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Railways saved 255 elephants : AI अलर्ट से ‘प्लान बी’ तक, रेलवे ने नॉर्थईस्ट में 255 हाथियों को ट्रेन हादसों से कैसे बचाया?

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों को ट्रेन हादसों से बचाया। इसके लिए एआई अलर्ट सिस्टम, स्पीड प्रतिबंध, पेट्रोलिंग, ‘प्लान बी’, अंडरपास और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ रियल टाइम कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया गया।

Railways saved 255 elephants : AI अलर्ट से ‘प्लान बी’ तक, रेलवे ने नॉर्थईस्ट में 255 हाथियों को ट्रेन हादसों से कैसे बचाया?

Railways saved 255 elephants : नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों को संभावित ट्रेन टक्कर से बचाने में सफलता हासिल की है। रेलवे ने इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अलर्ट सिस्टम, स्पीड प्रतिबंध, गश्त बढ़ाने, ‘प्लान बी’ सिस्टम और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ रियल टाइम कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया। NFR के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर कपिंजल किशोर शर्मा के मुताबिक, इन समय पर किए गए हस्तक्षेपों से अलीपुरद्वार डिवीजन में 106, रंगिया में 14, लुमडिंग में 122 और तिनसुकिया में 15 हाथियों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाया गया।नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सामने चुनौती इसलिए बड़ी है क्योंकि इसके कई रेल सेक्शन जंगल और हाथियों के आवास वाले इलाकों से होकर गुजरते हैं। ऐसे हिस्सों में हाथियों की अचानक ट्रैक पर मौजूदगी ट्रेन के लिए भी जोखिम पैदा करती है और वन्यजीवों के लिए भी। NFR ने अब तकनीक के साथ ग्राउंड लेवल निगरानी और वन विभाग के साथ तालमेल को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया है।

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ट्रैक के पास हाथी आते ही AI देता है अलर्ट

NFR ने संवेदनशील रेल सेक्शन में AI आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम यानी IDS लगाया है। यह सिस्टम डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम यानी DAS तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसका काम रेल ट्रैक के आसपास होने वाली गतिविधियों को पहचानकर हाथियों की मौजूदगी का रियल टाइम अलर्ट देना है।अलर्ट मिलने के बाद रेलवे कर्मचारी संबंधित सेक्शन में ट्रेन की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं और ट्रेन क्रू को भी सूचना दी जाती है। इससे लोको पायलट को हाथियों के ट्रैक के आसपास होने की जानकारी समय रहते मिल जाती है और जरूरत पड़ने पर ट्रेन की रफ्तार कम की जा सकती है या दूसरी सुरक्षा कार्रवाई की जा सकती है। NFR ने ऐसे संवेदनशील हिस्सों में तकनीक आधारित निगरानी के साथ नियमित पेट्रोलिंग भी बढ़ाई है।
हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर कुछ हिस्सों में टेम्परेरी और नाइट-टाइम स्पीड रिस्ट्रिक्शन भी लगाए जाते हैं। इसके अलावा ट्रैक के आसपास की वनस्पति साफ की जाती है, सावधानी वाले साइन लगाए जाते हैं और ट्रेन क्रू को संवेदनशील इलाकों के बारे में लगातार जानकारी दी जाती है।

‘प्लान बी’ में मधुमक्खियों की आवाज से हाथियों को दूर रखा जाता है

NFR की दूसरी खास पहल ‘प्लान बी’ है। इसमें ऐसी जगहों पर बढ़ी हुई आवाज में मधुमक्खियों की आवाज चलाई जाती है, जहां हाथियों के ट्रैक पर आने का खतरा ज्यादा रहता है। इसका उद्देश्य हाथियों को रेलवे लाइन की तरफ बढ़ने से रोकना और उन्हें सुरक्षित दिशा में जाने के लिए प्रेरित करना है।इसके साथ रेलवे संवेदनशील स्थानों पर अंडरपास भी बना रहा है। इनका उद्देश्य हाथियों और दूसरे वन्यजीवों को रेलवे ट्रैक पार करने की जरूरत कम करना और उनके लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यानी केवल ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित करने के बजाय रेलवे ऐसे स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम कर रहा है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही ट्रैक से अलग रखी जा सके।

255 हाथियों में सबसे ज्यादा बचाव लुमडिंग डिवीजन में

NFR के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान लुमडिंग डिवीजन में 122 हाथियों को संभावित ट्रेन टक्कर से बचाया गया। इसके बाद अलीपुरद्वार में 106, तिनसुकिया में 15 और रंगिया में 14 हाथियों को समय पर हस्तक्षेप से बचाया गया।इस दौरान रेलवे ने सिर्फ तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय फ्रंटलाइन कर्मचारियों की निगरानी को भी मजबूत किया। हाथियों की गतिविधि वाले हिस्सों में नियमित पेट्रोलिंग, ट्रैक के आसपास वनस्पति की सफाई और चेतावनी संकेत लगाए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क रखा जाता है, ताकि हाथियों की लोकेशन की जानकारी मिलने पर रेलवे तुरंत कार्रवाई कर सके।

