USCIRF RSS Sanctions - RSS पर अमेरिकी आयोग की कार्रवाई की मांग, मोहन भागवत के दौरे से पहले बढ़ा विवाद; जानिए क्या है पूरा मामला?
RSS प्रमुख मोहन भागवत के 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे से पहले USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई-लेवल मीटिंग और राजनयिक सम्मान न देने की अपील की है। आयोग ने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है।
USCIRF RSS Sanctions: अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है। आयोग के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने और उसके नेताओं को हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं देने की अपील की है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं।
मोहन भागवत के अमेरिका पहुंचने से पहले USCIRF ने क्या कहा?
USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि RSS नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, अमेरिकी सरकार की ओर से उच्चस्तरीय बैठक या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।
यह बयान मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। RSS के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के मुताबिक भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा करेंगे। अमेरिका में उनका प्रमुख कार्यक्रम 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ है, जिसे अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) आयोजित कर रहा है। यह यात्रा RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रही है।
USCIRF ने RSS पर पहले भी कार्रवाई की मांग की थी
यह पहली बार नहीं है जब USCIRF ने RSS के खिलाफ प्रतिबंध की बात कही है। मार्च 2026 में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी और RSS तथा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। इसमें संपत्ति फ्रीज करने और अमेरिका में प्रवेश पर रोक जैसे कदम शामिल थे। USCIRF ने अपनी 2026 रिपोर्ट में भारत को ‘Country of Particular Concern’ यानी CPC घोषित करने की भी सिफारिश की थी। आयोग पिछले कई वर्षों से भारत के लिए यह सिफारिश करता रहा है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत या RSS पर अपने आप कोई प्रतिबंध लगा दिया है। USCIRF एक सलाहकारी अमेरिकी संघीय संस्था है, जो राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देती है। अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार के संबंधित अधिकारियों के हाथ में होता है।
भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज किया था
मार्च में USCIRF की रिपोर्ट आने के बाद भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को कहा था कि भारत USCIRF की रिपोर्ट में देश के बारे में किए गए आकलन को ‘प्रेरित और पक्षपातपूर्ण’ मानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि USCIRF लंबे समय से भारत की स्थिति की एक विकृत और चुनिंदा तस्वीर पेश कर रहा है और इसके लिए संदिग्ध स्रोतों तथा वैचारिक सोच पर निर्भर करता है। भारत ने USCIRF से अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर तोड़फोड़ और हमलों तथा भारतीय-अमेरिकी समुदाय को डराने-धमकाने की घटनाओं पर भी ध्यान देने को कहा था।
इसलिए मौजूदा विवाद को समझते समय यह अंतर जरूरी है कि USCIRF ने RSS पर कार्रवाई की सिफारिश की है, जबकि भारत सरकार ने USCIRF के आकलन को ही पक्षपातपूर्ण बताते हुए खारिज किया है।
USCIRF आखिर है क्या और इसके पास कितनी ताकत है?
United States Commission on International Religious Freedom यानी USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र और द्विदलीय संघीय संस्था है। यह दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करती है और अमेरिकी सरकार को अपनी रिपोर्ट और नीतिगत सिफारिशें देती है। आयोग धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन वाले देशों को ‘Country of Particular Concern’ के रूप में नामित करने की सिफारिश कर सकता है। इसी तरह वह किसी संस्था या समूह के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की भी सिफारिश कर सकता है।
लेकिन किसी संगठन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू करने का अंतिम अधिकार USCIRF के पास नहीं है। इसलिए RSS पर प्रतिबंध की मांग को सीधे अमेरिकी प्रतिबंध लग जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। USCIRF की सिफारिश के बाद अमेरिकी सरकार को अपने स्तर पर फैसला लेना होगा।
विवाद का असर मोहन भागवत के दौरे पर क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि USCIRF का बयान मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से ठीक पहले आया है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के कार्यक्रम में शामिल होंगे और उनके अमेरिका, कनाडा तथा ब्रिटेन दौरे को RSS के शताब्दी वर्ष के अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान के तौर पर देखा जा रहा है।इस बयान से राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा जरूर तेज हो गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर अमेरिकी सरकार ने अभी ऐसा कोई फैसला घोषित नहीं किया है जिससे भागवत की यात्रा पर रोक या उनके कार्यक्रम को रद्द किए जाने की पुष्टि होती हो।
यानी फिलहाल मामला USCIRF की सिफारिश बनाम भारत सरकार की आपत्ति तक है। आगे अमेरिकी प्रशासन इस सिफारिश पर क्या रुख अपनाता है, यही इस विवाद का अगला बड़ा पहलू होगा।
FAQ’s
USCIRF Sanctions RSS Mohan Bhagwat Visit को लेकर क्या मामला है?
RSS प्रमुख मोहन भागवत 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। इससे पहले अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF के अधिकारियों ने RSS नेताओं पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें अमेरिकी सरकार की हाई-लेवल मीटिंग्स व राजनयिक सम्मान से दूर रखने की मांग की है।
USCIRF ने RSS के खिलाफ Sanctions की मांग क्यों की?
USCIRF का आरोप है कि RSS से जुड़े कुछ संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ हमलों में शामिल होने के आरोप हैं। इसी आधार पर USCIRF ने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की बात कही है।
USCIRF क्या है?
USCIRF यानी United States Commission on International Religious Freedom अमेरिका की एक स्वतंत्र संघीय सलाहकार संस्था है, जो दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखती है और अमेरिकी सरकार को नीतिगत सिफारिशें देती है। इसकी सिफारिशें अपने आप अमेरिकी प्रतिबंध में नहीं बदलतीं; अंतिम निर्णय अमेरिकी सरकार का होता है।
Mohan Bhagwat का US Visit कब होने वाला है?
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे की शुरुआत 25 अगस्त 2026 से होने की जानकारी सामने आई है। वे 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में AHEAD यानी American Hindus for Engagement and Dialogue के ‘Universal Oneness Celebrations’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
USCIRF ने Mohan Bhagwat के Visit को लेकर क्या कहा?
USCIRF चेयरमैन आसिफ महमूद ने भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे का जिक्र करते हुए RSS को लेकर धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े आरोप लगाए। वहीं कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि RSS नेताओं को हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए।
US Religious Freedom Body ने RSS Leaders के खिलाफ क्या कार्रवाई सुझाई?
USCIRF अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर Sanctions यानी लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। साथ ही RSS नेताओं के साथ हाई-लेवल सरकारी बैठकें और राजनयिक सम्मान नहीं देने की बात कही गई है।
USCIRF RSS Leaders को High-Level Diplomatic Meetings से दूर रखने की मांग क्यों कर रहा है?
USCIRF का तर्क है कि जिन RSS सदस्यों को वह धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार मानता है, उनके साथ अमेरिकी सरकार को आधिकारिक स्तर पर विशेष सम्मान या उच्चस्तरीय संपर्क नहीं रखना चाहिए। हालांकि, यह USCIRF की सिफारिश है, अमेरिकी सरकार द्वारा लागू किया गया कोई प्रतिबंध नहीं।
भारत सरकार ने USCIRF की इस टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भारत सरकार पहले भी USCIRF की भारत संबंधी रिपोर्टों और RSS पर की गई टिप्पणियों को खारिज कर चुकी है। विदेश मंत्रालय ने USCIRF पर भारत की स्थिति की “selective” और “distorted” तस्वीर पेश करने तथा संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक सोच पर निर्भर रहने का आरोप लगाया था। मार्च 2026 में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF से अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमलों और भारतीय समुदाय के खिलाफ कथित घटनाओं पर भी ध्यान देने को कहा था।