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए यूनिकॉर्न मास्ट के सह-विकास से जुड़ा मेमोरेंडम ऑफ इम्प्लीमेंटेशन साइन किया था। भारत में बीईएल जापानी सहयोग के साथ इसके विकास और उत्पादन में भूमिका निभा रहा है।
UNICORN System Indian Navy के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यूनिकॉर्न कई कम्युनिकेशन और एंटीना सिस्टम को एकीकृत करता है। इससे जहाज पर अलग-अलग एंटीना की जरूरत कम हो सकती है और रडार क्रॉस सेक्शन घटाने में मदद मिल सकती है, जिससे नौसैनिक प्लेटफॉर्म की स्टील्थ क्षमता बेहतर हो सकती है।
India-Japan Defence Cooperation में इस Agreement का क्या महत्व है?
भारत और जापान ने इसे दोनों देशों के बीच पहला रक्षा उपकरण ट्रांसफर प्रोजेक्ट बताया है। इसके साथ दोनों देश डीआरडीओ-एटीएलए सहयोग, रक्षा उद्योग, माइन काउंटरमेजर्स, जहाज निर्माण और रिपेयर सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे आगे दूसरे रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट के लिए भी आधार तैयार हो सकता है।