Pneumonic plague fears Russia : रूस में लैब कर्मचारी की मौत से प्लेग का शक, कैसे फैलता है न्यूमोनिक प्लेग?
रूस के इरकुत्स्क में लैब वर्कर दार्या शिपिलोवा की निमोनिया के बाद मौत से प्लेग की आशंका बढ़ी है। करीब 197 संपर्क में आए लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्लेग की पुष्टि नहीं की और स्थिति स्थिर बताई है।
Pneumonic plague fears Russia : रूस के साइबेरियाई क्षेत्र इरकुत्स्क में 28 साल की लैब वर्कर दार्या शिपिलोवा की मौत के बाद निमोनिक प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिपिलोवा इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं और गंभीर निमोनिया के बाद 2 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। उनके संपर्क में आए करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। इरकुत्स्क क्षेत्र के कुछ अस्पतालों में क्वारंटीन जैसे एहतियाती कदम उठाए गए हैं, जबकि शेलेखोव स्थित एक एल्युमिनियम प्लांट में कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य किया गया। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला की मौत को प्लेग से हुई मौत के रूप में आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है। रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने इसे अज्ञात कारण की निमोनिया बताया है और कहा है कि जांच में महिला के पेशे से जुड़े सूक्ष्मजीव नहीं मिले। एजेंसी के मुताबिक इरकुत्स्क और शेलेखोव में महामारी संबंधी स्थिति स्थिर है।

टेस्ट ट्यूब टूटने की रिपोर्ट से बढ़ी आशंका
दार्या शिपिलोवा इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में लैब टेक्नीशियन थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, 25 सितंबर को उनके काम के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूटने की बात सामने आई थी और इसमें प्लेग बैक्टीरिया होने की आशंका जताई गई। इसके बाद उन्हें गंभीर निमोनिया हुआ और 29 सितंबर को शेलेखोव के अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। हालांकि, यह भी साफ है कि टेस्ट ट्यूब टूटने और उनकी बीमारी के बीच संबंध की रूसी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है। रोस्पोट्रेबनादजोर का कहना है कि संस्थान में रोगजनक सूक्ष्मजीवों के साथ काम के दौरान किसी दुर्घटना का पता नहीं चला।महिला की मौत के बाद उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक करीब 197 लोग निगरानी में हैं और उनमें बीमारी के लक्षण सामने आने की जानकारी नहीं दी गई है। इरकुत्स्क के कई अस्पतालों में भी एहतियाती क्वारंटीन उपायों की खबर सामने आई है। शेलेखोव के इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट ने भी 3 अक्टूबर से कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य किया।

रूस ने कहा- प्लेग की पुष्टि नहीं हुई
इस मामले में सबसे अहम अंतर रिपोर्ट और आधिकारिक पुष्टि के बीच है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे संभावित निमोनिक प्लेग से जोड़ा जा रहा है, लेकिन रूस की स्वास्थ्य एजेंसी ने अभी ऐसा कोई आधिकारिक निदान नहीं दिया है।रोस्पोट्रेबनादजोर ने महिला की बीमारी को “अज्ञात कारण की निमोनिया” बताया है। एजेंसी के मुताबिक, विस्तृत जांच में ऐसे सूक्ष्मजीव नहीं मिले जो उनके पेशे से जुड़े हों। उसने इरकुत्स्क क्षेत्र और इरकुत्स्क तथा शेलेखोव शहरों की महामारी संबंधी स्थिति को स्थिर बताया है। इसी वजह से फिलहाल इसे रूस में निमोनिक प्लेग का प्रकोप कहना सही नहीं होगा।
क्षेत्रीय गवर्नर इगोर कोबजेव ने रूस के मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी अन्ना पोपोवा के साथ बैठक की थी। उन्होंने इसे क्षेत्र के एक निवासी में संभावित “विशेष रूप से खतरनाक संक्रामक बीमारी” के मामले से जुड़ी बैठक बताया था। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाए।
निमोनिक प्लेग सामान्य प्लेग से कितना अलग है?
प्लेग यर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर छोटे स्तनधारी जीवों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है। संक्रमित पिस्सू के काटने, संक्रमित जानवरों के ऊतकों या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क और कुछ परिस्थितियों में संक्रमित श्वसन कणों के जरिए इंसान संक्रमित हो सकता है। WHO के मुताबिक प्लेग के तीन प्रमुख रूप हैं - ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और निमोनिक।ब्यूबोनिक प्लेग सबसे आम रूप है। इसमें बुखार, कमजोरी और दर्दनाक सूजी हुई लिम्फ नोड्स यानी ब्यूबोज दिखाई दे सकते हैं। सेप्टीसीमिक प्लेग में बैक्टीरिया खून में फैल जाता है। वहीं निमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है और सबसे गंभीर रूप माना जाता है।
निमोनिक प्लेग संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाले श्वसन कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है, खासकर तब जब दोनों के बीच नजदीकी और लगातार संपर्क हो। इसलिए संदिग्ध मरीज को अलग रखना और उसके करीबी संपर्कों की निगरानी करना जरूरी माना जाता है।
बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है, लेकिन इलाज संभव है
निमोनिक प्लेग की सबसे बड़ी चिंता इसकी तेजी से बढ़ने वाली गंभीरता है। WHO के अनुसार इसके लक्षण बहुत तेजी से सामने आ सकते हैं और बिना इलाज के बीमारी जानलेवा हो सकती है। CDC के मुताबिक निमोनिक प्लेग का सामान्य इनक्यूबेशन पीरियड करीब 1 से 3 दिन होता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, सांस लेने में परेशानी और कभी-कभी खून मिला बलगम शामिल हो सकता है।WHO के मुताबिक बिना इलाज के निमोनिक प्लेग 18 से 24 घंटे के भीतर भी जानलेवा हो सकता है, लेकिन समय पर सही एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसे ठीक किया जा सकता है। CDC भी प्लेग की आशंका होने पर टेस्ट की अंतिम पुष्टि का इंतजार किए बिना इलाज शुरू करने की जरूरत बताता है।
यही कारण है कि संदिग्ध मामलों में आइसोलेशन, कॉन्टैक्ट मॉनिटरिंग और जल्द इलाज जैसे कदम उठाए जाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर निमोनिया का मरीज प्लेग से संक्रमित है। संक्रमण की पुष्टि के लिए यर्सिनिया पेस्टिस की पहचान करने वाली लैब जांच जरूरी होती है।
प्लेग की वैक्सीन आम लोगों के लिए नहीं
प्लेग के खिलाफ वैक्सीन मौजूद है, लेकिन WHO आम आबादी के लिए नियमित प्लेग वैक्सीनेशन की सिफारिश नहीं करता। वैक्सीनेशन मुख्य रूप से उन हाई-रिस्क लोगों के लिए विचार किया जाता है, जिनका लगातार संक्रमण के संपर्क में आने का खतरा रहता है, जैसे कुछ लैब कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी। आम तौर पर बचाव का जोर संक्रमण की जल्दी पहचान, मरीज को अलग रखने और करीबी संपर्कों की निगरानी पर रहता है।

