Firecracker Ban Supreme Court 2026 : पटाखों पर न पूरा बैन, न 24 घंटे छूट; सुप्रीम कोर्ट ने क्या तय की नई शर्तें?
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध और पूरे दिन इस्तेमाल की अनुमति, दोनों से इनकार किया है। जॉइंट पटाखों को शर्तों के साथ अनुमति देने की दिशा में सहमति बनी, जबकि बेरियम वाले ग्रीन पटाखों पर फैसला चार शहरों की टेस्टिंग के बाद होगा।
Firecracker Ban Supreme Court 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वह न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है और न ही पूरे दिन बेरोकटोक पटाखे चलाने की अनुमति देगा। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि धार्मिक भावनाओं और पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के असर के बीच संतुलन बनाना होगा। इसी सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफारिश के आधार पर जॉइंट पटाखों यानी लड़ियों को कुछ शर्तों के साथ बनाने और इस्तेमाल करने की अनुमति देने की दिशा में सहमति जताई। वहीं, जनरेशन-2 ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल पर फैसला चार शहरों में होने वाली आउटडोर टेस्टिंग के नतीजों के बाद होगा। दिल्ली-NCR में इस साल दिवाली के दौरान पटाखों के नियमों पर कोर्ट ने फिलहाल कोई आदेश नहीं दिया है, क्योंकि इससे जुड़े मामले की सुनवाई अलग से एमसी मेहता केस में हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने से क्यों इनकार किया?
कोर्ट ने साफ किया कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और उन्हें पूरे दिन इस्तेमाल करने की अनुमति देने, दोनों के बीच संतुलित रास्ता तलाशना होगा। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से त्योहारों से जुड़ी भावनाओं पर असर पड़ेगा, जबकि 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों समेत दूसरे जीवों पर प्रदूषण का गंभीर असर हो सकता है।कोर्ट जिस मामले की सुनवाई कर रहा है, वह अरुण गोपाल बनाम भारत संघ है। यह मामला 2015 में तीन बच्चों की ओर से दायर किया गया था, जिसमें पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने संकेत दिया कि आगे पटाखे चलाने के लिए निर्धारित समय और इस्तेमाल किए जा सकने वाले पटाखों की श्रेणी तय की जा सकती है। यानी 30 सितंबर की सुनवाई को पटाखों पर अंतिम और देशव्यापी छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
2018 से प्रतिबंधित जॉइंट पटाखों को अब क्या मिला?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस सिफारिश को स्वीकार करने की दिशा में सहमति जताई है, जिसमें जॉइंट पटाखों यानी लड़ियों को कुछ शर्तों के साथ बनाने की अनुमति देने की बात कही गई थी।जॉइंट पटाखे या सीरीज क्रैकर्स ऐसे पटाखे होते हैं जिनमें कई अलग-अलग पटाखों को एक साथ जोड़ा जाता है और वे एक के बाद एक फटते हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण, शोर और ठोस कचरे से जुड़ी चिंताओं के कारण इनके निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
इस बार केंद्र सरकार ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से स्टेकहोल्डर्स और तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद नई सिफारिशें कोर्ट के सामने रखीं। इन सिफारिशों में सीएसआईआर-नीरी की तकनीकी सलाह भी शामिल है।
नई व्यवस्था में जॉइंट पटाखों की शेल का आकार, पटाखों की संख्या और लगातार होने वाले विस्फोटों के बीच समय का अंतर निर्धारित किया जाएगा। कोर्ट ने इन्हीं सुरक्षा शर्तों के साथ नई पीढ़ी के जॉइंट पटाखों को अनुमति देने की सिफारिश स्वीकार करने की इच्छा जताई है।
जुलाई में कोर्ट ने सरकार से यह भी जांचने को कहा था कि निर्धारित 125 डेसीबल शोर मानक के तहत कुछ पटाखों के लिए मौजूदा प्रतिबंधों में आंशिक छूट दी जा सकती है या नहीं। पटाखा निर्माताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि नई तकनीकी शर्तें आगे के शोध पर आधारित हैं और इनसे पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
ग्रीन पटाखों में बेरियम पर फैसला अभी बाकी
सुनवाई में दूसरा बड़ा मुद्दा जनरेशन-2 ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल का था। इस मामले में कोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है।केंद्र सरकार ने बताया कि सीएसआईआर-नीरी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बेरियम वाले ग्रीन पटाखों के पर्यावरणीय असर की जांच के लिए चार शहरों में आउटडोर टेस्टिंग की सिफारिश की है। ये शहर दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई हैं।
सरकार के मुताबिक प्रस्तावित फॉर्मुलेशन की लैब टेस्टिंग हो चुकी है, लेकिन अलग-अलग एयर क्वालिटी परिस्थितियों में वास्तविक असर जानने के लिए आउटडोर टेस्टिंग जरूरी है। केंद्र ने इसके नतीजे पेश करने के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक का समय मांगा है। कोर्ट ने इस मुद्दे को 15 अक्टूबर को सुनने पर सहमति दी।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इसका फैसला आउटडोर टेस्टिंग के नतीजों से जुड़ा हुआ है।
पटाखों के समय पर भी लग सकती है पाबंदी
पटाखों के इस्तेमाल का समय भी इस मामले का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और किसी निश्चित अवधि में ही इस्तेमाल की अनुमति देने पर विचार किया जाएगा।याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि पहले तय किए गए समय की पाबंदियों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हुआ। उनके वकील ने कहा कि प्रदूषण का दबाव केवल दिवाली के दो दिनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दशहरा और दुर्गा पूजा के आसपास से पटाखों का इस्तेमाल शुरू हो जाता है। इसके साथ ही पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का असर भी दिवाली के समय की हवा पर पड़ता है।
दिल्ली-NCR में इस साल क्या नियम होंगे?
