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रुपया बचाने की जरूरत नहीं? PM की Economic Council के Sanjeev Sanyal ने क्यों कहा- ‘Market-Driven Level’ पर छोड़ दें

PM की Economic Advisory Council के सदस्य Sanjeev Sanyal on Rupee ने रुपये को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। उनका कहना है कि भारत को रुपये को किसी खास स्तर पर बनाए रखने के लिए जल्दबाजी में उसे “defend” नहीं करना चाहिए, बल्कि

रुपया बचाने की जरूरत नहीं? PM की Economic Council के Sanjeev Sanyal ने क्यों कहा- ‘Market-Driven Level’ पर छोड़ दें

PM की Economic Advisory Council के सदस्य Sanjeev Sanyal on Rupee ने रुपये को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। उनका कहना है कि भारत को रुपये को किसी खास स्तर पर बनाए रखने के लिए जल्दबाजी में उसे “defend” नहीं करना चाहिए, बल्कि बाजार की ताकतों को रुपये का market-driven level तय करने देना चाहिए।यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और अमेरिका के बीच bilateral trade agreement को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौता जल्दबाजी में करने के बजाय अपने दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

Sanjeev Sanyal Rupee Market-Driven Level से क्या मतलब है?

Market-driven level का मतलब उस exchange rate से है जो मुख्य रूप से बाजार में रुपये की demand और supply के आधार पर तय होता है।Sanyal का तर्क है कि भारत को रुपये को किसी एक तय स्तर पर बनाए रखने के लिए लगातार हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, रुपये को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपना स्तर खोजने की गुंजाइश दी जानी चाहिए।हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि केंद्रीय बैंक की भूमिका खत्म हो जाती है। Sanyal की टिप्पणी का मुख्य जोर रुपये के किसी खास स्तर को हर कीमत पर बनाए रखने के बजाय बाजार आधारित मूल्यनिर्धारण पर है।

Image: ANI

India-US Trade Deal पर भी Sanjeev Sanyal ने दी बड़ी सलाह

Sanyal ने India-US trade agreement को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।उन्होंने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन भारत को समझौते को जल्द finalise करने की जरूरत नहीं है। उनका तर्क है कि एक trade agreement लंबे समय तक लागू रहता है, इसलिए उसकी हर शर्त को भारत के हितों के नजरिए से अच्छी तरह जांचना जरूरी है।उनके मुताबिक, अगर किसी मुद्दे पर आगे बातचीत या बदलाव की जरूरत पड़ती है तो भारत को उसके लिए तैयार रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि भारत अपने दीर्घकालिक हितों से समझौता करे।

Agriculture और Dairy पर क्यों फंस सकता है Trade Deal?

Sanyal ने India-US negotiations में agriculture और dairy को विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा बताया।उनके मुताबिक, इन क्षेत्रों में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार भारतीय agricultural community के हितों की रक्षा करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी बड़े trade agreement के लिए राजनीतिक consensus महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके लिए उन्होंने India-US civil nuclear agreement का उदाहरण दिया।

 

अमेरिका की Tariff Policy पर क्या बोले Sanjeev Sanyal?

Sanyal ने अमेरिका की tariff policy से पैदा हुई uncertainty पर भी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों ने अमेरिका के साथ trade relations में tariffs और दूसरे मुद्दों के कारण disruptions का सामना किया है।उनके मुताबिक, tariff-related uncertainty के कारण goods और services के flow में “stop-go” की स्थिति पैदा हो सकती है और इससे broader bilateral relationship भी प्रभावित हो सकता है।Sanyal ने कहा कि आगे चलकर अमेरिकी political leadership को अपने trading partners के लिए ज्यादा stable policy framework की जरूरत को समझना होगा।

 

क्या कमजोर Rupee भारत के लिए हमेशा नुकसान है?