ट्रैक के पास खाना फेंकने से भी बढ़ता है खतरा

रेलवे ने इस मामले में यात्रियों और अपने कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना है। NFR ट्रेन क्रू, रेलवे स्टाफ, पैंट्री कार कर्मचारियों और यात्रियों को ट्रैक के आसपास खाने का कचरा नहीं फेंकने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है।रेलवे के मुताबिक, ट्रैक के पास फेंका गया खाना हाथियों और दूसरे जंगली जानवरों को वहां आने के लिए आकर्षित कर सकता है। इससे उनके रेलवे लाइन तक पहुंचने और ट्रेन से टक्कर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए वन्यजीव सुरक्षा के लिए सिर्फ रेलवे सिस्टम में बदलाव ही नहीं, बल्कि यात्रियों और कर्मचारियों के व्यवहार में बदलाव को भी जरूरी माना जा रहा है।
NFR का फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ रियल टाइम कम्युनिकेशन भी लगातार जारी है। जब भी हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलती है, दोनों विभागों के बीच जानकारी साझा करके जरूरी कदम उठाए जाते हैं।

ट्रेन-हाथी टक्कर के हर मामले की होती है जांच

NFR के CPRO कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि ट्रेन और हाथी के बीच होने वाली हर टक्कर को गंभीरता से लिया जाता है और निर्धारित सेफ्टी प्रोसीजर के तहत इसकी जांच की जाती है। रेलवे का कहना है कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, कर्मचारियों की सतर्कता और वन्यजीव अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल को आगे भी मजबूत किया जाएगा।नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे का मुख्यालय मालीगांव, गुवाहाटी में है। इसका नेटवर्क नॉर्थईस्ट के राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल के 7 जिलों और उत्तर बिहार के 5 जिलों तक फैला हुआ है। ऐसे में वन्यजीवों के आवास वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले रेल मार्गों पर हाथियों की सुरक्षा रेलवे के लिए लगातार एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
जनवरी से सितंबर के बीच 255 हाथियों को संभावित ट्रेन टक्कर से बचाने का आंकड़ा बताता है कि शुरुआती चेतावनी, ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित करने और रेलवे-फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के बीच तुरंत कम्युनिकेशन से ऐसे हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है। NFR अब इसी मॉडल में तकनीक, निगरानी और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रास्तों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

NFR ने 2026 में कितने हाथियों को ट्रेन की टक्कर से बचाया?

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों को संभावित ट्रेन टक्कर से बचाया गया।

सबसे ज्यादा Elephants किस Railway Division में बचाए गए?

सबसे ज्यादा 122 हाथी लुमडिंग डिवीजन में बचाए गए। इसके बाद अलीपुरद्वार में 106, तिनसुकिया में 15 और रंगिया में 14 हाथियों को बचाया गया।

NFR का AI-based Intrusion Detection System क्या है?

यह एक AI आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम है, जो डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम तकनीक के जरिए रेलवे ट्रैक के पास हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर रियल टाइम अलर्ट देता है। इससे रेलवे कर्मचारी और ट्रेन क्रू समय पर जरूरी कार्रवाई कर सकते हैं।

‘Plan Bee’ System क्या है?

‘प्लान बी’ एक ऐसा सिस्टम है जिसमें मधुमक्खियों की तेज आवाज का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य हाथियों को रेलवे ट्रैक की ओर आने से रोकना है।

Elephant-Train Collisions रोकने के लिए NFR और क्या कर रहा है?

NFR संवेदनशील इलाकों में नाइट-टाइम और टेम्परेरी स्पीड रिस्ट्रिक्शन, पेट्रोलिंग, चेतावनी संकेत, वनस्पति की सफाई और अंडरपास निर्माण जैसे उपाय कर रहा है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ रियल टाइम कम्युनिकेशन भी किया जा रहा है।

रेलवे ट्रैक के पास Food Waste फेंकना खतरनाक क्यों है?

ट्रैक के पास फेंका गया खाना हाथियों और दूसरे जंगली जानवरों को आकर्षित कर सकता है। इससे उनके रेलवे लाइन के करीब आने और ट्रेन से टक्कर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए NFR यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को ऐसा न करने के लिए जागरूक कर रहा है।

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