भारत में भी हो चुका है निमोनिक प्लेग का मामला
भारत में भी निमोनिक प्लेग का प्रकोप पहले सामने आ चुका है। WHO के अनुसार फरवरी 2002 में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के हटकोटी गांव में 16 मामले सामने आए थे, जिनमें 4 लोगों की मौत हुई थी। जांच में क्लिनिकल सैंपल में यर्सिनिया पेस्टिस की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीजों के संपर्कों को दवाएं दीं, निगरानी बढ़ाई और संक्रमण रोकने के लिए कई कदम उठाए थे।इस पुराने मामले और मौजूदा साइबेरिया की स्थिति में सबसे अहम अंतर यह है कि रूस के मामले में अभी प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए भारत में फिलहाल इस घटना के आधार पर किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। रूस में भी मौजूदा स्थिति को लेकर स्वास्थ्य एजेंसी ने महामारी संबंधी स्थिति को स्थिर बताया है।
फिलहाल साइबेरिया का मामला जांच और निगरानी के चरण में है। एक लैब कर्मचारी की मौत, करीब 197 लोगों की मेडिकल निगरानी और अस्पतालों में एहतियाती कदम जरूर गंभीरता दिखाते हैं, लेकिन इन्हें अपने आप में प्लेग आउटब्रेक की पुष्टि नहीं माना जा सकता। आगे की जांच से ही यह साफ होगा कि दार्या शिपिलोवा की मौत वास्तव में यर्सिनिया पेस्टिस संक्रमण से जुड़ी थी या किसी दूसरे कारण से।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Russia में Siberia lab death की investigation क्यों की जा रही है?
इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय लैब वर्कर दार्या शिपिलोवा की गंभीर निमोनिया के बाद मौत हुई। उनके काम के दौरान टेस्ट ट्यूब टूटने और प्लेग बैक्टीरिया के संभावित संपर्क की रिपोर्ट सामने आई, इसलिए उनकी मौत के कारण और संभावित संक्रमण की जांच की जा रही है। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने लैब एक्सपोजर या प्लेग की पुष्टि नहीं की है।
Siberia में pneumonic plague fears क्यों बढ़े हैं?
चिंता इसलिए बढ़ी क्योंकि मृतक महिला एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं और उनकी मौत गंभीर निमोनिया के बाद हुई। इसके बाद उनके करीब 197 संपर्कों को मेडिकल निगरानी में रखा गया और कुछ अस्पतालों में क्वारंटीन जैसे एहतियाती कदम उठाए गए।
Pneumonic plague क्या है और यह कैसे फैलता है?
निमोनिक प्लेग यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया से होने वाला प्लेग का गंभीर रूप है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति के श्वसन कणों के जरिए करीबी संपर्क में मौजूद दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण पहुंच सकता है। समय पर एंटीबायोटिक इलाज मिलने पर इसका उपचार संभव है।
Siberia laboratory में reported death को लेकर क्या investigation चल रही है?
जांच का मुख्य उद्देश्य महिला की मौत के वास्तविक कारण और उनकी बीमारी का लैब में काम से कोई संबंध था या नहीं, यह पता लगाना है। रोस्पोट्रेबनादजोर के मुताबिक विस्तृत जांच में महिला के पेशे से जुड़े सूक्ष्मजीव नहीं मिले और संस्थान में रोगजनक सूक्ष्मजीवों के साथ काम के दौरान किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं हुई।
क्या Russia में pneumonic plague outbreak की पुष्टि हुई है?
नहीं। 5 अक्टूबर 2026 तक रूस ने निमोनिक प्लेग आउटब्रेक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रोस्पोट्रेबनादजोर ने महिला की बीमारी को अज्ञात कारण की निमोनिया बताया है और इरकुत्स्क क्षेत्र की महामारी संबंधी स्थिति को स्थिर कहा है।