UPI Completes 10 Years : 11 देश और सालाना 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन - जानिए UPI ने 10 साल में कैसे बदला भारत ?
UPI ने 10 साल में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदल दी है। जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन और ₹29.88 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बना। 2016 के 1.78 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन से बढ़कर UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बना और अब 11 देशों तक पहुंच चुका है।
UPI ने 10 साल में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदल दी है। जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन और ₹29.88 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बना। 2016 के 1.78 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन से बढ़कर UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बना और अब 11 देशों तक पहुंच चुका है।
UPI Completes 10 Years : भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 25 अगस्त 2026 को अपने 10 साल पूरे कर रहा है। 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में UPI लॉन्च किया था। एक दशक में यह सिर्फ पेमेंट का माध्यम नहीं रहा, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की रीढ़ बन गया है। IMF भी UPI को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बता चुका है।
10 साल में 1.78 करोड़ से 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन
UPI की रफ्तार का अंदाजा इसके आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI पर सिर्फ 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन पहुंच गया। यानी करीब 10 साल में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगभग 13,000 गुना बढ़ा।
ट्रांजैक्शन की रकम में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। FY2016-17 में UPI से करीब ₹0.07 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ था, जो FY2025-26 में बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गया। यानी ट्रांजैक्शन वैल्यू 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ी।
FY2025-26 में UPI के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम की सालाना ग्रोथ रेट करीब 30% और वैल्यू की ग्रोथ 21% रही। इसी दौरान भारत के डिजिटल पेमेंट्स में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% तक पहुंच गई।
जुलाई में बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
2026 में UPI ने एक और बड़ा मुकाम हासिल किया। मई में पहली बार एक महीने में 2,300 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए और आंकड़ा 2,320 करोड़ पहुंच गया।
इसके बाद जुलाई 2026 में UPI ने अपने एक दशक के इतिहास का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया। इस महीने 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू ₹29.88 लाख करोड़ रही। यानी औसतन हर दिन करीब 66 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस हुए।
यह आंकड़ा बताता है कि UPI अब सिर्फ बड़े ऑनलाइन भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाला सिस्टम नहीं है। चाय-किराने के छोटे पेमेंट से लेकर बड़े पैमाने पर व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजने तक, यह रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।
21 बैंकों से शुरू हुआ सफर, अब 700 से ज्यादा बैंक
जब UPI की शुरुआत हुई थी, तब अप्रैल 2016 में सिर्फ 21 बैंक इससे जुड़े थे। पहले साल यानी FY2016-17 में यह संख्या 44 बैंकों तक पहुंची। FY2025-26 तक UPI पर लाइव बैंकों की संख्या 703 हो गई।
इनमें सरकारी और निजी बैंकों के साथ स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक भी शामिल हैं। NPCI के मुताबिक UPI नेटवर्क में बैंक और पेमेंट संस्थान अलग-अलग भूमिकाओं में पेमेंट भेजने और प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
UPI के इस इंटरऑपरेबल सिस्टम का मतलब है कि ग्राहक किसी एक बैंक या ऐप तक सीमित नहीं रहता। अलग-अलग बैंकों और ऐप्स के बीच भुगतान किया जा सकता है। IMF के मुताबिक यही इंटरऑपरेबिलिटी UPI के तेजी से विस्तार की बड़ी वजहों में से एक रही है।
छोटे पेमेंट में UPI की सबसे बड़ी पकड़
UPI के इस्तेमाल का पैटर्न भी इसकी लोकप्रियता की वजह समझाता है। कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में व्यक्ति से दुकानदार यानी P2M भुगतान की हिस्सेदारी करीब 63% है। वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान की हिस्सेदारी करीब 71% है।
इसका मतलब है कि दुकानों और व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान संख्या में ज्यादा हैं, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले भुगतान में रकम अपेक्षाकृत बड़ी होती है।
FY2025-26 में P2M ट्रांजैक्शन में करीब 86% भुगतान ₹500 से कम के थे। इससे पता चलता है कि UPI का इस्तेमाल रोजमर्रा के छोटे खर्चों में कितना बढ़ गया है। P2P भुगतान में भी 59% ट्रांजैक्शन ₹500 से कम के रहे, जबकि 41% ट्रांजैक्शन ₹500 से ज्यादा के थे।
यानी UPI ने एक साथ दो जरूरतों को पूरा किया है - छोटे रोजमर्रा के भुगतान और अपेक्षाकृत बड़ी रकम के डिजिटल ट्रांसफर।
भारत से निकलकर दुनिया तक पहुंचा UPI
UPI की कहानी अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। 2025 में दुनिया के रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% बताई गई। IMF ने भी UPI को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है।
UPI अब 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की सुविधा के साथ मौजूद है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव शामिल हैं।
विदेशों में UPI का विस्तार भारत के लिए सिर्फ डिजिटल पेमेंट की उपलब्धि नहीं है। इससे भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए दूसरे देशों में भुगतान आसान हो सकता है और भविष्य में भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाने का रास्ता भी खुल सकता है।
UPI ने डिजिटल पेमेंट को इतना आसान कैसे बनाया?