Rupee depreciation का असर अर्थव्यवस्था के अलगअलग हिस्सों पर अलगअलग हो सकता है।कमजोर रुपये से imported goods, crude oil और कुछ imported inputs महंगे हो सकते हैं, जिससे inflation पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कमजोर रुपया भारतीय exporters के लिए उनके products को international markets में comparatively competitive बना सकता है।इसलिए रुपये के कमजोर या मजबूत होने को केवल एकतरफाफायदायानुकसानके तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसका प्रभाव imports, exports, inflation, investment और broader economic conditions पर निर्भर करता है।

 

RBI की भूमिका क्या होती है?

भारत में रुपया पूरी तरह fixed exchange rate पर नहीं चलता। इसका मूल्य विदेशी मुद्रा बाजार में demand और supply समेत कई आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।RBI जरूरत पड़ने पर foreign exchange market में हस्तक्षेप कर सकता है। इसका उद्देश्य केवल रुपये को किसी एक निश्चित स्तर पर बनाए रखना ही नहीं, बल्कि अत्यधिक volatility और disorderly market conditions को संभालना भी हो सकता है।Sanyal की टिप्पणी इसी बहस के बीच आती है कि भारत को रुपये की exchange rate को लेकर कितना और किस तरह का intervention करना चाहिए।

 

Sanjeev Sanyal के बयान का बड़ा संदेश क्या है?

Sanjeev Sanyal on Rupee की टिप्पणी का व्यापक संदेश यह है कि भारत को exchange rate और trade policy दोनों में long-term economic interests को प्राथमिकता देनी चाहिए।एक तरफ वह रुपये को बाजार की ताकतों के अनुसार अपना स्तर खोजने देने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ India-US trade agreement में जल्दबाजी से बचने की सलाह दे रहे हैं।उनके मुताबिक, वैश्विक multilateral trading system कमजोर होने के दौर में bilateral trade agreements महत्वपूर्ण हो गए हैं। लेकिन ऐसे समझौतों में भारत के domestic sectors और दीर्घकालिक आर्थिक हितों की सुरक्षा जरूरी है।

 

निष्कर्ष

Sanjeev Sanyal Rupee Market-Driven Level वाली टिप्पणी ने रुपये की exchange rate policy को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि भारत को रुपये को लगातार defend करने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और बाजार को उसका उचित स्तर तय करने देना चाहिए।साथ ही, उन्होंने India-US trade agreement को लेकर भी जल्दबाजी से बचने और agriculture तथा dairy जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय हितों की रक्षा करने पर जोर दिया है।यानी Sanyal का संदेश दो स्तरों पर साफ हैरुपये के मामले में market-driven approach और trade deal में long-term national interest

 

FAQs

  1. Sanjeev Sanyal ने रुपये को लेकर क्या बयान दिया है?
    उन्होंने कहा है कि भारत को रुपये को लगातार defend करने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और बाजार की ताकतों को रुपये का market-driven level खोजने देना चाहिए।
  2. Rupee का Market-Driven Level क्या होता है?
    यह वह exchange rate है जो मुख्य रूप से foreign exchange market में रुपये की demand और supply तथा अन्य आर्थिक परिस्थितियों से निर्धारित होता है।
  3. क्या कमजोर रुपया भारत के लिए हमेशा नुकसानदायक है?
    नहीं। कमजोर रुपये से imports महंगे हो सकते हैं और inflation पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इससे भारतीय exports को international markets में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी मिल सकता है।
  4. Sanjeev Sanyal ने India-US Trade Deal पर क्या कहा?
    उन्होंने कहा कि भारत को समझौते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और agriculture तथा dairy जैसे संवेदनशील क्षेत्रों समेत अपने दीर्घकालिक हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
  5. RBI रुपये में क्या भूमिका निभाता है?
    RBI विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत के अनुसार हस्तक्षेप कर सकता है, खासकर अत्यधिक volatility या disorderly market conditions से निपटने के लिए।
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