8.7 करोड़ युवा आखिर कर क्या रहे हैं? NITI Aayog Youth Report 2026 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक 15-29 वर्ष के करीब 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई, न नौकरी और न ही प्रशिक्षण से जुड़े हैं। रिपोर्ट रोजगार, कौशल और प्रशिक्षण व्यवस्था में बड़े अंतर की ओर इशारा करती है।
NITI Aayog Youth Report 2026 में 8.7 करोड़ युवाओं को लेकर क्या सामने आया?
NITI Aayog Youth Report 2026 के अनुसार भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के 8.7 करोड़ से ज्यादा युवा NEET श्रेणी में हैं। यानी ये युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही किसी तरह का व्यावसायिक प्रशिक्षण ले रहे हैं।यह आंकड़ा NITI Aayog की अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट “Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047” में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह अनुमान 2021 में National Sample Survey की 78वीं राउंड में जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है।
NEET का अर्थ Not in Education, Employment or Training है। इस श्रेणी में बेरोजगार युवाओं के साथ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो किसी नौकरी की तलाश में सक्रिय रूप से नहीं हैं।रिपोर्ट की एक तालिका के अनुसार, नौकरी की सक्रिय तलाश कर रहे लोगों को अलग रखने पर भी NEET आबादी करीब 9 करोड़ तक पहुंचती है और 2021 के आंकड़ों के आधार पर यह उस आयु वर्ग का लगभग 11 फीसदी है।
8.7 Crore Indian Youth में इतनी बड़ी संख्या NEET क्यों है?
NITI Aayog के मुताबिक इस समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में आय की कमी, पहले की शिक्षा पर हुआ खर्च और प्रशिक्षण की लागत शामिल हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि NEET युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन पर पहले से घरेलू या आर्थिक जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में उनके लिए भुगतान वाला प्रशिक्षण लेना आसान नहीं होता।
खास बात यह है कि इस समूह में बड़ी संख्या घरेलू जिम्मेदारियों में लगी हुई है। रिपोर्ट की एक संकरी परिभाषा वाली NEET श्रेणी में करीब 88 फीसदी लोग घरेलू कामों में लगे बताए गए हैं।यानी Youth Not Studying Working Training की समस्या को केवल बेरोजगारी के आंकड़े के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। इसके पीछे आर्थिक परिस्थितियां, घरेलू जिम्मेदारियां और कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच भी महत्वपूर्ण कारक हैं।
Indian Youth Employment Crisis में Skill Gap कितनी बड़ी समस्या है?
रिपोर्ट में भारत के शिक्षा और रोजगार तंत्र के बीच मौजूद Skill Gap पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।NITI Aayog ने Economic Survey 2024-25 का हवाला देते हुए कहा कि केवल 8.25 फीसदी graduates ही ऐसी नौकरियों में काम कर रहे हैं जो उनकी शैक्षणिक योग्यता से मेल खाती हैं।इसका मतलब है कि डिग्री हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को अपनी qualification के अनुरूप काम नहीं मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार कई graduates को practical experience और industry की जरूरतों के अनुरूप training नहीं मिल पाती। नतीजतन, डिग्री होने के बावजूद उनकी employability प्रभावित होती है।यही समस्या Indian Youth Employment Crisis को और जटिल बनाती है—एक तरफ युवा शिक्षा पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी शिक्षा और उपलब्ध नौकरियों के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं बन पा रहा।
Job और Training के बीच सबसे बड़ा Gap कहां है?
NITI Aayog की रिपोर्ट में State of Skills Survey 2024 के हवाले से बताया गया है कि 82 फीसदी NEET respondents ने job-interview preparation और placement support की कमी को मौजूदा skilling programmes की प्रमुख खामियों में बताया।यानी सिर्फ training उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को यह भी बताना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद नौकरी कैसे मिलेगी और employers की वास्तविक जरूरतें क्या हैं।
इसके अलावा training programmes की जानकारी का अभाव भी बड़ी समस्या है। रिपोर्ट के मुताबिक 43 फीसदी NEET youth और 47 फीसदी महिलाओं ने उपलब्ध programmes के बारे में awareness की कमी को skilling से दूर रहने की प्रमुख वजहों में गिना।यह आंकड़ा बताता है कि Skill Development India में चुनौती केवल training centres की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि युवाओं को सही programme तक पहुंचाने और उसे रोजगार से जोड़ने की भी है।
NITI Aayog Skill Gap Report ने क्या समाधान सुझाए?
