Piyush Goyal Japan Business Summit: जापानी कंपनियों को भारत का न्योता, पीयूष गोयल ने क्यों कहा- दरवाजे 24x7 खुले हैं?
पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और R&D सेंटर बढ़ाने का न्योता दिया। जापान के 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य के बीच भारत सेमीकंडक्टर, AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना चाहता है।
पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और R&D सेंटर बढ़ाने का न्योता दिया। जापान के 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य के बीच भारत सेमीकंडक्टर, AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना चाहता है।
Piyush Goyal Japan Business Summit: भारत और जापान के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश के तहत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और रिसर्च-इनोवेशन सेंटर स्थापित करने की अपील की है। उन्होंने जापानी कारोबारियों से कहा कि भारत का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और निवेश के लिए “हमारे दरवाजे 24x7 खुले हैं।”
गोयल की यह अपील ऐसे समय आई है जब भारत और जापान व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। जापान ने अगले 10 साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपए निवेश का लक्ष्य रखा है। वहीं भारत में अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक जापान से 48.14 अरब डॉलर यानी करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए का FDI आया है।
जापानी कंपनियों से गोयल ने क्या कहा?
टोक्यो में जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि कंपनियां भारत की प्रतिभा, कुशल मानव संसाधन और बड़े बाजार का फायदा उठाएं। उन्होंने जापानी कंपनियों से भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन में स्थानीय हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

गोयल के मुताबिक लोकलाइजेशन बढ़ाने से कंपनियों की लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होती है। यानी अगर कंपनियां भारत में ही ज्यादा से ज्यादा कच्चा माल, कलपुर्जे और दूसरी सेवाएं हासिल करती हैं तो उत्पादन लागत कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने जापानी कंपनियों से भारत में ज्यादा रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), इनोवेशन सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का भी आग्रह किया। इसके साथ भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ इंजीनियरिंग एवं तकनीकी साझेदारी बढ़ाने की बात कही।
गोयल ने कहा कि सरकार इनोवेशन से जुड़ी फंडिंग में भी सहयोग करने के लिए तैयार है। उनका संदेश साफ था कि जापानी कंपनियां सिर्फ भारत को बड़ा बाजार मानकर यहां बिक्री न बढ़ाएं, बल्कि भारत को उत्पादन, रिसर्च और वैश्विक सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाएं।
अब सिर्फ फैक्ट्री नहीं, भारत से दुनिया के लिए उत्पादन
गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में नई फैक्ट्रियां और नई उत्पादन क्षमता स्थापित करने का न्योता दिया। उनका जोर “मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” पर रहा।
इसका मतलब है कि भारत में बनने वाले उत्पाद केवल घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें दूसरे देशों में भी निर्यात किया जाए। भारत का बड़ा घरेलू बाजार, बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौते कंपनियों के लिए इसे एक संभावित वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाते हैं।
गोयल ने यह भी कहा कि कोविड के दौरान जिन गतिविधियों को कंपनियों ने घर से चलाया था, उनमें से कई काम अब भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के जरिए किए जा सकते हैं। इससे जापानी कंपनियों को भारत की तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा।
जापान भारत में इतना बड़ा निवेशक क्यों है?
जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा FDI स्रोत है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक जापान से भारत में 48.14 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जो इस अवधि में भारत को मिले कुल FDI का करीब 6.11 प्रतिशत है।
भारत में 1,400 से ज्यादा जापानी कंपनियों की मौजूदगी बताई जाती है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, स्टील, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में जापानी कंपनियां लंबे समय से भारत में कारोबार कर रही हैं।
जापान की कंपनियों के लिए भारत की अहमियत सिर्फ आबादी और बाजार के आकार की वजह से नहीं है। भारत में तेजी से बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, युवा कार्यबल और वैश्विक कंपनियों के लिए सप्लाई चेन को भारत की ओर लाने की कोशिश भी इसे आकर्षक बनाती है।
200 से ज्यादा कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा
पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान के दौरे पर हैं। उनके साथ 200 से ज्यादा कारोबारी प्रतिनिधियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल है। यह भारत की ओर से जापान भेजे गए सबसे बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों में से एक है। प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, स्टील, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।
दौरे में टोक्यो, नागोया और ओसाका में कारोबारी बैठकें और रोड शो रखे गए हैं। टोक्यो में गोयल जापान के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ बैठक करने के अलावा केइदानरेन (Japan Business Federation) के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। केइदानरेन 1,500 से ज्यादा जापानी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।
नागोया में ऑटोमोबाइल और स्टील सेक्टर के निवेशकों के साथ चर्चा होगी, जबकि ओसाका में इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियों के साथ निवेश के अवसरों पर बातचीत होनी है।
सेमीकंडक्टर और AI पर भी भारत की नजर
इस दौरे का फोकस केवल पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इनोवेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप जैसे नए क्षेत्रों पर भी विशेष चर्चा हो रही है।
भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां इन क्षेत्रों में केवल निवेश ही न करें, बल्कि तकनीकी साझेदारी और रिसर्च के जरिए भारत की औद्योगिक क्षमता को भी मजबूत करें। इसी वजह से गोयल ने R&D सेंटर और भारतीय अकादमिक संस्थानों के साथ इंजीनियरिंग साझेदारी पर विशेष जोर दिया है।
भारत-जापान व्यापार में अगला फोकस निवेश और लोकलाइजेशन
भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार में संतुलन और निवेश की गति को लेकर अभी भी चुनौतियां हैं। इसी वजह से भारत अब जापानी निवेश को केवल आंकड़ों में बढ़ाने के बजाय उसे लोकल मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रिसर्च और निर्यात से जोड़ना चाहता है।
सरकार भारत-जापान के 2011 के व्यापार समझौते की भी समीक्षा करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि व्यापार असंतुलन कम किया जा सके और निवेश से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाया जा सके।
यानी गोयल का जापान दौरा सिर्फ नई कंपनियों को भारत बुलाने तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य जापान की पूंजी और तकनीक को भारत की मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड इंडस्ट्री से जोड़ना है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर जापानी कंपनियां भारत में निवेश और स्थानीय उत्पादन बढ़ाती हैं तो इससे नई फैक्ट्रियां, रोजगार, सप्लाई चेन और तकनीकी क्षमता विकसित हो सकती है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में जापानी कंपनियों की भागीदारी भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में स्थिति मजबूत कर सकती है।
भारत के लिए जापान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश केवल कारोबारी साझेदार नहीं हैं, बल्कि स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप का हिस्सा हैं। अब कोशिश इस रणनीतिक रिश्ते को ज्यादा मजबूत आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी में बदलने की है।
फिलहाल गोयल का संदेश साफ है - भारत जापानी कंपनियों को सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और दुनिया को निर्यात करने का प्लेटफॉर्म देना चाहता है। जापान के 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य के बीच आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत की औद्योगिक कहानी में बड़ी भूमिका निभा सकती है
FAQ:
Piyush Goyal ने Japanese Companies से India में Investment करने की अपील क्यों की?
गोयल चाहते हैं कि जापानी कंपनियां भारत के बड़े बाजार, कुशल मानव संसाधन और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का फायदा उठाकर यहां निवेश और उत्पादन बढ़ाएं।
Piyush Goyal ने Japanese Firms को किन क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया?
मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थकेयर, स्टार्टअप और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर जोर है।
Japanese Companies के लिए India क्यों महत्वपूर्ण Investment Destination है?
भारत का बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, बढ़ती औद्योगिक क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती भूमिका जापानी कंपनियों के लिए भारत को महत्वपूर्ण बनाती है।
Piyush Goyal ने Localise और Innovate करने पर जोर क्यों दिया?
लोकलाइजेशन से उत्पादन लागत और सप्लाई चेन की क्षमता बेहतर हो सकती है, जबकि R&D और इनोवेशन सेंटर भारत में तकनीकी क्षमता और उच्च मूल्य वाले रोजगार को बढ़ावा दे सकते हैं।
India-Japan Trade Relations कितने मजबूत हैं?
जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा FDI स्रोत है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक जापान से भारत में 48.14 अरब डॉलर का FDI आया, जो कुल FDI का करीब 6.11 प्रतिशत है।
Japanese Manufacturing Companies भारत में क्यों आ रही हैं?
भारत का बड़ा बाजार, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका कंपनियों के लिए आकर्षण का प्रमुख कारण है।