दिल्ली-NCR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर की सुनवाई में फिलहाल कोई नया आदेश नहीं दिया। इसकी वजह यह है कि पटाखों से जुड़े कुछ मुद्दे एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में पहले से ही लंबित हैं।इस मामले में दिल्ली-NCR के लिए पहले अलग प्रतिबंध लगाए गए थे। 2025 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने दिवाली के दौरान कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। उस व्यवस्था में बिक्री के स्थान, इस्तेमाल का समय और केवल निर्धारित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल जैसी शर्तें शामिल थीं।
30 सितंबर को जॉइंट पटाखों और दूसरे प्रस्तावित बदलावों को दिल्ली-NCR पर भी लागू करने की मांग सामने आई। पटाखा निर्माताओं और कारोबारियों की ओर से कहा गया कि अरुण गोपाल और एमसी मेहता मामलों में कुछ मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग-अलग आदेशों से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दिल्ली-NCR में अलग से सख्त प्रतिबंध की मांग का विरोध नहीं किया गया और क्षेत्र में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का हवाला दिया गया। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को उस बेंच के सामने रखा जा सकता है जो एमसी मेहता मामले की सुनवाई कर रही है। इसलिए दिल्ली-NCR में दिवाली 2026 के पटाखों पर अंतिम व्यवस्था अभी इस सुनवाई से तय नहीं हुई है।
इस बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब क्या है?
30 सितंबर की सुनवाई के बाद तीन बातें अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का संकेत नहीं दिया है। दूसरी, पूरे दिन पटाखे चलाने की खुली अनुमति भी नहीं दी गई है। तीसरी, जॉइंट पटाखों को निर्धारित तकनीकी शर्तों के साथ अनुमति देने की दिशा में कोर्ट ने केंद्र की सिफारिश स्वीकार की है, जबकि बेरियम वाले जनरेशन-2 ग्रीन पटाखों पर फैसला अभी टेस्टिंग के बाद होना है।पटाखों से जुड़े दूसरे प्रतिबंधों और निर्माण-बिक्री पर रोक की मांग वाली अर्जियों की सुनवाई भी आगे जारी रहेगी। इसलिए दिवाली 2026 के लिए अंतिम नियम आने तक इस सुनवाई को पूर्ण और अंतिम पटाखा नीति मानना सही नहीं होगा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Supreme Court Firecracker Ban 2026 पर क्या फैसला आया?
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाएगा, लेकिन पूरे दिन बेरोकटोक पटाखे चलाने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। कोर्ट निर्धारित समय और अनुमत पटाखों की श्रेणी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्या Diwali 2026 में firecrackers पर total ban है?
नहीं। 30 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में सहमति नहीं जताई है। हालांकि, दिवाली 2026 के लिए अंतिम समय और अन्य शर्तें अभी तय होनी बाकी हैं। खासकर दिल्ली-NCR का मामला अलग कार्यवाही से जुड़ा है।
Supreme Court ने firecrackers पर complete ban क्यों नहीं लगाया?
कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं और पटाखों से होने वाले प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों के बीच संतुलन की जरूरत बताई। कोर्ट ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर वायु प्रदूषण के असर को भी ध्यान में रखा है।
Green Crackers क्या हैं और India में इनके क्या rules हैं?
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखों की श्रेणी हैं जिन्हें निर्धारित कम-उत्सर्जन मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले केवल निर्धारित मानकों वाले ग्रीन और कम-उत्सर्जन वाले पटाखों की अनुमति से जुड़ी व्यवस्था बनाई थी। बेरियम वाले जनरेशन-2 ग्रीन पटाखों के संबंध में 2026 की सुनवाई में अतिरिक्त आउटडोर टेस्टिंग चल रही है।
Diwali Firecracker Guidelines 2026 क्या हैं?
30 सितंबर की सुनवाई के बाद पूरे देश के लिए अंतिम दिवाली गाइडलाइन अभी तय नहीं हुई है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि पटाखों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित समय और अनुमत पटाखों की श्रेणी तय की जा सकती है। जॉइंट पटाखों के लिए शेल का आकार, संख्या और विस्फोटों के बीच अंतर जैसी शर्तें प्रस्तावित हैं।
क्या सभी राज्यों में Firecracker Rules एक जैसे हैं?
सुप्रीम कोर्ट के कुछ पटाखा संबंधी निर्देश देशभर में लागू होते रहे हैं, लेकिन दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति और एमसी मेहता मामले में चल रही अलग कार्यवाही के कारण वहां विशेष शर्तें लागू हो सकती हैं। 2026 में दिल्ली-NCR के लिए दिवाली की अंतिम व्यवस्था अभी अलग सुनवाई से तय होनी है।