रिपोर्ट में NEET युवाओं और महिलाओं के लिए सस्ती या subsidised training उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। जहां जरूरत अधिक हो, वहां targeted financial support देने की भी सिफारिश की गई है।NITI Aayog का कहना है कि training के दौरान कमाई का कोई रास्ता उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है। खासकर उन युवाओं के लिए जो परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
काम कर रहे लोगों और NEET युवाओं के लिए रिपोर्ट ने mid-career reskilling, self-employment और स्थानीय मांग से जुड़े प्रशिक्षण पर जोर दिया।रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में रोजगार की मांग अलग हो सकती है। इसलिए training programmes को स्थानीय अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ रहे sectors से जोड़ना जरूरी है।भारत में 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से ज्यादा लोगों को skilling programmes के तहत प्रशिक्षित किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
महिलाओं की स्थिति भी चिंता का विषय
NITI Aayog ने युवाओं के साथ महिलाओं की स्थिति को भी अलग से रेखांकित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के बीच केवल 3 फीसदी formal jobs में हैं, जबकि 71 फीसदी महिलाएं informal work या NEET category में आती हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि महिलाओं के लिए रोजगार और skill development के रास्ते खोलना भारत की workforce participation बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।महिलाओं के लिए training की affordability, awareness और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियां रोजगार तक पहुंच में बड़ी बाधाएं बन सकती हैं।
क्या 8.7 करोड़ NEET Youth भारत के लिए चुनौती हैं?
भारत की बड़ी युवा आबादी को लंबे समय से demographic advantage के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन NITI Aayog Youth Report 2026 का यह आंकड़ा बताता है कि इस advantage को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।जब लाखों युवा शिक्षा पूरी करने के बाद भी अपनी qualification के अनुरूप रोजगार नहीं पा रहे हों या training तक उनकी पहुंच सीमित हो, तो केवल डिग्री की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।रिपोर्ट का जोर इसी बात पर है कि युवाओं को education से employment तक एक स्पष्ट और भरोसेमंद रास्ता मिलना चाहिए।
निष्कर्ष
NITI Aayog Youth Report 2026 में सामने आया 8.7 करोड़ NEET युवाओं का आंकड़ा भारत के सामने मौजूद Youth Employment और Skill Gap की गंभीर चुनौती को दिखाता है। समाधान केवल ज्यादा training programmes शुरू करने में नहीं, बल्कि उन्हें affordable, accessible और सीधे रोजगार से जोड़ने में है। भारत की युवा आबादी तभी वास्तविक ताकत बनेगी, जब उसे शिक्षा से सम्मानजनक और स्थायी रोजगार तक पहुंचने का रास्ता मिलेगा।
FAQ:
8.7 Crore Indian Youth के NEET होने की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
NITI Aayog के अनुसार 15-29 वर्ष के करीब 8.7 करोड़ युवा न शिक्षा, न रोजगार और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं।
Indian Youth को NEET Youth क्यों कहा जा रहा है?
NEET का मतलब Not in Education, Employment or Training है। इस श्रेणी में वे युवा आते हैं जो पढ़ाई, नौकरी या training में शामिल नहीं हैं।
Youth Employment Crisis की बड़ी वजह क्या है?
रिपोर्ट में आर्थिक बाधाओं, training की लागत, job-interview और placement support की कमी तथा उपलब्ध programmes की जानकारी न होने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।
भारत में Skill Gap कितना गंभीर है?
रिपोर्ट के मुताबिक Economic Survey 2024-25 का हवाला देते हुए केवल 8.25 फीसदी graduates के qualification-matched jobs में होने की बात कही गई है।
NITI Aayog ने NEET युवाओं के लिए क्या सुझाव दिए हैं?
रिपोर्ट ने affordable या subsidised training, targeted financial support, training के दौरान कमाई के अवसर, reskilling और स्थानीय रोजगार की मांग से जुड़े programmes पर जोर दिया है।