UPI की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और इंटरऑपरेबिलिटी है। एक ही सिस्टम के जरिए अलग-अलग बैंक खातों और ऐप्स के बीच तुरंत पैसा भेजा जा सकता है। इससे ग्राहक को किसी खास बैंक या पेमेंट नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
IMF की रिसर्च के मुताबिक इंटरऑपरेबिलिटी ने डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच नेटवर्क खुला रहने से ग्राहकों को ऐप चुनने की आजादी मिली और डिजिटल पेमेंट अपनाने की रफ्तार बढ़ी।
UPI के विस्तार के पीछे सस्ता मोबाइल इंटरनेट, बैंकिंग की बढ़ती पहुंच, डिजिटल पहचान और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे दूसरे कारक भी महत्वपूर्ण रहे हैं।
अगले 10 साल में UPI की नजर और बड़े विस्तार पर
UPI के पहले दशक ने भारत में डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। अब अगले दशक में फोकस नए यूजर्स और व्यापारियों को सिस्टम से जोड़ने, तकनीकी क्षमता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय भुगतान का विस्तार करने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने पर रहेगा।
सरकार का लक्ष्य UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और मजबूत करना है, जबकि NPCI लगातार नए पेमेंट फीचर्स और अंतरराष्ट्रीय उपयोग की संभावनाओं पर काम कर रहा है। 2026 में विदेशी यात्रियों के लिए UPI One World जैसी पहल भी इसका उदाहरण है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को भारतीय मोबाइल नंबर या बैंक खाते के बिना UPI भुगतान की सुविधा देने की कोशिश की गई।
FAQ:
July 2026 में UPI Transactions कितने रुपये तक पहुंच गए?
जुलाई 2026 में UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू ₹29.88 लाख करोड़ रही, जो UPI के एक दशक के इतिहास में सबसे ज्यादा मासिक वैल्यू थी।
UPI ने July 2026 में कितने Transactions दर्ज किए?
जुलाई 2026 में UPI पर 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक वॉल्यूम है।
UPI अब कितने देशों में Expand हो चुका है?
UPI की क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सुविधा 11 देशों में उपलब्ध है।
UPI International क्या है?
UPI International के जरिए भारत का UPI सिस्टम दूसरे देशों के पेमेंट नेटवर्क से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय भुगतान की सुविधा देता है।
किन देशों में UPI Payments की सुविधा उपलब्ध है?
UAE, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में UPI की अंतरराष्ट्रीय सुविधा उपलब्ध है।
UPI Global Expansion से भारत को क्या फायदा होगा?
इससे भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए विदेशों में डिजिटल भुगतान आसान हो सकता है और भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ सकती है।
UPI International Payments कैसे काम करते हैं?
जहां UPI की सुविधा उपलब्ध है, वहां भारतीय यूजर अपने UPI-सक्षम ऐप के जरिए संबंधित व्यापारी या पेमेंट नेटवर्क पर डिजिटल भुगतान कर सकता है। सुविधा स्थानीय नियमों और संबंधित देश के पेमेंट सिस्टम पर निर्भर करती है।
UPI को विदेशों में इतना लोकप्रिय क्यों बनाया जा रहा है?
UPI की तेज, इंटरऑपरेबल और आसान भुगतान व्यवस्था इसे दूसरे देशों के लिए भी आकर्षक डिजिटल पेमेंट मॉडल बनाती है। IMF ने भी इसकी इंटरऑपरेबिलिटी को इसके तेज विस्तार की महत्वपूर्ण वजह माना है।